जब दोस्त ने पहली बार मेरी गांड मारी

न्यू ऐस्स सेक्स कहानी में मैं गोलू सा हूँ. मुझे भी बचपन से लड़कों को देखना पसन्द था. मेरे एक दोस्त को मुझसे चिपकना अच्छा लगता था. मुझे भी यह पसंद आता था.

मैं सोनू गुप्ता, हरियाणा से हूँ.
मैं बचपन से ही मोटा सा हूँ और मेरे चूचे भी फूले फूले हुए हैं.
मेरी गांड भी बाहर की तरफ़ निकली हुई रहती थी.

कुल मिलाकर मुझे देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए.
न जाने क्यों, मगर मुझे भी बचपन से लड़कों को देखना पसन्द था.

यह मेरी पहली चुदाई की कहानी है.
ये न्यू ऐस्स सेक्स कहानी तब की है, जब मैं और मेरा दोस्त मनीष साथ खेला करते थे.
हम दोनों 18 साल के हो गए थे.

इधर मैं आपको मनीष के बारे में बता दूँ.
मनीष लम्बा-चौड़ा जाट लड़का था और दिखने में भी गोरा था और बहुत सेक्सी था.

कई बार खेलते-खेलते मनीष मेरी गांड पर अपना हाथ मार दिया करता था.

उसके हाथ लगाते ही पूरे शरीर में बिजली सी दौड़ जाती थी लेकिन समझ नहीं आता था कि ऐसा क्यों होता है.
उस वक्त गे सेक्स के बारे में कुछ नहीं पता था.

अब मुझे उसका छूना अच्छा लगने लगा था.
मैं जानबूझकर उसके गले लग जाता था और उसे मुझे छूने का मौका देता था.

ऐसे ही करते-करते कुछ दिन बीत गए.

एक दिन मैं और मनीष अकेले थे तो उसने अचानक मुझे गालों पर किस कर दिया और कहा- तू बहुत सेक्सी है!
मैं शर्मा गया और हंस दिया.
बदले में मैंने भी उसे किस कर दिया.

उसने मुझे गले से लगाया और मेरे बूब्स दबा दिए.
फिर अचानक से उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और ज़ोर ज़ोर से किस करना शुरू कर दिया.

मुझे शुरू में बहुत अजीब लगा, पर फिर अच्छा भी लगने लगा था.
वह मेरे बूब्स भी दबा देता था, इससे मुझे अलग ही मज़ा आता था.
ऐसे ही करते-करते हम दोनों अकेले होने पर किस कर देते थे.

एक दिन मनीष ने मुझे गे सेक्स वीडियो दिखाई और कहा कि हम भी ऐसे ट्राई करेंगे.
मुझे डर लग गया और मैंने मना कर दिया.

मैं वहां से भाग आया.
लेकिन मन ही मन मेरा भी दिल वह सब करने को कर रहा था.

मनीष ने मेरे अन्दर की औरत को जगा दिया था.
अब मैं खुद ही नहाते वक्त अपने बूब्स को दबाने लगा और मज़े लेने लगा.

एक दिन मैंने अपनी उंगली अपनी गांड में डाली और अन्दर बाहर करने लगा.
मुझे अच्छा लगा तो मैंने शैंपू से उंगली को चिकना किया और गांड में अन्दर डाल कर गांड को कुरेदा.

यह बड़ा ही लज्जतदार लगा तो मैं रोज ऐसा करने लगा.
कामना भी बढ़ने लगी, तो मैं एक की जगह दो उंगलियों को अपनी गांड में डाल कर अन्दर बाहर करने लगा.

अब मैं तरह तरह से अपनी गांड की खुजली मिटाने की कोशिश करने लगा था.

फिर एक दिन ऐसे ही मैंने एक मोटी मोमबत्ती भी गांड में डालकर देखी.
मुझे अहसास हो गया कि अब किसी मर्द का लंड अन्दर लिया जा सकता है.

मेरा डर भी खत्म सा हो गया था.

फिर एक दिन मनीष ने मुझे खेलने बुलाया और वह जानबूझ कर अपने सूने घर में ले गया.
उस दिन उसके घर के सभी लोग कहीं बाहर गए थे.

मैं समझ गया था कि उसका इरादा कुछ और ही है … और सच बताऊं तो अब मेरा भी दिल उसके साथ सेक्स करने को कर रहा था.
सूने कमरे में आते ही उसने मुझे दबोच लिया और किस करनी शुरू कर दी.

मैं भी उसका साथ देने लगा.
वह ज़ोरदार किस करने लगा, मुझे भी किस करने में मज़ा आ रहा था.

वह धीरे-धीरे मेरे बूब्स को दबा रहा था और चूतड़ों पर भी हाथ फेर रहा था.

उसने मेरे बूब्स चूसने शुरू किए और काटने लगा तो मुझे बहुत मज़ा आने लगा था.
मेरे मुँह से ‘आह … आह … ओह … आह …’ की आवाज़ निकल रही थी.

फिर अचानक से उसने अपनी पैंट उतार दी और अपना 7 इंच लम्बा लंड मेरे सामने रख दिया.
मेरी तो आंखें फटी की फटी रह गईं.

मेरे लंड से उसका लंड काफी बड़ा और मोटा था.

उसने मुझसे लंड मुँह में लेने को कहा.
पहले तो मैंने मना कर दिया, पर काफी कहने पर मुँह में ले लिया और उसका लंड चूसने लगा.

उसके लंड का स्वाद नमकीन-नमकीन सा था.
मैं उसका लंड बड़े मज़े से किसी लॉलीपॉप की तरह चूस रहा था.

उसने मेरा मुँह पकड़ा और अपना लंड ऐसे अन्दर-बाहर करने लगा … जैसे वह मेरे मुँह को ही चोद रहा हो.

मेरी आंखों से पानी आ गया और सांस लेने में भी तकलीफ़ होने लगी.

वह आह … आह … करता हुआ मुख चोदन कर रहा था.
अचानक से उसने अपने लंड का सारा लावा मेरे मुँह में निकाल दिया.

मुझे भी न जाने क्यों उसका गर्म सॉस अच्छा लगा और मैं उसके लौड़े को चूस कर सारा रस पी गया.

हम दोनों थक गए थे तो यूं ही लेट गए.
कुछ देर बाद उसने मुझे उठाया और पीछे घूमने को कहा.

मेरे घूमते ही उसने मेरी पैंट खींचकर उतार दी.
अब मेरी गोल-गोल गोरी गांड उसके लंड के सामने थी.

उसने मुझे झुकाया और गांड को चाटने लगा.

मुझे बहुत ज़्यादा मज़ा आने लगा. मेरे मुँह से ओह … आह … उह … ओह … आह … की आवाज़ें निकलने लगीं.

उसने दोबारा से अपना लंड मेरे मुँह में दिया और गीला कर लिया.

अब उसने मेरी गांड पर थूक लगाया और लौड़े की नोक को छेद पर रगड़ने लगा.
मैं लंड लेने के लिए तड़प रहा था.
मुझसे अब रहा नहीं जा रहा था.

मैंने उससे कह दिया- अब डाल भी दे साले … कब तक तड़पाएगा?

ये सुनकर वह काफी खुश हुआ और वह पुनः थोड़ा ज्यादा सा थूक लगाकर अपना लंड मेरी गांड में उतारने की कोशिश करने लगा.
अभी सिर्फ़ उसके लंड का टोपा ही अन्दर गया था कि मेरी चीख निकल गई ‘हाय.’

मुझे इतना तेज दर्द हुआ मानो किसी ने तलवार डाल दी हो.
मैंने उससे खुद को छुड़ाने की कोशिश की मगर उसकी पकड़ मज़बूत थी.

उसने एक और झटका लगाया और आधा लंड मेरी गांड में उतार दिया.

मेरी आंखों से आंसू आने लगे और लगने लगा मानो मैं बस अभी मर ही जाऊंगा.

मैं मनीष से मिन्नतें करने लगा- मुझे छोड़ दो … मैं मर जाऊंगा … मुझे छोड़ दो!
लेकिन वह भैनचोद बिल्कुल भी रहम करने के मूड में नहीं था.

उसने एक और झटका दे मारा और अपना पूरा लंड मेरी गांड में पेल दिया.
मुझे तो सच में ऐसा लगा कि मैं बस बेहोश ही हो जाऊंगा.

अब वह थोड़ी देर रुका. मेरे दूध सहलाने लगा और मेरी पीठ को चूमने लगा.

कुछ देर में मेरा दर्द कम होने लगा तो उसने धीरे-धीरे झटके मारने शुरू किए.
अब मुझे भी मज़ा आने लगा था.

मैं भी ‘आह … आह … आह … आह … ओह … ओह … फक मी’ बोलने लगा.
इससे उसका भी जोश बढ़ गया.

वह भी गालियां दे रहा था- भैनचोद ले चुद साले गांडू … बचपन से ही मैं तुझे चोदने की फिराक में था … आज हाथ आई है तू बहन की लौड़ी … आह आज तेरी गांड फाड़ दूँगा!
मैं भी कह रहा था- आह … आह … फाड़ दो राजा … आज बिल्कुल फाड़ कर रख दो मेरी गांड आह चोदो मेरे सनम!

वह मेरे चूतड़ों पर थप्पड़ भी मार रहा था, जिससे और मज़ा आ रहा था.
मुझे लग रहा था जैसे मैं जन्नत में हूँ.

एकदम से उसने झटके तेज़ कर दिए.
फिर एक आह की आवाज़ के साथ सारा गर्म गर्म लावा मेरी गांड में छोड़ दिया और मुझसे लिपट गया.

मैंने उठकर देखा कि मेरी गांड से खू/न निकला हुआ है.
लाल लाल रंग देख कर मैं डर गया.
पर उसने बताया कि पहली बार सील टूटती है तो थोड़ा खू/न आता है.

मेरी गांड में बहुत जलन हो रही थी.
मैं ठीक से चल भी नहीं पा रहा था और काफी दर्द भी हो रहा था.
लेकिन मनीष से अपनी गांड की सील तुड़वाकर मैं खुश भी था

फिर उसने अपना लंड मेरे मुँह के पास रख दिया.
मैंने उसके लंड को अपने मुँह में लेकर सारा माल चाट चाट कर साफ़ कर दिया.

हम दोनों ने एक-दूसरे को किस किया और घर को चले गए.
मेरी गांड में 2 दिन तक दर्द रहा, लेकिन मज़ा भी बहुत आया था.

ऐसे ही कई दिनों तक हमने कई बार अलग-अलग जगह पर सेक्स किया और खूब मज़े लिए.
दोबारा कैसे उसने मेरे ही घर में घुसकर मुझे चोदा, वह गे सेक्स कहानी आगे बताऊंगा.

तब तक के लिए बाय-बाय मेरी यह न्यू ऐस्स सेक्स कहानी आपको कैसी लगी, प्लीज ज़रूर बताएं.
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