वर्जिन लेस्बो सेक्स कहानी में मैं अच्छे घर की लड़की हूँ. मेरी गांड बहुत सेक्सी है. मेरी सहेलियाँ मेरी गांड सहलाती रहती थी. जब मैं गर्ल हॉस्टल में रहने लगी तो मेरी रूममेट ने मेरे साथ क्या किया?
मेरा नाम सारा है.
मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर से हूँ.
मेरी उम्र 19 साल है, मेरा रंग गोरा है और मैं हल्की स्थूल और भरी हुई लड़की हूँ लेकिन बहुत ही आकर्षक माल जैसी लड़की हूँ.
मैं फिलहाल मेडिकल कॉलेज की स्टूडेंट हूँ.
ये मेरी पहली सेक्स कहानी है, वर्जिन लेस्बो सेक्स कहानी में अगर कोई गलती हो जाए तो मैं आप सभी से पहले ही माफी चाहूँगी.
जब मैंने 12वीं क्लास पास की, तो घर वालों ने मुझे मेडिकल की पढ़ाई की तैयारी के लिए कहा.
मैंने एन्ट्रेंस एग्जाम पास किया और मैं पहली बार में ही एन्ट्रेंस एग्जाम पास कर लिया.
मुझे सरकारी कॉलेज मिल गया था.
घर वालों ने मुझे कॉलेज भेज दिया.
इससे पहले मैं कभी भी घर से दूर अकेली नहीं रही थी.
ये मेरा पहली बार था कि मैं घर से दूर रहूँगी.
खैर … जब मैं कॉलेज गई तो मुझे एक गर्ल्स हॉस्टल में रहना था.
उधर का रहना मुझे कंफर्टेबल लगा कि मैं लड़कियों के साथ रहूँगी और अपनी कुछ सहेलियां बना लूँगी, ताकि मैं अकेली महसूस न करूँ.
मैंने कभी भी सेक्स नहीं किया था.
जब भी घर पर अकेली होती थी तो पोर्न देखकर खुद को शांत कर लेती थी.
अपने परिवार और खुद के बारे में कुछ बताना चाहूँगी.
मेरे परिवार में कुल 5 सदस्य हैं.
मैं, अब्बू फरहान (42), अम्मी आयशा (39), भाई अहमद (18) और बुआ फातिमा (27) हैं.
हमारा घर बड़ा ही शरीफ और इज्जतदार खानदान है.
इसी लिए कभी किसी गैर मर्द से सेक्स करने का या बॉयफ्रेंड बनाने का सोचा भी नहीं.
मेरा फिगर 32-30-34 का है. मुझे देखकर बूढ़े से लेकर टीनएजर का भी लंड खड़ा हो सकता है.
जब मैं स्कूल में थी तो मेरी मटकती हुई गांड, मोटी-मोटी चूचियां और गोरे-गोरे गालों को देखकर बहुत सारे लड़कों का मुझे चोदने का मन करता था.
पर मैंने किसी को घास तक नहीं डाली क्योंकि मेरे लिए मेरे अब्बू की इज्जत सबसे बड़ी चीज है.
स्कूल में मेरी सहेलियों को मेरी गांड बड़ी पसंद थी.
जब हम सब लंच में अकेली होती थीं, तो मेरी सहेलियों में से कोई न कोई मेरी गांड पर थप्पड़ जरूर मारती थी और मुझसे रिक्वेस्ट भी करती थी कि उन्हें मेरी गांड पर हाथ फेरना है.
मैं भी उन्हें रोकती नहीं थी.
शायद मुझे उनका टच पसंद आता था.
मैं रात को अपनी बुआ फातिमा के पास सोती थी.
मुझे बचपन से ही हग करके सोने की आदत है इसलिए उन्हें हग करके सोती थी.
मुझे बुआ का साथ अच्छा लगता था.
धीरे-धीरे मुझे लगने लगा था कि मैं बायसेक्सुअल हूँ.
मुझे लड़कियां भी पसंद हैं.
खैर … अब जब मेरे कॉलेज जाने का समय हो गया था तो अब्बू ने मेरे मेडिकल कॉलेज जाने की तैयारियां शुरू कर दीं और इस तरह से मेरा दाखिला एक बड़े शहर के एक नामचीन सरकारी मेडिकल कॉलेज में हो गया था.
उधर बड़े अमीर घरों की लड़कियां भी पढ़ती थीं और मध्यम वर्ग की होनहार लड़कियां भी पढ़ने आती थीं.
बड़े अमीर घरों की लड़कियां अधिकतर बदतमीज किस्म की होती हैं, यह मुझे अपने स्कूल में पढ़ने वाली कुछ अमीरजादियों के चालचलन से मालूम था.
हालांकि सभी बड़े अमीर घरों की लड़कियां ऐसी नहीं होती हैं क्योंकि मैं भी शरीफजादी हूँ और ऊपर वाले की मेहर से मेरा घर भी अमीरों के घर में शुमार करता है.
इस नामचीन मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में आते ही उधर की लड़कियां मुझे घूर-घूर कर देखने लगीं.
मैं समझ गई थी कि वे मेरी मोटी और मुलायम गांड को निहार रही हैं.
हॉस्टल में आते ही मुझे एक लड़की मिली, उसका नाम नेहा था.
उसी के साथ मुझे रूम शेयर करना था.
उसकी उम्र 20 साल की थी, रंग एकदम साफ, चूचियां उभरी हुई और गांड मोटी थी.
थोड़ी देर में अपना सब सामान सैट कर लेने के बाद मैंने नेहा से बात करना शुरू किया.
वह बहुत खुली मानसिकता वाली लड़की थी.
उससे बात करके मुझे बड़ा अच्छा लगा.
नेहा से बातें करती हुई मैं उसके साथ मेस में गई और डिनर करके वापस अपने कमरे में आ गई.
उधर नेहा के साथ बातों-बातों में रात हो गई और सोने की बारी आ गई.
हम दोनों को एक ही बेड पर सोना था, जो ज्यादा बड़ा नहीं था … लेकिन हमने एडजस्ट कर लिया.
रात को सोते समय कई बार मेरी चूचियां नेहा की चूचियों से टच हो जाती थीं तो मैं उससे दूर होने की कोशिश करने लगती.
हालांकि इस पर उसकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई तो मैं संतुष्ट रही.
सुबह हुई, हम दोनों तैयार होकर कॉलेज चली गईं.
वहां नेहा ने मुझे सीनियर्स से मिलवाया.
मेरी सीनियर्स में रुबीना बाजी मिलीं, वे 26 साल की थीं. उनकी 32-28-34 की मस्त फिगर थी.
वे एकदम हॉट माल जैसी दिखती थीं.
दूसरी सीनियर भाविका 24 साल की थीं, उनकी फिगर 30-28-32 की थी, वे एक सांवली सी लड़की थीं.
उनके साथ उनकी कुछ चेलियां भी थीं – कृति, अंजली, जिया.
ये तीनों भी खूबसूरत लड़कियां थीं.
पहले मुझसे नाम आदि पूछा.
एक-दो बार मिले और हम सब घुल-मिल गईं.
इस बीच मैं एक बात नोट कर रही थी कि रुबीना और कृति मुझे बड़े गौर से देख रही थीं.
थोड़ी देर ऐसे ही बातें हुईं.
भाविका और रुबीना ने नेहा से कुछ बात की और हम सब हॉस्टल के अपने अपने कमरे की तरफ चल दीं.
कमरे की ओर जाते समय रुबीना मेरी चाल को देखते हुए कहने लगी- मुझे लगता है कि तुझे चलने में काफी मेहनत करनी पड़ती होगी न … हा हा हा जस्ट किडिंग!
मैं समझ गई कि वह मेरी गांड की तरफ इशारा करके जोक मार रही है.
मैंने इस बात को ज्यादा सीरियस नहीं लिया और अपने कमरे में आ गई.
आज रात नेहा का व्यवहार थोड़ा बदला हुआ था.
वह मुझे और भी ज्यादा बारीकी से देख रही थी, बार-बार मुझे टच करने की कोशिश कर रही थी.
लेकिन मैंने उसकी हरकतों को नजरअंदाज किया.
रात हुई तो हम दोनों बिस्तर पर सोने आ गए.
आज नेहा मुझसे कुछ ज्यादा ही करीब लेटी हुई थी.
मुझे लगा कि ठीक है, चलता है.
लेकिन कुछ देर बाद मैंने नोटिस किया कि नेहा मेरे हिप्स पर अपने हाथ से सहला रही थी.
मैंने उससे हंसते हुए पूछा- क्या कर रही हो?
नेहा बोली- कुछ नहीं यार, मुझे हग करके सोने की आदत है!
मैंने कहा- ओके … यह आदत मेरे अन्दर भी है.
मेरे मुँह से इतनी सी बात निकली कि वह मुझसे चिपक गई.
मैंने भी उसे अपने आपसे चिपक जाने दिया और खुद भी एकदम से चिपकने लगी.
जल्दी ही हम दोनों एक-दूसरे से अच्छी तरह से चिपक गए थे.
नेहा की गर्म-गर्म सांसें मेरी छाती पर लग रही थीं.
हम दोनों आंखें बंद करके एक दूसरे से चिपक कर सो गई थीं.
कुछ देर बाद मेरी आंख अचानक खुली तो मैंने महसूस किया कि नेहा अपने हाथ से मेरी कमर सहला रही थी और आराम-आराम से उसका हाथ मेरी गांड तक आ गया था.
उसका हाथ मेरी गांड की दरार में जा रहा था, जो मुझे थोड़ा गलत लगा.
मेरे अन्दर अजीब सी धक-धक होने लगी थी क्योंकि मुझे अच्छा भी लग रहा था.
अचानक उसने पीछे से मेरी सलवार से हाथ अन्दर डालकर मेरी पैंटी पर रख दिया.
उफ्फ … एकदम से लजीज सा लगा.
तभी उसने मेरी पैंटी को नीचे को सरकाया और मेरी गांड में छेद पर उंगली रख दी.
इतने में ही मेरी चूत पनिया गई.
मैंने नेहा को कसके पकड़ लिया.
मेरा मुँह उसकी मोटी चूचियों में और मेरी नाक उनकी आर्मपिट के करीब हो गई.
उसकी चूचियों की गर्माहट और बगल की महक से मुझे और मजा आ रहा था.
थोड़ी देर बाद नेहा ने अपना हाथ निकाला, तो मुझे समझ में नहीं आया कि क्यों हटा लिया.
तभी उसने अपनी एक उंगली खुद के मुँह में डाल कर उस पर थूक लगाया और वापस मेरी गांड के छेद पर रख कर थोड़ी अन्दर डाल दी.
मेरे मुँह से ‘आआह’ निकल गई.
वह हंस पड़ी.
उसने अपनी उंगली और अन्दर डाली.
मुझे बहुत दर्द हो रहा था.
थोड़ी देर बाद उसकी उंगली मेरी गांड में कट-कट अन्दर-बाहर होने लगी.
मुझे भी मजा आने लगा था.
फिर अचानक से उसने दूसरी उंगली भी डाल दी.
मैं तो जैसे मर ही गई.
मैंने उससे कहा- साली मादरचोद ये क्या कर रही है … आआ आह!
लेकिन वह नहीं मानी, हंसने लगी.
अब वह बिंदास हो गई थी तो उसने अपने दूसरे हाथ की उंगलियां मेरी सलवार में डालीं और मेरी चूत सहलाने लगी.
वह अपने हाथ की उंगलियों में थूक लगा लगा कर मेरी चूत व गांड में डालने लगी.
अब मुझे बेहिसाब लज्जतदार दर्द हो रहा था और अजीब सा मजा भी आ रहा था.
मेरी गांड और मेरी कुंवारी चूत दोनों की खुदाई हो रही थी.
अब मैं भी अपनी जीभ से नेहा के गाल चाटने और चूसने लगी.
वह भी मेरे साथ चूमा चाटी में पिल पड़ी.
उसके लिप्स मेरे लिप्स से टच हो रहे थे.
उसने अचानक मेरे लिप्स चूसने शुरू कर दिए और अब मुझे बहुत मजा आ रहा था.
नेहा जल्द ही पूरे जोश में मुझे चूमने लगी थी और ऐसा लग रहा था मानो वह मर्द है और मैं उसके नीचे पिसने वाली लड़की हूँ.
वह मुझे डोमिनेट कर रही थी.
मैं चुपचाप उसको करने दे रही थी और मजा ले रही थी.
कुछ देर बाद मैं झड़ गई और नेहा ने मेरा सारा पानी अपनी उंगलियों से चाट डाला.
उसके बाद उसने मुझे देखा और हंसती हुई बोली- मजा आया मेरी जान?
वर्जिन लेस्बो सेक्स करने में मुझे बहुत शर्म आ रही थी, मैं क्या बोलूँ.
मैं उठ कर बाथरूम में चली गई.
उधर अपने आपको साफ किया और सोचने लगी कि मेरे साथ क्या हुआ!
मुझे तो कुछ समझ ही नहीं आया और अपने आप से ही शर्मिंदा हो गई.
थोड़ी देर अपने आपको संभालने के बाद मैं बाहर आई तो नेहा सो चुकी थी.
मैं उसके बगल में लेट गई और सो गई.
यह मेरे साथ लेस्बियन सेक्स की शुरुआत हुई थी.
इसके आगे और भी बहुत कुछ हुआ, पर मुझे लिखने में शर्म आ रही है.
आपको मेरी यह वर्जिन लेस्बो सेक्स कहानी अच्छी लग रही होगी.
तो प्लीज मुझे कमेंट्स करके जरूर बताएं ताकि मेरी हिम्मत हो सके और मैं आगे का हाल भी लिख सकूँ.
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