शादीशुदा साली की कुंवारी चुत चोदी

साली Xxx चुदाई कहानी में मेरी साली की शादी के बाद से वह खुश नहीं थी. उसको औलाद भी नहीं हुई. उसका पति नपुंसक था. एक रात वह मेरे लंड के नीचे कैसे आई?

यूँ तो जीजा-साली के रिश्ते में कोई पर्दा कम ही होता है, पर मेरा और मेरी साली का रिश्ता बिल्कुल कैजुअल था.
बस मिलते तो हाय-हैलो, उसकी शादी मेरी शादी के एक साल बाद ही हो गई थी.

बाहर से देखने में सब कुछ परफेक्ट लगता था.
अच्छा पति, पैसेवाली ससुराल … सबको लगता था सब बढ़िया चल रहा है.

मैं भी अपनी निजी ज़िंदगी और अपनी बीवी की चुदाई में मशगूल रहता था.
हां, बीवी को चुदाई में ज्यादा इंटरेस्ट नहीं था.

जब मैं ज़बरदस्ती करता, तब चुदने के लिए मानती, वरना महीने के 18 दिन बहाना और 5 दिन मासिक के निकलने में दिल रूआंसा हो जाता था.

खैर … जैसे-तैसे मैं अपनी बुझी हुई सेक्स लाइफ जी रहा था.

फिर करीब एक साल पहले पता चला कि मेरी साली अभी तक कुंवारी ही है … यही वजह थी कि उसका कोई बच्चा नहीं हुआ था.
देखने में कभी लगा ही नहीं था कि इसके पति ने लंड पेला ही नहीं है.
चूंकि मेरी साली शादी-शुदा थी इसलिए मैंने कभी उसके बारे में गलत नहीं सोचा था.

पर जिस दिन से मुझे ये सच पता चला … बस उसके बाद से मुझे दिन-रात अपने लंड के नीचे रगड़ती हुई सिर्फ मेरी साली ही दिखाई देने लगी थी.

मैं कोई 10 इंच लौड़े वाला हीरो नहीं हूँ.
मेरा लंड करीब 7 इंच लंबा और 2.5-3 इंच मोटा है.

मुझे चूत चाटने का जबरदस्त शौक है और चूत के साथ गांड भी गजब की चाटना पसंद करता हूँ.

चूत और गांड दोनों को दबा-दबाकर चोदना भी बहुत अच्छा लगता है.
मेरी साली उम्र करीब 30 की, मैं 36 का.
उसका फिगर 32-28-34 का है. जबरदस्त सुंदर और देखने में एकदम कांटा माल.

साली Xxx चुदाई कहानी अभी कुछ दिन पहले की है.
उसकी शादी के करीब 3 साल बाद मेरा उससे अकेले में मिलना हुआ.
वह हमारे शहर आई थी और उसका पति भी साथ था.

दिन भर इधर-उधर की बातें हुईं.
शाम को मैं और उसका पति पीने बैठ गए.

मैंने उसे एक तगड़ा वाला पटियाला पैग बनाकर दिया और अपना भी वही बनाया.

साठ साठ एमएल के दो दो पैग खींचने के बाद मैंने अपनी साली को भी इनवाइट किया.
मेरी बीवी अपने बेटे को लेकर सो चुकी थी.

साली ने सिर्फ दो छोटे 30 एमएल वाले पैग लिए.
तीन पैग के बाद तो उसके पति की हालत एकदम टल्ली वाली हो गई थी.

हालांकि मुझे भी दूसरे पैग का नशा चढ़ने लगा था.
मेरी साली भी धीरे-धीरे मूड में आने लगी थी.

मौका देखकर मैंने पहले उसके बेहोश पति को बेड पर लिटाया.
फिर अपनी साली को हल्के से हिलाकर पूछा- सब ठीक चल रहा है ना?

वह अचानक रोने लगी और मेरे सीने से लिपट गई- जीजाजी … मैं मां नहीं बन पा रही … सब मुझसे पूछते हैं और मेरे पास कोई जवाब नहीं है!

मैंने कारण पूछा तो रोती हुई बोली- इनका लंड सिर्फ 3 इंच का ही है और खड़ा ही नहीं होता है … जब कभी मैं चूस कर खड़ा भी करूँ तो इनसे कुछ होता ही नहीं है … चढ़ कर दो तीन बार पुल्ल पुल्ल करके बह जाते हैं.

यह सब बोलती हुई वह मेरे और करीब आ गई.
हमारी सांसों की गर्माहट बढ़ने लगी.

मैंने धीरे से उसकी पीठ पर हाथ फेरा … तो वह मेरे साथ पूरी तरह से लिपट गई.
मेरा लंड हरकत में आ गया और नज़रें बदल गईं.

मैंने उसकी आंखों में देखा … उसे ज्यादा होश नहीं था.
उस समय रात के 12:30 बजे का समय हो रहा था.

मैंने उसे उसी बेड पर लिटाया, जहां उसका पति बेहोश पड़ा था.
कमरे का दरवाजा बंद किया, लाइट डिम कर दी.

बिस्तर से ओढ़ने वाली चादर आदि को एक तरफ खिसकाया और साली के बगल में लेट गया.

मैंने धीरे से उसका पेट सहलाया, तो उसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई.
फिर मैंने उसे अपनी तरफ खींचकर घुमाया और अपनी टांगों से दबाया.

वह मेरे साथ चिपक गई.

मैंने उसके लोअर में हाथ डाल कर नीचे घुसाया और उसकी मांसल गांड सहलाई.

वह मस्त हो गई और मुझे देखकर बस आंखों से इशारा करने लगी- रुकना मत जीजा जी!
उसकी आंखों में साफ दिख रहा था कि आज वह अपना कुंवारापन मुझे सौंपने को बेताब है.

मैंने हाथ उसकी पैंटी में घुसाया, गांड को ज़ोर से दबाया और पीछे से गांड की तरफ से चूत तक हाथ लाकर छेद को टटोला.
चुत पर बाल थे … न बहुत बड़े, न बहुत छोटे … बस इतने कि चूत चाटते वक्त मुँह में आएं.

मैंने अपनी तर्जनी उसकी चूत में सरका दी तो वह कराह उठी.

नशा हम दोनों को दोनों चीजों का था.
दारू का नशा और उससे ज्यादा चुदाई का नशा.

चुत में उंगली लेते ही वह चुदने को भूखी हो उठी थी.

मैंने हाथ बाहर निकाला और फुर्ती से अपने सारे कपड़े उतार फेंके.
उसके पति को देखा तो साला बेहोश पड़ा था.

फिर मैंने साली का लोअर नीचे खिसकाने को हाथ लगाया तो पैंटी की इलास्टिक में चला गया, मैंने दोनों को एक साथ खींचकर टांगों से बाहर निकाल कर ज़मीन पर फेंक दिए.

उसने जल्दी से अपनी पोजीशन चुदाई की … तो मैंने खुद अपने हाथों से उसकी टांगें खींचकर चौड़ी कर दीं और पूरे जोश में उसकी चूत में अपना मुँह घुसेड़ दिया.

मेरे मुँह को ऐसा मक्खन माल चूसने चाटने को मिला तो लगा कि साली की बुर को दांतों से काट-काटकर खा ही जाऊं.
उसकी चूत की वह हल्की-सी पेशाब वाली गंध … मुझे कामुक कर रही थी.

सारा दिन पेशाब करके जो गंध आती है, चाहे कितना धो लो … वह नशीली गंध मेरे नथुनों में घुस रही थी.
मैंने जीभ से चूत की पंखुड़ियां अलग कीं और कुत्ते की तरह ‘सप्लर्र-सप्लर्र’ चाटने लगा.

कितना गजब का अनुभव था मुझे … रसीली चूत सामने थी … और मैं भूखे शेर की तरह उसे खाए जा रहा था.

इसी बीच अपनी तर्जनी उसकी गांड में ठूँस दी.

गांड में उंगली के लिए वह अभी तैयार नहीं थी तो समझ ही नहीं पाई कि यह क्या हुआ … पर मैं चुत चाटता रहा.
पूरे 20-25 मिनट चाटने के बाद मैंने उसे पलटा और उसके सारे कपड़े उतार दिए.

अब मेरे सामने एकदम मादरजात नंगी साली चुदने के लिए रेडी पड़ी थी.

उसका संगमरमर सा गोरा बदन … मस्त मम्मे पतली कमर … आह साली मस्त लौंडिया के जैसी चुत पसारे हुई पड़ी थी.

मैंने दारू की बोतल उठाई और थोड़ी सी उसकी गांड पर डाल दी.
वह एकदम से चिहुँक उठी.

तभी मैं अपनी जीभ से उसकी गांड को चाटने लगा और छेद को जीभ की नोक से कुरेदने लगा.

वह मस्त हो गई और उसने अपनी गांड फैला दी.
मैं अपने दोनों हाथों से उसके 34 साइज़ के चूतड़ फैलाए जा रहा था ताकि गांड का छेद और ज्यादा खुल जाए.

कुछ देर चाटने के बाद मैंने शराब का घूँट उसकी गांड के छेद में डाला और जी भरकर चाटने में लग गया.
वह आह आह करती हुई मुझसे छेद चुसवा रही थी.

इसके बाद मैंने उसकी पीठ पर दारू डाली और कमनीय काया वाली इस रांड को जीभ से खूब चाटा, दांतों से काटा और मस्ती से चूमा, कान के पीछे, गर्दन में … हर जगह कुत्ते की तरह चाटता रहा.

फिर मैंने उसे घुमाया.
उसके चूचे मेरी आंखों के सामने आ गए.

उसके 32 साइज़ के उरोज एकदम सख्त और नुकीले मुझे ललचा रहे थे.
मैं हैरान था कि मेरी नज़र अब तक उसके इन रसीले मम्मों पर क्यों नहीं पड़ी थी!

मैंने उसकी चूचियों की रगड़ाई शुरू की … चूचियों को चूस चूस कर मसल मसल कर और रगड़-रगड़कर लाल कर दिया.
साथ ही उसके दोनों मम्मों को काटना और उसके चूचुकों को होंठों में दबा कर उसका दूध पीना शुरू किया.

बीच-बीच में मैं अपने एक हाथ से उसकी चूत को भी रगड़ता रहा और उंगलियां उसकी चूत में ठूँसने लगा.
वह लगातार रस छोड़ रही थी और चुदास के चलते कामुक आवाजें निकाल रही थी.

पूरे 45 मिनट के फोरप्ले के बाद वह गाली देने लगी- अब चोद भी दे मादरचोद!
मैं समझ गया कि अब साली Xxx चुदाई में और देर करना ठीक नहीं है. मैं उसे चोदने के लिए उठ गया.

मैंने एक तकिया उसकी कमर के नीचे लगाया और टांगें चौड़ी कर दीं.
मेरा लंड फटने को तैयार था.

पहले तो मैंने सोचा कि इससे लौड़े को चुसवाऊं, पर लगा आज तक शायद इसने इतना बड़ा लंड कभी नहीं चूसा होगा.
सारा खेल बिगड़ न जाए, इसलिए सोचा कि पहले इसकी चुत को चोद लूँ, दूसरे राउंड में बाकी का काम देखूँगा.

मैंने लंड पर थूक लगाया, उसकी चूत को फिर से चाट कर चिकनी की और सुपारा उसकी 2 इंच के चिकनी चूत में फँसा दिया.

लौड़े का हल्का दबाव चुत पर डाला तो उससे बर्दाश्त नहीं हुआ.
पति के उठने का डर था, इसलिए मैंने उसके होंठ अपने होंठों से कसकर दबाए और एक ज़ोरदार झटका मारकर पूरा लंड उसकी चूत में पेल दिया.

उसकी तो जैसे गांड ही फट गई, आंखें बाहर आने को हुईं, चीख गले में घुट गई.
मुँह बंद था तो आवाज तो नहीं निकली, लेकिन उसके आंसू बह निकले.

फिर धीरे-धीरे सब नॉर्मल हुआ.
चुदाई की रफ्तार तेज़ हो गई.

कुछ 10-12 मिनट की ज़ोरदार रगड़ाई के बाद मैंने उसकी चूत को अपने गाढ़े वीर्य से भर दिया.

अब वह कुंवारी नहीं रही.
पहली चुदाई के बाद बहुत थक भी गई थी.

मैं उसे अपनी गोदी में टांग कर बाथरूम ले गया, उधर शॉवर के नीचे खड़ी करके उसकी चुत गांड को अच्छे से साफ किया.
मैंने उसे भी नहलाया और खुद भी नहा लिया.

दारू का नशा कुछ कम हो गया था और उसकी चुत में दर्द बढ़ गया था.

वह तो दर्द से निर्जीव सी हो गई थी.
मैं उसे वापस बेड पर लाया और एक पैग बना कर उसे यह कह कर पिला दिया कि दर्द कम हो जाएगा, पी लो!

उसने पैग पी लिया, मैंने उसे बिना ब्रा के सारे कपड़े पहना दिए.
यह सब हो जाने के बाद मैंने घड़ी देखी तो उसमें रात के 2 बज रहे थे.

मैं उठ कर अपने कपड़े पहन कर बाहर आया और सिगरेट सुलगाने की सोचने लगा.
फिर पहले बीवी के कमरे में जाकर उसे देखा तो सब ठीक था.

मैं बालकनी में आया और सिगरेट फूँक कर फिर से साली के कमरे में अन्दर आ गया.
साली को देखा तो वह मुस्कुरा रही थी.

मुझे आया देख कर उसने दारू की बोतल उठा कर दिखाई.

मैंने बोतल को मुँह से लगाई और नीट ही गटक कर साली के मुँह से मुँह लगा कर स्वाद ठीक करने लगा.

वह भी फुसफुसा दी- एक बार और करो न जीजा जी!
मैंने कहा- हां क्यों नहीं मेरी जान … मैं तो एक बार क्या … दस बार चोदने के लिए राजी हूँ!

फिर वह बोली- जीजा जी सॉरी!
मैंने कहा- सॉरी किस बात की!

वह बोली- पहली बार में आपको गाली दे दी थी न … उसके लिए सॉरी!
मैंने कहा- साली कुतिया … तेरी गाली ने ही तो लौड़े को मजा दे दिया था!
वह हंस दी.

मैं एक और राउंड के लिए तैयार हो गया था.
इस बार मैंने उससे लौड़े की चुसाई और गांड की चुदाई का भी सोच लिया था.

वह सब कैसे हुआ, अगली बार लिखूँगा.
आपको जीजा साली की चुदाई वाली यह साली Xxx चुदाई कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
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