मामा का लंड मेरी गांड फाड़ गया

न्यू ऐस्स फक स्टोरी में मेरे मामा के साथ गे सेक्स सम्बन्ध बन रहे थे. मेरी गांड मारने के लिए वे मुझे अपने घर ले आये थे. लेकिन उनका लंड बहुत बड़ा था. मेरी गांड फट गयी.

दोस्तो, इस बेहतरीन गे सेक्स कहानी में आपका फिर से स्वागत है.
दरअसल आप लोगों को मेरी कहानी इतनी पसंद आ रही है, इसलिए मैं दिल से शुक्रिया करता हूँ और आशा करता हूँ कि आगे की कहानी भी आप अच्छे से एंजॉय करें.

पिछली कहानी
मामा का लंड गांड में लेने की तमन्ना
में आप पढ़ चुके थे कि मैं अपने मामा के साथ गांड चुदवा रहा था.
उसका लिंक आपको दे रहा हूँ, प्लीज एक बार जरूर पढ़ें.

अब आगे न्यू ऐस्स फक स्टोरी:

इतना सारा मजा करके हम अभी बैठे ही थे कि एक-दूसरे की आंखों में खो गए.
बस एक-दूसरे की तरफ देख रहे थे.

हम दोनों ने इतना मजा किया था और एक-दूसरे को खुश किया था कि हमें दुनिया की कोई खुशी अब नहीं चाहिए थी.

बस ऐसा लग रहा कि ये पल यहीं रुक जाए और हम ऐसे ही एक-दूसरे को देखते रहें.
वे पीछे तकिए से सटकर बैठ गए और उन्होंने अपनी गोद में मेरा सिर रख लिया.

मैं भी उनकी गोद में सिर रखकर लेट गया. मैं ऊपर उनकी तरफ बस देख रहा था.

उन्होंने झुककर मेरे होंठों को चूम लिया और मेरे मुँह में अपनी जीभ देकर किस करने लगे.

मामा- तुम बहुत मीठे हो, इतने ज्यादा मीठे कि बस तुम्हें चूसने और चाटते रहने का मन करता है.
ऐसा कहकर उन्होंने आंख मारी और हंसने लगे.

मैं- आप भी बहुत मीठे हो, पर साथ में खट्टे और नमकीन भी …
यह कह कर मैंने भी उन्हें आंख मार दी और शर्मा कर अपना मुँह उनके लंड की तरफ कर दिया, जहां ढीले लौड़े का स्पर्श मुझे बहुत मुलायम सा फील हुआ.

मामा- पहली बार जब देखा तुम्हें, तो लगा था कि तुम इन सब में कच्चे होगे, पर तुम तो खिलाड़ी निकले … बहुत अच्छा चूसते हो तुम, कहां से सीखा?
मैं- इंटरनेट पर … पर असली मजा क्या होता है, ये तो आपके साथ ही देखा.
मामा- ओओ … अच्छा!

मैं- आपने पापा को बोला था न कि आप मुझे किसी दोस्त की बर्थडे पार्टी में ले जाने वाले हो, वैसे है कौन ये दर्शन?
मामा- अरे वह तो मैंने बहाना बनाया था.

मैं- तो अब? मम्मी को क्या कहेंगे?
मामा- तू बोल?

मैं- मैं कुछ नहीं कहूँगा, रायता आपने फैलाया है, आप ही समेटो!
मामा- बड़े जालिम हो यार, सब मैं ही करूँ? और तू क्या करेगा?

मैंने उनके लंड को दबाया और उन्हें स्माइल देकर कहा- अभी करके बताऊं या फिर …
ऐसा कहकर मैंने आंख मारी.

हम दोनों की हंसी छूट गई.

‘चलो, कोई बात नहीं … मैं ही कुछ करूंगा. आओ .. नीचे चलते हैं.’

हम दोनों उठे और बेड से नीचे उतर ही रहे थे कि मैं जरा सा कराह उठा.
मेरे मुँह से एक हल्का सा दर्द भरी ‘आआह्ह्ह’ का स्वर निकल गया.

मामा- क्या हुआ?
मैं- मामा, पीछे दर्द हो रहा है.

मामा- इसलिए मैंने मना किया था, पर तुमने मेरी बात सुनी ही नहीं और जोश-जोश में ले लिया अन्दर!

मैं- हां तो, पूरा कहां लिया था? सिर्फ टोपा ही गया था और वह है भी कितना बड़ा, मेरी चमड़ी उधेड़ दी.

मामा- इसलिए ना कह रहा था. अच्छा हुआ जो मैंने जोश में पूरा नहीं धकेला.

मैं- हां … वर्ना एक महीने तक मेरा चलना बंद हो जाता है ना?
मामा की हंसी छूट गई.

ये देखकर मैं उनकी तरफ गुस्से से देखने लगा.
उन्होंने अपनी हंसी को रोक लिया.

मैं- बहुत हंसी आ रही है ना आपको? इस दर्द का बदला जरूर लूँगा, याद रखना!
ऐसा कहकर मैंने उठने की कोशिश की.

पर मुझे छेद में बहुत जलन हो रही थी.
मैं फिर से बेड पर बैठ गया.

मामा- रुको मेरी जान, रुको!

ऐसा कहकर वे मेरे पास आए, उन्होंने मुझे धीरे से खड़ा किया, मेरी पैंट उतारी और मुझे उल्टा झुकने को कहा.

मैं- ये क्या कर रहे हो आप?
मामा- मैंने दर्द दिया है ना, तो मरहम भी मैं ही लगाऊंगा.

उन्होंने मेरी पूरी पैंट उतार दी और मुझे बेड पर उल्टा लिटा दिया.

मेरे दोनों पैर जमीन पर थे और मैं बेड पर लेटा था.
वे तेल की शीशी लाये और वहां रख दी.

मैं नीचे से पूरा नंगा उनके सामने औंधा लेटा था, मेरे दूध जैसे सफेद और मुलायम चूतड़ उनके सामने थे.

उन्होंने मेरे चूतड़ों पर अपने दोनों हाथ रखे और उन्हें मसलने लगे.
मुझे भी अच्छा लग रहा था, मैं बस लेटा रहा.

उन्होंने दोनों चूतड़ों को फैलाया तो मेरा छेद खुल गया.
मेरा गोरा, बिना बालों वाला, दूध सा सफेद छेद देखकर उनके मुँह से ‘वाव’ निकल गया.

बस उनसे रहा नहीं गया, उन्होंने मेरे छेद को चूम लिया.
उनके छूते ही मेरे अन्दर जैसे करंट दौड़ गया.

उन्होंने खुद को रिलैक्स किया और मुझे अपने चूतड़ को फैलाने को कहा.

मैंने अपने हाथ पीछे करके वैसा ही किया.
ऐसा करने से मुझे अपनी गांड के छेद पर कुछ गुदगुदी महसूस हुई.

अब मामा गांड के छेद में तेल डाल रहे थे.
उन्होंने धीरे-धीरे वहां अपने अंगूठे से सहलाना शुरू किया.

उनकी इस हरकत से मुझे काफी ठीक लग रहा था.
मामा तेल डाल रहे थे और छेद को सहला रहे थे.

कुछ ही देर में मुझे बहुत मजा आने लगा था.

ये देखकर उन्होंने कहा- थोड़ा दर्द हो तो सह लेना, मैं उंगली अन्दर डाल रहा हूँ. घाव अन्दर से है ना!
मैंने हां में सिर हिलाया.

उन्होंने अपनी उंगली पर ढेर सारा तेल लगाया और मेरे छेद पर भी डाल कर धीरे-धीरे दबाने लगे.
उनकी उंगली धीरे धीरे मेरी गांड के अन्दर घुसती जा रही थी.
मैंने भी अपनी गांड को अन्दर भींच लिया, पर उनके कहने पर मैंने ढीली छोड़ दिया.

उनकी उंगली अब पूरी अन्दर तक चली गई थी.
इससे मुझे थोड़ी जलन होने लगी थी.
मगर मैं चुप रहा.

फिर वे धीरे-धीरे उंगली को अन्दर-बाहर करने लगे.
पता नहीं उनकी उंगली में ऐसी कौन सा जादू था कि मुझे मजा आने लगा था.

वैसे तो मैंने अपना मुँह बिस्तर में छुपाया था, पर जैसे-जैसे वह उंगली करते … मैं अपनी गांड को उठा-उठा कर धीरे-धीरे उनका साथ देने लगा था.

मामा- ओहोह … मेरी रानी को मजा आ रहा है, लगता है दर्द कम हो गया!
ऐसा कह के उन्होंने उंगली निकाल ली.

मैं- आह मामा, ये क्या किया? मुझे दर्द हो रहा है, तेल लगाओ ना!
मामा- सच में दर्द हो रहा है या नाटक कर रहे हो?

मैं- नाटक क्यों करूँ? सच में दर्द है. लेकिन आप जब तेल लगा रहे हो ना, उससे सुकून मिल रहा है.

मामा- तो मेरे पास उंगली से भी ज्यादा मजा देने वाली चीज है, वह डालूँ?
मैं- उसी की वजह से ही तो ये नौबत आई है!

मामा- ये देख, क्या हो गया तेरी मुलायम गांड देखकर!
ऐसा कहकर वे खड़े हो गए.

मैंने पीछे मुड़कर देखा तो उन्होंने अपनी पैंट घुटनों तक नीचे सरका दी थी.
उनका हथौड़े जैसा लंड खड़ा था अपने पूरे जोश में.

उनका वह विशाल लंड देखकर मेरे मुँह में पानी आ गया.
मैं पुनः बेड पर बैठ गया और उनके लंड को पकड़ कर उन्हें आगे को खींच लिया.

मामा के लंड को मैंने अपने मुँह में भर लिया और पूरा मुँह खोल कर ‘हाआ…’ करके उसे अन्दर तक की गर्मी दी.
उनके मुँह से ‘आआहह’ निकल गया.

मैंने लौड़े को बाहर निकाला और उसे दोनों हाथों से पकड़ कर फिर से चूसने लगा.
कुछ देर बाद मैंने वह तेल वाली शीशी उठाई और अपने हाथों पर ढेर सारा तेल लेकर उनके लंड की मसाज करने लगा.

तेल से चिकना हुआ लंड इतना सुंदर दिख रहा था कि क्या ही कहूँ.
लौड़े का सुंदर सा गुलाबी टोपा, उसके नीचे बड़ा सा आकार लिए डंडे जैसा एकदम कड़क … उस पर बड़ी-बड़ी नसें फूली हुईं, मानो कहर ढा रहा था.

मैं बस लौड़े की सुंदरता पर मोहित होकर उसकी तेल से मसाज कर रहा था.

मामा- बस कर यार, अभी तो पानी निकाला था, अब और मत उकसा!
मैं- तो मेरा दर्द दूर करिए ना … प्लीज!
मामा- मेरी रानी, तेरा दर्द तो मैं ऐसे दूर करूँगा कि एक दिन तू उछल-उछल कर अन्दर-बाहर करेगी!
मैं- पर कब?

वे बेड पर बैठ गए और मुझे अपनी गोद में बिठा लिया.
मैं नंगा ही उनके खड़े लंड पर बैठा था.

मेरी गांड की सुराख में उनका लंड हिचकोले खा रहा था और मैं अपना छेद उनके लंड पर घिस रहा था.
हम दोनों ही मदहोश हो चुके थे.

मामा- देख, तू मुझे ऐसे तड़पाया मत कर वर्ना जिस लंड को तू अपनी गांड घिस रहा है, वह तेरे अन्दर आग लगा देगा. एक तो मैं खुद को कैसे रोकता हूँ, ये मैं ही जानता हूँ!

मैं- तो मैं क्या करूँ? मैं खुद को रोक ही नहीं पाता!
मामा- पर तू अभी कच्चा है, अगर तेरी खुल कर ले ली न … तो फट जाएगी. तूने देखा नहीं, आज तुझे कितना दर्द हुआ था? और मैं तुझे दर्द से बिलखता नहीं देख सकता?

मैं- हम्म … पता है. तो फिर चूसकर ही प्यास बुझानी पड़ेगी.
मामा- हम्म!

मैं- हम कुछ और ट्राई करें?
मामा- क्या?

मैं- देखो, आपका टोपा तो मैंने अन्दर ले ही लिया था ना. दर्द तो हुआ था, पर आपकी उंगली ने दर्द मिटा दिया. अगर उंगली इतना मजा दे सकती है तो ये कितना देगा और मैं आपके लिए हर दर्द सह लूँगा!

मामा- पक्का?
मैं- हां बाबा.

मामा- ओके तो एक काम करते हैं, जितना जाएगा उतना डालूँगा और तेल से थोड़ा आसान भी हो जाएगा.
मैं- ओके माई लव.

मामा ने मुझे उल्टा लेटने को कहा.
उन्होंने अपनी पैंट उतार दी, तेल की शीशी उठा कर मेरे छेद पर औंधी कर दी और मेरी गांड के अन्दर खूब सारा तेल भर दिया.

फिर उन्होंने अपने लंड पर भी ढेर सारा तेल लगाकर उसे एकदम चिकना किया.
उसके बाद उन्होंने तकिया लिया और मेरे लंड के नीचे रखा, जिससे मेरी गांड ऊंची उठ गई.

अब मामा जी ने मेरे छेद पर पुनः तेल डाला और अपने लंड से छेद को मसलने लगे.
मैंने अपने दोनों हाथों से चूतड़ को फैला रखा था.

मेरा मुलायम सा छेद, पूरा राक्षस बनकर इतने बड़े लंड को खाने का सोच रहा था.
पर उसकी भूख इतनी बड़ी थी कि वह भूल गया था कि इस चीज को खाने से उसका मुँह फटने वाला है.

मामा अपना तगड़ा लंड मेरे छेद में डाल-डाल कर उसे मसल रहे थे- दर्द होने पर बताना, मैं रुक जाऊंगा.
मैंने हां में सिर हिलाया.

कुछ पल बाद उन्होंने अपना बड़ा सा नींबू के आकार का, लगभग साढ़े तीन इंच चौड़ा मोटा टोपा … जो आगे किसी नुकीली चीज जैसा था, उसे मेरे छेद पर सैट कर दिया और धीरे-धीरे दबाने लगे.

दरवाजा खोलते वक्त जैसा फील होता है, मुझे बिल्कुल वैसा फील हो रहा था.
जैसे-जैसे लंड का सुपारा मेरी गांड के अन्दर जा रहा था, मेरी सांस ऐसे फूल रही थी मानो कोई जलती भट्टी का लकड़ा मेरी गांड में डाला जा रहा हो.

मामा के लौड़े के मोटे सुपारे को अन्दर लेते ही मैंने अपनी गांड को भींच लिया.
मुझे अब दर्द हो रहा था पर मैं ये दर्द बर्दाश्त कर रहा था.

मैंने अपना सिर गद्दी में दबा दिया ताकि आवाज न निकले.
लेकिन मामा का लंड था कि उसका टोपा तो अभी भी पूरा नहीं गया था.

मामा के कहने पर मैंने गांड ढीली छोड़ दी और उन्होंने एक हल्का सा धक्का मारा.
उनका टोपा अन्दर चला गया.

मामा- तू ठीक तो है?
मैं कुछ देर गद्दी में मुँह दबाने के बाद बोला- आआआह मामा, दर्द हो रहा है … प्लीज कुछ कीजिएए एए ना!

मामा- डर मत, इससे ज्यादा नहीं डालूँगा. तू बस अपनी गांड को धीरे-धीरे ढीली छोड़!

मैंने वैसे ही किया.
कुछ देर तक वे मुझ पर वैसे ही पड़े रहे.

मेरी जलन भी अब कम हो रही थी और उनका टोपा मुझे अब महसूस हो रहा था.
वे मेरे पैरों पर बैठे हुए थे … अपना लंड मेरी गांड में दबाए हुए!

अभी तो पूरा लंड लेना बाकी था … सिर्फ दो इंच ही अन्दर था और हम दोनों जानते थे कि इससे ज्यादा ना ही मैं ले सकता हूँ और वे भी नहीं डालने वाले थे.

मामा- अब कैसा लग रहा है? ठीक है ना … या निकालूँ?
मैं- नहीं, रहने दीजिए … अब ठीक है!

उन्होंने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया और अपने टोपे को अन्दर घुमाने लगे.
मुझे फिर से थोड़ा दर्द होने लगा.

उन्होंने थोड़ा पीछे होकर लंड बाहर निकाला तो ‘पचक’ जैसी आवाज हुई.

मेरा छेद बड़ा हो गया था, खुल चुका था.

उन्होंने उस खुले हुए छेद में तेल डाला और ‘पचाक’ की आवाज के साथ एक ही बार में टोपा अन्दर कर दिया.
वे धीरे-धीरे गोल-गोल करते हुए अपनी कमर हिलाने लगे.

इसी कारण से टोपा अन्दर मस्ती से झूम रहा था.
मुझे भी मजा आ रहा था.

मैं भी अपनी गांड धीरे-धीरे उछाल कर उनका साथ देने लगा.
मैंने अपने पैर चौड़े कर लिए.

वे भी मुझ पर लेट गए और धीरे-धीरे अपने लौड़े को मेरे छेद में आगे-पीछे कर रहे थे.
मैं भी नीचे से अपनी गांड उछाल रहा था.

हम दोनों मदहोश हो रहे थे.
मुझे उनके पसीने की भीनी गंध पागल कर रही थी.

ऐसा लग रहा था जैसे वे अपने बड़े हथियार से मेरी गांड में कुआं खोद रहे हों.

हम दोनों मस्ती में ऐसे ही झूम रहे थे.
उन्होंने अपनी स्पीड कम कर दी.

मैं मजे ले रहा हूँ, ये देखते हुए उन्होंने थोड़ा दबाव और बढ़ाया.
तेल की चिकनाई से मेरे परदे अन्दर खुल रहे थे और उन्हें डालने में भी आसानी हो रही थी.

मेरे अन्दर जैसे ही दबाव बढ़ता गया, मैंने फिर से अन्दर छेद को भींच लिया.

उनका तगड़ा लंड का टोपा मैंने अपनी गांड में इतने जोर से दबाया था कि उन्हें आगे दबाव बनाना भी आसान नहीं हो रहा था.

उन्होंने मेरे कान की लौ को, मेरे गले को चूमना शुरू कर दिया.

उनका दबाव अब और भी बढ़ने लगा … यह मेरी बर्दाश्त के बाहर था. क्योंकि अन्दर जाने वाला वह शैतान लंड जाते-जाते मेरी अन्दर की हर एक सेल को चीरता हुआ अपने लिए जगह बना रहा था.

जैसे कोई बड़ा सा अजगर किसी छोटे से बिल में जाने की नाकाम कोशिश करता है और अन्दर सब तोड़ कर रख देता है.

मैं- आहा … ऊऊऊ … मां मर गया … उम्म … आपने तो ना बोला था … फिर … पूरा लंड … क्यों … डाला अन्दर!
मामा रुक गए- मेरी जान, मैंने पूरा नहीं, बस एक इंच ही अन्दर सरकाया है!

मैं- और … कितना … बाकी … है … आह?
मामा- अभी तो पूरा सात इंच बाकी है!

मैं- मामा … आह मुझसे नहीं … होगा आह … इसके आगे … आह अब आप इतने तक ही करो!

मुझसे ठीक से बोला तक नहीं जा रहा था.
उन्होंने कहा- ठीक है.

वे धीरे-धीरे हिलने लगे.
अब मुझे कुछ थोड़ा रिलैक्स फील हुआ.

उन्हें भी पसीना आ चुका था, तो उन्होंने लंड निकाल लिया और नीचे लेट गए.
मैंने भी राहत की सांस ली.

उन्होंने एक हाथ से अपना लंड पकड़ रखा था जो सीधा छत की तरफ देख रहा था.
मैंने भी मामा की तरफ देखा.

उन्होंने मुझे एक स्माइल दी.
मैंने भी उन्हें स्माइल दी.

उन्होंने मुझे अपनी तरफ खींचा.
मैं भी उनकी बांहों में समा गया.

हम दोनों के लंड नीचे से चिपके हुए थे और ऊपर एक-दूसरे के होंठ.

वे मुझे पागलों की तरह किस कर रहे थे.
मैं नीचे एक हाथ से उनका लंड मसल रहा था और वे मेरे छेद में उंगली कर रहे थे.

मैं धीरे से थोड़ा पीछे हुआ, उनके लंड को मेरी गांड पर सैट किया.
अपना एक पैर उनकी कमर पर रख दिया.
उनका लंड अब मेरे छेद पर घिस रहा था.

मामा भी धीरे-धीरे कमर हिला रहे थे.
उन्होंने मुझे किस करना चालू ही रखा था.

मैंने अब आंखें खोलीं और उनकी तरफ देखा.

उनका लंड मेरे छेद पर था.
उनकी जुबान मेरी जुबान का रस पान कर रही थी.

हमारी सांसें एक ही हो गई थीं … और आंखें एक-दूसरे को निहारे जा रही थीं.
कितना हसीन लम्हा था ये मैंने नीचे उनके लंड को अपने छेद पर दबाया.

उन्हें मेरा इशारा समझ आते ही उन्होंने एक हल्का सा झटका लगाया.
मेरे मुँह से उनकी जुबान फिसल गई.
मेरे चेहरे पर हल्का सा दर्द छाने लगा और उन्होंने मेरी बंद होती हुई आंखों में अपनी तस्वीर देख ली.

वे रुक गए … जैसे उन्होंने कोई प्रतिज्ञा ली थी मुझे दर्द ना देने की, जिसे वे बखूबी निभा रहे थे.

जब मैंने धीरे-धीरे अपनी आंखें खोलीं तो पाया कि उनके होंठ मेरे निचले होंठों को दबा रहे थे.
मैं फिर से मस्ती में आ गया.

उनका बस टोपा ही गया था अन्दर, पर जो मजा दे रहा था … वह क्या ही बताऊं … मेरे पूरे बदन में सनसनी-सी दौड़ रही थी.

उन्होंने और मैंने स्पीड बढ़ा दी थी.
मैं बहुत एंजॉय कर रहा था.

उनके नीचे आने का सुख मुझे अब मिल रहा था.
तेल की चिकनाई की वजह से लंड अन्दर अपने करतब दिखा रहा था.

उस वक्त मैं जैसे किसी खूँटे पर टंगा हुआ अपने आप को पीछे धकेल रहा था.
हमारे जिस्म एक होने को बेताब थे.

काश … मैं पूरा लंड ले पाता, पर उस भयंकर दर्द से मुझे खुद को बचाना भी था.
काश … मेरी गांड ये पूरा लंड अन्दर ले पाती … मैं हर वक्त बस ये लंड अपने अन्दर ही रखता. हर वक्त इसकी सवारी करता!

मामा- उम्म्म …
मैं- आआहह … मामू … मजा आ रहा है आह!

मामा- तू बहुत हॉट है … मैं तुझे रानी की तरह रखूँगा!
मैं- सच में?
मामा- हां मेरी जान.

मैं- लेकिन मेरी एक शर्त है.
मामा मुझे नीचे से झटका देते हुए बोले- क्या शर्त है मेरी जान?

मैं- मैं अगर रानी की तरह रहूँगी तो मुझे घुड़सवारी भी करनी है. आखिर रानी किसी घोड़े पर बैठे तो ही बाहर की दुनिया देख सकेगी ना!

मामा- हां मेरी जान, तुझे हर वक्त मेरे घोड़े की सवारी करवाऊंगा तुझे खड़े-खड़े पेलते-पेलते मैं चाँद पर ले जाऊंगा.

मैं- हट … जालिम, कुछ भी कहते हो आप!
मामा- तू तो मेरी रानी है और तेरी प्यास मिटाना मेरा फर्ज है.

मैं- अच्छा तो आज तक मेरे अलावा इस हथियार पर औरों को क्यों बिठाया? तब रानी याद नहीं आई?

हम दोनों बस फुल एंजॉय कर रहे थे.
नीचे से चुदाई और ऊपर मीठी रोमांटिक बातें चल रही थीं.

मामा- आज के बाद ये लंड सिर्फ तेरी ही गांड में जाएगा और किसी के अन्दर नहीं … आज के बाद ये सिर्फ और सिर्फ तुम्हारा है.
मैं मामा को किस करते हुए बोला- थैंक्यू सो मच मामा!

मामा ने न्यू ऐस्स फक का मजा लेते हुए अपनी स्पीड बढ़ा दी.
मैं भी अपनी गांड को उछाल रहा था.

मेरा लंड उनके नाभि के पास था और उनके हर धक्के पर वह हिचकोले खाता और हमारे दोनों के पेट में अपने आप सहलाया जाता, तो उससे मेरे अन्दर करंट दौड़ जाता था.
इसका असर नीचे होता, मैं गांड को सिकोड़ लेता और उछल कर उनके लंड पर कूदता, जिसकी वजह से उन्हें अच्छी ग्रिप मिलती और उन्हें मजा आता.

हमारा ये खेल आधा घंटा से जारी था.
लोग तो लॉलीपॉप ऊपर से खाते हैं, मैं नीचे से खा रहा था.

बस उनके लंड का टोपा ही मेरी गांड के छेद में आ जा रहा था.
मुझे अब इस खेल में बहुत मजा आ रहा था.

मामा- आह … मेरी रानी … मैं अब करीब हूँ. मेरा रस निकलने वाला है!
मैं- अन्दर ही निकालना मेरी जान!

मामा- ऊऊ आआह हह … आई लव यू बेबी.
मैं- आउच … ओह्ह … आई लव यू टू बेबी फक मी हार्ड … आह.

मामा ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर-जोर से मुझे चोदने लगे.
उनका टोपा धक्के लगने से अन्दर जाने लगा. मुझे भी मजा आ रहा था.
मैं भी खुद को नीचे झटके देने लगा.

अचानक से मामा ने मेरे होंठ अपने होंठों में ले लिए और मुझे जोर से नीचे दबाया, जिस वजह से लंड दो इंच तक और अन्दर चला गया.
मतलब पूरा 4 इंच – टोपा और ये मिलाकर … और लौड़े ने अपना लावा उगलना शुरू कर दिया.

उन्होंने मुझे वैसे ही दबाए रखा.
मुझे दर्द हो रहा था, पर साथ में मजा भी आ रहा था, जिसकी वजह से मेरा भी पानी छूट गया.

हम दोनों कुछ देर वैसे ही पड़े रहे.
मेरी गांड में उनका लंड और मुँह में उनकी जुबान अटकी पड़ी थी.

हम दोनों थक चुके थे, उठने की ताकत किसी में नहीं थी.

फिर उन्होंने मुझे हल्के से उठाया और अपना लंड मेरी गांड से निकाल लिया.

मैंने उसे देखा तो उस पर खून लगा हुआ था.
मैं डर गया.
मैंने उनकी तरफ देखा.

मामा- डरो नहीं ये तुम्हारी बाहरी सील थी, जो टूट गई. मैंने जोश में धक्का दे दिया था, इस वजह से टूट गई.
मैंने कुछ कहा नहीं, बस लेटा रहा.

उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठाया और उनके झूलते लंड के साथ वह मुझे बाथरूम ले गए.
मुझे टॉयलेट पर बिठा दिया और सब साफ करने को बोला.

मैं वैसे ही करने की कोशिश करने लगा.
उनका गाढ़ा रस मेरी गांड से रिस रहा था.
वे मेरे सामने खड़े होकर मुझे देख रहे थे.

उनका लंड अब ढीला पड़ चुका था और उस पर मेरे खून के धब्बे साफ-साफ नजर आ रहे थे.
मैंने उनका लंड पकड़ा और उन्हें अपनी तरफ खींचा, फिर मैंने नल चालू किया और मामा के लंड पर पानी डालने लगा.

ऊपर तिपाई से साबुन उठाया और लंड पर मलने लगा और पानी से उसे अच्छे से धोया.
मामा ने भी अब मुझे टॉयलेट से उठाया और झुकाकर मेरी गांड को हल्के पानी से धोया.
उसे अच्छे से पौंछ कर मुझे अपनी बांहों में भर लिया.

मुझे बेड पर लाकर कपड़े पहनाए और खुद भी पहने. जब उन्होंने मुझे पैंट पहनाई तो उससे पहले उन्होंने मेरे छेद पर तेल लगाया और अपने हाथों से और मुझे रजाई औढ़ा दी, मेरे माथे को चूमा और झप्पी मारकर हम दोनों सो गए.

आपको मेरी गांड चुदाई की यह न्यू ऐस्स फक स्टोरी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
प्रेम दिलवाला
premdilvala4@gmail.com