Xxx गर्ल ट्रेन सेक्स स्टोरी में मेरे भाई और उसके दोस्त से चुदकर मेरी अन्तर्वासना चरम पर थी. मेरा भाई मुझे घुमाने ले जा रहा था कि उसके कई दोस्त मिल गए.
यह कहानी सुनें.
दोस्तो, मेरा नाम प्रिया है और मैं आपको अपने सगे भाई आरव के साथ अपनी चुदाई की कहानी
भाई के दोस्त के बाद भाई से भी चुदी मैं
सुना रही थी.
उसमें अब तक आपने पढ़ा था कि किस तरह से आरव भैया के दोस्त विक्की ने मुझे चोदा और उसके बाद आरव भैया ने भी मुझे चोद दिया.
भैया से चुदने के बाद मैं उनकी गर्लफ्रेंड बन गई थी और लगभग हर रात मैं किसी न किसी तरह से अपने भाई के लौड़े से चुदने लगी थी.
अब आगे इस Xxx गर्ल ट्रेन सेक्स स्टोरी में मैं आपको आरव भैया और उनके फ्रेंड्स के साथ अपनी ट्रेन ट्रिप वाली सेक्स कहानी लिख रही हूँ.
हम दोनों को चुदाई करते हुए बहुत दिन हो चुके थे.
कुछ दिनों से मेरी मॉम और डैड भी घर पर ही रह रहे थे तो चुदाई का अवसर नहीं मिल रहा था.
मैं उदास थी.
उस दिन मेरे भैया मेरे रूम में आए.
आरव भैया कमरे में आते ही मुझे किस करने की कोशिश करने लगे.
मैं मॉम डैड की आहट लेती हुई दरवाजे बंद करके भैया से लिपट गई.
‘क्या हुआ प्रिया? उदास क्यों हो? क्या हुआ?’
मैं- भैया … मैं घर पर रह-रहकर थक गई हूँ. कहीं घूमने जाना चाहती हूँ, लेकिन पापा मुझे कहीं अकेले नहीं जाने देंगे. आपको पता है ना … मेरी कॉलेज की ट्रिप थी, फिर भी उन्होंने मना कर दिया था.
आरव- बस इतनी सी बात? मैं बात करूँगा. तुम ये बताओ … कहां जाना है तुम्हें?
मैं- गोवा या थाइलैंड.
आरव- ठीक है … लेकिन तुम्हें मेरी बात माननी होगी.
मैं- कौन-सी बात?
आरव- जो भी मैं करने को कहूँ … वह सब.
मैं- ठीक है.
आरव ने पापा से कहा- पापा … मैं थाइलैंड घूमने जाना चाहता हूँ.
डैड- ठीक है … तुम अपनी पढ़ाई का सब देख लो … और जा सकते हो.
आरव- डैड … मैं प्रिया को भी साथ ले जाऊं? मैं उसका ख्याल रखूँगा.
डैड- ठीक है … साथ में जा रहे हो तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है.
आरव- थैंक्स पापा.
मैं- थैंक्स आरव भैया.
हम दोनों ने अपना प्लान तय किया और भैया ने सारी तैयारी कर ली.
फिर वह रात आ गई, जब हम दोनों को जाना था.
मैं और आरव भैया फ्लाइट पकड़ने के लिए रात आठ बजे घर से निकल गए.
भैया ने कैब बुक करके बुलाई और कैब के आते ही भैया ने ड्राइवर से कहा- पहले किसी अच्छे मॉल में चलो … क्योंकि फ्लाइट तो रात साढ़े बारह बजे की है.
वह ओके कह कर हम दोनों को बिठा कर आगे बढ़ गया.
मैं और आरव भैया एक मॉल में आ गए.
आरव- प्रिया … थाइलैंड में ऐसे ड्रेस नहीं पहना करते. तो कुछ ब्रा-पैंटी खरीद ले … वहां तुझे सिर्फ वही पहनना है.
मैं- लेकिन भैया … सबके सामने वहां नंगी कैसे घूम सकती हूँ?
आरव- मैंने कहा था ना कि तुम्हें मेरी बात माननी होगी!
मैं- ठीक है.
आरव- ये नेट वाली ड्रेस और ब्रा-पैंटी पहन कर चैक लो.
मैं- ठीक है.
मैंने देखा और उस पारदर्शी ड्रेस को पहन लिया.
उसके अलावा मैंने कुछ दूसरे सेक्सी कपड़े भी खरीदे और भैया वापस चलने के लिए कैब बुक करने लगे.
हम सब खरीदकर एयरपोर्ट के लिए निकल पड़े.
वहां जाकर पता चला कि मौसम की वजह से सारी फ्लाइट्स कैंसल हो गई हैं, अगले दो दिन तक दूसरी कोई फ्लाइट नहीं है.
मैं- भैया … अब घर वापस चलें क्या?
आरव- हां अब और क्या कर सकते हैं?
तभी वहां एयरपोर्ट के बाहर हमें विक्की और उसका फ्रेंड रोहन मिल गए.
विक्की- हैलो आरव, प्रिया यहां कैसे?
आरव- हम दोनों थाइलैंड घूमने जा रहे थे … लेकिन फ्लाइट कैंसल हो गई.
मैं- मेरा तो सारा मूड ही खराब हो गया.
विक्की- हम भी कनाडा जा रहे थे … लेकिन अभी गोवा जा रहे हैं. अगर तुम लोग चाहो तो हमारे साथ कार में चल स्टेशन तक सकते हो. हम लोग ट्रेन से जाएंगे.
मैंने भैया से कहा- चलते हैं भैया … वैसे भी थाइलैंड तो नहीं जा पाएंगे.
आरव- ठीक है … चलो.
फिर मैं, आरव भैया, विक्की और रोहन उनकी कार में बैठ कर रेलवे स्टेशन के लिए निकल गए.
रास्ते में रोहन और विक्की मुझे ही घूरते जा रहे थे … क्योंकि मैं नेट वाली ड्रेस में थी, जिसके आर-पार ब्रा-पैंटी दिख रही थी
अब हम सभी ट्रेन में जाने वाले थे.
विक्की के फ्रेंड की पहचान थी तो उसने ट्रेन की कन्फ़र्म टिकट बुक करवा ली.
वह टिकट लेकर आया तो मैंने कहा- इतनी सारी टिकट? हम तो सिर्फ चार लोग हैं.
रोहन बोला- हम सिर्फ चार लोग नहीं … दस लोग हैं.
तभी पांच लड़के और एक लड़की आई.
वह लड़की आरव, विक्की और रोहन को देखकर बोली- मैं इतने सारे लड़कों के साथ नहीं करवा सकती.
वह यह कहकर चली गई.
रवि, मयंक, अक्षय, अक्षत, विवेक, विशाल एक दूसरे का मुँह देखने लगे.
रवि- अब क्या मज़ा आएगा लड़की के बिना? अब दूसरी रंडी कहां मिलेगी?
तभी विक्की मेरी तरफ देखकर कहता है- तुम लोगों को ढूंढने की कोई ज़रूरत नहीं है … ये रही लड़की.
अक्षत- हम्म … लड़की तो अच्छी है … लेकिन ये तो आरव की बहन है.
विक्की- आरव खुद इसे चोद चुका है.
आरव- विक्की … ये सब बताने की क्या ज़रूरत थी?
अक्षत- कोई नहीं भाई … लेकिन अब तो तेरी बहन को चोदने में मज़ा आएगा.
मैं- नहीं … ऐसा नहीं हो सकता. मैं कोई रंडी नहीं हूँ कि इतने सारे लंड ले सकूँ.
मयंक- रंडी नहीं हो, तो बना देंगे.
सभी लड़के हंसने लगे.
मैं भी मन बना चुकी थी कि इस बार पूरी रंडी ही बन कर चुदूँगी.
विक्की- आरव … मान जाओ बहुत मज़ा आएगा.
आरव- ठीक है … वैसे मैं भी यही चाहता हूँ. प्रिया … चलो अब तुम भी मान जाओ.
मैं- ठीक है … लेकिन प्रॉमिस करो … एक बार में एक ही लड़का चोदेगा … और जब तक मैं चुदने के लिए रेडी नहीं होऊंगी, कोई भी मुझे हाथ नहीं लगाएगा!
सभी राजी थे- ठीक है … प्रॉमिस.
फिर हम सब ट्रेन में बैठ गए और हमारा सफर शुरू हो गया.
मैं और आरव भैया, विक्की और अक्षत फर्स्ट क्लास एसी डिब्बे में थे, आस-पास के डिब्बों में बाकी सभी.
एसी फुल पर चल रहा था, फिर भी मेरे पसीने छूट गए थे.
मैं लेट गई थी, बहुत थक गई थी.
तभी अक्षत मेरे सामने की सीट पर लेटा था.
वह बोला- अरे प्रिया अपनी ड्रेस निकाल दो … अभी यहां कोई नहीं आने वाला!
मैंने कहा- मुझे ठंड लग रही है.
अक्षत- कोई बात नहीं … ऐसा करो, मेरे पास आ जाओ, मैं गर्म कर दूंगा.
मैं- नहीं मैं यहीं ठीक हूँ.
अक्षत मुझे गाली देता हुआ मेरे पास आया और ज़ोर से एक तमाचा जड़ते हुए बोला- बहन की लौड़ी रंडी … मुझे मना कर रही है.
साले ने इतनी ज़ोर से चांटा मारा था कि मेरे भैया नींद में थे, वे भी उठ गए थे.
मैं भी रोने लगी थी.
आरव- क्या हुआ प्रिया?
मैं रोती हुई बोली- भैया … अक्षत ने थप्पड़ मारा है.
अक्षत- तो और क्या करूँ? साली रंडी मेरे पास आने से क्यों मना कर रही थी?
आरव भैया अक्षत से लड़ने लगे कि इसमें मारने की क्या जरूरत है.
तभी विक्की उठ कर आ गया और उन्हें समझाने लगा- आरव, प्रिया इधर तेरी बहन नहीं है वह यहां पर हम सब की रंडी है!
विक्की भैया को लेकर दूसरे डिब्बे में चला गया.
वहां से उसने अक्षय को और मयंक को यहां भेज दिया.
अक्षत- अब यहां आ जा प्रिया.
मैं डर गई थी तो चुपचाप बैठी रही.
कुछ देर बाद अक्षत मेरा हाथ पकड़ कर मुझे ऊपर वाली सीट पर ले गया और उधर उसने मेरी ड्रेस को उतार कर नीचे फेंक दिया.
अब उसने मुझे आधी नंगी मतलब ब्रा पैंटी में करके अपनी बांहों में भर लिया और लेट गया.
थोड़ी देर में उसने मेरी ब्रा भी उतार दी और मेरे एक निप्पल को अपनी दो उंगलियों से मींजने लगा.
मुझे भी मजा आने लगा.
एक मर्द जब मुझ जैसी कामुक लड़की से चिपका हो, तो कब तक मैं शांत पड़ी रहती.
लेकिन तब भी मैं चुपचाप उसकी हरकतों का मजा लेती रही.
थोड़ी देर बाद उसे न जाने क्या हुआ कि उसने पैंटी निकाल कर मेरी ब्रा और पैंटी भी नीचे फेंक दी.
वह कहने लगा कि अब मैं तुझे नंगी ही ट्रेन से उतारूंगा.
मैं घबरा गई कि साला यह तो अजीब चटका आदमी है. अरे चोदना है तो चोद ले … मुझे नंगी घुमाएगा तो राह चलता आदमी भी मुझे नजरों से चोदेगा और यदि उधर भी इसने मुझे खुलेआम चोदना चालू कर दिया तो क्या होगा?
मैं सब यह सोच सोच कर परेशान थी लेकिन मुझे विश्वास था कि ऐसा कुछ होने वाला नहीं है.
अब उसने मुझे यहां-वहां हर जगह किस करना चालू कर दिया.
वह मुझे कहीं कहीं नाखून भी मार रहा था.
तभी आरव भैया आ गए और उन्होंने मुझे अक्षत से दूर कर दिया.
आरव भैया ने मुझे मेरी ब्रा-पैंटी उठा कर पकड़ा दी.
अक्षत उसे मना करने लगा तो आरव उसे गाली देने लगा.
अक्षत को भी गुस्सा आ गया और वे दोनों लड़ने लगे.
फिर बाकी लोगों ने उन दोनों को शांत करवा दिया.
पर अक्षत मानने को तैयार नहीं था. वह बोलता ही जा रहा था- इसे नंगी करके ही घुमाऊंगा!
तभी पास में खड़े अक्षय उसके कान में कुछ कहने लगे तो वह आरव को सॉरी बोलने लगा.
आरव भैया भी शांत हो गए.
अब विक्की ने कहा- प्रिया … तुम अक्षत के साथ सो जाओ. वह सेक्स से ज्यादा कुछ नहीं करेगा!
मैं तो वैसे ही गर्म हुई पड़ी थी तो मुझे लौड़े की सख्त जरूरत थी.
अब सभी लेट गए.
मैं और अक्षत बांहों में लिपट कर सो गए.
रात भर वह मेरे बूब्स दबाता और चूसता रहा.
उसने मुझे चोदा इसलिए नहीं क्योंकि मैंने उससे कहा नहीं था कि वह मुझे चोदे.
मैं भी सो गई.
फिर सुबह के पांच बजे होंगे, मयंक ने मुझे जगाया.
वह बोला- मेरे साथ चलो.
मैं उसके साथ चली गई.
वह मुझे उसके कंपार्टमेंट में ले गया.
उसने अपनी पैंट निकाल कर रख दी और बोला- शुरू हो जाओ. तुम्हें लौड़े की जरूरत होगी!
मैं हंस दी- तुमको कैसे मालूम कि मुझे इसकी जरूरत थी?
वह बोला- साली रंडी … रात भर से नंगी लेटी है और लंड नहीं घुसा तेरी चुत में तो लंड की जरूरत नहीं होगी तुझे?
मैं समझ गई और उसका चूसने लगी.
उसने कुछ देर बाद अपना सारा माल मेरी ब्रा खोलकर मेरे मम्मों में डाल दिया.
हम दोनों वहीं पर चुदाई करके सो गए.
सुबह ग्यारह बजे हम सब गोवा पहुंच गए.
उधर मेरे साथ सारे लड़कों ने एक प्लान बनाया कि मैं कब कब किस लड़के के साथ सेक्स का मजा लूँगी.
मेरे भैया मुझे हर लड़के के साथ मिल कर चोदना चाह रहे थे तो मैंने भी मन बना लिया था कि अपने भैया के साथ किसी लड़के का लंड लूँगी तो चुदाई में सुरक्षित रहूँगी.
अब आगे गोवा में क्या हुआ मेरे साथ … वह मैं अगली कहानी में आपको बताऊंगी.
आपको मेरी यह Xxx गर्ल ट्रेन सेक्स स्टोरी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
आपकी प्रिया
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