जवान भतीजी संग मैकलोडगंज होटल में- 5

टाइट ऐस्स फक स्टोरी में मैं अपनी भतीजी के साथ हनीमून मनाने मैकलोडगंज गया, वहां एक और कपल भी था. उस दुल्हन की चूत गांड दोनों मैंने खोली.

मेरी कहानी के पिछले भाग
चुदाई की प्यासी दुल्हन बेचारी
में आपने पढ़ा कि मेरी भतीजी ने होटल में बगल वाले कमरे में हनीमून मना रहे युगल में दुल्हन लड़की अलका की चूत दिलवाई. उसको भी मेरे लंड से चुदने में बहुत मज़ा आया.
पाँच मिनट की चुदाई के बाद अलका के नंगे शरीर में झटके लगने लगे।
वो उफ्फ… सी… आअह… आई ईईई… उम्मम् म्म… करती हुई झड़ गई।

अब आगे टाइट ऐस्स फक स्टोरी:

फिर वो मेरी छाती पर हाथ रखकर मुझे धकेलने की कोशिश करने लगी।
मैंने लंड अलका की चूत से बाहर खींच लिया और लंड को ट्टटों के पास से पकड़ लिया।
मेरा लंड पूरे शवाब में था।
मैंने श्रेया और विजय की तरफ घूमकर कहा, “विजय, साली ये तो गई! देखो ना, कुतिया अपना काम होते ही मुझे धकेलने लगी!”

विजय बोला, “अंकल, आप इसकी गांड में लंड डालकर अपना पानी निकाल लो!”

मैंने हँसते हुए कहा, “सही कह रहे हो विजय! मुझे इसकी गांड ही मारनी पड़ेगी!”

मैंने अलका के बाल खींचकर उसे घोड़ी बनाना चाहा, पर उसके बदन पर अभी भी झटके लग रहे थे क्योंकि उसकी चूत से अभी भी पानी की पिचकारियाँ निकल रही थीं।

विजय ने आकर अलका की कमर पकड़ी और उसे ज़बरदस्ती मेरे सामने घोड़ी बना दिया।
फिर विजय ने अलका की कमर पर दोनों हाथ रखकर नीचे दबा दिया जिससे अलका के चूतड़ पूरे फैल गए।

अलका ने अपना सिर पीछे घुमाकर मेरी तरफ बेचारगी से देखा तो मैं उसको आँख मारकर मुस्कुरा दिया।
उसने बिना कोई रिएक्शन दिए अपना मुँह आगे घुमा लिया।

उसके चेहरे पर ऐसी बेचारगी थी जैसे किसी बकरे के चेहरे पर कटने से पहले होती है।

अलका की चूत से चिकना पानी निकलकर उसकी गांड के गुलाबी छेद पर लगा हुआ था।
मैं अपनी बीच वाली अँगुली को उसकी गांड के छेद पर घुमाने लगा।

फिर मैंने धीरे से अँगुली अंदर सरकाई तो अलका अपनी कमर उठाकर हल्के से चिहुँकी।
अलका की टाइट गांड ने ग्रिप बनाकर मेरी अँगुली को कस लिया था।

मैंने विजय से कहा, “यार, इसकी गांड तो बहुत टाइट है! देखो, अँगुली कैसे अंदर फँस गई है!”

विजय बोला, “हाँ अंकल, बहुत टाइट है साली! श्रेया की भी तो पहले ऐसे ही थी, अब वो आराम से लंड लेती है!”

श्रेया ताली बजाकर हँसते हुए उठकर हमारे पास आ गई और मेरा पूरा सख्त लंड पकड़कर उसकी मुठ मारते हुए बोली, “अरे विजय भइया! देखो तो पापा का लंड! ये आपकी प्यारी सी पत्नी की गांड पूरी खोल देगा! फिर ये भी मेरी तरह आराम से अपनी गांड में लंड लेकर उसपर कूदेगी और आप मज़े से भाभी को लंड पर उछलते हुए देखना!”

विजय बोला, “बिलकुल श्रेया! मैं तो यही चाहता हूँ। बहुत गर्मी है इस रंडी में। मैं चाहता हूँ आज अंकल इसको चोदकर ठंडी कर दें!”

श्रेया ने मेरा लंड पकड़कर अलका की गांड के छेद पर लगाया और अपना एक हाथ अलका के पेट पर ले जाकर उसे थोड़ा ऊपर उठाकर सेट किया।
फिर अलका की गांड पर ढेर सारा थूक डालकर मुझे लंड डालने का इशारा करके लंबी साँस लेकर बोली, “अरे विजय भइया! आप औरत की प्यास नहीं समझ सकते। आप जितना औरत को ठंडी करना चाहोगे, उसकी गर्मी उतनी भड़केगी!”

मैंने अलका के नीचे एक बाँह डालकर उसे कस लिया और थोड़ा झुककर लंड के टोपे का दबाव गांड के छेद पर दिया।
तो नाज़ुक गांड ने मेरे पत्थर जैसे सख्त लौड़े के सामने फड़क कर अपने होंठ खोल दिए।
जिससे मेरा एकदम लाल और बल्ब जितना मोटा सुपाड़ा अलका के गद्देदार चूतड़ों के बीच प्यारे से छेद में जाकर फँस गया।

अलका ज़ोर से आह… हाए मम्मी… उफ्फ्… करते हुए ज़ोर से चीखते हुए छटपटाकर मेरी पकड़ से छूटने की कोशिश करने लगी।
पर कुतिया शेर के पंजे से कभी नहीं निकल सकती … वही हालत टाइट ऐस्स फक का मजा लेने की आस में अलका की थी।

श्रेया अलका के बाल खींचकर बोली, “अरे भाभी! देखो ना, आपके पति आपको तगड़े लंड से चुदवाते हुए देखकर कितने खुश हैं! कम से कम उनकी खुशी के लिए ही बिना नखरा किए चुदवा लो!”

अलका लंबी साँस लेते हुए पूरे ज़ोर से अपनी कुहनियाँ सोफे पर टिकाकर बोली, “हाँ श्रेया… हाँ श्रेया… बिलकुल मैं लूँगी पूरा लंड! आह अंकल डालो… आह फाड़ दो मेरी गांड… उफ्फ़!”

अलका की बात सुनकर श्रेया ने उसके बाल छोड़कर विजय से कहा, “चलो भइया! आओ हम दोनों बैठकर आपकी प्यारी पत्नी की लाइव पोर्न मूवी देखते हैं!”

मैंने अलका की गांड से लंड का टोपा बाहर खींच लिया और उसके चूतड़ों को फैलाकर उसके खुले हुए छेद में बहुत सारा थूक डाला।
फिर लापरवाही से लंड छेद पर लगाकर अलका की गांड में डाल दिया।

एक ही झटके से लंड लगभग आधा अंदर चला गया था।
अलका चिल्ला रही थी … पर मुझे उससे कोई मतलब नहीं था।
मुझे तो मेरे मज़बूत लंड को जिसे उसकी टाइट गांड ने भींच रखा था, उससे मतलब था।

मैंने धीरे-धीरे दो और धक्के मारकर पूरा लंड अलका की गांड की गहराई में पहुँचा दिया और धीरे-धीरे लंड अंदर-बाहर करने लगा।

मेरी बॉल्स हर झटके के साथ उसकी चूत से टकरा रही थीं और हर झटके के साथ अलका के मुँह से आह… उफ्फ़… मम्मी… आह धीरे करो ना अंकल… बहुत बड़ा और मोटा लंड है आपका… आह आईईई… उम्मम्मम… मम्मी… आह प्लीज़ धीरे… आह जलन हो रही है मेरी गांड में… आह अंकल प्लीज़ बस करो… आह मेरी चूत मार लो… आह… बोल रही थी।

मैंने अलका की गांड में लंड अंदर-बाहर करते हुए विजय से वैसलीन पूछा क्योंकि गांड में मेरा लंड बहुत कसा हुआ जा रहा था।
विजय ने अलका से पूछा, “वैसलीन है क्या?”

अलका- आम्मम्म… आह… हाँ है, मेरे बैग में है!

विजय लपक कर दो मिनट में बैग से वैसलीन लेकर आ गया।
जैसे ही उसने वैसलीन मेरी तरफ बढ़ाई, मैंने लंड अलका की गांड से बाहर खींच लिया और अपनी मर्दानगी विजय को दिखाते हुए लंड उसके सामने लहराकर उससे वैसलीन की डिब्बी ले ली।
विजय कभी मेरे लंड को और कभी अपनी पत्नी की गांड के फैले हुए छेद को देख रहा था।
अलका की गांड के अंदर की लाल चमड़ी उसके फैले हुए छेद से दिख रही थी।

मैंने डिब्बी से खूब सारी वैसलीन लेकर अपने लंड पर मसलते हुए डिब्बी वापिस विजय को देते हुए कहा, “यार, बड़ी टाइट है अलका की! बेचारी को तकलीफ हो रही है। तुम उसकी गांड में वैसलीन लगाकर चिकनी कर दो, फिर उसे भी मज़ा आएगा!”

विजय अँगुली से वैसलीन लेकर अलका के पिछवाड़े के पास झुककर वैसलीन उसकी गांड के छेद में लगाने लगा।
मैंने श्रेया की तरफ देखकर आँख मारी तो वो हँसने लगी।

उधर विजय बोला, “अंकल, लो तैयार है इसकी गांड! अब इसे दर्द नहीं होगा, पूरी चिकनी हो चुकी है!”

मैंने अलका को सीधी करके सोफे पर लिटाया और उसकी दोनों टाँगें फैलाकर अपने कंधों पर रख लीं।
लंड को उसकी चूत के होंठों पर फिराते हुए अलका के चेहरे की तरफ देखा।

अलका भी मेरी तरफ देख रही थी।
जैसे ही हमारी नज़रें मिलीं, वो मुस्कुराकर मेरे गले में अपनी बाहें डालकर मेरे से लिपट गई और मेरे होंठ चूसने लगी।

मैंने अलका का साथ देते हुए हाथ नीचे लेकर लंड को पकड़ा और उसकी गांड पर सेट करने लगा।
तभी अलका ने भी अपना हाथ नीचे लेकर लंड को पकड़कर अपनी गांड के छेद से भिड़ा लिया और मेरी आँखों में देखते हुए बोली, “अंकल उफ्फ़… अब डालो पर थोड़ा आराम से!”

मैंने धीरे से लंड पर दबाव दिया तो लंड अलका की गांड में आराम से फिसलता हुआ अंदर चला गया।
मैंने लंड को आधे से ज़्यादा बाहर खींचकर खुद को सेट किया और अलका के स्प्रिंग की तरह उछल रहे बूब्स को पकड़कर लंड वापिस अंदर डाल दिया।
अलका ने आह… अंकल… बोलते हुए अपने होंठ दाँतों से काटते हुए आँखें बंद कर लीं।

मैंने धीरे-धीरे लंड की स्पीड बढ़ा दी।
मैं फुल स्पीड से अलका की गांड मार रहा था।

हम दोनों श्रेया और विजय को भूलकर चुदाई का मज़ा लेने लगे।

अब तो अलका भी मेरी तरफ देखकर आह… अंकल… उफ्फ़… मज़ा आ रहा है… आह थोड़ा धीरे… उफ्फ़ करो ना अंकल… आईईईई… कितना मस्त लंड है आपका! बोलते हुए मेरे हर झटके के साथ अपनी गांड उठा-उठाकर चुदवाने लगी।
कमरे में फच-फच की आवाज़ें गूँज रही थीं।

थोड़ी देर ऐसे ही अलका की गांड खोलने के बाद मैंने जैसे ही लंड बाहर निकाला तो अलका मेरी तरफ देखकर बोली, “क्या हुआ अंकल, बाहर क्यों निकाल लिया?”
मैंने मुस्कुराते हुए उसके बालों में हाथ फिराया और उसके होंठों पर चूमते हुए कहा, “अलका, तू कुतिया है ना मेरी?”
अलका सिर हिलाकर बोली, “जी अंकल, मैं कुतिया ही तो हूँ!”

मैंने कहा, “फिर कुतिया की गांड कैसे मारी जाती है?”
अलका मेरी बात पर हँसते हुए उठकर कुतिया बनते हुए बोली, “अंकल, कुतिया की गांड कुतिया की तरह मारी जाती है!”

अलका सोफे पर अपनी कुहनियों और घुटनों के बल होकर कुतिया बन गई और अपनी कमर पूरी झुकाकर अपने चूतड़ मेरे सामने फैला दिए।

मेरे से अलका के फैले हुए चूतड़ों का नज़ारा देखकर रहा नहीं गया।
मैंने उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मारते हुए कहा, “वाह मेरी रंडी! कितना शानदार पिछवाड़ा है तेरा!”
अलका आह… सीईईईई… करते हुए बोली, “अंकल, ये पिछवाड़ा आपके मोटे लंड के लिए है!”

अपनी उम्र से आधी से भी कम उम्र की लड़की मेरे सामने अपनी टाइट ऐस्स फक के लिए खोलकर कुतिया बनी हुई थी।
उसकी गांड का फैला हुआ छेद अंदर से आग की भट्ठी की तरह दहकता हुआ दिख रहा था और उसकी चूत से पानी टपक रहा था।

मैंने झुककर उसकी चूत पर अपनी जीभ फिराकर उसका नमकीन पानी चाट लिया और उसकी कमर पकड़कर लंड उसकी गांड से भिड़ा दिया।
फिर मैंने पूरा लंड एक झटके में अलका की टाइट गुफा में डाल दिया और उसकी गर्दन पकड़कर उसे ऊपर उठाया।
अलका के नरम चूतड़ों के बीच से होता हुआ लंड पूरा उसके अंदर फिट हो चुका था।
उसके चूतड़ मेरी जाँघों से चिपके हुए थे, उसकी पीठ मेरी छाती से और मेरे दोनों हाथों में अलका की दोनों चूचियाँ थीं।

मैंने अलका की दोनों चूचियों को भींचते हुए उसकी गर्दन पर जीभ फिराकर पूछा, “कैसे लग रहा है मेरी रंडी?”
अलका मेरी तरफ अपना चेहरा घुमाकर हल्का मुस्कुराई और अपने होंठ मेरी तरफ बढ़ा दिए।

मैंने अलका के होंठों को अपने होंठों में भर लिया और अपनी कमर हिलाकर लंड उसकी गांड के अंदर-बाहर करने लगा।
हम दोनों का बदन आपस में चिपका हुआ था और एक-दूसरे से रगड़ खा रहा था।

मेरे लंड के हर झटके के साथ अलका कसमसा रही थी और मैं बिना रुके अलका की गांड मार रहा था।
जब मेरी जाँघें अलका के चूतड़ों से टकरातीं तो ठप-ठप की आवाज़ें आतीं।

मैंने थोड़ी देर बाद अलका के होंठ छोड़े तो वो ‘आह… आईई… एमईई… अंकल…’ करते हुए लंबी साँस लेकर बोली, “उफ्फ़ आपका लंड बहुत बड़ा है! ऐसा लग रहा है मेरे अंदर कोई मोटा डंडा हो!”

मैं फुल स्पीड से अलका की गांड में लंड पेलने लगा।
अलका की बहुत ही टाइट और दहकती गांड ने मेरे लोहे को थोड़ी देर में पिघला दिया।

मेरे लंड ने इस पोज़ीशन में चार-पाँच मिनट तक अलका की गांड ड्रिल करने के बाद अपने गर्म और गाढ़े पानी से उसकी गांड को भर दिया।
मैंने झड़ते टाइम अलका को अपनी बाहों में कस लिया था।

मेरा लंड अभी भी उसके छेद में फूल और सिकुड़ रहा था।

थोड़ी देर बाद मैंने लंड बाहर निकालकर जैसे ही अलका को अपनी पकड़ से आज़ाद किया.
वो सोफे पर निढाल होकर उल्टी ही लेट गई।

कमसिन लड़की की कुंवारी गांड खोलकर मेरी साँसें भी तेज़ हो चुकी थीं।
मेरे माथे पर पसीना बहने लगा था।

मैं भी अलका के पैरों के पास सोफे पर टाँगें फैलाकर बैठ गया और आँखें बंद करके खुद को शांत करने लगा।

थोड़ी देर बाद अलका ने कुनमुनाते हुए अपनी टाँगें लंबी कीं तो उसका पैर मेरी जाँघ से टच हुआ।
मैंने आँखें खोलकर उसकी तरफ देखा।

अलका उल्टी लेटी हुई थी, उसके दोनों गोलमटोल चूतड़ पहाड़ियों की तरह उठे हुए थे जिन पर मेरे वीर्य के निशान थे।
मैंने अपने सामने बैठे हुए विजय और श्रेया की तरफ देखा।

वो दोनों मेरी तरफ देख रहे थे।
श्रेया विजय के लंड को पकड़कर हिला रही थी।

वो मुस्कुराते हुए खड़ी होकर मेरे पास आकर बोली, “वाउ पापा! आपने कमाल कर दिया! मज़ा आ गया आपको अलका की गांड मारते हुए देखकर!”

फिर वो विजय के पास जाकर उसका हाथ पकड़कर खींचते हुए बोली, “देखो, विजय भी अपनी पत्नी को आपसे चुदवाते हुए देखकर कितना खुश है!”

विजय भी खड़ा होकर मेरे पास आ गया।
श्रेया उसका लंड पकड़कर बोली, “आह भइया! भाभी को पापा से गांड मरवाते देखकर आपका लंड भी खड़ा हो गया! चलो आओ, आपको मज़ा देती हूँ!”

श्रेया विजय को खींचकर लेटी हुई अलका के पास ले गई और उसका लंड पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगी।
दो मिनट में ही विजय ने आह… श्रेया… आह… करते हुए अलका के नंगे बदन पर अपना थोड़ा सा पानी गिरा दिया।

श्रेया खुश होते हुए विजय से बोली, “भइया, अपनी चुदी हुई बीवी पर आपको मुठ मरवाकर कैसा लगा?”
विजय श्रेया की गांड पर थपकी देकर बोला, “यार, मज़ा आ गया आज तो!”

फिर श्रेया ने हमारे लिए एक-एक पेग बनाया।
पर अलका उठी नहीं तो हम तीनों ने अपना पेग खत्म किया।

रात काफी हो चुकी थी।
मैं और श्रेया अपने कमरे में आ गए।

श्रेया अलका को मेरे से चुदवाकर बहुत खुश थी।
वो पूरी रात छोटी ब.च्ची की तरह नंगी ही मेरे से चिपक कर सोती रही।

अगले दिन हम सुबह लेट उठे।
उठते ही श्रेया ने विजय को फोन किया और उन लोगों के साथ घूमने का प्लान बना लिया।

हम चारों तैयार होकर पूरा दिन घूमते रहे।
अलका सारा दिन मेरे से चिपकी रही, जैसे वो मेरे साथ हनीमून मनाने आई हो।

रात को फिर मैंने अलका की गांड और चूत को अच्छे से बजाया।
तीन दिन में अलका मेरे से चुदवाकर पूरी खुल चुकी थी।

अब उसको भी विजय से कोई शिकायत नहीं थी क्योंकि विजय ने उसको किसी से भी चुदवाने की छूट दे दी थी।

तीन दिन की घमासान चुदाई के बाद विजय और अलका अपने घर चले गए और मैं और श्रेया अलग होकर अपने-अपने घर आ गए।

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