पूरी नंगी बहन मेरे सामने चुदी मेरे जीजू से. मैं उसी कमरे में सो रहा था. वे मुझे छोटा और सोया हुआ समझ कर पूरे नंगे होकर चुदाई करने लगे. मैंने अपनी दीदी का नंगा बदन देखा, चूत चूचियां देखी.
दोस्तो, मैं विजय अपनी सेक्स कहानी
मेरे सामने दीदी चुदीं जीजा से
का दूसरा भाग लेकर हाज़िर हूँ.
जैसा कि आपको पहले भाग में मैंने बताया था कि दीदी और जीजा एक राउंड की चुदाई करने के बाद बेड पर नंगे ही लेट गए थे.
अब आगे पूरी नंगी बहन मेरे सामने चुदी:
जीजा जी ने अपनी एक टांग दीदी के ऊपर रखी हुई थी और वे अपने हाथ को दीदी के शरीर पर रख कर मस्ती से धीरे-धीरे फेर रहे थे, साथ में प्यार भरी बातें कर रहे थे.
बातों ही बातों में जीजा जी ने दीदी से पूछा- मज़ा आया ना?
दीदी ने हां में गर्दन हिलाकर ‘हम्म..’ करके जवाब दिया.
जीजा जी ने मुस्कुराते हुए कहा- अभी तो और मज़ा आने वाला है.
यह सुनकर दीदी ने जीजा जी के गाल पर एक हल्का-सा किस दे दिया और वे बोलीं- तो दो न मजा!
उनकी ये बातें सुनकर मुझे लग रहा था कि आज तो एक बार और चुदाई देखने को मिलेगी.
मैं अपने अंधेरे वाले बेड पर लेटा-लेटा बस उन्हें ही देख रहा था.
लाइट लैंप की रोशनी में वे दोनों मुझे बिल्कुल साफ दिखाई दे रहे थे.
धीरे-धीरे बातें करते-करते उन दोनों की हल्की-फुल्की छेड़छाड़ शुरू हो गई.
दोनों पहले से ही नंगे थे, तो उनके बीच कपड़ों का कोई बंधन भी नहीं था.
थोड़ी देर तक बेड पर ही प्यार करते रहे.
जीजा जी दीदी के निपल्स मसल रहे थे और बीच-बीच में कभी बूब्स पर, कभी गर्दन पर, तो कभी होंठों पर चुंबन कर रहे थे.
दीदी भी अपने एक हाथ से जीजा की छाती पर फेर रही थीं और पहले राउंड के बाद मुरझाए हुए उनके औज़ार को वे अपने दूसरे हाथ से सहला रही थीं, जिससे जीजा का लंड दोबारा से जिंदा होकर खड़ा होने लगा था.
इसके बाद जीजा जी बेड से नीचे उतरे और दीदी को भी खींचकर बेड से नीचे ले आए.
फिर जीजा जी ने पूरी नंगी बहन को ड्रेसिंग टेबल के शीशे के सामने खड़ा कर दिया.
अब उन दोनों का पूरा नंगा शरीर मुझे बड़े आराम से दिख रहा था.
जैसा कि मैंने पहले भाग में बताया था कि दीदी की हाइट 5 फीट 2 इंच थी, उनका शरीर बिल्कुल गोरा था. उनके बूब्स बिल्कुल गोल और खुद के बल पर सामने की ओर देखते हुए तने थे.
दीदी के दूध लगभग 30 या 32 इंच साइज़ के रहे होंगे. उनके पिछवाड़े का साइज़ भी लगभग 34 इंच का ही रहा होगा. कमर थोड़ी पतली थी.
दीदी का मुँह शीशे की तरफ था और जीजा जी उनके पीछे खड़े थे.
जीजा जी की हाइट भी दीदी से बस तीन-चार इंच ही ज्यादा थी.
शीशे के सामने खड़े-खड़े जीजा जी ने अपने दोनों हाथ दीदी की कमर में डाले और उनके शरीर पर धीरे-धीरे हाथ घुमाने लगे.
हाथ घुमाते-घुमाते वे अपना एक हाथ दीदी के दूध के निप्पल पर ले आए और अपनी दो उंगलियों की मदद से निप्पल को मींजने लगे.
दीदी ने अपनी गर्दन जीजा जी की तरफ घुमाई और वे दोनों किस करने लगे.
वे दोनों धीरे-धीरे दूसरे राउंड के लिए गर्म हो रहे थे.
किस करते-करते जीजा जी ने दीदी को पूरी तरह अपनी तरफ घुमा लिया और उनके दोनों गालों, गर्दन, होंठों पर चुंबनों की बरसात शुरू कर दी.
साथ ही जीजा जी अपने हाथों से दीदी की पीठ और चूतड़ों को सहलाने लगे.
लगभग 5 मिनट की किसिंग के बाद जीजा जी ने एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और दूसरे निप्पल को हाथ की दो उंगलियों से मींजने लगे.
दीदी भी अपने हाथों से जीजा जी का सिर अपने बूब्स में दबा रही थीं.
जीजा जी बारी-बारी से दोनों बूब्स को दबा रहे थे और चूस रहे थे.
ऐसा करते-करते जीजा जी ने अपना एक हाथ नीचे ले जाकर मेरी दीदी की चूत को सहलाना शुरू कर दिया.
कुछ देर दीदी के शरीर के साथ ऐसे ही खेलने के बाद उन्होंने दीदी को नीचे घुटनों के बल बैठने के लिए कहा.
दीदी समझ गई थीं कि अब उन्हें क्या चाहिए.
तो वह तुरंत नीचे बैठ गईं और जीजा जी के लंड को हाथ से सहलाने लगीं.
जीजा जी के लंड की साइज़ लगभग 6 इंच की थी और ठीक-ठाक मोटाई थी.
जीजा जी ने अपने दोनों हाथों से दीदी का सिर पकड़ा और दीदी के मुँह में अपना हथियार घुसाकर चुसवाने लगे.
दीदी भी बड़े प्यार से आइसक्रीम की तरह लंड को चूसने में लगी हुई थीं.
लंड की चुसाई में दीदी कभी उसे पूरा मुँह में लेतीं, तो कभी साइड से अपनी जीभ से चाट रही थीं.
ऐसा करने से जीजा जी के पूरे लंड पर दीदी का थूक लग रहा था, जिससे वह अच्छे से गीला और चमकदार होता जा रहा था.
थोड़ी देर तक लंड चुसवाने के बाद जीजा जी ने दीदी को खड़ी कर दिया और वापस दीदी का मुँह शीशे की तरफ तथा पीठ अपनी तरफ करके खड़ा कर दिया.
फिर जीजा जी ने पूरी नंगी बहन की एक टांग उठाकर ड्रेसिंग टेबल के टॉप पर रख दी.
अब टांगें थोड़ी चौड़ी होने की वजह से सामने शीशे में दीदी की चूत एकदम साफ और अच्छे से नज़र आने लगी थी.
नीचे के बाल एकदम ताज़ा शेव किए हुए थे मतलब दीदी भी चुदवाने की पूरी तैयारी करके बैठी थीं.
अब जीजा जी दीदी की कमर से हाथ फेरते हुए जांघों पर हाथ घुमाने लगे और वे अपने एक हाथ की उंगलियां दीदी की चूत की दरार पर फिराने लगे.
उंगली दरार पर फिराते-फिराते जीजा जी ने दो उंगलियां अन्दर डाल दीं और अन्दर-बाहर करने लगे.
वे दूसरे हाथ से दीदी के एक दूध को पकड़ कर हॉर्न के जैसे दबाने लगे.
अब दोनों की … खास तौर पर दीदी की कामुक सिसकारियां निकलनी शुरू हो चुकी थीं.
उन दोनों के बीच जो बातें हो रही थीं, उनमें चुदाई करने की बेचैनी साफ पता लग रही थी.
दीदी बोल रही थीं- सुभाष, मेरी जान अब तुम्हारी इस चूत को उंगलियों की नहीं, मेरे लौड़े की जरूरत है. प्लीज जल्दी से लौड़ा अन्दर घुसाओ और इस चूत की चुदाई शुरू कर दो!
जीजा जी ने हंसते हुए कहा- अच्छा ऐसी ही बात थी … पर अभी थोड़ी देर पहले चुदने से मना कर रही थीं और अब एक बार चुदने के बाद भी खुजली कम नहीं हुई!
इन सब बातों के बीच जीजा जी और दीदी के किस चालू थे और नीचे जीजा जी अपनी उंगलियों से चूत को चोदे जा रहे थे.
इसी बीच दीदी झड़ने वाली थीं, तो ‘आह्ह … ईई… ऊह्ह …’ की सिसकारियों के साथ बोलीं- आज तीन महीने बाद मुझे मेरा लौड़ा मिला है, तो एक बार में ही खुजली कैसे शांत होगी?
इतने में दीदी झड़ गईं और दोनों एक-दूसरे से खड़े-खड़े ही चिपक गए.
अब बारी जीजा जी की थी.
उन्होंने दीदी का मुँह अपनी तरफ करके एक टांग को दोबारा ड्रेसिंग टेबल के टॉप पर रखा और खड़े-खड़े ही लंड को चूत पर रगड़ने लगे.
दीदी भी लौड़े को अपने हाथ से पकड़ कर चूत के अन्दर घुसाने का प्रयास कर रही थीं.
स्टैंडिंग पोजीशन में लंड अन्दर घुसाने में थोड़ी परेशानी हो रही थी.
जीजा जी ने लौड़ा चुत से अलग किया और दीदी से उसे गीला करने को कहा.
दीदी ने एक बार में ही अपने मुँह में थूक भरा और लौड़े को एक बार चूसकर पूरा गीला कर दिया.
अब फिर से इसी पोजीशन में जीजा जी ने अपना लौड़ा धीरे-धीरे चूत में घुसा दिया और अन्दर-बाहर करना शुरू करके दीदी को चोदना चालू कर दिया.
कुछ झटकों में ही दीदी की चूत गीली हो गई और चुदाई से आने वाली मधुर आवाज़ें आने लगीं.
फच फच की आवाजें मेरे लौड़े को भी गीला कर रही थीं.
कुछ देर खड़े-खड़े चोदने के बाद दीदी बोलीं- जान, अब मुझे आपको चोदना है. बेड पर चलो और मेरे इस लौड़े से मैं तेरी चूत को चोदूँगी … चलो जल्दी से चित लेट जाओ मेरे यार!
तब जीजा जी ने लौड़ा अन्दर घुसाए रखा और दीदी को अपनी गोद में उठाकर बेड पर ले आए.
वे चित लेट गए.
दीदी उनके ऊपर काउगर्ल पोजीशन में बैठ गईं.
दीदी ने लौड़े को दोबारा अपनी चूत में सैट किया और लौड़े के ऊपर उछलने लगीं.
जीजा जी दोनों हाथों से चूचियों को मसलने में लगे थे, दीदी लंड की मस्त सवारी करने में लगी थीं.
दीदी जब जीजा जी के ऊपर बैठे-बैठे चुद रही थीं, तब उनके बूब्स भी साथ में उछल रहे थे और दीदी बड़ी कामुक सिसकारियां निकाल रही थीं.
ऐसे 5-7 मिनट चुदाई करने के बाद दीदी थोड़ी थक गईं, तो वे जीजा जी के ऊपर सिर रखकर लेट गईं.
जीजा जी ने नीचे से धीरे-धीरे झटके देना चालू रखा.
थोड़ी देर धीरे-धीरे संभोग करने के बाद जीजा जी बोले- चल खड़ी हो मेरी संगीता जान … अब कुतिया बन जा … तेरा सुभाष तुझे कुत्ते की तरह चोदकर चूत की खुजली मिटा देगा!
दीदी झट से बेड के एक कोने पर आकर घोड़ी बन गईं और जीजा जी ने बेड के नीचे खड़े होकर पीछे से लंड को चूत में घुसेड़ दिया.
अब दोनों पूरे जोश में आगे-पीछे होकर झटके लगा रहे थे और पूरा कमरा सिर्फ सिसकारियों और चुदाई की आवाज़ से गूँज रहा था.
उन दोनों की बातों में अब सिर्फ लौड़ा, चूत और चुदाई ही शब्द बचे थे.
दीदी बोल रही थीं- आह चोदता जा मेरे राजा .. आज कितने दिनों बाद यह लौड़ा इस चूत को मिला है!
जीजा जी दीदी के दूध पकड़ कर उन्हें धकापेल चोद रहे थे.
वे दोनों अब अपने क्लाइमेक्स पर पहुंचने वाले थे, तो जीजा जी ने दीदी को सीधा लिटाया और उनके ऊपर आकर मिशनरी पोजीशन में चुदाई चालू कर दी.
उन दोनों की सांसें तेज़ तेज़ चल रही थीं.
दीदी बोल रही थीं- आह चोदो मेरे राजा … और जोर जोर से चोदो … आज पूरे तीन महीने बाद यह चुदाई का मज़ा मिल रहा है … चोद दे अपनी चूत को आआह … ऊऊआह … ईईईई … आह आह चोद दे मेरे यार!
ऐसे करते-करते दीदी और जीजा पूरा आनन्द ले रहे थे.
जीजा जी की चुदाई की रफ्तार फुल हो गई थी और वे भी लंड को पूरा जोर लगाकर चुत के अन्दर बाहर करके दीदी को चोद रहे थे.
जीजा जी जोर-जोर से झटका देते देते आह आह करते हुए कहने लगे- आह मेरी रानी मैं जाने वाला हूँ आह!
उधर दीदी भी चरम पर आ गई थीं तो उनकी भी आहें और कराहें निकलने लगी थीं.
कुछ पल बाद वे दोनों एक साथ ही झड़ गए.
चुत लंड के मिलन से निकलने वाली आवाज़ शांत होती चली गई और जीजा जी के लंड का सारा रस चुत से निकल कर जांघों पर बह निकला.
इस जबरदस्त सेक्स के बाद वे दोनों एक मिनट तक ऐसे ही ऊपर नीचे निढाल होकर पड़े रहे.
दीदी ने कुछ पल बाद फिर से एक जोरदार किस दिया और जीजा जी को साइड में कर दिया.
उन दोनों की सांस अभी भी तेज ही चल रही थी.
थोड़ी देर बाद दीदी खड़ी हुईं, तब मुझे दिखा कि लौड़े से निकला हुआ माल चुत से निकल कर जांघ तक आ गया था.
दीदी ने तौलिया से चुत को साफ किया और लंड को भी दीदी ने ही तौलिए से साफ किया और एक किस लौड़े पर भी कर दिया.
जीजा जी ने कुछ भी हरकत करना बंद कर दिया था.
दीदी जब खड़ी हुईं, तो मैंने देखा कि उनकी गोरी गोरी चूचियां बिल्कुल लाल हो चुकी थीं और उनके बोबों पर जीजा जी के काटने के निशान भी थे.
अब दोनों थक चुके थे तो उन्होंने कपड़े भी नहीं पहने और चादर ओढ़ कर नंगे ही सो गए.
अगली रात भी जीजा जी वहीं सोए थे, तो मुझे लगा कि आज भी मुझे लाइव सेक्स देखने का मौका मिलेगा.
मैं पहले ही आकर सोने का नाटक करने लगा.
कुछ देर बाद जब दीदी आईं तो उन्होंने जो कहा उसे सुनकर जीजा जी का सेक्स करने का अरमान और मेरा लाइव सेक्स देखने का अरमान फीका पड़ गया.
क्योंकि दीदी ने बताया कि उनका पीरियड चालू हो गया है.
लेकिन जीजा जी कहां मानने वाले थे उन्होंने कुछ देर की किसिंग और सकिंग करके दीदी को लौड़ा चूसने के लिए राजी कर लिया.
जीजा जी पूरे नंगे हो गए और दीदी के ऊपर के कपड़े निकाल दिए.
दीदी का मन नहीं था लेकिन जीजा जी को खुश करने के लिए उन्होंने ऐसा किया.
जीजा जी ने थोड़ी देर किसिंग करने के बाद दोनों चूचियों को खूब दबाया और पिया.
उसके बाद दीदी ने लंड को चूसना चालू कर दिया.
दीदी ने लौड़े को चूसते चूसते उसे हाथों से हिलाना भी चालू रखा ताकि वे जीजा जी के लंड को जल्दी डिस्चार्ज करवा सकें.
ऐसा करते-करते दीदी ने जीजा जी का काम कर दिया और सारा माल चूचियों पर डलवा लिया.
अगली रात की सेक्स कहानी इतनी शॉर्ट में आपको बता दी क्योंकि उसे दिन सेक्स तो हुआ नहीं और केवल जीजा जी को खुश करने के लिए दीदी ने लौड़े को चूस कर और हिला कर उसका माल निकलवा दिया था.
तो दोस्तो, यह थी मेरे जीवन से जुड़े पहले सेक्स अनुभव की कहानी.
आगे की कहानियों में मैं आपको मेरा एक और लाइव सेक्स देखना मिलेगा.
उसमें मेरी पहली चुदाई का जिक्र है.
बाकी कहानियां भी मैं आप सबको जरूर बताऊंगा, जिसमें एक कहानी में यह भी बताऊंगा कि कैसे आगे चलकर मैंने अपनी संगीता दीदी को भी अपने लौड़े के नीचे ले कर चोद दिया था.
पूरी नंगी बहन की सेक्स कहानी कैसी लगी, ईमेल आईडी पर आप अपने सुझाव और रिएक्शन ज़रूर दें.
धन्यवाद.
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