मेरी विधवा बहन की जवानी का भोग

बहन चुदाई स्टोरी में पढ़ें कि मेरे जीजा की मौत के बाद मैं दीदी की मदद के लिए उनके साथ जीजा का बिजनेस देखने लगा. मैं दीदी के साथ ही सोता था. फिर एक दिन …

दोस्तो, मैं आपको अपनी बहन चुदाई की कहानी बताना चाहता हूं.
मुझे अन्तर्वासना से बेहतर मंच इस आपबीती के लिये नहीं मिल सकता था इसलिए मैंने अपनी बहन चुदाई स्टोरी यहां पर शेयर करने का फैसला किया.

मेरी बहन सुधा एक सीधी सी लड़की थी. मगर वो देखने में बहुत सुंदर थी.

जैसे ही जवान हुई तो शहर से उसके लिए एक रिश्ता आया.
लड़के वाले अच्छे थे और बहन के लिए रिश्ता बहुत लायक था. इस वजह से मां और पापा ने उसकी शादी कर दी.

मेरे जीजा दिल्ली में ही अपनी कपड़े रंगने की फैक्ट्री चलाते थे. उसमें जीन्स और शर्ट को कलर किया जाता है.
उनकी शादी अच्छे तरीके से हुई और शादी के बाद सब कुछ सही चल रहा था.

एक दिन मेरे जीजा का एक एक्सिडेंट हुआ और उनके सिर में चोट लग गई.
हम सब उनका हाल चाल लेने गए.

उनकी हालत बहुत गंभीर थी.
डॉक्टर ने साफ बोल दिया कि ये कितने दिन जिन्दा रहेंगे कुछ नहीं कहा जा सकता.

हम उनको घर ले आये लेकिन उनकी हालत बिगड़ती चली गयी क्योंकि दिमाग में चोट आई थी.
दो हफ्ते के बाद उन्होंने दम तोड़ दिया.

दीदी के घर में मातम छा गया. कुछ दिन बाद दीदी के ससुर भी बेटे के दुख में बीमार पड़ गये.

जीजा की तेरहवीं के बाद मैं वहीं पर रुक गया क्योंकि दीदी के ससुर को अस्पताल भी लेकर जाना होता था और फैक्ट्री का काम भी बंद पड़ा था.
मैं दीदी के पास ही सोता था.

फिर उसकी सास ने मुझे फैक्ट्री का काम समझा दिया.
वो खुद भी वहां जाती थी और काम देखती थी.

इस तरह मेरे दिन वहीं बीतने लगे.

कई बार रात को मेरी आँख खुल जाती थी तो दीदी जाग रही होती थी.
उसको नींद आनी बंद हो गयी थी.
मैं उनसे रात भर बातें करता रहता था.

मुझे काफी दिन हो गए थे.
एक रात में मैं सोने के लिए गया तो दीदी अपनी साड़ी उतार रही थी। उन्होंने फिर ब्लाउज उतार दिया.

मुझे उनकी नंगी कमर दिखी और मैं ध्यान से देखने लगा.

फिर उन्होंने अपना पेटीकोट भी उतार दिया।
अब वो ब्रा और पैंटी में थी और झुकी हुई थी. पेटीकोट और साड़ी उठा कर फोल्ड कर रही थीं. मैं उनकी छोटी सी पैंटी को देखने लगा।

दीदी की पैंटी इतनी छोटी थी कि उनके चूतड़ भी नहीं ढक पा रहे थे. शायद दीदी के चूतड़े थे ही बड़े. इसलिए पैंटी से बाहर निकल रहे थे.

फिर दीदी ने अपनी मैक्सी निकालकर पहन ली.

मैं दरवाजे पर खड़ा था तो पीछे हो गया.

फिर मैं अंदर आया और बेड पर लेट गया.
दीदी भी आकर बेड पर लेट गयी.

कुछ देर के बाद उसे नींद आ गयी.
मगर मैं नहीं सो सका.

आज मुझे दीदी का नंगा बदन दिखा था और वो मेरे साथ ही लेटी थी. मेरे मन में हवस जाग गयी थी.
मैं दीदी के करीब सरक गया.

मेरे हाथ उनके बदन को छूने के लिए तड़प रहे थे लेकिन आगे बढ़ते हुए गांड भी फट रही थी.

फिर हिम्मत करके मैंने अपना हाथ दीदी के चूचों पर रख दिया और एकदम से आंख बंद कर लीं.
दीदी उठ गयी और उन्होंने मेरा हाथ हटाकर नीचे मेरे पैर की तरफ रखवा दिया और फिर करवट बदल कर सो गयी.

कुछ देर तक मैं ऐसे ही लेटा रहा.
मैं हिला नहीं.

फिर आधे घंटे के बाद दीदी ने करवट ली और फिर से मेरी ओर घूम गयी.
मैंने फिर उनकी चूची पर हाथ रख दिया.
मैं देखना चाहता था कि अबकी बार वो क्या करती है.

मगर दीदी ने कुछ नहीं किया और सोती रही.

फिर मैंने अपना हाथ दूसरी चूची पर रखा और सोने की एक्टिंग करता रहा.
अबकी बार भी जब वो नहीं उठी तो मेरी हिम्मत बढ़ गयी.

मैं अब उनकी चूची को पकड़ कर सहलाने लगा मगर मैंने आंखें बंद ही रखी.

दीदी उठ गयी और उसने फिर से मेरा हाथ हटा दिया.
मेरी हवा टाइट हो गयी और मैं चुपचाप सोने का नाटक करते हुए लेटा रहा.

उसके बाद मैं करवट बदल कर सो गया.

पता नहीं कब अचानक मुझे सिसकारियां सुनाई दीं तो मेरी नींद टूट गयी.
मैंने हल्की सी आंख खोलकर देखा तो दीदी की मैक्सी ऊपर उठी थी और हाथ चूत पर था. वो अपनी चूत को सहला रही थी.

फिर पता नहीं उसे क्या हुआ कि वो उठी और बाथरूम में चली गयी.
अंदर जाकर उसने दरवाजा ढाल लिया और मैं भी पीछे पीछे चला गया.

मैं बाहर से झांकने की कोशिश करने लगा.
मैंने देखा कि दीदी ने एक मोमबत्ती ली और अपनी चूत में डालने लगी.

मैं मजे से देखने लगा.
दीदी अब जोर से मोमबत्ती पेल रही थी.

मेरा लंड भी खड़ा हो गया था और मैं भी वहीं पर खड़ा हुआ लंड को सहलाने लगा.

दीदी का रस निकल गया तो वो अपनी चूत को पानी से धोने लगी.
मैं धीरे से चलकर बेड पर वापस आ गया।

फिर दीदी आई और मेरे पास लेट गई।
कुछ देर बाद दीदी सो गई तो मैंने उनकी मैक्सी को ऊपर सरकाया मगर वो घुटनों तक ही आ पाई.
मैं उनकी करवट बदलने का इंतजार करने लगा.

काफी देर बाद उसने दूसरी तरफ करवट ली तो मैंने मैक्सी ऊपर की.
अबकी बार वो जांघ तक आ गई।

मैं अपनी बहन की चिकनी नंगी जांघें देख कर कामुक हो गया।
अब मैं सोच रहा था कि उसको और ऊपर कैसे करूं?

मैंने हाथ से ही मैक्सी को ऊपर उठाने की कोशिश की पर वो उठी नहीं. दीदी की जांघों के नीचे दबी थी मैक्सी।

कामुकता में मेरा हाथ दीदी की जांघ पर चला गया. मैं सावधानी से जांघों को छूने लगा.
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

तभी दीदी ने करवट बदली और मेरा हाथ मैक्सी में अंदर घुस गया।
मुझे दीदी की चूत के बाल महसूस हुए तो मैं समझ गया कि दीदी ने पैंटी उतार दी है।

मैंने अब और रिस्क नहीं लिया और बाथरूम में घुस गया. वहां दीदी की पैंटी उठाई और उसे सूंघने लगा.
अजीब सी खुशबू थी।
मैंने लम्बी सांस ली और फिर से सूंघने लगा।

अब पैंटी का बीच वाला हिस्सा देखा तो वो गीला था और मैंने उसी हिस्से को चूसना शुरू कर दिया।
दूसरे हाथ से मैंने लोवर नीचे कर दिया और लंड को हाथ में पकड़ कर मसलने लगा. आह्ह … मुझे बहुत मज़ा आ रहा था।

फिर मेरी गांड तब फटी जब पीछे से दीदी ने आवाज दी.
मैं कामुकता में इतना पागल था कि दरवाजा बंद नहीं किया.

पीछे मुड़ा तो दीदी बोली- बस पैंटी को चाटता रहेगा? अरे तू थोड़ी हिम्मत करता तो मैं तुझे चूत ही दे देती मेरे भाई.

एक बार तो मैं घबराया क्योंकि दीदी ने मेरे हाथ में मेरा लंड देख लिया था.
फिर वो मुस्करा कर बोली- आ … बाहर आजा.

मैं खुश हो गया और दीदी ने मेरे हाथ में से पैंटी ली और फेंक दी.
तभी उन्होंने मेरा हाथ लंड से हटाया और बोली- तुझे तो मुट्ठी मारना भी नहीं आया. बस दबाए जा रहा है। चल छोड़, तुझे सीखने की जरूरत भी नहीं. अब तो चूत चोदना सीख तू।

इतना बड़ा सरप्राइज देख कर सोच मैं सकते में आ गया. मैं कुछ नहीं बोल सका।

दीदी ने मेरा लौड़ा मुंह में भर लिया और चूसने लगी.
मुझे तो मज़ा आ गया।

मैंने दीदी का सिर पकड़ा और लंड अंदर गले तक धकेल दिया. दीदी ने पूरा गले तक ले लिया लंड.

मैं तो इस आनंद को रोक कर रख ही नहीं पाया और मेरा वीर्य निकल गया।
दीदी ने उसको पूरा गटक लिया और चूसती रही.

फिर दीदी ने लंड छोड़ दिया और बोली- चल, बेड पर चल. मैं गेट लॉक कर दूं कि कभी सासू मां आकर तुझे बहनचोद बनता हुआ देख ले.

मैं हंसने लगा और अपनी लोवर निकाल दी और अंडरवियर भी। मैं बेड पर आ गया.
दीदी ने कहा- सब उतार दे भाई।
मैंने कहा- दीदी आप भी उतार दो.

दीदी बोली- पैन्टी तो उतार चुकी. बाकी भी उतार दूंगी तेरे से पहले.
मैंने अपने कपड़े उतारे तो दीदी ने भी ब्रा खोल दी.

वो चूचे मसलते हुए बोली- मैं कब से इस जवान लंड का इंतजार कर रही थी. अब मैं सब्र नहीं कर पाऊंगी. चल जल्दी से मेरी चूत चाट ले.

दीदी बेड पर आई और चूत खोलकर लेट गयी.
मैं उनकी टांगों के बीच में आ गया और चूत देखने लगा.

दीदी की चूत का बिल्कुल भोसड़ा बना हुआ था जैसे कोई मोटी मूली दीदी रोज पेलती हो।

वो बोली- अरे भाई … चूस … क्या देख रहा है?
मैं बोला- दीदी आपकी तो खुल गई है।
दीदी बोली- साले, तेरा जीजा रोज 9 इंच का लंड पेलता था।

मैं अब दीदी की चूत चूसने लगा.

वो अपनी सुहागरात की कहानी बताने लगी और बोली- तेरा जीजा बहुत चोदू इन्सान था. पहली रात में ही उसने मेरी चूत फाड़ दी थी. मुझे इतना दर्द हुआ कि मैं पूरी रात रोती ही रही. उसने मुझे सोने नहीं दिया और रात में तीन बार चोदा. अगले दिन मैं उठ भी नहीं पायी. मेरी सास भी मेरा मजाक बनाती थी.

दीदी ने आगे बताया- एक हफ्ते के बाद उसने मेरी गांड भी फाड़ दी. अगर वो एक्सीडेंट में मरता नहीं तो मेरी बहुत मौज थी.

अब मैं ये सुन कर रुक गया और बोला- दीदी मेरा लंड भी तो इतना बड़ा हो जाएगा ना?
वो बोली- हां, कुछ भी करना पड़े चाहे, तेरा लंड तो मैं उससे भी बड़ा बनाना चाहती हूं. नहीं तो मुझे मजा नहीं आयेगा.

मैं फिर से दीदी की चूत को चाटने लगा.
वो बोली- चल, अब ऊपर का सामान भी देख ले।

मैं उठ गया. दीदी अपनी चूची पर हाथ रख कर सहला रही थी.
मैंने भी अपने हाथ से दूसरी चूची पकड़ ली और सहलाने लगा.

दीदी बोली- चूची को अब मुंह में ले ले. अभी तो ये चूची कुंवारी है. कोई बच्चा भी नहीं जो इन्हें पीता हो.
अपने मुंह में चूची लेने लगा मैं … मगर पूरी अंदर नहीं आती थी.

मैं चूसता रहा और मेरा लंड खड़ा हो गया.

मैंने कहा- दीदी, खड़ा हो गया।
दीदी बोली- अरे भाई, चल अब अंदर डाल दे।

मैंने अपना लंड अंदर डाल दिया और धक्के लगाने लगा.
दीदी बोली- साले, तेज तेज धक्के मार।

मैं बहुत तेज धक्के लगाने लगा.
अब दीदी से झेला नहीं गया और वो ऊह्ह … आह्ह … करती हुई थोड़ी ही देर में झड़ गयी.
मैं चूत में लंड को पेलता ही रहा.

वो मेरी कमर पर हाथ रख कर सहलाने लगी और मैं उसको चोदता ही रहा.
फिर मैं और दीदी एक बार फिर से साथ में झड़ गये.

दीदी बोली- साले, तू तो जवान हो गया. मेरा दो बार पानी निकाल दिया तूने।

मैं बोला- दीदी आपका भाई हूं. कम थोड़े ही ना हूं?
फिर हम नंगे ही चिपक कर सो गए.

कुछ देर बाद मेरी नींद खुली तो दीदी मेरा लंड चूस रही थी.
हरकत से मैं भी उठ गया और दीदी बोली- चल एक राउंड और करते हैं.

मैं बोला- दीदी अभी तो किया था।
वो बोली- साले सुबह होने वाली है. हमने रात में किया था.

वो मेरे लंड को हाथ में लेकर जोर जोर से हिलाने लगी और बोली- तेरा ये औजार और तू अब दोनों ही जवान होने वाले हो.
मैं बोला- कैसे दीदी?

उसने कहा- कल मेरी सास बोल रही थी कि मैं उनकी बहन के छोटे बेटे से शादी कर लूं. अभी मैं जवान हूं और बाद में फिर जिन्दगी खराब हो जायेगी.
मैं बोला- तो फिर आपने क्या कहा?

दीदी- मैं अब उनको मना कर दूंगी कि मुझे शादी नहीं करनी. मैं ऐसे ही ठीक हूं.
मैं- तो उससे क्या होगा?
दीदी- मैं तेरे साथ ही रहूंगी.
मैं- फिर तो मजा आयेगा. हम रोज ही किया करेंगे.

वो इस बात पर हंसने लगी और फिर लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी. मेरे लंड में तनाव आ गया. फिर मैं दीदी के ऊपर चढ़ गया और चूत में लंड डालकर राजधानी एक्सप्रेस के जैसे धक्के मारने लगा.

दीदी अपनी गांड उठाकर मुझे ही चोदने लगी.
दस मिनट में फिर से दीदी की चूत ने पानी छोड़ दिया.
वो बोली- साले तू तो बहुत पानी निकलवाता है. ऐसे तो तू जल्दी ही मामा बन जायेगा.

मैं उसको चोदने में ही लगा था. दीदी ने फिर से मेरी कमर सहलाई और मज़े लेती रही।

कुछ देर बाद दीदी फिर झड़ गई. करीब आधे घंटे तक मेरा पानी नहीं निकला मगर मैं थक गया और रुक गया.

दीदी बोली- एक दिन में ही थक गया बेटा, रोज कैसे करेगा?
मैं बोला- दीदी अब क्या करूं? आप इतना तेज करने को बोलती हो कि मैं थक जाता हूं.

ये कहकर मैं फिर से धक्के लगाने लगा.
दीदी भी बहन चुदाई के मजे ले रही थी.

मैंने फिर दीदी की चूत के अंदर ही पानी भर दिया.
दीदी ने मुझे अपने सीने से चिपका लिया.

कुछ देर फिर हम बातें करने लगे.
दीदी- भाई, तू आज से फैक्ट्री का काम देख लेना. मैं सास को बोल दूंगी कि पापा का ध्यान वो रखे। फिर हम दोनों को कोई दिक्कत नहीं होगी. पैसे भी आयेंगे और मज़े भी लेंगे।

मैं दीदी की चूची दबा कर बोला- दीदी, अगर आपकी सास को पता चला गया आपके और मेरी बहन चुदाई के बारे में?
दीदी- वो भी देख लेंगे. अब मैं पूरी जिन्दगी मोमबत्ती तो नहीं पेल सकती ना? चूत को लंड तो चाहिए ही होगा. मैं दूसरी शादी नहीं कर सकती.

फिर मैंने पूछा- आपको मोमबत्ती से मजा आता है क्या?
दीदी- अरे भाई, जब लंड ना हो तो उंगली भी डालनी पड़ती है।

इस तरह से उस रात दीदी और मेरे बीच में सेक्स संबंध बन गये.
हम रोज भाई बहन चुदाई करने लगे.

कुछ दिन बाद दीदी प्रेग्नेंट हो गयी.
वो बोली- एक बात समझ नहीं आ रही. मैं तेरे लंड से मां बनने वाली हूं। मगर सास को कैसे समझाएंगे?
मैं- दीदी, तो फिर गिरवा दो!

दीदी- पागल है तू? बच्चा तो पैदा करना ही पड़ेगा. वर्ना हमारा परिवार तो बर्बाद हो जाएगा बिना बच्चे के।
मैं- दीदी फिर अपनी सास को कैसे बताओगे कि किससे चुदवायी है?
वो बोली- कोई बात नहीं. मैं साफ बता दूंगी. उसके बाद जो होगा देखा जायेगा.

मैंने दीदी को पकड़ कर चूम लिया और बोला- ठीक है दीदी। चलो एक बार पापा बनने की खुशी में चुदाई तो करने दो?
दीदी- अरे मम्मी आ जाएगी.

इस पर मैं बोला- दीदी कोई बात नहीं. वैसे भी तो हम बताने ही वाले हैं कि बच्चा हम भाई बहन की चुदाई से ही पैदा हुआ है.
दीदी- हां बात तो ठीक कह रहा है.

हम फिर से चुदाई करने बेडरूम में गए और मैं दीदी की ब्रा उतारते ही चूचियों पर टूट पड़ा और चूसने लगा.
दीदी भी मेरा लंड हाथ से सहला रही थी.

मैंने दीदी को बोला- दीदी, आज तो पीछे करने दो. कितनी खुशी की बात है।
दीदी बोली- चल कर ले। वैसे मुझे मज़ा नहीं आएगा. अभी तेरा छोटा है.

मैं बोला- आपने नाप कर कब देखा?
वो बोली- अभी नाप देती हूं.
फिर उसने अपना हाथ फैलाया और नापा तो देखा कि लंड उनकी हथेली से भी ज्यादा लंबा था.

दीदी- अरे वाह … तू तो जवान हो गया है. तेरा तो अब 8 इंच का होने ही वाला है.
मैं बोला- अब तो गांड चोदने दो?

दीदी घोड़ी बन गई और बेड के किनारे पकड़ लिये. मैंने पीछे से लंड घुसा दिया और दीदी को चोदने लगा.
वो भी सिसकारी भर कर चुदवाती रही.

फिर मेरा पानी गांड में ही निकल गया।

दीदी ने लंड मुंह में लिया और चूसने लगी.
मैं बोला- एक बार और करोगे न?
वो बोली- साले पापा बनने की चुदाई तो ही गई. अब मामा बनने की भी करनी पड़ेगी।

मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया. मैं दीदी को चोदने लगा. वो मजे से चूत में लंड लेती रही. हमने बहुत देर तक चुदाई की और पानी निकाल लिया.

फिर देखा तो उसकी सास हमें देख रही थी.
वो बोली- क्या बात है मधु? आज तो तुमने दरवाजा भी बंद नहीं किया?

दीदी समझ गई कि आज बहन चुदाई की फिल्म बन गई है.

मैं तो घबरा कर कमरे में आ गया मगर दीदी वहीं रही. दीदी ने सब अपनी सास को बता दिया तो सास खुश हो गई कि वो दादी बनने वाली हैं।

अब दीदी कमरे में आई और उसने बताया कि उसकी सास को बहुत दिनों से पता है कि हम भाई बहन चुदाई करते हैं.
मैं ये सुनकर और ज्यादा खुश हो गया.

दीदी ने मुझे चूम लिया और बांहों में भरकर बेड पर लेट गयी.

उसके बाद तो हमारी लाइफ और ज्यादा रंगीन हो गई।
मैं और दीदी रोज चुदाई करते रहे और दीदी ने मेरे लंड से दो बच्चे पैदा कर दिये.
अब तीसरा बच्चा दीदी के पेट में है.

दोस्तो, ये थी मेरी बहन चुदाई की स्टोरी. आपको ये कहानी कैसी लगी मुझे बताना जरूर. आप मुझे कमेंट्स में बता सकते हैं.
लेखक की पिछली कहानी थी: भाभी ने सिनेमाहाल में सेक्स का मजा दिया