भतीजी की कुंवारी सहेली की पहली चुदाई- 2

न्यूड गर्ल सेक्स टॉक स्टोरी में मैं अपनी भतीजी की सहेली की कुंवारी चूत को फाड़ चुका था. उसे बहुत मजा आया. अब मेरी कामुक दृष्टि उसकी गांड के भूरे छेद पर थी.

मेरी कहानी के पिछले भाग
भतीजी की कुंवारी सहेली की बुर फाड़ी
में आपने पढ़ा कि मेरी भतीजी अपनी चूत मरवा ऑफिस चली गयी और उसकी सहेली की चूत पर मेरा दिल आ गया था. मैंने उसे गर्म करके उसकी नई नकोर बुर का भेदन कर दिया था.

अब आगे न्यूड गर्ल सेक्स टॉक स्टोरी:

शाम को पांच बजे फोन की घंटी बजी।
मैंने उठकर फोन उठाया।
उधर श्रेया थी।

मेरे फोन उठाते ही श्रेया हंसते हुए बोली, “क्या बात है मेरे चाचा! मेरी जान, एक और कुंवारी लड़की की चूत फाड़ दी!”
मैं तकिए के सहारे बैठते हुए बोला, “क्या मतलब?”

श्रेया बोली, “चाचू, ज्यादा भोले मत बनो! जब अवनी की सील टूट रही थी और वो जोर-जोर से चिल्ला रही थी, तब मैं फोन पर ही थी!”
मैंने लण्ड पर हाथ फिराते हुए कहा, “ओह अच्छा, तब एक कॉल आई तो थी!”

श्रेया बोली, “चाचू, वो मेरी कॉल ही थी! मैंने अवनी की चूत फटने से लेकर, जब वो मजे से आपका लण्ड ले रही थी, तब तक सब कुछ सुना!”
मैंने कहा, “बस यार, वो हो गया!”

श्रेया बोली, “कोई बात नहीं चाचू! मुझे तो दुख इस बात का है कि मैं आपको अवनी की चुदाई करते नहीं देख सकी! अब आप बस इतना बता दो कि मेरे शेर की बॉल्स में मेरी चूत के लिए और पानी बचा है या सब उस रण्डी ने निचोड़ लिया?”

श्रेया की गंदी बातें सुनकर मेरा लण्ड फिर से अकड़ने लगा।
उधर अवनी भी अंगड़ाई लेते हुए उठकर बैठ गई।

मैंने श्रेया से कहा, “तू फिकर मत कर! तेरे चाचू की बॉल्स में खूब पानी है और लण्ड में भी पूरा दम है! तू चाहे तो दो-चार और ले आ, सबकी चूत की धज्जियाँ न उड़ा दीं तो मेरा नाम बदल देना!”

अवनी मुझे लण्ड सहलाते देखकर अपने एक हाथ से मेरी बॉल्स छूने लगी और मेरी तरफ देखकर बोली, “श्रेया है क्या?”
मैंने कहा, “हाँ, श्रेया है!”

श्रेया ने शायद अवनी की बात सुन ली थी।
वो बोली, “चाचू, अवनी से बात करवाना!”

मैंने मोबाइल स्पीकर पर डालकर अवनी को दे दिया।
जैसे ही अवनी ने हैलो बोला, श्रेया चहकते हुए बोली, “कॉन्ग्रैचुलेशन मेरी जान! आखिर तूने भी अपनी चूत फड़वा ही ली, वो भी चाचू के तगड़े हथौड़े से!”
अवनी मुस्कुराते हुए बोली, “श्रेया, बस हो गया! मैं भी क्या करती!”

श्रेया बोली, “अच्छा ही हुआ! चल, मैं थोड़ी देर में आती हूँ। फिर आज सेलिब्रेशन करेंगे और दोनों मिलकर चाचू के लण्ड की सवारी करेंगे!”
उसने अवनी को बाय बोलकर फोन काट दिया।

अवनी फोन साइड में रखकर मेरी गोद में लेट गई और धीरे से बोली, “मैं आपको क्या बोलूँ?”
मैंने उसके बालों में हाथ फिराते हुए पूछा, “क्या मतलब?”
अवनी बोली, “श्रेया आपको चाचू बोलती है, क्या मैं आपको चाचू बोलूँ या जीजू?”
मैंने कहा, “तुम जो चाहे बोल सकती हो!”

अवनी बोली, “ठीक है, मैं भी आपको चाचू ही बोलूँगी!”
फिर अवनी मेरी छाती से लिपट गई और बोली, “चाचू, सारा बदन दुख रहा है। टांगों के बीच अभी भी भारी-भारी लग रहा है!”

मैंने अवनी के एक चूतड़ को सहलाते हुए मुट्ठी में भींच लिया और कहा, “मेरी जान, अभी तो तेरी सील ही खुली है। अभी तो तुझे कामसूत्र के सारे आसन भी सिखाने हैं!”
अवनी बोली, “कसम से आप इस दुनिया के सबसे बड़े चोदू हो!”

फिर अवनी उठकर बोली, “चाचू, मैं चाय बनाकर लाती हूँ। आप तब तक कपड़े पहन लो!”

मैंने बेड से उठकर अवनी को खींचकर अपनी बाहों में भर लिया और चूमते हुए कहा, “मेरी जान, हम दोनों नंगे ही रहेंगे!”

अवनी मेरी छाती पर चूमते हुए बोली, “ठीक है चाचू, मैं आपकी हर बात मानूँगी! रुको, मैं बाथरूम जाकर आती हूँ!”
मैंने उसकी कमर में हाथ डालकर कहा, “चल, दोनों बाथरूम चलते हैं!”

थोड़ी देर पहले बुरी तरह चुदकर अपनी सील तुड़वाने वाली नंगी कमसिन अवनी, जिसके बाल बुरी तरह बिखरे हुए थे और उसके संगमरमर जैसे बदन पर काटने-मारने के लाल निशान साफ गवाही दे रहे थे कि इसने किसी कसाई से अपना फूल-जैसा बदन रुलवाया है।

अवनी मेरी तरफ देखकर मुस्कुराई और बाथरूम की तरफ बढ़ गई।

रास्ते में चलते हुए वो बोली, “चाचू, ऐसा लग रहा है टांगों में जान ही नहीं है और अंदर अभी भी बहुत जलन है!”
मैंने कहा, “अवनी, कोई बात नहीं। कल तक तुम बिल्कुल ठीक हो जाओगी!”

तब तक बाथरूम आ गया।

बाथरूम आते ही अवनी कमोड का ढक्कन उठाकर बैठ गई और आँखें बंद करके जोर लगाकर मूतने की कोशिश करने लगी।
उसके चेहरे पर दर्द के भाव थे।

मैंने अवनी के गाल पर हाथ फिराकर पूछा, “क्या हुआ?”
वो मेरा हाथ जोर से पकड़ते हुए बोली, “आह चाचू, दर्द हो रहा है!”

अवनी के इतना बोलते ही उसकी चूत से ‘शर्रर्र’ की आवाज के साथ मूत की धार निकली और उसके मुँह से निकला, “आह उफ्फ मम्मी!”

मैं मुस्कुराते हुए उसकी चूत से बहते मूत को देख रहा था।

मूतने के बाद अवनी ने आँखें खोलीं और टिश्यू लेकर कमोड से उठते हुए अपनी चूत पोंछते हुए बोली, “चलो चाचू, अब आपका टर्न! आप भी सूसू करो!”

मैंने हँसते हुए अपना लण्ड पकड़ा और कमोड की तरफ करके मूतने लगा।
अवनी बड़े प्यार से मुझे मूतते हुए देख रही थी।

मेरे मूतने के बाद अवनी बाथरूम में लगे फुल-साइज शीशे के सामने खड़ी हो गई और खुद को देखने लगी।

शीशे में अपनी हालत देखकर अवनी एकदम चौंकी और बोली, “ओह माई गॉड! क्या ये मैं हूँ?”
फिर वो अपने बूब्स पर पड़े निशान देखकर बोली, “ओह चाचू, आपने ये क्या कर दिया!”

मैंने अवनी को पीछे से बाहों में ले लिया और अपने से सटाकर उसके दोनों बूब्स पर हाथ फेरने लगा।

अवनी शीशे में मुँह बनाकर मुझे देखते हुए बोली, “कोई ऐसे भी करता है क्या चाचू! कितनी छोटी हूँ मैं आपसे, आपने तो मेरे बदन का हुलिया ही बिगाड़ दिया!”

मैंने अवनी के बहुत नरम, गुब्बारे-जैसे चिकने और फूले हुए बूब्स को सहलाते हुए कहा, “मेरी जान, तुम्हारी जैसी छोटी और प्यारी लड़कियों को इस सब में बहुत मजा आता है!”
अवनी मेरे दोनों हाथ पकड़कर बोली, “चाचू, छोड़ो ना मुझे! देखने भी दो ना कि आपने मेरे साथ क्या-क्या कांड किए हैं!”

जैसे ही मैंने अवनी को छोड़ा, वो घूमकर शीशे की तरफ अपने चूतड़ करके उन्हें देखने लगी।
अवनी के गोरे चूतड़ भी बुरी तरह लाल थे।

अवनी अपने चूतड़ों पर पड़े निशानों पर हाथ फिराते हुए मुस्कुराकर बोली, “हे भगवान! मेरी किस्मत में ऐसा जालिम मर्द से सील तुड़वाना लिखा था!”
उसकी मासूम बात पर मुझे हँसी आ गई।

फिर अवनी घूमकर एक टांग उठाकर अपनी फूलकर लाल हो चुकी चूत पर उंगलियाँ फिराते हुए बोली, “ओह माई गॉड! देखो चाचू, इसका क्या हाल हो गया! आह मम्मी!”

फिर वो मुझे बाहर धकेलते हुए बोली, “आप निकलो यहाँ से! मैं अपनी शक्ल सही करके आती हूँ!”

मैं मुस्कुराते हुए किचन में आ गया और चाय बनाने लगा।

थोड़ी देर बाद अवनी की आवाज आई।
वो मुझे “चाचू! चाचू!” करते हुए ढूँढ रही थी।

मैंने आवाज दी, “अवनी, मैं किचन में हूँ!”
अवनी सीधा किचन में आ गई।

अवनी ने एक लाल टॉप पहन रखा था जो ऊपर से उसकी गोल-गोल चूचियों को आधा ढके हुए था और नीचे से चूचियाँ आधी से ज्यादा नंगी थीं।
टॉप बहुत ढीला था और अवनी के चलने से उसकी चूचियाँ थिरक रही थीं।
उसके कड़क निप्पल टॉप के ऊपर से साफ दिख रहे थे।

नीचे अवनी ने लाल रंग का थॉन्ग पहन रखा था जो बस उसकी चूत की शेप ढके हुए था और ट्रांसपैरेंट होने की वजह से उसकी फूली हुई चूत अंदर से साफ दिख रही थी।

अवनी मुझे भूखी नजरों से देखते हुए मुस्कुराती आँखों से इशारा करते हुए बोली, “ऐसे क्या देख रहे हो चाचू?”
मैंने उसे नीचे से ऊपर तक देखते हुए कहा, “इस दुनिया की सबसे हसीन लड़की को, जो अभी-अभी कली से फूल बनकर और भी हसीन हो चुकी है!”

अवनी शर्माते हुए मेरे पास आकर मेरी छाती पर पतली उंगली फिराते हुए बोली, “बस भी करो ना जानू! आप जब ऐसे देखते हो तो कुछ होता है!”

मैंने उसकी पतली कमर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींचा और अपना एक हाथ उसके टॉप में डालकर उसके मदमस्त, बहुत सॉफ्ट गुब्बारे-जैसे चिकने बूब को पकड़कर मसलते हुए कहा, “होने दो ना जो होता है! इसे ही तो जवानी कहते हैं। इस जवानी का जितना मजा लूट सकती हो, लूट लो!”

मैंने अवनी के हार्ड निप्पल को उंगलियों में लेकर मसला तो उसकी सिसकारी निकल गई।

फिर वो हँसते हुए मुझसे अलग होकर बोली, “चाचू, बस करो! अब मेरे में और हिम्मत नहीं। मैं बड़ी मुश्किल से अभी क्लीन होकर आई हूँ। आप ऐसे करते रहे तो मैं फिर से गीली हो जाऊँगी!”

फिर वो मेरे लण्ड की तरफ उंगली करके बोली, “देखो ना, आपका ये कितना भयंकर लगता है देखने में! भगवान का शुक्र मनाओ कि मैं ये लेकर अभी आपके सामने जिंदा खड़ी हूँ!”

फिर अवनी ने जैसे ही घूमकर फ्रिज खोला, उसकी मदमस्त गांड थिरक कर मेरे सामने आ गई।
थॉन्ग की पतली डोरी उसके चूतड़ों में फँसी हुई थी।

जैसे ही वो फ्रिज से कुछ निकालने को झुकी, मुझे उसकी गुलाबी गांड का छेद नजर आ गया।

वो सीधी होते हुए बोली, “वैसे एक बात बताओ, आप अपने डंडे को क्या खिलाते हो जो ये इतना मोटा, ताजा और बड़ा है!”
मैंने लण्ड पर हाथ फिराते हुए कहा, “खिलाना क्या है मेरी जान! ये तुम जैसी कच्ची कलियों की चूत का खून पीकर जवान रहता है!”

अवनी पलटकर मेरी तरफ देखते हुए बोली, “वैसे चाचू, मैंने सुना है लड़कों का एक बार हो जाए तो दोबारा खड़ा नहीं होता, पर आपने सुबह श्रेया के साथ किया और अभी मेरे साथ, पर आपका अभी भी खड़ा हो रहा है! एक बात है, बड़ी हिम्मत है आपमें!”

मैंने लण्ड की तारीफ सुनकर उसे हिलाते हुए कहा, “हिम्मती तुम भी कम नहीं हो! तुम्हें पता है कोई लड़की एक बार मेरा लण्ड ले ले तो उससे चलना मुश्किल हो जाता है। एक तुम हो जो मेरे सामने आराम से खड़ी हो!”

अवनी गैस के पास आकर चाय छानते हुए बोली, “चाचू, मैं जानती हूँ मेरी टांगों के बीच कितनी जलन हो रही है। दिल कर रहा है टाँगें फैलाकर बस लेट जाऊँ!”
मैंने उसकी गांड की एक गोलाई पर हाथ फिराते हुए कहा, “ऐसे बोलो ना – बस टाँगें फैलाकर लण्ड अंदर लेकर पड़ी रहूँ!”

अवनी मेरी छाती पर मुक्का मारते हुए बोली, “बस करो आप तो! मुझे अब नहीं लेना आपका!”

फिर अवनी चाय कप में डालकर हॉल की तरफ जाते हुए बोली, “चलिये जनाब, चाय पी लीजिये! अब जो करना है अपनी श्रेया के साथ करना!”
मैं उसके पीछे-पीछे चलते हुए बोला, “आने दो उसको! उसकी तो मैं गांड मारूँगा!”

अवनी टेबल पर चाय रखकर चेयर पर बैठते हुए बोली, “ठीक है, आप उसकी गांड मारना, मैं बैठकर देखूँगी!”

मैं भी अवनी के पास चेयर पर बैठ गया और उसका हाथ अपने हाथ में लेकर न्यूड गर्ल सेक्स टॉक करने की मंशा से बोला, “अवनी, मैंने सुना है पंजाबी लड़कियों को गांड मरवाना बहुत पसंद होता है!”
अवनी हँसते हुए बोली, “आप मुझे फुसलाओ मत! आपका कोई पता नहीं, आप मेरे पीछे भी अपना डंडा फँसाकर रख दो!”

मैंने कहा, “यार कसम से मैंने सुना है! तुम भी तो पंजाबी हो, सच बताओ क्या ये बात सही है?”
अवनी मुस्कुराते हुए लंबी साँस लेकर बोली, “चाचू, सुना तो मैंने भी है!”

मैंने अवनी का हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रखा और दूसरे हाथ से चाय का कप उठाते हुए उसके चेहरे को ध्यान से देखते हुए पूछा, “सच बताओ, क्या सुना है तुमने?”
अवनी बोली, “यही कि पीछे करवाने में भी बहुत मजा आता है! मेरी सब सहेलियाँ स्कूल टाइम से ही ये सब करवा रही हैं!”

मैंने कहा, “यार खुलकर बोलो कि गांड मरवाने में मजा आता है!”
अवनी अपने होंठों पर जीभ फिराते हुए, हाथ से लण्ड सहलाते हुए बोली, “वही तो चाचू!”

वो आगे बोली, “मेरी कुछ सहेलियाँ तो ऐसे भी बोलती हैं कि चूत में लेने से रिस्क रहता है और गांड मरवाने से कोई रिस्क भी नहीं। और तो और, चूत में पहली बार दर्द भी होता है पर गांड में ज्यादा दर्द नहीं होता और मजा पूरा आता है!”

अवनी की बात सुनकर मैं खुश होते हुए बोला, “अच्छा! तो इसीलिए पंजाबी लड़कियाँ गांड मरवाने में ज्यादा रुचि रखती हैं और इसीलिए उनकी गांड बड़ी होती है!”
अवनी बोली, “हाँ चाचू, आप ऐसा समझ सकते हैं!”

मैंने पूछा, “क्या तुम गांड मरवा चुकी हो?”
अवनी बोली, “नहीं चाचू, मैंने आज तक कभी किसी का लण्ड नहीं लिया!”

मैंने पूछा, “क्या कभी उंगली या कुछ और डाला है तुमने अपने छेद में?”
अवनी बोली, “हाँ बहुत बार! जब मैं और श्रेया एक-दूसरे से करती हैं तो वो मेरी चूत मसलती है और मेरी गांड में उंगली भी डालती है!”
मैंने चाय खत्म करते हुए कहा, “गुड! अच्छी बात है!”

फिर मैंने पूछा, “अच्छा एक बात बताओ, जब वो उंगली डालती है तो तुम्हें कैसा लगता है?”
अवनी बोली, “चाचू, बहुत अच्छा लगता है! गुदगुदी-सी होती है। गांड में उंगली डलवाकर चूत मसलवाने में बहुत मजा आता है!”

वो चुलबुले अंदाज में बोली, “सच बताऊँ, श्रेया मुझे बहुत बार बोल चुकी है – तू अपनी चूत नहीं देना चाहती तो गांड मरवा कर मजे ले!”
फिर अवनी मुझसे शिकायत करते हुए बोली, “पर चाचू, आप बहुत गंदे हो! आपने मुझे किसी लायक नहीं छोड़ा!”

मैंने अवनी के बालों में हाथ फेरकर कहा, “अरे मेरी जान, ऐसा कुछ नहीं है! सबसे पहले लण्ड लेने का हक चूत का होता है। जब तक कोई लड़की अपनी चूत में लण्ड डलवाकर अपनी बच्चेदानी और लण्ड के टोपे का मिलन नहीं करवाती, वो कुंवारी रहती है। और जब तक ये मिलन नहीं होता, लड़की का शरीर पूरा खिलता नहीं। एक बार ये मिलन हो जाए तो फिर लण्ड चाहे चूत में लो, गांड में लो या मुँह में लेकर लण्ड का पानी पियो – लड़की को हर चीज में मजा आएगा!”

मैंने अवनी के चेहरे को ध्यान से देखा तो गंदी बातों का असर उसके चेहरे पर साफ दिख रहा था।
उसका चेहरा लाल हो गया था।

न्यूड गर्ल सेक्स टॉक स्टोरी के अगले भाग की प्रतीक्षा करें.
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