राजमिस्त्री ने महिला मजदूर की चूत गांड चोदी

लेबर Xxx कहानी में एक हरामी मिस्त्री अपनी लेबर में सुंदर जवान लड़कियों को शामिल्कातासा था और रोज किसी एक लड़की को चोदता था. ऐसी ही एक जवान भाभी लंच ब्रेक में चुदी.

दोस्तो, मैं आपका दोस्त विशु एक और सेक्स कहानी लेकर हाजिर हुआ हूँ.

ये लेबर Xxx कहानी एक हरामी किस्म के राजमिस्त्री की है.

यह न केवल एक सेक्स कहानी है बल्कि एक सच्चाई भी है कि किस तरह से पुरुष मिस्त्री और स्त्री लेबर के बीच सेक्स संबंध बन जाता है.

शुरुआत में तो स्त्री लेबर को कुछ दिक्कत हो सकती है लेकिन बाद में वह खुद ही गैर मर्द के साथ सेक्स संबंध बनाने के लिए आतुर हो जाती है.

इसके कई कारण हो सकते हैं.
जैसे कि पति के द्वारा अच्छे से संभोग का सुख न देना, धन के लालच से सेक्स का सुख मिल जाना … कभी कभी काम की जरूरत के चलते स्त्रियां खुद ही अपने साथ वाले मिस्त्री सुपरवाइजर या मैनेजर के नीचे बिछ कर अपना उल्लू सीधा कर लेती हैं.

आज की सेक्स कहानी इसी तरह के सेक्स संबंधों को लेकर है.
इस कहानी का मुख्य नायक एक राजमिस्त्री है, जो रेती-सीमेंट से मकान की दीवारों का प्लास्टर करता है.

इस मिस्त्री का नाम रंग अण्णा है, पर सब उसे रंगना बुलाते हैं.

वह पेशे से मकान निर्माण वाला एक राजमिस्त्री है.

रंगना एक ठेकेदार के यहां काम करता था.
उसकी उम्र लगभग 50 साल की है लेकिन वह बड़ा ही बलिष्ठ है और उसे रोजाना नई चूत चोदने की आदत थी.

रंगना अकेला ही रहता है क्योंकि वह बचपन में ही घर से भाग गया था.

उसकी जिंदगी की शुरुआत कुछ ऐसी हुई थी जिससे उसे सेक्स की आदत लग गई थी.

दरअसल हुआ यह था कि जब वह बचपन में घर से भागा था तो उसने कुछ दिन रोडवेज़ के एक ट्रक पर क्लीनर का काम किया.

उसने वहां गाड़ी चलानी सीख ली.
फिर एक दिन उसके ड्राइवर ने न/शे की हालत में उसकी गांड चोद दी थी तो उसने अपनी तनख्वाह लेकर वहां से काम छोड़ दिया था.

वह उधर से मुंबई आ गया और उधर उसने एक ठेकेदार के पास मिस्त्री के नीचे काम करना शुरू कर दिया.
रंगना होशियार था तो वह उधर जल्दी ही काम सीख गया.

कुछ दिनों बाद वह खुद भी एक मिस्त्री का काम करने लगा.
अब वह काफी होशियार हो गया था तो कैसा भी काम मिलता, वह उसे जल्दी ही कर लेता था.

अब उस इलाके के होशियार मिस्त्री लोगों में उसका नाम चलने लगा था.
ठेकेदार भी उसे सबसे पहले काम देने लगे थे और वह जिस भी लेबर को अपने साथ काम पर रखने के लिए ठेकेदार से सिफारिश करता, उसे तुरंत काम मिल जाता.

क्योंकि ठेकेदार का काम ऐसा था कि वह मिस्त्री को अपने साथ काम करने वाले बिगारी और बाई को चुनने की छूट दे देता था.
बिगारी और बाई का मतलब मजदूर पुरुष और महिला से है.

इसमें होता यह था कि मिस्त्री ने जिसे चुना, उसको काम मिल जाता था, बाकी सारे दिन बिना काम के रह जाते थे.
रंगना के साथ भी ऐसा ही होता था.

उसके साथ कई बार ऐसा भी होता था कि जो बिगारी या बाई काम पर जाने से मना करता, आगे से रंगना उसे कभी भी अपनी साइट पर काम नहीं करने देता.
इसलिए उसके पास काम के लिए बिगारी और बाई की खासी संख्या थी.

वह बाई या महिला लेबर की खूबसूरती को देख कर अपने साथ काम पर लगाता था.

धीरे धीरे रंगना को यह आदत पड़ गई थी कि उसके साथ जो बाई काम करती थी, उसको वह दुपहर में लंच टाइम में ही चोद लेता था.
यदि बाई ने चुदने से ना कहा तो वह उसे आगे से कभी भी काम पर नहीं लेता था.
इसका मतलब यह भी होता था कि उस बाई को उस इलाके में काफी दिनों तक काम नहीं मिल सकता था.

ऐसे ही एक दिन रंगना को 10वें माले पर काम करना था.
उधर उसे बाथरूम में प्लास्टर करने का काम था.

वह साइट पर आया, तो उसे एक नई बाई दिखी जो काम के इंतज़ार में बैठी थी.

रंगना के आते ही सब बाइयां खड़ी हो गईं.
रंगना ने सबको देखा, उनमें उसे एक नया चेहरा दिखा.
वह कम उम्र की एक देसी लौंडिया थी.

रंगना ने उसे करीब बुलाया और उसका नाम पूछा.
उस लड़की ने अपना नाम निनम्मा बताया.

रंगना ने उससे कहा- तुम चलो!

फिर उसे एक बिगारी यानि पुरुष लेबर को भी लेना था तो निनम्मा बोली- मेरे पति को भी ले लो ना!
रंगना बोला- ठीक है बुला ले उसे!

अब वे दोनों मियां-बीवी साथ में मजदूरी का काम करने रेडी हो गए थे.
निनम्मा ने अपने पति को बुलाया.

रंगना ने उन दोनों को 10 वें माले पर जाकर माल मिक्स करने का बोल दिया.

कुछ देर बाद वह भी वहां पहुंच गया.
निनम्मा का पति बाहर प्लास्टर का माल सीमेंट-रेती मिक्स करने लगा था और निनम्मा माल लेकर रंगना को तगाड़ी यानि तसला भर कर देने का काम करने लगी.

निनम्मा वहीं रंगना के पास खड़ी रहती.

काम दुपहर तक चला.
इस बीच रंगना ने निनम्मा को काम करते-करते छुआ तो निनम्मा ने हंस कर हरी झंडी दे दी.

ये देख कर रंगना का मूड बन गया.
जब खाना खाने का समय होने वाला था तो रोज़ की तरह उसने निनम्मा के पति से कहा कि तू नीचे जा और बाकी बिगारी के साथ काम कर, अभी इतना माल काफी है, काम हो जाएगा.

वह बिचारा वहां से नीचे जाकर काम में लग गया.
यहां रंगना ने काम खत्म किया और अपनी जेब से दारू का पौवा निकाल कर गटक लिया.

ये रंगना का पसंदीदा समय था तो वह मूड बना कर अपनी जुगाड़ को चोद देता था.
फिर आज तो एक देसी माल चुदने को राजी थी.

दारू पीने के बाद रंगना ने एक बीड़ी सुलगाई और निनम्मा को अपने पास बुलाया.

निनम्मा जैसे ही उसके पास आई तो उसने उसको अपनी बांहों में पकड़ लिया.
निनम्मा ने भी कोई आना-कानी नहीं की.
उसने पहले गैर मर्द के साथ ये सेक्स वाला काम किया था तो उसे मालूम था कि उसका मिस्त्री उसको चोदकर ही रहेगा.

रंगना ने उसे किस करना शुरू किया.
वह निनम्मा के पिछवाड़े पर हाथ फेरने लगा.
बीच-बीच में वह उसकी चूची को भी दबा देता.

निनम्मा एक डीजल माल थी, मतलब वह ऊंचाई में थोड़ी कम थी और दिखने में कयामत थी.

वह भी अब तक कई मिस्त्रियों का पानी अपने अन्दर गिरवा चुकी थी.
इसलिए निनम्मा भी अपने पैर ऊपर उठा कर रंगना का साथ दे रही थी.

रंगना ने वहीं पड़ी एक काली त्रिपाल पर उसे लिटा दिया और अपनी पैंट खोल कर निनम्मा के ऊपर चढ़ गया.
निनम्मा ने खुद अपने हाथ से अपनी साड़ी ऊपर कर ली और रंगना ने निनम्मा के पैरों को फैला कर अलग कर दिया.

फिर रंगना ने अपना तनतनाता हुआ लौड़ा हाथ से पकड़ कर निनम्मा की चूत पर टिकाया और उसको चूत की फांक में घिसने लगा.
निनम्मा भी उस हरकत से कामातुर हो गई और उसने रंगना को अपने सीने पर खींच लिया.

रंगना ने एक हाथ से उसकी चूत की दोनों फाँकों को अलग किया और अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर फँसा दिया.
फिर रंगना ने निनम्मा की कमर पकड़ कर कमर से झटका देते हुए उसको अपने बदन पर खींच लिया.

रंगना के इस प्रहार से निनम्मा को एक झटका लगा और उसी पल रंगना का पूरा लंड एक झटके में अन्दर घुस गया.

रंगना का लंड इतना तगड़ा और लंबा था कि निनम्मा की चीख निकल गई.
उसने रंगना के बदन में अपने नाखून गाड़ दिए.

रंगना को तकलीफ हुई, पर उसने सह लिया.
यहां निनम्मा की हालत खराब हो गई थी.

रंगना का औज़ार उसके पति से डबल बड़ा और काफी मोटा था.

उसने इतने मिस्त्रियों से अपनी चूत चुदवाई थी लेकिन अभी तक इतना बड़ा लंड अपनी चूत में नहीं लिया था.

शायद रंगना के बड़े और मोटे लौड़े के कारण औरतें रंगना के पास काम करने के लिए उतावली रहती थीं.

पर पहली बार में इतने बड़े लौड़े से चुदने से निनम्मा की हालत खराब हो गई थी.
रंगना का नुकीला तीर उसकी चूत की जड़ में अन्दर तक घुस चुका था.

अब तो निनम्मा को अपने अन्दर रंगना के लौड़े की चुभन को सहना ही था.
ये सोचकर निनम्मा चुदाई में डूबती गई थी कि कुछ देर में सब सही हो जाएगा.

वह सही सोच रही थी क्योंकि लंड कितना भी बड़ा क्यों न हो, आखिर में चूत उसके अनुसार अपने आप को फैला ही लेती है.

शुरू में तो रंगना के औज़ार ने निनम्मा की चूत में हलचल मचा दी थी.
पर बाद में निनम्मा को मजा आने लगा था.

रंगना ने निनम्मा को अपनी बांहों में उठाया और उसे धकापेल चोदने लगा.
निनम्मा रंगना जैसे सांड के सामने एक बकरी की तरह लग रही थी.

वह रंगना की बांहों में जकड़ी हुई पूरी हवा में थी और एक मजबूत मर्द के हाथों में झूल रही थी.

ये आसन भी निनम्मा के लिए नया था.
इस आसन की वजह से रंगना का लंड निनम्मा की बच्चेदानी को ठोकर मार रहा था.
उसकी चूत की दीवारें बहुत ज्यादा घिस रही थीं.

रंगना के मूसल लौड़े से निनम्मा की सारी नसें हिल गई थीं.

उसे भारी दर्द हो रहा था, पर रंगना के गले में झूलती हुई अपनी आंखों में मीठे दर्द के आंसू लिए निनम्मा रंगना के लंड का हर वार अपनी चूत में झेल रही थी.

हर धक्के पर निनम्मा ‘आह हम्म आह’ की मादक आवाज़ निकाल रही थी.
धक्कों पर धक्के लग रहे थे.

वे दोनों पसीने से लथपथ हो गए थे.

ये लंड-चूत का खेल रंगना बड़ी उस्तादी से खेल रहा था.
कुछ देर बाद निनम्मा की चूत ने अपना रस छोड़ा तो रंगना के लंड को … और निनम्मा की चूत को इससे आसानी हो गई. चूत में चिकनाई बढ़ गई थी … तो लंड सटासट चलने लगा था.

रंगना अब खड़े-खड़े ही निनम्मा को उछाल-उछाल कर चोद रहा था.
निनम्मा की टांगें अब दर्द करने लगी थीं.
रंगना ने उन्हें अपने हाथों में पकड़ रखा था.

कुछ देर बाद रंगना ने आसन बदला.
उसने निनम्मा को नीचे उतार कर बिठा दिया और उसके मुँह के सामने लंड कर दिया.

निनम्मा समझ गई कि रंगना क्या चाहता है.
पर लंड पर लगे अपने वीर्य और चिकनाहट को देख उसे घिन आई.

उसने रंगना को लंड मुँह में लेने से मना कर दिया.

फिर रंगना ने उसे उठाकर खड़ी कर दिया और अब उसे पलटा कर थोड़ा आगे को झुका दिया.

रंगना खुद नीचे बैठ गया और निनम्मा की चूत और गांड के छेद को चाटने लगा.
उसके इस कारनामे से निनम्मा के बदन में करंट सा दौड़ गया.

वह उत्तेजना से सिहर उठी.
वह ‘इस्स्स आह्ह्ह’ करने लगी.

फिर वह अपना एक हाथ पीछे ले जाकर रंगना के सर को अपनी गांड पर दबाने लगी.

निनम्मा की चूत ने फिर से पानी छोड़ना चालू कर दिया.
उसकी गांड का छेद भी रंगना की ज़ुबान के थूक से गीला हो गया था.

रंगना उठकर खड़ा हो गया.
उसने निनम्मा को और थोड़ा आगे झुकाया. अपने लंड को अपने ही थूक से सान दिया.

फिर लंड को उसकी गांड के छेद पर रखकर उसकी कमर पकड़ ली.

गांड के छेद पर लंड का स्पर्श पाकर निनम्मा मुड़ी ही थी कि रंगना ने एक तेज़ धक्का मारा.
एक ही शॉट में रंगना का आधे से ज़्यादा लंड निनम्मा की गांड में घुस चुका था. निनम्मा को बहुत दर्द हुआ.

वह ज़ोर से चीखी- अम्माह्ह्ह बहुत दर्द हो रहा है … मुझे छोड़ दो … आह निकालो अपना सामान … मैं मर गई … आह सामान है या गधे का लंड? गांड में क्यों डाला मिस्त्री?

रंगना ने कुछ न सुनते हुए एक और तगड़े धक्के में अपना पूरा लंड निनम्मा के पिछवाड़े में घुसेड़ दिया.
‘आई अइओ … साला हरामी … निकाल ना!’
निनम्मा छटपटाने लगी.

वह रंगना की पकड़ से निकल कर भागने की कोशिश कर रही थी पर रंगना की पकड़ से आज तक कोई नहीं निकल सका था.

रंगना के ऊपर दारू का नशा जोर मारने लगा था.
उसने निनम्मा को उसी हालत में चोदना चालू कर दिया.

बीच-बीच में रंगना अपने लंड पर थूक देता, उससे निनम्मा की गांड के रास्ते में चिकनाई बनी रहती.

कुछ देर बाद निनम्मा की गांड ने रंगना के लंड को एडजस्ट कर लिया.
अब निनम्मा को भी अपनी गांड चुदवाने में मज़ा आने लगा था.

वह भी पीछे हो-होकर गांड चुदवाने लगी.

रंगना थोड़ा उस पर और झुक गया और उसकी चूत को अपने हाथों से कुरेदने लगा.
यहां लंड गांड में घुसता, वहां निनम्मा की चूत में रंगना उंगली करने लगता.

निनम्मा उसकी इस हरकत से पागल हुई जा रही थी.

कुछ देर के बाद उंगली की करामात रंग लाई.
निनम्मा झड़ने को तैयार हो गई. यहां रंगना का भी लंड गांड के अन्दर फूलने लगा और कुछ ही समय में दोनों झड़ने लगे.
रंगना ने लंड की धार से उसकी गांड भर दी.

लंड की आखिरी बूँद गिरने तक रंगना का लंड निनम्मा की गांड से बाहर नहीं आया.
जब लौड़े से रस खाली हो गया तो वह स्वतः ही गांड से बाहर आ गया.

रंगना ने अपनी पानी पीने की बॉटल में से पानी लेकर लंड को साफ किया.
निनम्मा ने अपने पास के एक कपड़े से अपनी चूत और गांड साफ की.

उसकी गांड अब दर्द कर रही थी.
उससे ठीक से चला नहीं जा रहा था.

रंगना खाना खाने के लिए नीचे उतरा.
तो निनम्मा भी उसके पीछे नीचे उतरने लगी.

पर 9 वें माले पर लंगड़ाती हुई चलने से उसे ज़ोरों की सुसु लग आई थी.
उसने सोचा कि यहीं बाथरूम में जगह देखकर मूत लेती हूँ.

वह जैसे ही अन्दर घुसी, वहां दूसरा मिस्त्री उसकी पति की बहन को नीचे लिटा कर चोद रहा था.
वे दोनों चुदाई में मस्त थे.

उसकी ननद ही उसे यहां काम पर लाई थी.
निनम्मा ने थोड़ी देर खड़ी होकर दोनों की लेबर Xxx चुदाई का मज़ा लिया.

पर जब उसकी ननद ने उसे देखा तो वह वहां से निकल गई.
हालांकि उसकी ननद चुदाई पूरी करवाने के बाद ही वहां से निकल पाई थी.

जब ननद बाहर निकली तो निनम्मा खड़ी थी और उसकी राह देख रही थी.
उसकी ननद शर्माती हुई करीब आई.

निनम्मा ने उसे देखा तो वह बोली- क्या भाभी आप भी?
निनम्मा हंस दी.

फिर जब वे दोनों चलने लगीं तो अपनी भाभी को लंगड़ाती देख निनम्मा की ननद बोली- भाभी क्या हुआ?

तो निनम्मा डरती हुई बोली- पैर में मोच आ गई है!

तो उसकी ननद बोली- भाभी मुझे मालूम है ये मोच कैसे आती है. मैंने भी काम किया है रंगना के हाथ के नीचे. मुँआ सब जगह चोदता है और पिछवाड़े का होल तो सुजा ही देता है. मैं भी एक हफ्ते तक लंगड़ाती रही थी. पर एक हफ्ता उसने मुझे ही साथ में रखा. अभी तुम्हारी बारी शुरू हुई है, पूरे हफ्ते लँगड़ाने के लिए तैयार हो जाओ!

वे दोनों हंसने लगीं.

बस फिर क्या था. निनम्मा एक हफ्ते तक रोज़ चुदवाती रही.
दुपहर में रंगना चोदता और रात को झोपड़े में उसका पति उसे चोदता था.

ये थी रंगना मिस्त्री की रंगीनी वाली लेबर Xxx कहानी. आपको मजा आया होगा, प्लीज बताएं.

आपका विशु राजे
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लेखक की पिछली कहानी थी: चुदाई का शौक या लत