भतीजी की कुंवारी सहेली की पहली चुदाई- 3

हॉट गर्ल एनल Xxx कहानी में कुंवारी सेक्सी लड़की की चूत फाड़ने के बाद मैंने उसे गांड मरवाने के लिए राजी कर लिया था. उसे मेरे लंड से चूत की सील तुड़वाने में बहुत मजा आया था.

मेरी कहानी के पिछले भाग
भतीजी की सहेली की गांड मारने की लालसा
में आपने पढ़ा कि मैं अपनी भतीजी की सहेली की कुंवारी चूत का उद्घाटन अपने लंड से चुका था. हम दोनों को बहुत मजा आया था. इसके बाद मेरी नजर उसकी गांड पर थी. मैं उससे सेक्सी बातें करके उसे गांड मरवाने के लिए तैयार कर रहा था.

अब आगे हॉट गर्ल एनल Xxx कहानी:

मैंने टॉप के अंदर हाथ डालकर उसकी चुचियों पर फिराया तो साफ महसूस किया कि उसके निप्पल और कड़क होकर नुकीले हो गए थे।

फिर मैंने अपनी एक उंगली मुँह में डालकर थूक से गीली की और उसके होंठों पर रख दी।
उसने उसे मुँह में लेकर चूसने लगी।

मैंने अवनी से पूछा, “अवनी, एक बात सच बताओ – क्या तुम्हारी चूत में कुछ हो रहा है?”
अवनी ने मुँह से मेरी उंगली निकालकर अपना एक पैर चेयर पर रखा, दूसरा पैर फैलाया और एक उंगली थॉन्ग के ऊपर से अपनी चूत पर फिराते हुए बोली, “आह चाचू, देखो ना! मेरा थॉन्ग गीला हो चुका है!”

मैंने अपना हाथ उसकी टांगों के बीच ले जाकर थॉन्ग साइड में करके चूत नंगी कर ली।
जैसे ही मैंने चूत के होंठों के बीच उंगली फिराई, अवनी अपनी एक चूची मसलते हुए बोली, “आह चाचू!”

मेरी उंगली उसके चिकने पानी से गीली हो गई।

मैंने वो उंगली दोबारा अवनी के मुँह में डाली तो उसने उंगली चूसकर साफ कर दी।

अवनी में सेक्स की आग भड़कते देख मेरा लण्ड फिर से खड़ा होने लगा।
मैंने अवनी को खींचकर उसका थॉन्ग उतारा और अपनी गोद में बिठा लिया।

अवनी अपनी भारी गांड मेरे घुटनों पर रखकर मेरी तरफ मुँह करके बैठी थी।
उसकी चूत मेरे लण्ड से लगी हुई थी और उसकी भारी चूचियाँ मेरी छाती से भिड़ी हुई थीं।

मैं उसके दोनों चूतड़ों को हथेलियों में कसकर अपना मुँह उसकी चुचियों पर रगड़ने लगा।

पर अवनी ने जबरदस्ती मुझे रोकते हुए मेरा चेहरा ऊपर उठाया और मेरे होंठ चूसने लगी।
हम दोनों पागल प्रेमियों की तरह एक-दूसरे के होंठ और जीभ चूसे जा रहे थे।

मेरे हाथ अवनी के चूतड़ मसल रहे थे।
बीच-बीच में मैं उसके चूतड़ों पर थप्पड़ भी मार रहा था।

अवनी पूरे कामुक अंदाज में मेरी बाहों में झूल रही थी।
उसके मुँह से बहुत कामुक सिसकारियाँ निकल रही थीं।

बहुत देर तक एक-दूसरे के होंठ चूसने के बाद अवनी ने मेरा चेहरा दोनों हाथों में लेकर माथे पर अपना माथा टिकाकर बोली, “आह चाचू! मेरी चूत में चींटियाँ रेंग रही हैं! उफ्फ आह, कुछ करो ना!”

मैंने अवनी के चूतड़ के नीचे से हाथ निकालकर अपनी दो उंगलियाँ थूक से गीली कीं और उसके चूतड़ों के बीच से गांड का छेद टटोलकर एक उंगली धीरे से अवनी की गांड में सरका दी।

अवनी ने “आह उम्मम्म चाचू!” करते हुए अपनी गांड पीछे को उभार दी और एक हाथ से अपनी चूची पकड़कर निप्पल मेरे मुँह में डाल दी।

मैं अवनी की हार्ड निप्पल चूसते हुए उसकी गांड में उंगली अंदर-बाहर करने लगा।
अवनी बिन पानी की मछली की तरह मेरी बाहों में तड़प रही थी।

मैंने उसे होश में लाने के लिए निप्पल को दाँतों से जोर से काटा तो उसने “आउच मम्मी!” बोलते हुए मेरे मुँह से निप्पल खींच ली और मेरा लण्ड पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी।

मैंने उसकी गांड में उंगली करते हुए कहा, “बड़ी गरमी है कुतिया तेरे अंदर!”
अवनी अंगड़ाई लेकर बोली, “तो निकाल दो ना अपनी इस कुतिया की गरमी! मना कौन कर रहा है!”

मैंने कहा, “साली रण्डी की औलाद! तुम जैसी कम उम्र की लड़कियाँ मुझे इसीलिए पसंद हैं क्योंकि उनमें जब चुदाई की आग भड़कती है तो वो खुद टाँगें फैलाकर चुदवाती हैं!”

अवनी सिसकते हुए अपनी चूत मेरे लण्ड पर रगड़ते हुए बोली, “आह मेरी जान! उफ्फ कितना मस्त लण्ड है आपका! एकदम गरम लोहा है! उफ्फ, इसको मेरी गरम भट्टी में डाल दो ना!”
अवनी एकदम मस्त हो उठी थी।

मैं उसे गोद में उठाकर बेड पर ले आया और बेड पर लिटाकर उसकी टाँगें फैला दीं।

अवनी अपनी चूत के दाने को मसलते हुए मेरी आँखों में देखकर बोली, “आह चाचू, लुक एट माई पुसी! कैसी लगी ये आपको?”
मैंने लण्ड हाथ से हिलाते हुए कहा, “बहुत सुंदर! आज तक जितनी भी चूत मारी हैं, सबसे सुंदर चूत है तुम्हारी!”

अवनी खुश होकर बोली, “सच्ची चाचू?”
मैंने कहा, “हाँ, सबसे सुंदर!”

अवनी बोली, “क्या श्रेया से भी सुंदर?”
मैंने जान-बूझकर कहा, “श्रेया की चूत तो कुछ भी नहीं तुम्हारी चूत के सामने!”

अवनी ने खुश होते हुए अपने घुटनों के पीछे से दोनों टाँगें पकड़कर उठा लीं और मुस्कुराते हुए बोली, “कम ऑन चाचू! प्लीज प्यार करो ना मेरी चूत को!”

मैं बेड पर चढ़कर बैठ गया और उंगली से बहुत सारा थूक लेकर उसकी गांड पर उंगली फिराने लगा।
अवनी के दोनों छेद देखकर मेरा लण्ड बेकाबू हो चुका था।

मैंने अवनी की चूत के पास मुँह ले जाकर उसकी चूत पर भी थूका और उंगली चूत के होंठों में फिराने लगा।

अवनी हवस की आग से बुरी तरह काँप रही थी। उसने सिसकारते हुए कहा, “आई मम्मी! आह, कुछ करो! मेरे अंदर कुछ हो रहा है!”
मैंने उसकी हालत देखकर धीरे से उंगली उसकी चूत में सरका दी।

उंगली अंदर जाते ही अवनी “आह चाचू, दुखता है!”
बोलते हुए उछलकर बैठ गई और बोली, “नहीं चाचू, रहने दो! मैं नहीं कर पाऊँगी! शायद आपके लण्ड से मेरी चूत अंदर से छिल चुकी है!”

मैंने अवनी को बाहों में लेकर कहा, “अरे मेरी प्यारी बच्ची! कोई बात नहीं जान, अगर तुम नहीं चुदवा सकती तो कोई बात नहीं!”
अवनी भोला चेहरा बनाकर बोली, “चाचू, दिल तो बहुत है, पर मैं अंगुली तो डलवा नहीं पा रही! आपका लण्ड कैसे ले लूँगी?”

मैंने कहा, “कोई बात नहीं! चल, तुझे लण्ड बिना अंदर डाले जन्नत की सैर करवाता हूँ!”
अवनी मेरी आँखों में देखकर बोली, “वो कैसे चाचू?”

मैंने उसे आँख मारकर जीभ बाहर निकालकर चाटने का इशारा किया।

वो मुस्कुराकर पास में रखा तकिया खींचकर अपनी गांड के नीचे लगा कर लेट गई और टाँगें फैलाकर बोली, “आह प्लीज आओ चाचू! आह, लिक माई कंट प्लीज!”

मैंने अवनी के ऊपर झुककर उसके होंठ चूमे और कहा, “अवनी, मैं तो तेरी चूत का पानी निकाल दूँगा, पर मेरे खड़े लण्ड का क्या होगा?”
अवनी झट से बोली, “श्रेया आने वाली है ना! आप उस कुतिया की गांड में डाल लेना!”

मैंने कहा, “नहीं अवनी! मेरे लण्ड का उसूल है – ये उसी की चूत और गांड में जाता है जो इसे खड़ा करती है!”

फिर मैंने कहा, “तुम्हें पता है, अगर श्रेया होती तो बिना कुछ सोचे मेरे सामने अपनी गांड परोस देती! क्या तुम अपने चाचू को ऐसे प्यासा छोड़ दोगी?”
मेरा तीर निशाने पर लगा।
अवनी बोली, “नहीं चाचू! मैं भी आपको प्यासा नहीं छोड़ सकती! पर क्या करूँ, आपका लण्ड कोई मामूली लण्ड नहीं जिसे गांड में डलवाया जा सके!”

मैंने थोड़ा गुस्सा होते हुए कहा, “चलो ठीक है, मैं श्रेया के आने का इंतज़ार करता हूँ!”

मुझे मालूम था – अपनी लड़की अपनी ही होती है, वो मुझे तड़पता नहीं देख सकेगी।

मेरी बात सुनकर अवनी उठकर बैठ गई और मेरा चेहरा हाथों में लेकर बोली, “अरे नहीं चाचू! मैंने ऐसा कब कहा? मैं भी तो श्रेया जैसी ही हूँ ना! आई प्रॉमिस, मैं आपको उससे भी ज्यादा प्यार दूँगी!”

फिर वो मेरा लण्ड पकड़कर हिलाते हुए बोली, “और ये तो मेरी जान है! मेरा हर छेद अब इसका है! आप चाहो तो इसे मेरी गांड में भी डाल सकते हो!”
अवनी की बात सुनकर मैं उसके सामने घुटनों के बल खड़ा हो गया और दोनों हाथ कमर में रखकर लण्ड को ज़ोर-ज़ोर से झटके लगवाने लगा।

अवनी लण्ड को ऐसे ऊपर-नीचे झटके मारते देखकर ताली बजाकर ज़ोर से हँसने लगी।
हँसते-हँसते वो बोली, “ओह माई गॉड! सो ब्यूटीफुल! आप इसको बिना पकड़े कैसे झटके लगवा सकते हो? और करो ना चाचू!”

मैं बिना रुके लण्ड को ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ झटके लगवाता रहा।
अवनी छोटी ब.च्ची की तरह ज़ोर-ज़ोर से हँस रही थी।

मैंने कहा, “अवनी, तुमने इसे अपनी गांड में सैर देने की परमिशन दी है, इसी लिए ये खुश होकर डांस करते हुए तुम्हें थैंक यू बोल रहा है!”

अवनी लण्ड के ऊपर एक हाथ रखकर दूसरे हाथ से सहलाते हुए बोली, “ओह तो ये बात है!”

फिर वो लण्ड के टोपे पर चूमते हुए लण्ड से बोली, “आह मेरे बाबू को मेरी गांड में जाना है! पर बाबू, आप बहुत बड़े और मोटे हो! मेरी गांड का छेद बहुत छोटा है! प्लीज मेरी गांड फाड़ मत देना! आपको पता है, आपने पहले ही मेरी चूत अंदर से बुरी तरह छील दी है! कहीं ऐसा ना हो कि मैं आपको गांड में लेकर चलने लायक ही ना रहूँ! कल मेरा ऑफिस भी है!”

अवनी बड़ी मासूमियत से लण्ड से बातें कर रही थी।

फिर वो मुस्कुराते हुए एक बार मेरी तरफ देखकर लण्ड को मुँह में भरकर चूसने लगी।
एक तो अवनी का गर्म मुँह, ऊपर से पूरी नंगी अवनी मेरी आँखों के सामने लण्ड पर झुकी हुई थी … उसके चूतड़ पूरे फैले हुए थे।

थोड़ी देर में मेरा फौलादी अजगर जैसा लण्ड उसके गद्देदार चूतड़ों के बीच से उसकी गांड के सुरमई छेद को भेदकर अंदर जाने वाला था – ये सोचकर मेरे लण्ड की नसें फूलने लगीं।

मैंने अवनी के ऊपर झुककर उसके चूतड़ पकड़ लिए और उन्हें बुरी तरह फैला दिया।

अवनी के ऊपर झुकने से मेरा लण्ड उसके मुँह में बुरी तरह फँस गया।
वो मुझे धकेलने की कोशिश करते हुए गूँ-गूँ करने लगी।

मैंने उसके चूतड़ों पर चार-पाँच तमाचे लगाकर उसके मुँह से लण्ड बाहर खींच लिया और उसे बेड पर धकेलकर लिटा दिया।

अवनी पूरे दिल से अपनी गांड मरवाने को तैयार थी।

मैंने फुर्ती से उसकी टाँगें खोलीं और अपना मुँह उसकी चूत से सटा कर उसकी फूली हुई चूत चाटने लगा।

अवनी “आह उम्मम्म! आह चाचू!” करते हुए मेरे मुँह पर अपनी चूत पटकने लगी।

मैं बिना रुके लप-लप उसकी चूत चाट रहा था। उसकी चूत से मेरा थूक बहकर उसकी गांड तक जा रहा था।

मैंने उसकी गांड के छेद के नीचे अंगूठा रखकर थूक इकट्ठा किया और अंगूठा धीरे से अंदर सरका दिया।

दूसरे हाथ के अंगूठे से मैं उसकी चूत के दाने को मसल रहा था।
मेरी तीखी जीभ अवनी की चूत के अंदर घूम रही थी।

थोड़ी देर में अवनी “आ ईई! आस्स्स्स! आईई ईई! मम्मी! उफ्फ थोड़ा और करो ना! आह मैं मर जाऊँगी! आह चाचू!” करते हुए अपनी चूत का रस बहा दिया।

अवनी बुरी तरह चिल्लाते हुए काँप रही थी।
मैं उसकी चूत से बहते नमकीन पानी को चाट रहा था।

थोड़ी देर बाद अवनी शांत हुई तो उसने ज़ोर से मेरे बाल खींचकर मुझे अपने ऊपर खींच लिया और मेरे चेहरे पर बहुत तेज़ी से चूमने लगी।

मेरे भारी बदन के नीचे कमसिन अवनी दब चुकी थी, पर वो बड़े प्यार से “आई लव यू जानू! आह आप बहुत अच्छे हो!” बोलते हुए चूमे जा रही थी।

थोड़ी देर चूमने के बाद अवनी मेरी पीठ पर दोनों बाहें कसकर मुझसे चिपक गई और धीरे से मेरे कान में बोली, “चाचू, क्या आप मेरी गांड आज ही मारना चाहते हो?”
मैंने उसका चेहरा हाथों में कसकर, उसकी आँखों में देखकर कहा, “बिल्कुल! आज ही और वो भी अभी!”

अवनी जोश से मुझे साइड में धकेलते हुए बोली, “ठीक है! जो मेरी जान की इच्छा! बाकी मैं तो खुशनसीब हूँ जो मुझे पहली बार में ऐसा मर्द मिला जिसमे इतना दम है कि वो मुझे एक बार में ही खोलकर रख दे!”

मैंने अवनी के ऊपर से हटकर बेड पर बैठते हुए कहा, “अवनी, अच्छा ही है ना! तुम आज ही अपना सब मुझे दे दो! मैं तुम्हें इतने प्यार से खोलूँगा कि तुम एक दिन में ही पूरी रण्डी बन जाओ!”

अवनी मेरे सामने बैठकर दोनों मुठ्ठियाँ बेड पर रखकर मेरा चेहरा अपने चेहरे के पास लाकर बोली, “उम्मम्म म्म! ये बात है! तो अब मैं आपके लिए रण्डी हो गई? ठीक है, तो क्या आप इस रण्डी की कीमत नहीं दोगे?”
मैंने उसकी दोनों चूचियाँ दबोचकर मसलते हुए कहा, “बता इस कुतिया को क्या चाहिए!”

अवनी हँसते हुए मेरा लण्ड पकड़कर बोली, “चाचू, इस रण्डी को आपका ये हथौड़ा और आपका प्यार चाहिए!”
मैंने कहा, “जानू, ये तो तुम्हारा ही है! जब चाहे ले सकती हो!”

अवनी उठकर मुँह दूसरी तरफ करके घोड़ी बन गई और कमर नीचे झुका दी।

अवनी के चूतड़ पूरी तरह खुल गए। उसकी गांड का सुरमई छेद बड़ी मासूमियत से हल्का-सा खुला हुआ था – जैसे मछली का मुँह।

मुझसे रहा नहीं गया।
मैंने उसके चूतड़ थामकर अपना चेहरा उसके चूतड़ों में घुसा दिया और उसकी गांड को जीभ से कुरेदने लगा।

मैं अवनी की गांड में जीभ घुसेड़ने की कोशिश कर रहा था।
अवनी “आह चाचू! उम्मम्म! गुदगुदी हो रही है!” करती रही।

जैसे-जैसे मैं उसकी गांड को जीभ से कुरेद रहा था, वो “आह ही-ही-ही! आह उम्मम्म म्म! ही-ही! चाचू गुदगुदी हो रही है!” कर रही थी।

मैंने उसकी गांड चाटना छोड़ा, उस पर बहुत सारा थूक डाला और उंगली से थूक छेद के अंदर करके लण्ड पर भी थूक मसला और बोला, “रुक साली रण्डी! तेरी गुदगुदी अभी खत्म करता हूँ!”

जवाब में अवनी ने अपनी गांड और फैला दी।
कमसिन लड़की का हौसला देखकर मेरे अंदर का मर्द उसे चैलेंज समझ बैठा।

मैंने उसके पीछे पोजीशन ली, एक बाँह उसकी कमर में डालकर उसे जकड़ लिया और लण्ड का टोपा छेद पर लगाकर अंगूठे से थोड़ा-सा अंदर डाल दिया।

अवनी “सीसीसी! आह आराम से करना प्लीज! उम्म म्मम! आह मम्मी! देखो ना, तुम्हारी प्यारी बेटी की गांड में कितना बड़ा लण्ड जाने वाला है! आह उफ्फ!”
वह की गंदी और मादक बातें मुझे उकसा रही थीं।

मैंने धीरे से कमर हिलाकर झटका मारा तो मेरा मोटा सुपाड़ा अवनी की कसी हुई गांड में चला गया।

अवनी ने एक बार “आई ईईई! आह!” करते हुए कमर उठाकर गांड सिकोड़ी, पर उसी पल उसने वापिस चूतड़ खोल दिए।
शायद उसे सिकोड़कर एहसास हो गया था कि अब सिकोड़ने से कोई फायदा नहीं – जितना खोलूँगी उतना आराम रहेगा।

अवनी के चूतड़ खोलते ही मैंने लण्ड पर और थूक लगाकर ज़ोर से एक और झटका मारा।
लण्ड उसकी गुफा में आधे से ज्यादा चला गया।

अवनी बेड की चादर मुट्ठियों में कसकर, मुँह गद्दे में छुपाकर धीरे से “आईईई! मम्मी! आह!” करती चीखी।
मैंने उसी पल लण्ड थोड़ा बाहर खींचा और वापिस अंदर डालकर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।

धीरे-धीरे मैंने अवनी की प्यारी सी गांड में रास्ता बना दिया।
फिर मैंने एक और झटका मारकर पूरा लण्ड उसकी गांड में उतार दिया।

अवनी फिर “आह बस भी करो ना! आईई ईईईईई! मम्मी! आह प्लीज धीरे करो ना!” बोलते हुए चीखी।

इस समय मेरा लण्ड पूरा हार्ड था।
जब लण्ड हार्ड होकर किसी कुतिया के छेद में फँसा हो तो उसे कुतिया से कोई मतलब नहीं – उसे तो बस उस छेद को फाड़कर अपना थूक की पिचकारी मारनी होती है।

अब मेरा मकसद भी लण्ड से अवनी की गांड खोलकर उसमें अपना पानी बहाने का था।

मैं अवनी की बातों पर ध्यान दिए बिना उसकी गांड मार रहा था।
मेरा पत्थर जैसा लण्ड उसके रुई जैसे चूतड़ों के बीच से उसकी गांड में अंदर-बाहर हो रहा था।

मेरे हर स्ट्रोक के साथ अवनी “आह उह! आह धीरे! प्लीज चाचू स्लो!” बोल रही थी।
पर मैं उसकी कमर पकड़कर उसकी टाइट गुफा में लण्ड पेलकर मज़ा ले रहा था।

हर झटके के साथ मैं अवनी की कमर अपनी तरफ खींच रहा था, जिससे उसके चूतड़ मेरी जाँघों से टकराकर फच-फच की आवाज़ कर रहे थे।

कमरे में फच-फच, “आह चाचू! उम्मम्मम! मम्मी! आह धीरे! बहुत बड़ा और मोटा है आपका! आह सीसीसी! आईईईई! आह!” की आवाज़ें गूँज रही थीं।
मेरा लण्ड मस्ती से अवनी की गांड में रास्ता बना रहा था।

अवनी अपना हाथ पीछे लाकर लण्ड पकड़ने की कोशिश करते हुए चिल्लाकर बोली, “थोड़ा रुको भी! मैं थक गई हूँ! आह चाचू, मेरी टाँगें दुखने लगी हैं!”
एक बेचारी नंगी कुतिया शेर के पंजे में तड़प रही थी।

उसे तड़पते देख मेरे अंदर का हैवान और खूँखार हो गया।
मैंने अवनी के चूतड़ों पर दोनों हाथों से फट-फट की आवाज़ से ज़ोरदार थप्पड़ मारे और उसके दोनों कंधे पकड़कर एक पैर उसकी कमर के आगे लाकर स्पीड बढ़ा दी।

मेरा लण्ड पूरा उसकी गांड में अंदर-बाहर हो रहा था।

मैं उसे गालियाँ देते हुए चोद रहा था, “आह साली कुतिया! कितनी मस्त गांड है तेरी! रण्डी की औलाद, तेरे हर छेद को मैं इतना खोल दूँगा कि तू एक साथ दस लण्ड लेकर भी चुदासी ही रहेगी!”
“आह अवनी! आज तक मैंने तेरे जैसी मस्त रण्डी नहीं चोदी! उफ्फ साली कुतिया, क्या मस्त चूतड़ हैं तेरे! तुझे सारी उम्र मैं अपनी रखैल बनाकर रखूँगा!”

मैं अवनी से किसी खिलौने की तरह खेल रहा था।

तभी डोर बेल बजी।
अवनी बोली, “आह चाचू! लगता है श्रेया आ गई!”

मैंने उसके बाल खींचकर मुँह अपनी तरफ किया और गाल पर थप्पड़ मारते हुए कहा, “सुन कुतिया! कोई भी आए, तेरी चुदाई बंद नहीं होगी!”

तभी दोबारा डोर बेल बजी।
मैंने उसके होंठों पर ज़ोर से काटा, जिससे अवनी की चीख निकल गई।

फिर मैं झल्लाते हुए लण्ड उसकी गांड से बाहर निकाला और उसे हुक्म दिया, “साली रण्डी! तू ऐसे ही कुतिया बनकर रहेगी! मैं दरवाज़ा खोलता हूँ!”

मैं बेड से नीचे उतरकर अवनी की गांड की तरफ देखा – उसका छेद तीन इंच तक फैला हुआ था और अंदर से लाल चमड़ी दिख रही थी।

मेरे लण्ड बाहर निकालते ही अवनी गद्दे में सिर झुकाकर लंबी साँसें लेने लगी।

मैं लण्ड हिलाते हुए अवनी को देख ही रहा था कि तीसरी बार डोर बेल बजी।

मैंने दरवाज़े के पास जाकर आवाज़ दी, “कौन?”

बाहर से श्रेया की खनखनाती आवाज़ आई, “मैं हूँ चाचू, श्रेया! दरवाज़ा खोलो ना! कब से बाहर खड़ी हूँ!”

मैंने झटके से दरवाज़ा खोला।
श्रेया अंदर आकर मुझसे लिपट गई और एक हाथ से लण्ड पकड़कर बोली, “आह चाचू! इसको मेरे लिए आपने पहले से ही तैयार कर रखा है! रियली आई लव यू!”

मैंने बिना कुछ बोले दरवाज़ा बंद किया और श्रेया के बाल कसकर पकड़ लिए।

जैसे ही मैंने उसके बाल खींचे, वो नीचे गिरते हुए रोने जैसी आवाज़ में बोली, “क्या हुआ चाचू?”

मैंने उसके गाल पर थप्पड़ मारकर गुस्से से आँखों में देखकर कहा, “साली रण्डी! थोड़ी देर और बाहर अपनी माँ नहीं चुदवा सकती थी क्या? कुतिया की औलाद, देख मेरे लण्ड की हालत! इसका पानी निकलने वाला था और तू बाहर खड़ी घंटी बजा रही थी!”

श्रेया मुस्कुराते हुए उठकर बोली, “ओह तो ये बात है! अंदर चुदाई चल रही थी! ओह सॉरी चाचू, मैंने आपको डिस्टर्ब किया!”

मैं पलटकर कमरे की तरफ बढ़ गया और अवनी के पास आ गया।
अवनी के पास आकर मैं बेड पर चढ़ा और उसके मुँह में लण्ड दे दिया और अंदर-बाहर करने लगा।

तभी श्रेया अंदर आकर हमें देखकर बोली, “ओह माई गॉड! क्या सीन है चाचू!”

फिर वो अवनी की गांड गौर से देखते हुए उसके चूतड़ पर हाथ फिराकर बोली, “ओह भगवान! क्या हाल कर दिया आपने इसकी गांड का! चाचू, लगता है आपने बुरी तरह इसकी गांड मारी है!”

मैं बिना कुछ बोले अवनी के मुँह में लण्ड अंदर-बाहर कर रहा था।

फिर मैं लण्ड उसके मुँह से निकालकर उसके पीछे आ गया और गांड में थूककर एक झटके में पूरा लण्ड अंदर पेल दिया।
अवनी फिर “आह मम्मी!” बोलते हुए ज़ोर से चीखी।

मैं श्रेया की तरफ देखकर पूरी स्पीड से अवनी की गांड मारने लगा।

श्रेया मुस्कुराते हुए बोली, “चाचू, क्या मैं आप लोगों को जॉइन कर सकती हूँ?”
मैं कुछ नहीं बोला।

तभी अवनी बोली, “आह ईई ईई! श्रेया आओ ना प्लीज! उफ्फ देखो ना, मेरी क्या हालत कर दी इस कमीने आदमी ने! आह प्लीज आओ ना! मेरे में अब और हिम्मत नहीं!”

श्रेया फुर्ती से कपड़े उतारकर अवनी के सामने टाँगें फैलाकर बैठ गई।

अवनी उसकी चूत चाटते हुए “आह बस चाचू थोड़ा धीरे प्लीज! आह!” कह रही थी।

मैंने अवनी के बाल खींचकर उसे सीधा किया और श्रेया से कहा, “चल, तू इसके नीचे लेटकर इसकी चूत चाट!”

श्रेया झट से अवनी के नीचे लेट गई और मुँह उठाकर उसकी चूत चाटने लगी।

अवनी के मुँह के पास श्रेया की चूत थी, वो जीभ निकालकर उसकी चूत चाट रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने अवनी की गांड से लण्ड निकाला और बेड पर लेट गया।

मैंने अवनी को लण्ड की तरफ खींचकर लण्ड उसकी गांड पर भिड़ा दिया।

अवनी एक हाथ से लण्ड पकड़कर उस पर बैठ गई और “आह आई ईईई! आह!” करते हुए धीरे-धीरे लण्ड अंदर लेने लगी।
अवनी पूरा लण्ड अपनी गांड में लेकर उस पर उछलने लगी।

पैंतालीस किलो की अवनी नब्बे किलो के आदमी के लण्ड पर ज़ोर-ज़ोर से उछल रही थी।
हॉट गर्ल एनल Xxx करने में उसकी प्यारी चूचियाँ हवा में उछल रही थीं।

थोड़ी देर बाद मैंने उसकी कमर में हाथ डालकर उसे अपने ऊपर गिरा लिया और उसकी एक चूची मुँह में लेकर नीचे से ज़ोरदार झटके मारते हुए झड़ने लगा।
मेरे लण्ड के पानी की धार ने उसकी गांड को पूरा भर दिया।

थोड़ी देर बाद जब मैं शांत हुआ तो अवनी मेरे ऊपर से उठकर बगल में लेट गई और हाँफने लगी।

मेरा लण्ड कुंवारी गांड की लंबी चुदाई के बाद धीरे-धीरे सिकुड़ने लगा।

श्रेया, जो अवनी के सिर के पास बैठी थी, उसके बालों में हाथ फिराते हुए बोली, “ओह मेरी जान! चाचू ने तो तेरी हालत खराब कर दी! देख, तेरी चूत भी कैसे फूली पड़ी है! गांड का तो कहना ही क्या! साली, तू तो बोलती थी कि अभी किसी का लण्ड नहीं लेगी! साली, तूने तो पहली बार में ही सबसे बड़े लण्ड से माथा लगा लिया!”

मैं श्रेया की बातें सुनकर मुस्कुरा उठा।

मैंने अवनी की तरफ देखा तो उसकी हालत सच में बहुत खराब थी।
उसका चेहरा ऐसा लग रहा था जैसे वो बहुत रो चुकी हो।

अवनी आँखें बंद करके टाँगें फैलाकर लेटी हुई थी।
उसकी हालत देखकर मुझे उस पर बहुत तरस आया।

पर मैं कर भी क्या सकता था?
हर लड़की को कभी ना कभी तो अपनी चूत और गांड में लण्ड के लिए रास्ता बनवाना ही पड़ता है।

अब वो मेरे लण्ड से भिड़ बैठी तो इसमें मेरी क्या गलती?
मैंने तो उसकी चूत और गांड का उद्घाटन करके उसी का फायदा किया है – उसे जवानी के मज़े लेने लायक बनाया है।

ये सोचते हुए मैं चुपचाप उठकर बाथरूम की तरफ आ गया और मूतने लगा।
मूतने के बाद मैंने अपने मुरझाए हुए लण्ड को धोकर साफ किया।

मेरा लण्ड बुरी तरह मुरझाया हुआ था।
शायद सुबह श्रेया की चूत और अब अवनी की चूत-गांड में गड्ढा खोदने के बाद लण्ड थक चुका था।

लण्ड धोने के बाद मैंने उसे तौलिये से साफ किया और तेल से बॉल्स व लण्ड की हल्की मालिश करने के बाद कमरे में आकर अंडरवियर-बनियान पहनकर अवनी और श्रेया के पास आ गया।

आगे की कहानी की प्रतीक्षा करें.
अब तक की हॉट गर्ल एनल Xxx कहानी पर आपके मेल और कमेंट्स आमंत्रित हैं.
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