Xxx मज़ा सेक्स कहानी में मेरी भतीजी ने होटल में बगल वाले कमरे में हनीमून मना रहे कपल में से लड़की की चूत दिलवाई. उसे मेरे बड़े लंड से चुदकर बहुत मज़ा आया.
मेरी कहानी के पिछले भाग
नवविवाहित कपल के सामने भतीजी की गांड मारी
में आपने पढ़ा कि मैंने एक न्यूली मैरिड कपल में दुल्हन को चोदने के बाद उनके सामने अपनी भतीजी की गांड मारी.
अब आगे Xxx मज़ा सेक्स कहानी:
श्रेया की बुरी तरह गांड मारने के बाद मेरा लंड ढीला हो चुका था, पर लंड में गांड फाड़कर जीतने की खुशी की अकड़ अभी भी बाकी थी।
मेरा लंड ऊपर से बॉल्स तक पानी से भीगा हुआ था।
मेरी सांसें अभी भी तेज़ चल रही थीं।
मैं श्रेया को वहीं छोड़कर सोफे पर आकर बैठ गया और आराम करने लगा।
मैं आँखें बंद करके टाँगें फैलाकर बैठा था।
थोड़ी देर बाद मुझे अपने लंड पर पतली और नाज़ुक अँगुलियाँ महसूस हुईं।
मैंने आँखें खोलकर देखा तो मेरी टाँगों के बीच अलका बैठी हुई थी।
वो अपनी एक हथेली पर लंड को रखकर दूसरे हाथ में तौलिया लेकर लंड को साफ कर रही थी।
जैसे ही मेरी नज़रें अलका से मिलीं, उसने मुस्कुराकर शर्माते हुए नज़रें नीची कर लीं और धीरे से बोली, “अंकल, लगता है ये इतनी मेहनत करके थक गया है!”
मैंने उसके बालों में हाथ फेरकर कहा, “अरे नहीं अलका, मर्द और घोड़ा कभी नहीं थकते! तेरा थोड़ा सा प्यार मिलते ही ये फिर उठ जाएगा!”
अलका बोली, “जानती हूँ अंकल, पर देखो ना… ये अभी भी कितना बड़ा और मोटा लग रहा है!”
फिर वो लंड के टोपे पर उम्म्म… आह… चुम्मी करते हुए बोली, “अंकल, कितना सुंदर है ये! दिल करता है इसको चूमती रहूँ!”
अलका की बात पर मेरी हँसी निकल गई।
मैं समझ गया था कि इसकी चूत फिर से गीली हो चुकी है।
क्योंकि जब चूत में खुजली मची हो, लड़की को लंड तभी सुंदर लगता है।
मैंने हँसते हुए अलका का कंधा पकड़कर उसे ऊपर उठाया और जैसे ही वो उठी, मैंने अपनी एक हथेली उसकी टाँगों के बीच जोड़ पर डालते हुए कहा, “ओ विजय! देखो, तुम्हारी बीवी श्रेया की गांड चुदाई देखकर गर्म हो गई!”
विजय मेरे पास आकर अलका को देखने लगा।
मैंने अपनी अँगुलियों और हथेली पर लगा हुआ अलका की चूत का पानी विजय को दिखाते हुए कहा, “देखो, साली की चूत कैसे टपक रही है!”
विजय बोला, “अंकल, बहुत गर्म है ये! साली की फाड़ डालो!”
मैंने अलका को घुमाते हुए उसके चूतड़ अपनी तरफ कर लिए और चूतड़ों के बीच जैसे ही एक अँगुली डाली, अलका थोड़ा सा झुक गई, जिससे उसकी गांड का छेद दिखने लगा।
मैंने छेद को अँगुली से कुरेदते हुए विजय से कहा, “अरे विजय, इसकी चूत तो मैं मार ही चुका, अब इसकी गांड खोलना ज़रूरी है! देखो तो कितनी टाइट है!”
विजय बोला, “हाँ हाँ, बिलकुल अंकल, सही कहा आपने!”
फिर मैंने अलका के चूतड़ पर थप्पड़ मारकर कहा, “कोई बात नहीं, जितनी इसकी चूत तड़पेगी, उतनी मस्ती से ये अपनी गांड मरवाएगी!”
विजय खुश होता हुआ बोला, “अंकल, आपकी बात सही है, पर आपको नहीं पता इसमें कितनी आग है!”
मैंने अलका को खींचकर अपनी गोद में बिठा लिया और उसके दोनों चूचे पकड़कर मसलते हुए कहा, “कोई बात नहीं विजय, तुम फिक्र मत करो। तुम्हारे हनीमून पर मैं इसकी चूत और गांड मार-मारकर इसको ठंडी कर दूँगा!”
अलका ने मुस्कुराकर विजय के एकदम सिकुड़े हुए लंड को एक अँगुली से हल्का सा हिलाकर शरारत से कहा, “जानू, अंकल सही कह रहे हैं! अब तुम्हें अपने इस नूनी से मेहनत करने की ज़रूरत नहीं। अंकल का मोटा और तगड़ा लंड है मेरे पास! और घर जाने के बाद तुमसे कुछ ना हो पाया तो मैं किसी और लंड का इंतज़ाम कर लूँगी। अब तुम देखो, मैं कैसे रंडी बनकर दिखाती हूँ!”
अलका की बात पर हम तीनों हँसने लगे।
तभी श्रेया ने फर्श से खड़े होकर विजय को आवाज़ दी, “भइया, तौलिया देना तो!”
विजय बाथरूम से तौलिया लेकर श्रेया की चूत और गांड को साफ करने लगा।
फिर श्रेया मेरे पास आकर सोफे पर बैठ गई और मेरा हाथ पकड़कर बोली, “ओह डैडी! आपने तो मुझे बुरी तरह थका दिया! अब मुझे पेग की सख्त ज़रूरत है। मेरा पूरा बदन बुरी तरह दुख रहा है!”
मैंने विजय से पूछा कि उनके कमरे में शराब है या नहीं।
विजय ने मना कर दिया और कहा कि वो लोग ड्रिंक नहीं करते।
मैंने श्रेया को थोड़ी देर रेस्ट करने को कहा और खुद अलका को गोद से उतार कर तौलिया लपेटकर अपने कमरे में चला गया।
मैंने अपने कमरे से शराब की बोतल ली और वापिस विजय के कमरे में आ गया।
मैंने अलका को बोतल देते हुए कहा, “चल मेरी जान, सबके लिए पेग बना!”
अलका ने बोतल पकड़ तो ली पर वो विजय की तरफ देखने लगी, शायद वो कुछ समझ नहीं पा रही थी।
मैंने श्रेया से कहा, “तुम इसकी मदद कर दो!”
श्रेया बोली, “नहीं चाचू, मेरे में हिम्मत नहीं है। आप ही भाभी को पेग बनाना सिखा दो!”
फिर श्रेया विजय से बोली, “भइया, तुम भी पेग लोगे ना?”
विजय बोला, “मैंने कभी शराब नहीं पी!”
श्रेया अंगड़ाई लेकर अपने चूचे उभारकर मुस्कुराते हुए विजय से बोली, “अरे भइया! शराब पीकर शवाब का स्वाद चखकर देखो, मज़ा आ जाएगा!”
विजय कुछ नहीं बोला।
श्रेया फिर बोली, “देखना, अभी पापा तुम्हारी पत्नी की चूत में शराब भरकर पियेंगे, फिर उसको शराब पिलाकर उसकी गांड मारेंगे! तुम भी देखना कैसे तुम्हारी बीवी शराब पीकर उछल-उछल कर अपनी गांड मरवाएगी!”
विजय श्रेया से बोला, “ठीक है, अगर आप पीओगी तो मैं भी ले लूँगा!”
मैंने अलका का हाथ पकड़कर कहा, “चल आ जा, तुम्हें मैं पेग बनाना सिखाता हूँ!”
अलका खड़ी हो गई तो मैं उसके एक चूतड़ पर हाथ रखकर उसे टेबल के पास ले आया।
टेबल कमरे के एक कोने में था, श्रेया और विजय हमसे थोड़ा दूर थे।
टेबल के पास आते ही मैंने अलका को बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूसकर कहा, “अलका, तुम बहुत सुंदर हो!”
अलका कसमसाते हुए बोली, “थैंक्यू अंकल!”
मैंने उसकी आँखों में देखकर कहा, “सच बताओ, तुम मेरे से चुदवाकर खुश हो या नहीं?”
अलका मेरे से चिपकते हुए बोली, “अंकल, आप सोच नहीं सकते मैं कितनी खुश हूँ! मुझे आज तक कभी किसी के साथ इतना मज़ा नहीं आया। और विजय में तो इतना भी दम नहीं कि वो मेरी चूत में दो मिनट भी टिक सके!”
मैंने शरारत से कहा, “वो बेचारा क्या करे, तुम हो ही इतनी गर्म!”
अलका बोली, “नहीं अंकल, उसके बस का नहीं है कि वो किसी लड़की को खुश कर सके। पर अंकल, आपके साथ तो लड़की होना क्या होता है, ये मैंने आज महसूस किया है!”
मैंने अलका के दोनों चूतड़ पकड़कर पूरे फैला दिए और उसकी गर्दन पर जीभ फिराते हुए कहा, “अलका, लड़की होने का मज़ा तो तुमने ले लिया। क्या तुम लड़की के अंदर की रंडी होने का मज़ा लेना चाहोगी?”
अलका- हाँ आह… सी… अंकल… उम्म्म्म… बिलकुल अंकल! मुझे आपसे हर मज़ा चाहिए!
मैंने कहा, “ठीक है, फिर तुम ये भूल जाओ कि विजय तुम्हारा पति है। बस तुम यहाँ सिर्फ मेरी बनकर मज़ा लो!”
अलका ने मेरी कमर में लिपटे तौलिये की गाँठ खोल दी, जिससे तौलिया नीचे गिर गया।
अलका मेरी टाँगों के बीच झूलते लंड को पकड़कर अपनी चूत से रगड़ते हुए बोली, “अम्म्म्म… आह… ठीक है अंकल! जैसा आप कहोगे मैं वैसा ही करूँगी!”
मैंने अलका को छोड़कर टेबल पर रखे चार गिलास सीधे किए और चार पेग बना लिए।
मैंने श्रेया का पेग सबसे बड़ा रखा, अपना मीडियम और अलका-विजय का सबसे छोटा।
फिर मैंने अलका को ट्रे उठाने को बोला।
वो मेरे लंड को अपनी चूत से और ज़ोर से रगड़ते हुए नशीले अंदाज़ में बोली, “रुको ना अंकल, दो मिनट बस!”
मैंने कहा, “अलका, लंड लेने का दिल है ना?”
अलका बोली, “हाँ अंकल, बहुत!”
मैंने कहा, “बस थोड़ी देर सब्र करो, फिर मैं तुम्हें बहुत मज़ा दूँगा!”
अलका मेरी बात पर लंड छोड़कर थोड़े गुस्से से बोली, “ठीक है अंकल, आपकी मर्ज़ी!”
मैंने उसे कहा, “मेरी जान, पूरा मज़ा चाहिए ना?”
वो सिर हिलाकर बोली, “हाँ अंकल!”
मैंने कहा, “फिर गुस्सा छोड़ो और थोड़ी देर इंतज़ार करो!”
अलका बिना कुछ बोले ट्रे उठाकर चल पड़ी।
मैं अलका के पीछे-पीछे चलता हुआ उसके बड़े ही ख़ूबसूरत उछलते चूतड़ देखकर ये सोच रहा था कि बेबी, थोड़ी देर बाद मैं इन चूतड़ों को फैलाकर तेरी गांड मारने वाला हूँ!
अलका ने टेबल के पास जाकर ट्रे रख दी और खुद विजय की बगल में बैठ गई।
मैं श्रेया की बगल में बैठ गया।
हम चारों मादरज़ात नंगे थे।
मैंने अलका से कहा, “बेबी, ये पेग ऐसे रखो मत! अपनी चूत को अच्छे लंड से चुदवाने के लिए अपने पति को थैंक्स बोलकर एक पेग उसे दो!”
चुदासी अलका मुस्कुराते हुए उठ गई और एक गिलास उठाकर विजय की तरफ बढ़ाते हुए इठलाती हुई बोली, “थैंक्यू जानू! अपनी बीवी की चूत में अंकल का लंड डलवाने के लिए!”
अलका की बात पर सब हँसने लगे।
फिर अलका ने एक पेग श्रेया को देते हुए कहा, “दीदी, आपको भी थैंक्यू! आपकी वजह से ही असली लंड क्या होता है, मैं जान पाई हूँ!”
फिर अलका एक पेग मुझे देकर मेरी गोद में अपने नंगे और चिकने चूतड़ रखकर बैठते हुए मेरे होंठों पर चूमकर बोली, “मेरे राजा, मेरे मालिक, आप हो! आई लव यू अंकल!”
मैंने हँसते हुए विजय से कहा, “यार, कुछ तो समझा अपनी बीवी को! साली नंगी होकर मेरी गोद में बैठी है, फिर भी अंकल-अंकल बोल रही है!”
विजय कुछ बोलता उससे पहले अलका बोली, “अंकल, श्रेया दीदी तो आपको आह डैडी… ओह डैडी… बोलकर चुदवाती हैं! मैं तो सिर्फ अंकल ही बोल रही हूँ!”
अलका की बात पर एक बार फिर सब हँस पड़े।
मैंने टेबल पर रखा पेग उठाकर अलका को गोद से उठाया और पेग में अपना लंड डुबोकर अलका को देते हुए कहा, “ये पेग एक शरीफ पत्नी के लिए, जो नई-नई शादी करके अपने पति के सामने रंडियों की तरह दूसरे मर्द का लंड लेने वाली है!”
फिर हम चारों ने चियर्स करते हुए अपने-अपने पेग से एक-एक घूँट भरा।
मैं अभी भी अलका के सामने खड़ा हुआ था।
अलका ने घूँट भरकर गिलास टेबल पर रखा और मेरा लंड पकड़कर चूमते हुए बोली, “अंकल, जब सामने इतना सेक्सी लंड हो तो कोई भी लड़की उसे लेने के लिए तड़प उठे! फिर चाहे सामने पति हो या पति का बाप!”
वह इतना बोलकर लंड चूसने लगी।
फिर उसने लंड को दोबारा अपने पेग में डुबोया और उस पर लगी शराब चाट ली।
अलका बार-बार लंड को शराब से नहला कर चाट रही थी।
उधर श्रेया अपना पूरा पेग घटक कर दूसरा पेग बनाने चली गई थी।
विजय अपनी पत्नी को मेरा लंड चाटते हुए देख रहा था।
श्रेया पेग लेकर विजय के पास आकर बैठते हुए उसकी जाँघ पर हाथ रखकर बोली, “अरे भइया, अब हम क्या करें?”
विजय उसकी तरफ सवालिया नज़रों से देखने लगा।
श्रेया बोली, “अरे बुद्धू! मेरा मतलब आप अपनी पत्नी को चुदवाते हुए देखोगे और मैं डैडी को उसे चोदते हुए… अब हम दोनों तो बस यहीं कर सकते हैं! ना तो अब मेरे में हिम्मत है चुदवाने की…”
फिर वो उसके सोए हुए लंड को सहलाकर बोली, “…और ना अब आपके इस नूनू में खड़े होने की हिम्मत है!”
श्रेया की बात सुनकर अलका बोली, “दीदी, विजय को देखने दो ना! कैसे उसकी पत्नी अंकल की रंडी बनकर चुदवाती है! आप क्यों उसे डिस्टर्ब कर रही हो!”
अलका ने ये बात कुछ इस अंदाज़ से कही जैसे वो विजय से बदला लेना चाहती हो और उसे दिखा देना चाहती हो कि उसके अंदर कितनी आग छुपी हुई है।
इतना बोलते ही अलका मेरे लंड को मुँह में भरकर चूसने लगी।
मैं भी अपना पेग खत्म कर चुका था।
मैंने अलका के मुँह से लंड बाहर खींचकर उसका पेग उसके होंठों से लगा दिया, जिसे वो एक बार में पी गई।
शराब के टेस्ट से जैसे ही उसने मुँह बनाया, मैंने उसका जबड़ा दबाकर मुँह खोल दिया और लंड अंदर डालकर आगे-पीछे करने लगा।
थोड़ी देर अलका के मुँह की चुदाई करने के बाद मेरा लंड फिर से अपने असली रूप में आ गया।
मैंने अलका के मुँह से लंड बाहर खींच लिया और उसकी गर्दन पकड़कर उसे सोफे पर खींचा।
उसकी एक टाँग उठाकर अपने कंधे पर रखी और लंड उसकी चूत पर लगा दिया।
मेरे मोटे सुपाड़े ने अलका की तीन अँगुली जितनी चूत को पूरा ढक लिया।
अलका अपनी दोनों कुहनियों के सहारे पीठ ऊपर उठाकर मेरे चेहरे पर नज़रें टिकाकर लंड अंदर जाने का इंतज़ार कर रही थी।
पर मैंने खुद पर कंट्रोल करते हुए लंड के सुपाड़े को उसकी चूत के होंठों में रगड़ा और सोफे पर बैठकर अलका को अपनी गोद में खींच लिया।
अलका कटी पतंग की तरह मेरी गोद में खिंची चली आई।
मेरा छत की तरफ उठा हुआ लंड उसके चूतड़ों की दरार के बीच से रगड़ खाता हुआ उसकी टाँगों के बीच से निकलकर उसकी चूत के होंठों में फँस गया।
अलका के गद्देदार चूतड़ मेरी जाँघों पर टिक गए।
उसके चूतड़ों का कटाव एक अलग ही मज़ा दे रहा था।
मैंने अपने दोनों हाथ आगे लाकर उसकी दोनों चूचियों को पकड़ लिया और उसकी निप्पल से खेलने लगा।
अलका मचलते हुए अपनी कमर हिलाकर मेरे लंड पर अपनी चूत रगड़ते हुए मुँह पीछे मेरी तरफ घुमाकर मेरी आँखों में देखने लगी।
अलका के पतले गुलाबी होंठ काँप रहे थे और उसकी आँखें वासना से गुलाबी हो चुकी थीं।
वो मेरी आँखों में देखते हुए धीरे से बोली, “अंकल, क्यों तड़पा रहे हो? प्लीज़ कुछ करो ना! मेरे अंदर चींटियाँ रेंग रही हैं!”
मैं एक हाथ सरकाकर उसकी गर्दन पर ले आया और उसकी गर्दन दबोचकर उसके होंठ अपने होंठों में भर लिए।
हम दोनों पागल प्रेमियों की तरह एक-दूसरे के होंठ चूस रहे थे।
थोड़ी देर बाद श्रेया और विजय के हँसने की आवाज़ आई तो मैंने अलका के होंठ छोड़कर उनकी तरफ देखा और पूछा, “क्या हुआ?”
श्रेया तपाक से बोली, “पापा, भइया बोल रहे हैं आप उसकी पत्नी को तड़पा क्यों रहे हो! तो मैंने उन्हें समझाया कि पापा आपकी पत्नी को अच्छे से गर्म करके ठंडी करेंगे!”
श्रेया की बात पर अलका अपनी दो अँगुलियाँ चूत पर रगड़कर विजय को दिखाते हुए बोली, “जानू, देखो ना मेरी कैसे बह रही है! मैं तो पूरी गर्म हूँ, अंकल ही पता नहीं क्यों कुछ कर नहीं रहे!”
अलका की बात पर विजय बिना कुछ बोले हँस दिया।
श्रेया खड़ी होकर बोली, “चलो, एक-एक पेग और हो जाए!”
मैंने कहा, “श्रेया, गुड आइडिया! तुम बोतल ले आओ और सबके लिए पेग बना लो!”
वह उठकर बोतल लेने चली गई।
मैंने अलका की चूत को मुठ्ठी में भींचकर मसलते हुए कहा, “चल रंडी की औलाद, तुझे असली मज़ा देता हूँ!”
अलका बेशर्मी से हँसते हुए बोली, “अंकल, आपको कैसे पता कि मैं रंडी की औलाद हूँ?”
मैंने कहा, “साली, तेरे जैसी चुदक्कड़ तो रंडी की औलाद ही हो सकती है!”
अलका बड़ी अदा और बेशर्मी से बोली, “सच कहा अंकल आपने! अब बस आप इस रंडी की औलाद को भी रंडी बना दो!”
मैंने अलका को सोफे पर लिटा दिया और उसकी टाँगें फैलाकर उसकी बहती हुई चूत चाटने लगा।
मैं अलका की चूत में पूरी जीभ डालकर अंदर-बाहर कर रहा था।
अलका अपनी गांड उठा-उठाकर उफ्फ… हाए अंकल… आई ईईईई… बहुत मज़ा आ रहा है! अपना लंड डालो ना मेरी चूत में! बोलती हुई चूत चटवा रही थी।
मैंने अलका की दहकती हुई चूत में अपनी बीच वाली दो अँगुलियाँ डालकर पूरा ज़ोर लगाकर ऊपर की तरफ उठा दिया।
अलका ने सिसकारते हुए अपनी गांड हवा में उठा दी।
अब अलका की चूत मेरे मुँह के पास थी।
मैं दूसरे हाथ के अंगूठे से अलका की चूत के दाने और उसके सूसू वाले छेद को ज़ोर-ज़ोर से रगड़ रहा था।
जिससे अलका ने आईईईई… आस्स्स्स… सी… करते हुए अपनी चूत से मूत की धार निकाल दी।
अलका की चूत से गर्म मूत की धार शर्रर… शर्रर… करते हुए मेरे मुँह पर लगी।
मैंने अलका की चूत से अँगुलियाँ निकाल लीं, जिससे अलका की गांड सोफे पर टिक गई।
अलका अपनी टाँगें फैलाकर अपनी चूचियों को दोनों हाथों से मसलने लगी।
उसकी चूत से अभी भी मूत की धार निकल रही थी।
मैंने तपाक से अलका की टाँगें पूरी फैलाकर अपनी पोज़ीशन सेट की और लंड का टोपा उसके छेद पर लगा दिया।
मेरा लंड भी उसके मूत से नहा गया।
लंड को अपने छेद पर महसूस करते ही अलका ने अपनी गांड उठाकर मेरी आँखों में देखकर मुस्कुराते हुए लंड का स्वागत किया और अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए बोली, “ओह अंकल! डाल भी दो ना! ब.च्ची को क्यों तड़पा रहे हो!”
मैंने लंड पर धीरे से दबाव देकर सुपाड़ा उसके छेद में डाला।
अलका मचलते हुए उफ्फ… आह अंकल… बोली।
दो झटकों में ही मैंने पूरा लंड अलका की चूत की गहराई में पहुँचा दिया।
मैंने लंड को लगभग पूरा बाहर खींचकर फिर से ज़ोरदार झटका मारा तो पूरा लंड अंदर जाते ही अलका स्प्रिंग की तरह उछलकर मेरे से चिपक गई और ‘आई… आह… मम्मी… मरोगे क्या!’ बोलते हुए चिल्लाई।
मैं बिना रुके अपनी कमर को आगे-पीछे करते हुए फचाफच उसकी चूत मारने लगा।
कमरे में अलका की Xxx मज़ा से सिसकारियाँ गूँज उठीं।
थोड़ी देर में वो मज़े से हँसते हुए किलकारियाँ भरने लगी।
मैंने रुककर उसकी एक निप्पल को मुँह में भरकर चूसना चाहा तो वो बोली, “प्लीज़ अंकल, रुको मत! करते रहो!”
मैंने पास बैठे विजय से कहा, “देख विजय, तेरी पत्नी कैसे रंडी की तरह लंड माँग रही है!”
विजय बोला, “अंकल, साली कुतिया की फाड़ दो आज!”
मैं उसकी बात पर फिर से बिना रुके लंड पेलने लगा।
कोई चार-पाँच मिनट की चुदाई के बाद अलका के बदन को झटके लगने लगे।
वो उफ्फ… सी… आह… आईईईई… उम्मम्म म्म… करते हुए झड़ गई।
आगे की Xxx मज़ा सेक्स कहानी की प्रतीक्षा करें.
अब तक की स्टोरी पर आप मुझे मेल और कमेंट्स अपने विचार भेजें.
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