मेरा रूममेट मेरे लौड़े से चुद गया- 1

गे फीलिंग स्टोरी में मुझे लड़कियां अच्छी लगती थी पर मेरी क्लास में एक नया लड़का आया तो वह मुझे अच्छा लगने लगा. मेरी फीलिंग उसे चोदने की होने लगी थी.

हाय दोस्तो, मेरा नाम साहिल है.

मेरी ये गे फीलिंग स्टोरी तब की है, जब मैं स्कूल की हायर क्लास में था.
मेरा स्कूल मेरे घर से बहुत दूर था. मैं इस स्कूल में शुरू से ही पढ़ रहा हूँ.

चूंकि इस स्कूल की बहुत ज्यादा प्रसिद्धि है, तो इधर दाखिले के लिए एंट्रेंस एग्जाम देना पड़ता है.
फिर जब एडमिशन हो जाता है तो छात्र को वहीं के हॉस्टल में रहना पड़ता है.

उस स्कूल में छात्र दूर-दूर से पढ़ने आते थे और सबको रूम अलॉट होता था.

छोटी क्लास के छात्रों को डॉरमेट्री हॉल में रहना पड़ता था और जवान हो चुके छात्रों को एक रूम में दो से पाँच छात्र तक अलग अलग कमरों की साइज़ और उपलब्धता के आधार पर रहना मिलता था.

मुझे बचपन से लड़के पसंद नहीं आते थे. लेकिन जब मैं 18 साल का हो गया था और बड़ी क्लास में आया, तब मेरी सोच में परिवर्तन होने लगा था.
उस साल मेरी क्लास में एक नया लड़का आया था. उसका नाम एजाज था. वह मुझसे एक सीट पीछे बैठता था.

मुझे उसे देखकर पहली बार कुछ-कुछ टाइप वाला प्यार सा फील हुआ था.

इससे पहले मेरी लड़कियों से खूब पटती थी और बहुत सारी लड़कियां मेरी फ्रेंड्स थीं.
मैं सारी लड़कियों से बातें करता था, मुझे लड़कियों में कुछ ज्यादा ही इंटरेस्ट था.

लेकिन जब मैंने पहली बार एजाज को देखा, तो न जाने क्या हुआ कि मुझसे रहा नहीं जा रहा था.
मेरा मन करने लगा था कि मैं बस उसे पकड़ कर किस कर लूँ.

मेरी उससे हैलो हाय से बात होना शुरू हुई.
फिर मेरी उससे बातें होना शुरू हो गईं.

हम दोनों साथ में बैठने लगे.
वह मेरे बगल बैठने लगा.

अब हम दोनों में घनिष्ठता बढ़ गई और दोनों एक साथ में स्कूल में घूमने लगे थे.

फिर कुछ ऐसा होने लगा कि जब मैं क्लास के बाहर जाता तो उसे ही अपने ले जाता.
मुझे उसके लिए प्यार और बढ़ने लगा.

लेकिन अभी तक मैं उससे कह नहीं पाया था क्योंकि लड़कों में इंटरेस्ट होना सभी गलत समझते हैं.

धीरे-धीरे एक क्लास और बीत गई.
अब हम सब 12वीं में आ गए.

हम दोनों बेस्ट फ्रेंड बन गए थे.
हम दोनों अपने दिन का ज्यादा समय एक-दूसरे के साथ ही बिताते.

हमारे स्कूल के पास ही एक नदी थी.
शाम के टाइम हम दोनों लोग वहां चले जाते थे.

मैं हमेशा उसका हाथ पकड़े रहता.
उधर बैठ कर हम दोनों दिन भर की बातें करते और पूरी शाम वहीं गुजारते.

इस बार हम दोनों ने 12वीं में हॉस्टल का अपना रूम भी एक ही करवा लिया था.
उस कमरे में सिर्फ हम दो लोग ही रहते थे.

हमारे बीच अब दोस्ती बहुत आगे बढ़ चुकी थी.

मैं रूम में उससे जान, बाबू भी कह देता था.
वह हंस कर कहता- भाई, कोई सुन लेगा तो क्या समझेगा?
तो मैं कहता- सुन लेगा तो क्या हुआ, हम दोस्त हैं और दोस्त एक-दूसरे की जान होते हैं!

मुझे कभी-कभी लगता था कि शायद मैं भी उसे अच्छा लगता हूँ. लेकिन मुझमें हिम्मत नहीं थी कि मैं उससे पूछ सकूँ.

फिर एक दिन मुझे डेटिंग एप के बारे में पता चला.
मैंने उसे डाउनलोड कर लिया और साइनअप कर लिया.

मेरी उस एप पर कई सारे लड़कों से बात भी होने लगी थी.

तभी एक दिन मुझे एक पास के रहने वाले लड़के की प्रोफाइल मिली.
मैंने मैसेज कर दिया.
मैंने सोचा कि अगर ज्यादा पास का होगा, तो मिल भी लूंगा.

मैं रोज देखता था कि रिप्लाई आए, लेकिन वह कभी ऑनलाइन ही नहीं आता.
एक हफ्ते के बाद उसका रिप्लाई आया.
जब आया तब मैंने मैसेज किया तो उसने बोला.

वह- हैलो!
मैं- एज?

वह- मेरी 19 और तुम्हारी?
मैं- सेम … मैं भी 19 का हूँ. आप कहां से हो?

जबाव में उसने वही जगह बताई, जहां हमारा हॉस्टल स्थित था.

मैंने सोचा कि ये बंदा तो पास का ही है, इससे तो मिल भी सकता हूँ.
उसने पूछा कि क्या तुमको लड़के पसंद हैं?
मैंने कहा- हां!

उसने कहा कि कब से पसंद आने लगे हैं.
फिर मैंने उसे अपनी सारी कहानी बताई कि जब मैं 11वीं में था तो उसी समय मुझे एक लड़का अच्छा लगने लगा था. अब तो हम दोनों एक ही कमरे में रहते हैं.

यानि उस दिन चैट में मैंने उसे सब कुछ बताया लेकिन उसे एजाज का नाम नहीं बताया.
हम दोनों ने काफी बातें कीं.

फिर एक दिन उसने मुझसे मेरी फोटो मांगी, मैंने दे दी.
उसके बाद उसका मैसेज ही नहीं आया.

अगले दिन मैं और एजाज शाम को नदी के पास गए थे.
उधर मैंने उसको बताया कि मेरी एक लड़की से बात हो रही है.
मैंने उसको यह नहीं बताया कि वह लड़का है और मुझे लड़के पसंद आते हैं.

वह सिर्फ हूँ हां कर रहा था.
मैंने उसे बताया- उसने मुझसे मेरा फोटो मांगा, फिर फ़ोटो लेने के बाद उसका कोई मैसेज नहीं आया!

वह कुछ नहीं बोला, बस मुझे देखता रहा.
उसी दिन जब हम दोनों वापस आए तो मुझे उस अननोन पर्सन का मैसेज आया- आई लव यू … मुझे आप बहुत अच्छे लगे!

मैंने एकदम सरप्राइज जैसा जबाव पाया तो उससे पूछा कि यह मैसेज उसी समय क्यों नहीं किया था?
तो उसने बताया कि कुछ काम था.

मैंने उससे कहा- मैं तुमसे प्यार नहीं करता!
उसने पूछा- क्यों?

मैंने बताया कि मैं सिर्फ और सिर्फ अपने फ्रेंड से प्यार करता हूँ.
उसने मुझे समझाया- हम दोनों को लड़कों में इंटरेस्ट है, हम दोनों एक-दूसरे के साथ फिजिकल भी हो सकते हैं. लेकिन तुम्हारे फ्रेंड को लड़कों में इंटरेस्ट नहीं हो सकता है!

मैंने उससे मना किया और मैंने कहा- हम सिर्फ फ्रेंड्स हैं, कुछ और नहीं … मैं तुमसे प्यार नहीं कर सकता!
उसने कहा- अच्छा, मिल तो सकते हैं!
तो मैंने मिलने के लिए हां कह दी.

एक दिन नदी के पास वाले पार्क में हम दोनों का मिलने के लिए डिसाइड हुआ.
मैं और एजाज शाम को नदी के पास गए.
मैंने उसको बताया कि उस लड़की ने मुझे आई लव यू कहा है.

यह बताते हुए मैंने उसे सारी बात बता दी कि कल हम दोनों पार्क में मिलेंगे.
उसने कहा- मुझे कल कुछ काम है, नहीं तो मैं भी भाभी को देखने चलता. कल मैं रहूँगा नहीं … भाभी को रूम पर ही ले आना!

मैंने कहा- मैं अभी उससे सिर्फ मिल रहा हूँ, प्यार-व्यार नहीं करता तो रूम पर क्यों ले जाऊंगा? पागल है क्या, कुछ भी बोल रहा है!
उसने पूछा- अरे तो फिर प्यार किससे करते हो?
मैंने कह दिया- तुमसे!

वह बोला- हां वह तो ठीक है, लेकिन करते किससे हो?
मैं जैसे उसे हमेशा कहता था, मैंने वैसे ही कह दिया कि तू ही तो मेरी जान है!

फिर हम दोनों हंसने लगे.

अगले दिन मैं थोड़ा तैयार हुआ और पार्क में जाकर उधर बैठ गया जहां हमारी मिलने की बात हुई थी.
करीब आधा घंटा हो गया, कोई नहीं आया.

मैंने उससे मैसेज किया- कहां हो?
उसका रिप्लाई आया- बस 5 मिनट में आ रहा हूँ, रास्ते में हूँ!

वह पार्क बहुत घना था क्योंकि पेड़ बहुत लगे थे, तो गेट से कौन आ रहा है, दिखता भी नहीं था.
तभी कोई आया और उसने पीछे से मेरी आंखें बंद कर दीं.

मैंने कहा- कौन है? तुम आ गए क्या?
तो कोई आवाज़ नहीं आई.

मैंने जबरदस्ती हाथ हटाया तो पीछे एजाज था.
वह बोला- तुमने कहा था कि तुम आ गए … कोई लड़का आने वाला था क्या?

मैं डर गया कि इसे पता तो नहीं चल गया कि मैं लड़के से मिलने वाला हूँ.

मैंने बात बनाने के लिए कहा कि तेरे हाथ लड़के जैसे लगे, तो मुझे लगा लड़का है.
एजाज कहा- अच्छा!

मैंने उससे पूछा- तुम तो कुछ काम से गए थे, क्या हुआ … गए नहीं क्या?
वह कहा- वह काम तो खत्म हो गया.

मैंने सोचा कि अब उस लड़के से कैसे मिलूँगा. आज मौका था कि उससे एटलीस्ट देखता तो सही, क्योंकि मैंने उससे देखा नहीं था, सिर्फ बात हुई थी. हां, पर उसने मुझे मेरी फ़ोटो से देख लिया था.

मैंने सोचा कि अगर वह आ गया, तो एजाज को पता चल जाएगा कि मैं बाइसेक्सुअल हूँ.

यही सब याद करके मैंने मन बनाया कि एप पर मैसेज करके उससे मना कर देता हूँ.
इधर मैं आपको एक बात दूं कि डेटिंग एप पर जब मैसेज आते हैं, तो फोन पर अलग सा नोटिफिकेशन वाला म्यूजिक बजता है, जो कि व्हाट्सएप्प या अन्य सोशल मीडिया एप से अलग आवाज सी होती है.

इसीलिए मैं हमेशा फोन को म्यूट करके बातें करता हूँ ताकि जब किसी का मैसेज आए तो कोई जान न पाए कि मैं डेटिंग एप यूज़ कर रहा हूँ.
मैंने एजाज से कहा- एक मिनट रुक जा, मुझे एक अर्जेंट काम है.

मैंने फोन साइड में करके उस अननोन पर्सन को जल्दी से मैसेज किया कि आज नहीं मिल पाऊंगा, बाद में बात करते हैं.
मैंने मैसेज टाइप करके सेंड किया, तभी मुझे एजाज के फोन से मैसेज रिसीव होने का म्यूजिक सुनाई दिया.
यह वही सेम आवाज थी जो डेटिंग एप से आती है.

शायद एजाज ने अपना फोन म्यूट नहीं किया था.
मैंने उसकी तरफ देखा तो उसका चेहरा सफेद पड़ गया.
मैंने कहा- ये कैसी आवाज़ है?

उसने कहा- कुछ नहीं, मैं म्यूजिक बजा रहा था!
मैंने उसका फोन छीन लिया.

मैंने उसके फोन में उसी एप को देखा तो एप खोल कर सारे मैसेज देखे.
उसने पहले तो वह एप हाइड किया हुआ था लेकिन नोटिफिकेशन आने से एप दिखने लगा था.

तभी मुझे पता चल गया था.

मैंने उससे कहा- तू है इस सबके पीछे … पहले से बताया क्यों नहीं? आज के बाद मुझसे बात मत करना!
मैंने गुस्सा होने का नाटक किया और कहा- और अगर तूने फोन साइलेंट पर रखा होता तो मुझे आज भी पता नहीं चलता!
फिर वह बोला- मैं तो सिर्फ ये देख रहा था कि तुम मुझसे ही प्यार करते हो कि किसी और से भी, या किसी और से फिजिकल होने के लिए मुझे छोड़ दोगे!

मैं उससे बिना कोई बात किए अपने रूम में आ गया.
वह भी मेरे पीछे-पीछे मनाते हुए रूम में आ गया.

जैसे ही वह रूम में घुसा, उसने दरवाज़ा लॉक कर दिया.
उसने मुझे देखते हुए कहा- आई लव यू साहिल … तुम मुझे बहुत अच्छे लगते हो. मैं डरता था कि तुम्हें पता चला तो क्या सोचोगे मेरे बारे में? तभी मैंने तुमसे कभी कुछ नहीं कहा!

मैं कुछ नहीं बोला.

फिर रात में डिनर के लिए हम दोनों मेस में गए, खाना खाया और वापस कमरे में आ गए.

पूरी रात मैंने उससे बात नहीं की.
अगले दिन भी क्लास में मैं उसके पास भी नहीं बैठा और उससे बात नहीं की.

मैं खुद को उससे बात न करने के लिए रोक रहा था और अपने ड्रामा को चालू रखा.
दो दिन तक ऐसा ही चला.
जब वह मेरे पास आता, मैं वहां से हट जाता.

तीसरे दिन महीने का लास्ट सैटरडे था.
सैटरडे को ज्यादातर ब/च्चे खाना खाने बाहर जाते थे … क्योंकि उस दिन हमारे मेस की छुट्टी रहती थी.

शाम के 7 बजे का समय हो रहा था, हॉस्टल खाली होने लगा था.
छात्र बाहर जाने लगे थे … और कई छात्र इसी का फायदा उठाकर डेट पर भी जाते थे.

मैं एजाज से बात नहीं कर रहा था.
वह मुझसे बार-बार पूछ रहा था- बाहर चलेगा?

मैं उसे लगातार इग्नोर कर रहा था.
मैं कमरे में आ गया.
पीछे से एजाज भी आया और कमरा बंद कर दिया.

वह बहुत गुस्से में था- मैं क्या करूँ कि तू बात करना शुरू करेगा … सॉरी बोला तो भी तेरी समझ नहीं आता क्या?
वह बोल रहा था.

मैं चुप होकर बेड की चादर ठीक कर रहा था.
तभी उसने पीछे से मुझे खींचा और अपनी तरफ घुमा लिया.

हमारे फेस एक-दूसरे के सामने थे.
जुलाई का सीजन था, हमें पसीना भी खूब हो रहा था.

उस वक्त फैन बंद था क्योंकि उस समय लाइट नहीं आ रही थी.
उसने मुझसे कहा- आई लव यू साहिल, मैं सच में तुमसे बहुत प्यार करता हूँ!

अभी मैं कुछ बोल पाता कि वह मुझे किस करने लगा. मेरे होंठ उसके होंठों में दब गए थे.
मुझे एकदम से सनसनी होने लगी और मेरा गुस्सा वाला ड्रामा खत्म हो गया.

अब हम दोनों एक-दूसरे को किस किए जा रहे थे.

दोस्तो, एजाज के साथ मेरी गांड चुदाई की कहानी अभी मस्त होने वाली है.
गे फीलिंग स्टोरी पर प्लीज आप अपने कमेंट्स जरूर भेजें और मुझे बताएं कि आपको मेरी गे सेक्स कहानी कैसी लग रही है.
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