बाजी की चूत को रोज लंड चाहिए

सेक्सी बहन को चोदा मैंने. मैं अपनी बाजी के घर गया तो मैंने उनको एक पराये मर्द से चुदाई का मजा लेती देखा. उन्होंने भी मुझे देखते हुए देख लिया.

नमस्ते दोस्तो! मैं दाशिन खान, राजस्थान के एक छोटे से गाँव का रहने वाला हूँ।
मेरी उम्र 23 साल है।

मैंने अपनी सेक्सी बहन को चोदा … यह कैसे हुआ, बताने से पहले मैं आपको अपने परिवार का परिचय करवा देता हूँ।
मेरे घर में हम 6 भाई-बहन हैं—3 बहनें और 3 भाई।
मेरे से सब बड़े हैं और सबकी शादी हो चुकी है, बस मुझे छोड़कर।

यह कहानी मेरी सबसे बड़ी बाजी (दीदी) सुल्ताना की है, जिनकी उम्र करीब 42 साल है।
वह शादीशुदा हैं और दिखने में भोली-भाली और शरीफ लगती हैं।

हमारे घर के पास में ही उनका ससुराल है, जहाँ वह अपने शौहर के साथ रहती हैं।
उनके 4 बच्चे हैं।

बाजी दिखने में सुंदर हैं, ज्यादा गोरी तो नहीं फिर भी उनकी हाइट ज्यादा और थोड़ी मोटी होने से उनका फिगर कातिलाना है!
उनकी मोटी-मोटी आँखें और बड़ी-बड़ी जाँघें बहुत आकर्षित करती हैं।

गाँव में औरतें घाघरा-चोली ही पहनती हैं, मेरी बाजी भी यही पहनती थीं।

जीजाजी 45 साल के हैं और हट्टे-कट्टे लगते हैं। यहाँ गाँव में ज्यादातर काम खेती का ही होता है, हालाँकि बाजी कभी-कभी बड़े घरों में खाना बनाने का काम भी कर लेती हैं।

मैं बचपन से ही अपनी बाजी के पास ज्यादा रहा हूँ क्योंकि हमारे गाँव में स्कूल नहीं था, इसलिए मैं उनके पास रहकर पढ़ाई करता था।

जब मैं छोटा था और मुझमें समझ कम थी, तब रात को बाजी और जीजाजी उठकर घर के अंदर जाते थे और 15-20 मिनट बाद वापस आ जाते थे।
मुझे बस बाजी की चूड़ियों की और सिसकारी की आवाज आती थी, पर उस समय मुझे पता नहीं था कि अंदर क्या होता था।
बाद में पता चला कि असल माजरा क्या था।

खैर, बात साल भर पुरानी है।

काफी समय बाद अब मैं शहर में रहता था और पढ़ाई करता था।
जब भी मैं घर जाता तो पहले बाजी के घर जाता था क्योंकि शहर से जो बस जाती थी, वह जीजाजी के गाँव पहुँचती थी।
वहाँ से मैं जीजाजी की बाइक लेकर अपने घर जाया करता था।

उस दिन भी मैं शहर से रवाना हुआ।
जीजाजी को फोन लगाया तो बंद बता रहा था।
मैंने सोचा घर पर होंगे तो आज उन्हें मिलकर सरप्राइज देता हूँ।

रात को करीब 10 बजे मैं उनके गाँव पहुँच गया।
बस स्टैंड के पास में ही उनका घर था, तो मैं उनके घर की तरफ रवाना हुआ।
बाजी का घर बाकी घरों से सबसे अंत में है।

उनके घर में दो गेट हैं—एक सामने और एक पीछे।
पीछे की तरफ गायों का बाड़ा बना हुआ है।

मैं धीरे-धीरे उनके घर के पीछे वाले हिस्से में पहुँचा और सोचा कि जीजाजी को कॉल करूँ कि आप आगे का गेट खोलें, मैं आ रहा हूँ।

जैसे ही मैं पीछे वाले गेट के पास पहुँचा, मुझे बाजी के घर के पिछले स्टोर रूम से आवाज आई।
मैं रुक गया।
थोड़ा रुका तो लगा कि कोई आपस में बात कर रहा है।
मैंने सोचा इतनी रात को स्टोर रूम में कौन हो सकता है?

मैं पीछे के गेट से स्टोर रूम की खिड़की के पास गया और आवाज सुनने लगा।

मुझे बाजी की आवाज सुनाई दी, “आह! धीरे से करो ना, आज कोई नहीं है”
मुझे अजीब लगा।
दीदी और जीजू यहाँ क्यों आए हैं?
वो यह सब कुछ आगे वाले रूम में भी कर सकते थे।

बाजी की आवाज फिर सुनाई दी, “आज सिर्फ बच्चे ही हैं और कोई नहीं, आप आराम से करिए!”

मेरा दिमाग खराब हो गया!
इसका मतलब बाजी के साथ जीजू नहीं, बल्कि कोई और था।
मैं एकदम शॉक हो गया।

पहले सोचा कि आगे का गेट बजा दूँ, पर मैं वहीं रुक गया और सुनने लगा कि आखिर बाजी के साथ और कौन है।

मैं बिल्कुल खिड़की के पास चला गया और अंदर देखने लगा।
लाइट बंद थी, पर जो टूटी-फूटी चारपाई थी उस पर बाजी लेटी हुई थी और एक आदमी उन पर चढ़ा हुआ था।

शायद वो बाजी के चूचे दबा रहा था जिससे बाजी हल्की सिसकारी ले रही थी।

चारपाई का सिरहाना खिड़की के पास ही था, यानी बाजी का सिर बिल्कुल खिड़की से सटा हुआ था।
बस कुछ ही दूरी पर मेरी बाजी को कोई बजा रहा था!

थोड़ी देर बाद बाजी की आवाज़ आई, “अब रहा नहीं जाता, मुझे चोदो ना!”

अब मुझे भी मजा आने लगा।
मेरा हाथ अपने आप पैंट में चला गया और मैं अपने लन्ड को दबाने लगा।

कुछ देर बाद पायल की आवाज सुनाई दी और वह आदमी बाजी को लिप-किस करने लगा।

फिर उस आदमी की आवाज़ आई, “मेरी जान, तैयार हो?”

उधर से बाजी की सिर्फ “हम्ममम” की आवाज़ आई।

अचानक से बाजी जोर से चीखी, “मादरचोद! आराम से, जान मारेगा क्या? उफ्फ… आराम से… उम्म म्मम… हाय री!”

अब बाजी की पायल की आवाज़ आने लगी और साथ में चारपाई की “चूँ-चूँ” करती आवाज़।
मेरा लन्ड पूरा तन गया था और मैं भी मूठ मार रहा था।

अब पूरा माहौल बन गया था।
कमरे में सिर्फ़ बाजी की सिसकारियां और “फच्च-फक्च” की आवाज़ मुझे रोमांचित करने लगी।

मेरी बाजी मजे से लन्ड ले रही थी और मैं कुछ भी नहीं कर पा रहा था।
और करता भी क्या? जब बाजी खुद मजे ले रही है, तो मुझे क्या दिक्कत! कमरे से आती गालियाँ भी अब मुझे मधुर लगने लगीं।

“मादरचोद! आराम से करो ना, मैं कोई रंडी नहीं हूँ!” बाजी बोली।

वह आदमी बोला, “साली! हमेशा मेरा मोटा लन्ड लेती हो और बोलती हो राँड नहीं हो? साली! आज तेरी बुर् फाड़ दूँगा! ले मेरा पूरा लन्ड!”

बाजी मजे से लन्ड खा रही थी और उसका छोटा भाई बाहर खड़ा उसकी धमाकेदार चुदाई देख रहा था।

करीब 15 मिनट बाद उनका तूफान शांत हुआ।
वह आदमी बड़े जोर से चिल्लाता हुआ बाजी के भोसड़े में झड़ गया।
उनके साथ मेरे लन्ड का पानी भी निकल गया।
मैं धीरे से आगे वाले गेट पर आ गया और बाजी को आवाज़ लगाई।

थोड़ी देर बाद बाजी बाहर आयी। मुझे देखकर बोली, “अरे छोटे! तू कब आया?”
“अभी आया हूँ बाजी!” मैंने कहा।

बाजी थोड़ी डरी हुई थी और उसकी हालत थोड़ी खराब थी।
आखिर क्यों न होती, अभी एक आदमी से जमकर अपना भोसड़ा मरवा के आई थी।

मैं अंदर आ गया तो बाजी बोली, “छोटू, तुम यहाँ रुको, मैं तेरे लिए खाना लगा देती हूँ।”
इतना कहकर वह पीछे वाले गेट की तरफ गई।
शायद वह आदमी अभी वहीं था।

मैं भी उठा और पीछे की तरफ चला गया।
वहाँ कोई नहीं था, पर थोड़ा और पीछे बाड़े में उस आदमी ने मेरी बाजी को पकड़ रखा था।
चाँदनी रात थी, इसलिए मुझे सब साफ दिख रहा था।

एक लंबा और मोटा आदमी मेरी बाजी को जकड़े हुए था।

मुझे आश्चर्य हुआ कि कैसे इस सांड को बाजी ने अपने ऊपर लिया हुआ था।

बाजी कराह कर बोली, “जाओ जल्दी! छोटा भाई आ गया है।”
वह आदमी बोला, “तो क्या हुआ? भाई को भी देखने दे कि कैसे उसकी बहन रात में अपनी चुदाई करवाती है!”

इतना कहकर उसने मेरी बाजी के होंठ अपने मुँह में ले लिए।
मैं मन मसोस कर रह गया कि कोई मेरी बाजी को मेरे सामने मसल रहा है और मैं सिर्फ़ देख रहा हूँ।

मैं वापस आकर कमरे में बैठ गया।
थोड़ी देर बाद दीदी वहाँ आई।

उनके बाल बिखरे हुए थे और गालों पर काटने जैसे निशान थे।

मैंने पूछा, “बाजी, इतनी देर कहाँ लगा दी?”
वह बोली, “छोटू, गाय के बाड़े में सांड घुस गया था, उसे निकालने गई थी।”

मैं मन ही मन बोला, “अभी तो वह सांड आपके ही ऊपर था!”

खैर, थोड़ी देर इधर-उधर की बातें हुई और मैं सो गया।
सुबह बाजी ने उठाया और चाय दी।

मैंने चाय ली और पूछा, “बाजी, जीजाजी कहाँ हैं?”
वह बोली, “तेरे जीजाजी पास के गाँव में गए हैं खेतों के काम से, 2 दिन बाद आएँगे।”

मैंने नहा-धोकर खाना खाया और पीछे वाले गेट पर आकर धूप सेंकने लगा।
इतने में बाजी आ गई और हम बातें करने लगे।

“छोटे, अब बता कैसी चल रही है तेरी पढ़ाई?” बाजी ने पूछा।
“बहुत अच्छी चल है बाजी!” मैंने जवाब दिया।
“घर कब जा रहे हो अम्मी के पास?”

“शाम को जीजाजी की बाइक लेकर जाऊँगा।” मैंने कहा।
पर वह बोली, “बाइक तो तेरे जीजाजी ले गए। एक काम हो सकता है, अपने स्कूल के सर जी पीछे ही रहते हैं, उनके पास बाइक है। तुम ले जाना और वापस आते हुए दे आना।

मैंने पूछा, “तुम कैसे जानती हो सर जी को?”

वह कहने लगी कि स्कूल में प्रोग्राम होते रहते हैं, इसलिए वह वहाँ खाना बनाने जाती है।

बाजी ने सर जी को फोन किया और थोड़ी देर बाद एक आदमी आया।
अरे! यह तो वही रात वाला आदमी है जो मेरी बाजी को चोदकर गया था!

उसने कहा, “यह लो चाबी छोटू! शाम से पहले चले जाना, यहाँ बहुत सर्दी है।”

मुझे ऐसा लगा जैसे वह कह रहा हो कि शाम से पहले चले जाना, क्योंकि रात में तेरी बाजी फिर से मेरे से भोसड़ा मरवाएगी! खैर, वह बोलकर चला गया।

इतने में जीजाजी का कॉल आया।
पहले बाजी ने बात की, फिर मेरे बारे में बताया।
जीजाजी ने कहा कि यह तो बहुत अच्छा हुआ, मुझे अभी 4-5 दिन और लग जाएँगे, तुम छोटू को अपने पास ही रहने देना।

शायद बाजी को यह अच्छा न लगा।
लगता भी कैसे, उनका प्लान जो खराब हो गया था! मैं खुश हो गया और बाजी मायूस।

“क्या हुआ बाजी?” मैंने पूछा।
वह बोली, “कुछ नहीं।”

ऐसे करते-करते दो दिन निकल गए।

अगले दो दिन घर का माहौल काफी तनावपूर्ण पर उत्तेजक था।
बाजी हर वक्त उस “सांड” (सर जी) के ख्यालों में खोई रहतीं और मैं उनकी हर हरकत पर नजर रखता।

तीसरे दिन की दोपहर को बाजी ने मुझसे कहा, “छोटू, घर में राशन खत्म हो गया है, तू जरा पास वाली दुकान से आटा और चीनी ले आ।”

मैंने देखा कि बाजी मुझे घर से बाहर भेजने की जल्दबाजी में थीं।
मुझे शक हुआ कि जरूर उस आदमी का आने का समय हो गया है।

मैं बाजार जाने के बहाने निकला, लेकिन रास्ते से ही वापस मुड़कर घर के पीछे वाले बाड़े की दीवार के पीछे छिप गया।

मुश्किल से 5 मिनट बीते होंगे कि वही सर जी अपनी बाइक खड़ी कर दबे पांव पीछे के रास्ते से स्टोर रूम में दाखिल हुए।
बाजी पहले से ही वहां इंतज़ार कर रही थीं।

मैंने चुपके से खिड़की के पास जाकर झांका।
अंदर का नजारा देख मेरा खून उबलने लगा।

बाजी ने अपनी चोली उतार रखी थी और वह आदमी उनके भारी बदन को बुरी तरह मसल रहा था।

बाजी के मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं, “उफ्फ… आज तो बहुत जल्दी आ गए आप! मेरा भाई बाहर गया है, जल्दी करो!”
बाजी ने उत्तेजित होकर कहा।

वह आदमी हंसा और बोला, “साली रांड! तेरे इस जिस्म की खुशबू मुझे खींच लाई। आज तुझे ऐसी चुदाई दूंगा कि तेरा भाई भी सुनकर हैरान रह जाएगा!”

इतना कहकर उसने बाजी को चारपाई पर पटका और उनके घाघरे को ऊपर उठाकर अपनी पैंट उतार दी।
उसका लन्ड वाकई किसी सांड की तरह लंबा और मोटा था।

उसने बिना किसी देरी के बाजी की जांघों के बीच अपना हथियार सेट किया और एक तगड़ा धक्का मारा।
“आह्ह! मर गई… धीरे… फाड़ दोगे क्या!” बाजी जोर से चिल्लाईं।

वह आदमी रुका नहीं और जोर-जोर से धक्के मारने लगा।
“फच्च-फच्च” की आवाज पूरे कमरे में गूंजने लगी।
बाजी की पायलें छनक रही थीं और उनके भारी चूतड़ चारपाई से टकरा रहे थे।

मैं बाहर खड़ा अपनी पैंट के ऊपर से ही अपना लन्ड सहला रहा था।
मेरा दिल जोरों से धड़क रहा था।

अचानक बाजी की नजर खिड़की की तरफ गई और हमारी आंखें मिल गईं।

बाजी एक पल के लिए ठिठक गईं, लेकिन उन्होंने शोर नहीं मचाया।
उनकी आंखों में डर के बजाय एक अजीब सी चमक थी।
उन्होंने उस आदमी को और जोर से जकड़ लिया और मेरी तरफ देखते हुए जोर-जोर से आहें भरने लगीं।

शायद उन्हें इस बात में और मजा आ रहा था कि उनका छोटा भाई उन्हें पराये मर्द से ठुकते हुए देख रहा है।

करीब आधे घंटे तक वह सांड बाजी को रौंदता रहा।

जब दोनों का पानी झड़ने वाला था, तो बाजी ने जोर से चिल्लाकर कहा, “डाल दो पूरा अंदर… आह्ह्ह… आज मुझे पूरी तरह भर दो!”

कमरा शांत हुआ, तो मैं भागकर वापस दुकान की तरफ गया और सामान लेकर ऐसे आया जैसे मुझे कुछ पता ही न हो।

जब मैं घर पहुँचा, तो बाजी रसोई में थीं, उनके चेहरे पर एक अजीब सा संतोष और थकान थी।

जैसे ही उन्होंने मुझे देखा, वह थोड़ा मुस्कुराई और बोलीं, “बड़ी देर कर दी छोटू, सामान मिल गया?”

मैंने उनकी आंखों में झांकते हुए कहा, हाँ बाजी, सामान तो मिल गया, पर रास्ते में एक सांड फिर से बाड़े की तरफ जाते देखा था, संभल कर रहिएगा!”

बाजी का चेहरा एकदम से लाल हो गया, पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।

उस रात जब मैं सोया, तो बाजी मेरे कमरे में आईं और मेरे सिर पर हाथ फेरते हुए बोलीं, “छोटू, शहर की पढ़ाई में बहुत थकान होती होगी ना? आज मैं तेरी मालिश कर देती हूँ।”

मुझे समझ आ गया कि अब बाजी मेरे सामने पूरी तरह खुल चुकी हैं।
उस रात बाजी का रूप बदला हुआ था।

उन्होंने जो ढीली चोली पहन रखी थी, उसके बटन ऊपर से खुले थे।

वह मेरे बिस्तर के किनारे बैठ गईं और सरसों का तेल लेकर मेरे पैरों की मालिश करने लगीं।
कमरे में मद्धम रोशनी थी और बाजी के शरीर से पसीने और उस आदमी की गंध आ रही थी, जो मुझे और भी उत्तेजित कर रही थी।

मालिश करते-करते बाजी ने धीरे से पूछा, “छोटू, दोपहर में तूने खिड़की से सब देख लिया था ना?”

मैं सन्न रह गया।
मुझे लगा वह गुस्सा करेंगी, लेकिन उनके स्वर में एक अजीब सी नरमी थी।

मैंने धीरे से कहा, “हाँ बाजी, देख लिया था।”

बाजी थोड़ा मुस्कुराईं और मेरे पास खिसक कर बैठ गईं।
उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपने भारी चूतड़ पर रख दिया और बोलीं, “तो बता, कैसा लगा अपनी बाजी को उस सांड के नीचे दबते हुए देखकर?”

मेरा गला सूखने लगा था।
मैंने हिम्मत जुटाकर कहा, “बाजी, वह आपको बहुत बुरी तरह चोद रहा था। आप तो दर्द से चिल्ला रही थीं!”

बाजी ने खिलखिलाकर हंसा और अपनी चोली का एक और बटन खोल दिया, “पगले! वह दर्द नहीं, मजा था। तेरे जीजा जी अब बूढ़े हो चले हैं, वह प्यास नहीं बुझा पाते जो वह सर जी बुझाते हैं। लेकिन आज तुझे देख कर मुझे लगा कि मेरा छोटा भाई भी अब जवान हो गया है!”

इतना कहकर उन्होंने मेरा हाथ धीरे से अपनी जाँघों के बीच सरका दिया।
मैं कांपने लगा था।

बाजी मेरे कान के पास आकर फुसफुसाई, “आज रात जीजा जी नहीं हैं, और सर जी भी चले गए हैं। क्या तू अपनी बाजी की थकान दूर नहीं करेगा?”

मैंने आव देखा न ताव, बाजी को अपनी बाहों में भर लिया।
उनके भारी बदन का स्पर्श मिलते ही मेरा लन्ड फन उठाए खड़ा हो गया।

बाजी ने झट से अपनी चोली उतार दी और उनके बड़े-बड़े चूचे मेरे सामने थे।
मैंने उन्हें पागलों की तरह मसलना शुरू कर दिया।

बाजी जोर से कराह उठीं, “आह्ह्ह! छोटू… आराम से! तू तो उस सांड से भी ज्यादा जंगली निकला!”

मैंने उनके घाघरे का नाड़ा खोल दिया और उन्हें बिस्तर पर लिटा दिया।
चाँदनी रात की रोशनी में बाजी का नंगा बदन किसी अप्सरा जैसा लग रहा था, बस थोड़ा भारी और मांसल।

जब मैंने अपनी पैंट उतारी, तो बाजी मेरा लन्ड देखकर दंग रह गईं, “हायल्ला! इतना बड़ा! तूने इसे शहर में पाल-पोस कर इतना बड़ा कर लिया?”
बाजी ने मजाक करते हुए उसे हाथ में थाम लिया।

मैंने बाजी की टांगें चौड़ी कीं और उनके गीले भोसड़े पर अपना हथियार सेट किया।
बाजी ने अपनी आँखें बंद कर लीं और तकिये को कस कर पकड़ लिया।

“दे दे छोटू… आज अपने शहर की पूरी ताकत अपनी बाजी के अंदर उतार दे!” बाजी चिल्लाईं।

जैसे ही मैंने पहला धक्का मारा, बाजी के मुंह से एक लंबी सिसकारी निकली, “ओह्ह्ह माँ! मर गई… कितना मोटा लंड है तेरा!”

कमरे में फिर से वही “फच्च-फच्च” की आवाजें गूंजने लगीं.
लेकिन इस बार वह आदमी मैं था।

मैं अपनी सगी बाजी को पूरी ताकत से ठोक रहा था और वह मजे में गालियां दे रही थीं, “जोर से चोद मेरे भाई! अपनी बाजी को आज रंडी बना दे… आह्ह्ह!”

करीब आधे घंटे तक हम दोनों एक-दूसरे के नंगे बदन से खेलते रहे।
अंत में, जब मेरा पानी निकलने वाला था, मैंने बाजी के चूतड़ों को कसकर पकड़ा और सारा गर्म माल उनके अंदर छोड़ दिया।
बाजी भी बुरी तरह कांपते हुए शांत हो गईं।

हम दोनों पसीने में लथपथ एक-दूसरे से लिपटे रहे। बाजी ने मेरे माथे को चूमा और बोलीं, “अब जब तक तू यहाँ है, हर रात यही होगा छोटू, तुझे कहीं और जाने की जरूरत नहीं है।”

मैं अपनी सेक्सी बहन को चोदा. यह कहानी कैसी लगी?
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