चुदक्कड़ लड़की गर्लफ्रेंड बनकर होटल में चुदी

चालू गर्ल हिंदीपोर्न कहानी में मेरे दोस्त ने मुझे एक लड़की को ऑनलाइन मिलवाया. मैं उससे सेक्स के लिए कहने लगा. मैं उसे मिला और होटल में ले गया. वह एकदम बिंदास लड़की की तरह चुदी.

दोस्तो, मेरा नाम गुड्डू है. मैं उत्तर प्रदेश के मेरठ का रहने वाला हूँ.
मेरी उम्र 19 साल है.
मैं अभी ग्रेजुएशन का स्टूडेंट हूँ और अन्तर्वासना की इस मोहक हिंदीपोर्न कहानी साइट का नियमित पाठक भी हूँ.

यह मेरी पहली सेक्स कहानी है. मुझसे अगर कुछ गलती हो जाए तो माफ कर दीजिएगा.
ये चालू गर्ल हिंदीपोर्न कहानी आज से करीब 2 साल पहले की है.

मुझे सेक्स के बारे में बहुत पहले से पता है और मैं अपने लिए कोई लड़की ढूंढ रहा था.
मेरे लंड की लंबाई साढ़े छह इंच है और इसकी मोटाई दो इंच है.

सर्दियों में मेरे एक दोस्त ने मुझे खुशी नाम की लड़की की इंस्टाग्राम आईडी दी और हमारी दोस्ती हो गई.
वह गाजियाबाद की रहने वाली थी.

फिर कुछ दिनों बाद हम नॉर्मल बातें करते-करते कब सेक्स की बातें करने लगे, हमें पता ही नहीं चला.

कहानी शुरू करने से पहले मैं आपको खुशी के बारे में बता देता हूँ.
खुशी एक कॉलेज जाने वाली बहुत ही सेक्सी लड़की है.
सच बताऊं तो उसे देखते ही सबका लंड खड़ा हो जाता है.

वह मुझसे 2 साल बड़ी है और उसकी भी सेक्स में काफ़ी रुचि है, यह मुझे जैसे ही पता चला.
मेरा लंड बल्लियों उछलने लगा.

खुशी के चूचों का साइज 34 इंच है, उसकी कमर 32 की और उसकी 36 इंछ की गांड बिल्कुल किसी फुटबाल की तरह गोल बाहर को निकली हुई है.

सड़क छाप लौंडों की भाषा में कहूँ तो वह एकदम गदराया हुआ माल है.

खुशी और मेरी दोस्ती, एक कॉमन फ्रेंड के जरिए हुई थी.
हम दोनों पहले दोस्त थे, फिर रिलेशनशिप में आए और रिलेशनशिप में आते ही हमारी सेक्स की बातें शुरू हो गईं.
वैसे तो मेरा घर गाजियाबाद से 40 किमी दूर है, पर हमारे रिलेशन में आते ही हमारा रोजाना मिलना शुरू हो गया.

पहले फोन सेक्स हुआ और हमारी सेक्स करने की तमन्ना बहुत बढ़ गई.

जब हम पहली बार मिले तो उसे देखते ही मैं पानी-पानी हो गया.
वह थी ही एकदम बला सी खूबसूरत और भरे-पूरे जिस्म की मालकिन.

उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा होने लगा और दिल में एक अलग सी हलचल होने लगी.
मन में थोड़ा डर भी था क्योंकि पहली-पहली बार प्यार में थोड़ा डर तो लगता ही है.

मैंने उसे मिलते ही गले लगाया.
पहली बार गले लगने से मेरे पूरे जिस्म में आग लग गई.

मेरा लंड उसकी चूत पर एकदम से जा लगा और सड़क पर ही हमारे बीच चुंबनों का दौर शुरू हो गया.

फिर हमने एक-दूसरे को संभाला और एक होटल में जाकर कमरा ले लिया.

कमरे के अन्दर घुसते ही मैंने उसे दबोच लिया और सीधा उसके होंठों पर कब्जा कर लिया.
वह भी मेरा साथ एकदम भूखी शेरनी की तरह देने लगी.

किस करते-करते मेरे हाथ उसकी 34 इंच की चूचियों पर चलने लगे.
क्या सुखद आनन्द था.

उस पल का हाल लिखते लिखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

वे गर्मागर्म पल सच में मेरे लिए बेहद जोश भरे हुए थे.

अब कुछ ही मिनट में मैंने उसका टॉप उतार दिया और उसने मेरी शर्ट को उतार कर फेंक दिया.

उसका टॉप निकालते ही उसका दूध जैसा सफ़ेद बदन देखकर मेरा लंड फटने को हो रहा था.

मैंने उसकी चूचियों को ब्रा के ऊपर से ही मसलना शुरू कर दिया.
फिर उसके कहने पर मैंने उसकी ब्रा निकाली और उसके बूब्स को उससे आजाद कर दिया.

मैं उसकी चूचियों के ऊपर मानो टूट ही पड़ा था.
वह भी मुझे अपने मम्मों से खेलने देने को आतुर दिख रही थी.

उसने भी अपने दूध खुल्ला छोड़ दिए थे कि आ जाओ और चूस लो … खा लो मेरे मम्मों को!

मैंने पहले उसके होंठों पर किस किया.
फिर उसके गाल पर, कान पर, गले पर … और बस अब तो समझो मुझे भूत सा सवार हो गया था.
मैं उसके बूब्स, पेट, नाभि पर किस करते-करते उसे चाटने लगा.

फिर मैंने उसके एक दूध को अपने मुँह में भर लिया और उसके निप्पल को अपने होंठों से दबा कर खींचने लगा और दूसरे दूध को अपने हाथ की हथेली में पूरा भर कर भींचने लगा.

उसे मीठा दर्द होने लगा और वह मेरे सर पर अपने दोनों हाथों को रख कर अपने रस को पिलाने की चेष्टा करने लगी.

मैं उसकी भड़की हुई चुदास को देख कर एकदम से बावला सा हो गया और उसके दोनों मम्मों को बारी बारी से चूसने व काटने लगा.

वह ‘आह्ह … आह्ह … ओह यस’ की आवाज करने लगी.
वह पूरी गर्म होने लगी.

इधर मेरे लंड ने भी पूरी गर्मी पकड़ ली थी और मेरी जीन्स को फाड़कर बाहर निकलने की कोशिश करने लगा.

तभी किस करते-करते मैं उसकी चूत के पास पहुंचा और उसकी जीन्स निकाल फेंकी.

अब वह बस गुलाबी रंग की पैंटी में थी, जो किस करने की वजह से उसकी चूत के रस से गीली हो गई थी.

मैंने उसकी चुत को पैंटी के ऊपर से ही सहलाया.
उसे सहलाने में ही वह बहुत गर्म हो गई.
उसने खुद ही अपनी पैंटी निकाल दी और मुझे मेरी पैंट और अंडरवियर निकालने को कहा.

मेरा लंड देखते ही उसके चेहरे पर अलग सी चमक थी.
मैंने उसकी चूत को सहलाना शुरू किया और वह काफ़ी गर्म हो गई.

वह बोलने लगी- गुड्डू, अब बर्दाश्त नहीं हो रहा. अपना लंड डाल दो.

दोस्तो, मेरा पहली बार सेक्स का अनुभव था.
मैं पहले से ही सेक्स टैबलेट साथ लेकर आया था और रूम में दाखिल होने के पहले ही उसे खा लिया था.
इसी वजह से मेरा लंड काफी सख्त हो गया था.

मैंने उसकी चूत पर लंड रखा और थोड़ा सा अन्दर डाला.
उसकी चूत खुली हुई थी, ये लंड रखते ही पता चल गया क्योंकि उसने पहले भी बहुत बार सेक्स किया हुआ था.

मेरा मन थोड़ा सा खराब तो हुआ पर न कुछ मिलने से कुछ मिलना बेहतर होता है.
फिर मैंने उसकी चूत में अपना पूरा लंड घुसा दिया और धक्के मारने लगा.

वह एकदम से लंड घुसेड़ देने से जरा अचकचा गई और आह की आवाज निकाल कर लौड़े को जज़्ब करने लगी.

मैंने उसकी ऊँह आह की परवाह किए बिना धकापेल चुदाई चालू कर दी.

वह भी अपनी गांड उठा कर मेरे लौड़े से लोहा लेने लगी.
गजब की रंडी थी साली उसे लौड़े को खाने का शौक था … न जाने बहन की लौड़ी कितने लंड खा चुकी थी.

मैं भी उस कुतिया की चुत में रंडी की चुत समझ कर अपने लंड को ठोके जा रहा था.

करीब 10 मिनट तक लगातार धक्के मारने के बाद खुशी का काम तमाम होने वाला था.

वह बहुत तेजी से नीचे से अपनी गांड उठा-उठाकर साथ दे रही थी.

और तभी अपने जिस्म को अकड़ाती हुई झड़ गई.
उसकी चुत से पानी निकल जाने की वजह से वह ढीली हो गई और चुत में रस भर गया.

इससे मुझे अब और ज्यादा मजा आने लगा.

मैं तकरीबन 20 मिनट तक उसे चोदता रहा और उसके बाद झड़ने वाला हो गया था.

मैंने खुशी से पूछा- कहां निकालूँ?
उसने कहा- अन्दर ही निकाल दो. मैं टैबलेट खा लूँगी. मुझे अन्दर ही रस लेने में काफ़ी मजा आता है.

ये सुनते ही मैंने जोरदार 10-15 धक्के मारे और उसके अन्दर ही झड़ गया.

हम दोनों निढाल होकर गिर गए और अपने सांसों को नियंत्रित करने लगे.

पहले राउंड की चुदाई में हम दोनों काफ़ी थक चुके थे तो एक-दूसरे की बांहों में ही लेट गए और एक-दूसरे को देखने लगे.

वह मेरी आंखों में देख कर मुस्कुराने लगी.

मैंने उससे पूछा- कैसा लगा?
वह बोली- चटपटा लगा!

मैंने कहा- अरे … मुझे तो लगा कि मीठा लगा होगा!

वह हंस दी और बोली- वह तो तुम्हें लगा होगा कि मैं मीठी हूँ!
मैंने कहा- नहीं मेरी जान, मुझे तो तुम नमकीन लगीं.

वह हंसने लगी और बोली- इसी लिए तो मुझे तुम्हारी चुदाई चटपटी लगी.

इसी तरह की प्यार भरी बातों में हम एक दूसरे को चूमने लगे.
हमारी जीभ आपस में लड़ने लगीं.
हम दोनों एक दूसरे की लार पीने लगे.

वह बोली- जान फिर से हो जाए!
मैंने कहा- हां फिर से हो जाए और उसके बाद भी फिर से हो जाए.

वह बोली- अच्छा मतलब तीन बार?
मैंने कहा- अरे मेरी जान तुम चाहो तो पांच बार भी हो जाएगा.

वह मेरे सीने पर हाथ मारती हुई बोली- ये हुई न मर्दों वाली बात. मुझे तुम बहुत पसंद आए.

मैंने मन ही मन में सोचा कि साली नेशनल हाईवे लग रही है … कुतिया के ऊपर से न जाने कितने वाहन गुजर गए होंगे इसे फर्क ही नहीं पड़ता है.

हालांकि उसकी चुत इतनी ज्यादा ढीली नहीं थी जिससे यह कहा जा सकता हो कि चुत का भोसड़ा बन गया हो.

खैर … अभी तो होटल का कमरा बुक किया था तो पूरा पैसा वसूल चुदाई करना था.

मैं उसके साथ प्रेमालाप में लग गया और कुछ ही देर में मेरा लंड दोबारा से हलचल करने लगा.

मैंने उसके होंठों पर किस करना शुरू कर दिया और उसके बूब्स पीने लगा.

जल्दी ही मेरा लंड दोबारा से लड़ने के लिए रेडी हो गया था.

इस बीच मैंने उससे लंड मुँह में लेने को कहा और उसने तुरंत लंड पकड़ कर मुँह में डाल लिया.

कुछ मिनट लंड चुसवाने के बाद लौड़ा अपने असली रूप में आ गया था और दोबारा से चुदाई करने के लिए खूब चिकना हो गया था.

इस बार मैंने उसे घोड़ी बनाया और एक ही झटके में पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया.
लंड पेलते ही वह चिल्लाई और बोली- आराम से चोद … कहीं भागी थोड़ी जा रही हूँ.

मैं पिल पड़ा और उसकी चूचियों को मसलते हुए उसकी ताबड़तोड़ चुदाई करने लगा.
सेकंड राउंड में भी वह दो बार झड़ चुकी थी और मैं भी अपने चरम पर पहुंच गया था.

आधा घंटा तक चले हमारे दूसरे राउंड में मुझे काफ़ी मजा आया.
मैं इस बार मस्ती से उसकी चुत में ही झड़ गया.

उसके बाद एक बार और सेक्स करके मैंने उससे कहा कि चौथी बार और करूंगा.

मगर वह राजी नहीं थी.
उसने कहा- अब तक मैं छह बार झड़ चुकी हूँ और अब मुझमें हिम्मत नहीं बची है.

वह अपने घर के लिए जाने की कहने लगी.

अब हम दोनों ने बाथरूम में जाकर एक-दूसरे को अच्छे से साफ किया और किस करके अपने-अपने कपड़े पहने.

फिर एक रेस्तरां में जाकर खाना खाया क्योंकि 3 राउंड चुदाई के बाद एनर्जी खत्म हो गई थी.

खाना खाने के बाद हम दोनों अपने-अपने घर को चले गए.

मैंने कुछ दिन बाद उस रंडी की गांड भी मारी, उसकी सेक्स कहानी मैं आपको कभी बाद में बताऊंगा.

दोस्तो, आपको मेरी चालू गर्ल हिंदीपोर्न कहानी कैसी लगी?
मुझे मेल करके अपने विचार जरूर दें और मेरा हौसला बढ़ाएं.
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