आंटी और उनकी दो बेटियों को एक साथ चोदा- 2

चूत चूत चूत 3 पुसी कहानी में मैंने एक दिन में 3 चूत चोदी. उनमें से 2 कुंवारी बहनें थी और तीसरी उन जवान लड़कियों की मम्मी थी.

फ्रेंड्स, मैं आपका दोस्त आलोक एक बार पुनः अपनी सेक्स कहानी के अगले भाग के साथ हाजिर हूँ.
कहानी के पहले भाग
पड़ोस की कुंवारी लड़की की पहली चुदाई
में अब तक आपने पढ़ा था कि मेरी पड़ोसन लड़की अंजलि मेरे साथ सैट हो गई थी और मैं उसके घर में उसकी चुत चाट चुका था.
फिर जब मैंने उससे लंड चूसने के लिए कहा, तो साली नखरे दिखाने लगी कि उसे लंड चूसने में घिन आएगी.
इस बात पर मैं उससे गुस्सा हो गया और वह मुझे मनाने लगी.
किसी तरह से वह मेरे लौड़े को चूसने के लिए राजी हो गई और मेरे लंड को पकड़ कर उससे खेलने लगी, मुझे चूमने लगी.

अब आगे चूत चूत चूत 3 पुसी कहानी:

अब वह नीचे झुकी और मेरे लौड़े को अपनी जीभ की नोक से थोड़ा-थोड़ा चाटने लगी.
मुझे मजा आने लगा तो मैंने रबड़ी का पैकेट उठाया और लंड पर अच्छे से रबड़ी लगा दी.

उसके बाद मैंने कहा- रानी, तुमको रबड़ी तो बहुत पसंद है न … अब मेरे लंड को चूस-चूसकर सारी रबड़ी खा लो!
वह अभी भी हल्के-हल्के से लंड को चूस रही थी.
शायद उसे लंड चाटने में अच्छा नहीं लग रहा था.

मैंने एकदम से उसका सिर पकड़ा और पूरा लंड उसके मुँह में घुसेड़ दिया.
वह अचकचा गई और लंड मुँह से बाहर निकालने की कोशिश करने लगी.

मगर मैंने उसके मुँह को लौड़े पर दबाए रखा तो उसे मीठी रबड़ी के चलते लंड चूसने में अच्छा लगने लगा.
वह लौड़े से सहज हो गई.

मैं भी मस्ती से उसके मुँह की घपाघप चुदाई करने लगा.
मुझे भी काफी मज़ा आने लगा.

मैंने कहा- आह रानी … बहुत मज़ा आ रहा है … तूने मुझे खुश कर दिया!
वह कुछ नहीं बोली.

उसके बाद मैंने उसका सिर से हाथ हटा लिया.

उसने कहा- राजा जी … अब आप अपनी रानी की चुदाई करके उसे खुश कर दो!
मैंने कहा- जो हुकुम रानी जी!

फिर अंजलि बेड पर लेट गई और मैंने उसकी दोनों टांगें फैलाकर अपना लंड चूत पर सैट कर दिया.

यह मेरा भी पहली बार वाला सेक्स था.
इससे पहले मैंने कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया था.

मैंने एक झटका मारा तो मेरा आधा लंड चूत में घुस गया.
अंजलि की चीख निकल गई.

वह दर्द से कराह रही थी- आह निकालो लंड को … दर्द हो रहा है!
मैंने कहा- मेरी रानी … पहली बार सबको दर्द होता है … इसमें घबराने की कोई बात नहीं है!

मैं प्यार से उसके बूब्स चूसता रहा और उसे किस करता रहा.
थोड़ी देर बाद उसका दर्द कम हो गया.

फिर मैंने धीरे-धीरे लंड को आगे-पीछे करना शुरू कर दिया और वह भी आराम से चुदवाने लगी.

कुछ पल बाद जब वह सहज हो गई तो मैंने एक करारा झटका और दे मारा.

इस बार पूरा लंड उसकी चूत में समा गया था और वह फिर से चिल्लाने लगी थी- आह मर गई … मेरी फट गई … आह निकालो इसे जल्दी!

मैंने उसे समझाया और उसे किस किया, उसके बूब्स चूसे.

थोड़ी देर बाद वह सामान्य हो गई और मज़े से चूत चुदवाने लगी.

वह बोल रही थी- चोदो राजा जी अपनी रानी को … आज मेरी प्यास बुझा दो.
अब तो वह अपनी चूत को खूब उठा उठा कर चुदवा रही थी.

इस तरह मैंने उसे 20 मिनट तक चोदा और कहा- मेरा निकलने वाला है … जल्दी बताओ … कहां निकालूँ!
तो वह बोली- अन्दर नहीं … बाहर निकालो!

मैंने लंड को बाहर निकाला और उससे कहा- हिलाओ मेरे लंड को … अपने हाथों से!
वह मेरे लंड के आगे बैठ गई और लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी.

कुछ ही देर में मेरा वीर्य उसके मुँह पर गिर गया.
वह नाराज़ होने लगी- तुमने बताया क्यों नहीं कि निकलने वाला है … मैं लंड का मुँह नीचे कर देती!

मैंने कहा- अरे यार मैं कहने ही वाला था … पर तब तक वीर्य ही निकल गया!

फिर मैंने उससे सॉरी कहकर मना लिया. हम दोनों लोग नहाने के लिए बाथरूम में चले गए.
मैंने उसके शरीर को खूब धोया, उसने मेरे शरीर को.

उसके बाद मैंने अपने कपड़े पहने और घर चला गया.
इस तरह मैं हफ्ते में एक दिन छुट्टी मारता और अंजलि की चूत रबड़ी के साथ मारता.

फिर एक दिन मैंने छुट्टी की … जैसा कि मैं हफ्ते में एक दिन करता हूँ … और बाज़ार चला गया.
उधर से रबड़ी और एक सेक्स की गोली का पत्ता लेकर आ गया.

अंजलि के घर आया और बोला- आज मैं तुम्हें खूब चोदूँगा … आज मैं सेक्स की गोली का पत्ता लेकर आया हूँ!

अंजलि ने कहा- ठीक है … आओ कमरे में चलते हैं.

मैंने रबड़ी और सेक्स की गोली अंजलि को दे दी.
उसने उसे एक साइड रख दिया.

हम दोनों ने एक-दूसरे के कपड़े उतारे और रबड़ी उठाकर अंजलि के बदन पर लगाई और उसके होंठ, बूब्स, चूत चूसने का काम चालू कर दिया.
मुझे उसे चूसते-चूसते दस मिनट हो गए थे. हम दोनों अपने सेक्स में तल्लीन थे.

तभी एक आवाज़ आई- तुम लोग ये क्या कर रहे हो?
मैं और अंजलि चौंक गए.

देखा तो पता चला कि सुमन आज कॉलेज से जल्दी लौट आई.

दरअसल अंजलि के घर की 3 चाबियां हैं.
एक चाबी अंजलि के पास, एक सुमन के पास, एक अंजलि की मम्मी रेखा के पास रहती है.

सुमन हमें ये सब करते हुए 5 मिनट से देख रही थी.
ऐसा उसने बाद में मुझे बताया था.

सुमन बोली- आलोक … तुम क्या कर रहे हो दीदी के साथ … तुम्हें शर्म नहीं आती … और दीदी आपको भी?
अंजलि ने तो जल्दी से कपड़े पहन लिए.

मगर मैंने जैसे ही अपने कपड़े उठाए, वैसे ही सुमन ने छीन लिए.
उसने कहा- मैं आज तुम्हें नंगा घुमाऊंगी सड़क पर … और सबके सामने तुम्हारी बेइज़्ज़ती करूँगी.

मैं डर गया और उसके पैरों में गिर गया.
मैं गिड़गिड़ाने लगा- प्लीज़ मुझे माफ कर दो सुमन जी!

फिर अंजलि ने कहा- सुमन, प्लीज़ हमें माफ कर दो!
तब सुमन ने अंजलि से कहा- दीदी तुम इस कमरे से बाहर जाओ … मैं तब तक इस आलोक को देखती हूँ.

अंजलि दूसरे कमरे में चली गई.

फिर सुमन ने मुझसे कहा- मैं तुझे माफ तो कर दूँगी … पर मैं जो कहूँगी वह करना पड़ेगा!
मैंने कहा- सुमन जी … आप जो कहोगी मैं वह सब करूँगा!

सुमन ने कहा- चल तो आगे आ और मेरे तलवे चाट!
मैं कुत्ते की तरह उसके पैर चाटने लगा.
वह गर्म होने लगी थी.

हम दोनों का सेक्स देख कर वह पहले से चुदासी हुई पड़ी थी इसलिए उसने जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार दिए.

मैं उसे नंगी होते देख कर चौंक गया कि ये क्या कर रही है!
फिर उसने कहा- जैसे तू अंजलि दीदी को चाट रहा था न … वैसे ही मुझे भी चूस और चाट! मैं तुम दोनों को 5 मिनट से देख रही थी कि कैसे तुम अंजलि के बदन पर रबड़ी लगा कर उसको चूस और चाट रहे थे!

मैंने झट से रबड़ी उठाई और अंजलि की तरह सुमन को रबड़ी लगा कर उसे भी चूसने और चाटने लगा.

कुछ मिनट बाद उसकी मम्मी आ गईं और उन्होंने भी मुझे सुमन के साथ देख लिया.
वे बोलीं- ये क्या हो रहा है?

सुमन झट से उठी और अपने कपड़े पहनने लगी.

फिर मैंने जैसे ही अपने कपड़े उठाए, वैसे ही आंटी जी ने कपड़े छीन लिए और कहा- ये जो काम कर रहा था, तो तुझे शर्म नहीं आई … अब तुझे शर्म लग रही है?

आंटी जी ने अंजलि को आवाज़ लगाई तो अंजलि कमरे में आ गई.
आंटी जी ने कहा- देख अंजलि, इन दोनों के काम!

मैं आंटी जी के आगे गिड़गिड़ाने लगा- मुझे माफ कर दो!
पर आंटी जी कह रही थीं- तुम्हें माफ नहीं करूँगी … तुम्हें आज पूरे मोहल्ले में घुमाऊंगी!

वह माफ करने को तैयार नहीं थीं!
फिर आंटी जी ने अंजलि से कहा- किचन में जाओ और मेरे लिए जूस ले आओ!

फिर अंजलि के मन में आइडिया आया और उसने वही किया.
जो सेक्स की गोलियां लेकर मैं आया था, उसने दो गोलियां उठाईं और गोली पीसकर जूस में डालकर मिला दीं.

फिर वह जूस का गिलास आंटी जी के लिए ले आई.
उसने कहा- लो मम्मी जी जूस!

फिर आंटी ने सारा जूस पी लिया और थोड़ा सा छोड़ दिया.
उन्होंने मुझसे कहा- ले … अब ये बाकी का तू पी ले.

मैंने वह जूस पी लिया.
मैंने आंटी से पूछा कि आज आप जल्दी कैसे वापस आ गईं.

उन्होंने जो बताया उसके अनुसार उस दिन बदायूँ शहर में कुछ था, इसलिए उस जिले के सारे स्कूल-कॉलेज जल्दी बंद हो गए थे.

मुझे और अंजलि को इस बात का पता नहीं था और इसलिए आंटी जी, सुमन जल्दी घर आ गए थे और मेरा तमाशा बन गया था.

जूस पीने के 15 मिनट बाद आंटी जी को कुछ होने लगा.

आंटी ने सुमन और अंजलि को बाज़ार से कुछ ऐसा लाने को कहा, जिस काम में कम से कम एक घंटा लगे.
अंजलि मामले को समझ चुकी थी कि मम्मी जी पर अब सेक्स की गोली का असर होने लगा है.

अंजलि और सुमन बाज़ार चली गईं.
तब आंटी जी ने मुझसे कहा- मैं तुझे माफ तो कर दूँगी … पर मैं जो कहूँगी वह सब तुझे करना पड़ेगा!

मैं राज़ी हो गया और मैंने कहा- हां हां आंटी, बोलिए न!
आंटी ने कहा- अगर तू मुझे खुश कर देगा तो मैं तुझे माफ कर दूँगी!

मैं चौंक गया कि आंटी ये क्या कह रही हैं?
मैंने कहा- कैसे खुश करूँ मैं आपको?
तो उन्होंने कहा- मेरी चूत चोद कर!

मैंने तुरंत उनके सारे कपड़े उतारे और अंजलि की तरह उन्हें भी चूसने-चाटने लगा.

दस मिनट बाद सुमन और अंजलि वापस आ गईं और उन दोनों ने हम दोनों को सेक्स करते हुए देख लिया.

अंजलि ने भी यही सोचा था और वह ही हो गया … क्योंकि अंजलि केवल बाज़ार जाने का बहाना बना कर कुछ दूर घूम कर वापस लौट आई थी.
उसे पता था कि उसने मम्मी को सेक्स की गोली खिला दी है और उसका असर जब शुरू हो गया, तब मम्मी ने हम लोगों को बाज़ार ऐसे काम के लिए भेज दिया जिसमें कम से कम एक घंटा लगे.

फिर अंजलि ने आंटी जी को सारी कहानी बताई कि कैसे आलोक ने मुझे चोदा और सुमन के साथ कैसे आलोक ने चुम्मा-चाटी की और उसके शरीर को चूसा.

अंजलि और सुमन ने आंटी से कहा- हमें भी बहुत प्यास लगी है … सेक्स करने की भूख है.

तब आंटी ने कहा- अंजलि … तेरे पापा तो बहुत कम आते हैं और मुझे भी सेक्स करने की बहुत इच्छा होती है! क्यों न हम लोग इस लड़के से अपनी-अपनी प्यास बुझा लें!

अब सब खुल गया था तो मैंने एक-एक करके दोनों बेटियों और मां को इस तरह चोदा कि वे सब मस्त हो गईं.
पहले मैं अंजलि को चूस कर और चाटकर चोदने लगता था.

उसी दिन मैंने सुमन की सील तोड़ी थी.
मेरे पास चूत चूत चूत 3 पुसी थी.
उसके बाद दोनों बेटियां और मां मेरे लंड की दीवानी हो गईं और हफ्ते में एक दिन दो बेटियां और मां को एक साथ चोदता था.

अब वे सब लोग दिल्ली चली गई हैं.
मुझे जब उनकी बहुत याद आती है तो बस मुट्ठ मार लेता हूँ!

आप लोगों को मेरी सेक्स कहानी कैसी लगी?
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