मैंने प्‍लेबाय बनकर मैडम की चुत चोदी

जिगोलो प्लेबॉय कहानी में मैं रात पढ़ते हुए चाय पीने सड़क पर आ गया. कुछ देर बाद मेरे पास आकर एक सफेद रंग की गाड़ी रुकी, शीशा नीचे हुआ और गाड़ी में से आवाज़ आई ‘चलोगे?’

दोस्तो … कैसे हैं आप सब?
आशा करता हूँ कि आप सब ठीक ही होंगे और चुदाई का भरपूर मज़ा ले रहे होंगे.

कहानी शुरू करने से पहले मैं आप सबको अपने बारे में बता देता हूँ.

मेरा नाम निखिल है और मैं अभी इंदौर में रह रहा हूँ.
मैं यहां पर रहकर कॉम्पिटिशन की तैयारी कर रहा हूँ और इस घटना के बाद एक जाना माना प्लेबॉय भी बन गया हूँ.

मेरी हाइट 6 फुट है और दिखने में भी एक अच्छा-खासा मर्द हूँ.
मेरी उम्र 21 साल है.

ये जिगोलो प्लेबॉय कहानी आज से एक साल पहले की है जब मैं इंदौर में नया-नया आया था.

मैं रूम से कोचिंग और कोचिंग से लाइब्रेरी जाया करता था.
लाइब्रेरी में देर रात तक बैठा करता था.

एक रात मैं लाइब्रेरी में बैठा था तो पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था.
सोचा क्यों न चाय पी आऊं.

उस समय रात के करीब एक बजे होंगे.
इंदौर में रात को दुकानें खुलना एक आम बात है.

मैं चाय पीकर एक खाली जगह देखकर एक सुनसान से रास्ते पर बैठ गया.

कुछ देर बैठने के बाद मेरे पास आकर एक सफेद रंग की गाड़ी रुकी.
मैंने ज्यादा उस पर ध्यान नहीं दिया, सोचा होगा कोई होगा.

लेकिन दो-तीन मिनट रुकने के बाद जैसे ही गाड़ी का शीशा नीचे हुआ और गाड़ी में से आवाज़ आई ‘चलोगे?’
इस आवाज के साथ मेरी नजरें उस ओर गईं तो गाड़ी का गेट खोल दिया गया.

मैं कुछ समझ नहीं पाया, लेकिन मैंने कहानियों में पढ़ा था कि लड़कियां प्लेबॉय को लेने आती हैं.
मेरी नजरों में एक हसीन सा चेहरा आ गया.

हम दोनों की नजरें मिलीं तो उन्होंने बोला- चलोगे!
मेरा सर यंत्रवत हां में हिल गया.

मैंने चाय का कप बेंच पर रख दिया और एक पांच का नोट कप के नीचे दबा दिया.

मैं पहले तो बहुत डर रहा था लेकिन डरते-डरते गाड़ी में बैठ गया.

यह मेरा पहली बार का मामला था और वह भी एक अनजान शहर में!
डर लगता ही है.

फिर भी मैं बहुत डरते-डरते गाड़ी में बैठ गया.

मैं आगे बढ़ने से पहले आपको उस मैडम के बारे में बता देता हूँ.
मैडम की उम्र लगभग 28-29 के करीब होगी.
अगर फिगर की बात की जाए तो उनका फिगर 34-30-36 के करीब का रहा होगा.

बड़ी ही कयामत माल लग रही थीं यार, कुछ पूछो मत!

उनकी जितनी तारीफ की जाए उतना कम है.
उन्होंने एक नीले कलर की साड़ी पहनी हुई थी.
उस साड़ी में वे सच में कांटा माल लग रही थीं.

मैं जैसे ही गाड़ी में बैठा, गाड़ी चल पड़ी.
पूरे रास्ते मेरे मन में एक अलग ही घबराहट हो रही थी.

पूरे रास्ते हमारी कुछ भी बात नहीं हुई.

कुछ देर चलने के बाद गाड़ी एक घर के पास जाकर रुकी.

उन्होंने गाड़ी पार्क करके अन्दर की ओर कदम बढ़ाए और मुझसे पीछे पीछे आने का कहा.
मैं उनके पिछवाड़े को निहारता हुआ अन्दर आ गया और उधर एक बहुत ही गुदेगुदे से सोफे पर बैठ गया.

वे मुझे देख कर एक बार ऐसे आश्वस्त सी हुईं मानो उनके लिए एक मजबूत ठोकू मिल हो गया हो.

वे वापस घूमी और अन्दर चली गईं.

थोड़ी देर बाद मैडम मेरे लिए चाय लेकर आईं.
हम दोनों ने मिलकर चाय पी और कुछ बातें की.

उन्होंने मेरे बारे में पूछा – जैसे नाम क्या है, कहां से हो आदि.
ये सब बातें हुईं, तो अब तक मैंने अपने अन्दर का आत्मविश्वास काफी बढ़ा लिया था.

थोड़ी देर बाद जैसे ही चाय खत्म हुई तो वे उठ खड़ी हुईं और मुझे इशारा करती हुई एक बेडरूम की तरफ बढ़ गईं.
मैं यंत्रवत उनके पीछे पीछे चल दिया.

कुछ ही पलों बाद वे मुझे अपने बेहद सुसज्जित बेडरूम में लेकर आ गईं और घूम कर मुझे देखने लगीं.
मैं उन्हें देख रहा था और उनके रूप सौन्दर्य का दीदार कर रहा था.

उनके तने हुए दूध मुझे उत्तेजित करने लगे थे.

वे बड़ी अदा से किसी फैशन परेड करने वाली मॉडल की तरह कैटवाक करती हुई बड़ी नफासत से धीरे-धीरे चलती हुई मेरे करीब आने लगीं.

सच बताऊं, मेरे से भी कंट्रोल नहीं हो रहा था.
जिसके सामने हुस्न की परी हो और वह चुदने को खुद कह रही हो, तो एक जवान लौंडे को और क्या चाहिए!

जैसे ही मैडम मेरे करीब आईं, तो उनके बदन की मादक महक मुझे बौराने लगी.
मैंने हिम्मत करके अपना मुँह उनके चेहरे के समीप कर दिया.
वे भी अपने होंठ आगे करके मुझ पर अपने नथुनों से निकलती गर्म सांसें छोड़ने लगीं.

मैंने हिम्मत की और अपने होंठों को मैडम के होंठों से चिपका दिए.
वे लरजते होंठों से मेरे नथुनों से निलने वाली गर्म सांस को आत्मसात करने लगीं.

मैंने आंखें बंद कीं और एक लंबी लिपकिस करना शुरू कर दी.
उनकी तरफ से भी रिस्पॉन्स मिलने लगा और हम दोनों होंठों से होंठों का रस पीने लगे.

मैंने उनकी गर्दन को अपने हाथों से पकड़ा और उनके मुँह में अपनी जीभ ठेल दी.
मैडम ने मेरी जीभ अपने मुँह में दबा ली और मेरी जीभ को निचोड़ कर उसका रस पीने लगीं.

कभी वे मेरे मुँह में अपनी जीभ दे देतीं, तो मैं उनकी जीभ से उनकी मीठी लार का रस पीने लगता … कभी वे मेरी लार को पीने लगतीं.
करीब 15 मिनट तक मैंने उनके होंठों का रसपान किया.

सच में क्या गुलाबी होंठ थे यार …
एकदम मुलायम और रसभरे होंठ थे.

धीरे-धीरे मैंने उनकी गर्दन को छोड़ा और एक हाथ से उनके मम्मों को सहलाने लगा.

आह बेहद मस्त और मखमली दूध थे … एकदम मलाई जैसे मुलायम!
उनके स्तनों की साइज़ की बात की जाए तो करीब 34 इंच के ही रहे होंगे.
दबाने में एकदम सॉफ्ट और दिखने में एकदम ठोस … और उन स्तनों के ऊपर उनके निप्पल एकदम बेर के जैसे गोल व कड़क चूचुक थे.

मैंने उनके एक दूध को मसलते हुए दबाया.
तो मैडम के मुँह से एक मीठी कराह निकल गई- आह!

मैंने दूध को छोड़ दिया तो उन्होंने वापस मेरे हाथ से अपने दूध को मसलवाना चालू कर दिया.
मैं समझ गया कि इनको मम्मों को निचुड़वाने का मन है.

मैंने अपने दोनों हाथों से उनके दोनों दूध पकड़ लिए और होंठ चूमते हुए दूध मसलने लगा.

काफी समय तक मैंने उनके स्तनों का मर्दन किया, फिर उनके दूध कपड़ों के ऊपर से मुँह में भर कर बारी बारी से दोनों मम्मों का रसपान किया.

क्या बताऊं, इतना मज़ा आ रहा था कि बता भी नहीं सकता कैसा फील हो रहा था.
मेरा तो इतने में ही लंड अकड़ गया था और लंड फटने को होने लगा था.

धीरे-धीरे मैंने उनके सारे कपड़े उतार दिए और उन्होंने मेरे भी सारे कपड़े उतार दिए.
हम दोनों एक-दूसरे के कपड़े उतार कर पूरे नंगे हो गए थे.

उनके घर पर कोई नहीं था तो हम बेफिक्र होकर मज़ा ले रहे थे.

रात अपनी थी तो किसी बात की कोई जल्दी थी ही नहीं.

हम सब काम आराम-आराम से कर रहे थे क्योंकि जल्दबाज़ी में मज़ा नहीं आता.
इसलिए मैं आराम-आराम से उनके हुस्न का रस ले रहा था.

जैसे ही मैंने मैडम की पैंटी निकाली, तो मैं उनकी चूत देखकर एकदम दंग रह गया.

एकदम गोरी-चिट्टी, और सफाचट चुत देख कर समझ आ गया कि आज मुझसे चुदने के लिए ही झांटों का मुंडन किया गया है.

मैं नीचे अपने घुटनों पर बैठ गया और जैसे ही चूत के करीब अपनी नाक को ले गया, तो चुत से स्ट्रावेरी की महक आ रही थी.

मुझे सेक्स कहानियों के जरिए मालूम था कि छिनाल लड़कियां अपनी चुत चुसवाने के लिए अपनी चुत में तरह तरह सुगंध लगाती हैं ताकि मर्द उनकी चुत को स्वाद लेकर चूसें और चाटें.

मैं भी स्ट्रावेरी की महक से महकती चुत को अपने सामने रस टपकाती देख कर खुद को रोक ही न सका और एकदम से उनकी चूत पर झपट पड़ा.

मैडम की गुलाबी चुत को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.
गजब की खुशबू आ रही थी … एकदम मादक और मर्दों को घायल कर देने वाली.

मैंने जैसे ही मैडम की चूत पर मुँह रखा, तो वे एकदम से सिहर गईं.
मैडम की चूत अन्दर से एकदम सुर्ख गुलाबी थी और चूत एकदम गीली हो चुकी थी.

चूत से नमकीन पानी बहने लगा था.
मैंने जीभ से रस को चाटा तो मैडम की चूत का पानी का स्वाद एकदम शैम्पेन जैसा था.

मैं पिल पड़ा और जीभ को चुत के अन्दर तक पेल कर उसकी दीवारों को चाट लिया.
कसम से … चूत चाटने में इतना मज़ा आया कि क्या ही बताऊं!

उधर मैडम का हाल भी बुरा हो गया था.
वे मेरे सर को अपनी चुत में ऐसे दबा रही थीं मानो मुझे सर के बल अपनी चुत में ही घुसेड़ लेंगी.

वे अपने दोनों हाथों से मेरे मुँह को अपनी चूत पर दबाने लगीं और मुँह से सिसकारियां निकालने लगीं.
मैं उनकी चूत में दो उंगलियां डालकर आगे-पीछे करने लगा, जिससे उनको और जोश चढ़ने लगा.

वे मेरा मुँह पकड़ कर अपनी चूत पर और ज़ोर से दबाने लगी और अतिरेकता की हद को पार करती हुई सिसकारियां भरने लगीं.

उनकी इस मद्धिम आवाज में कामुकता मुझे पागल कर रही थी ‘आह आह … ऊँह खा ले साले …’

मैंने करीब 20 मिनट तक मैडम की स्ट्रावेरी के स्वाद वाली चुत चाटी.

इस दौरान उनका शरीर एकदम अकड़ने लगा और वे ज़ोर-ज़ोर से ‘आह … आह उह …’ करती हुई चिल्लाने लगीं.

‘आह और ज़ोर से चाट मादरचोद … साले बहन के लौड़े मेरी चुत को चाट ले हरामी!’ यही सब कहती हुई मैडम का पानी एक बार निकल गया और वे निढाल होकर मेरे मुँह पर अपनी चुत टिका कर ढेर हंसने लगीं.
मैंने उनकी दोनों जांघों से उन्हें पकड़ कर साधा और उनकी चुत का पूरा पानी चाट चाट कर साफ कर दिया.

कुछ ही देर में मैडम भी संयत हो गई थीं.
अब उनसे सब्र नहीं हो रहा था.

वे कहने लगीं- अब और इंतज़ार मत कराओ .. प्लीज अब डाल दो जल्दी से … मुझे और मत तड़पाओ!

मैं भी थक गया था तो उनके बिस्तर पर लेट गया.
मेरा लंड अभी भी खड़ा था और हवा में तनतनना रहा था.

उन्होंने दराज से सिगरेट निकाली और उसे सुलगा कर मेरा खड़ा लंड अपने हाथ से सहलाने लगीं.
थोड़ी देर तक सिगरेट पीते हुई मैंने ने लौड़े को आगे पीछे किया और बिस्तर पर ही चढ़ गईं.

मैं सोच रहा था कि मैडम लंड चूसेंगी … लेकिन उन्होंने मेरे झांटों भरे लंड को मुँह में नहीं लिया.

कुछ देर बाद मैडम ने लंड को पकड़ा और उसे अपनी चूत पर सैट करने लगीं.

जैसे ही लंड ने चुत के मुँह में अपना मुँह डाला … मैंने एक ज़ोर का धक्का दे मारा.
उनके मुँह से एक मीठी सी चीख निकल गई- आह्ह … बहुत मोटा है तेरा … जरा धीमे धीमे करो न!

मैं अपनी गांड उठा कर उन्हें धीरे-धीरे चोदने लगा और उन्हें अपनी तरफ झुका कर उनके दोनों दूध बारी बारी से पीने-चूसने और मसलने लगा.

कभी मैं मैडम के होंठों पर किस करने लगता तो कभी उनके स्तनों को दबाकर चूसने और दबाने लगता.
नीचे मेरा लंड उनकी चूत में चट-चट की आवाज़ करता हुआ शंटिंग कर रहा था.

मैडम दुलकी चाल से लौड़े की सवारी कर रही थीं.
जब वे सीधी बैठ कर लंड की सवारी कर रही थीं, तो उन्होंने अपने दोनों हाथ अपने सर के पीछे रख लिए थे … जिससे उनके दोनों दूध मस्त थिरक रहे थे और उनकी मादक आवाज से पूरा रूम गूँज रहा था.

सच में क्या जन्नत का मज़ा आ रहा था उनकी चूत चोदने में!
मैडम की चुत भी एकदम आग की तप्त भट्टी की तरह गर्म थी, जिसके अहसास से मेरे लौड़े की मस्त मालिश हो रही थी.

करीब 20 मिनट की चुदाई के साथ हम दोनों एक साथ झड़ गए और चिपक कर लेट गए.
पहली बार चुत का मजा लिया था मैंने.

तभी वे बोलीं- तेरा फर्स्ट टाइम था क्या?
मैंने कहा- हां!

वे ऐसे मुस्कुरा दीं, मानो उन्होंने कुंवारे लंड से चुदने में ज्यादा मजा आ गया हो.

थोड़ी देर रुकने के बाद हम दोनों दोबारा शुरू हो गए.
उस रात करीब हम दोनों ने तीन बार चुदाई की.

मैडम मेरे लंड से चुत चुदवा कर पूरी तरह से संतुष्ट हो गई थीं.

फिर उन्होंने मुझे सुबह के करीब 5 बजे उसी जगह पर छोड़ दिया, जहां से लिया था.
जाते समय उन्होंने मेरा नंबर लिया और एक लिफाफा भी पकड़ा दिया.

जाते वक्त मैडम ने एक लंबा सा हग और एक लिप किस करते हुए कहा- अब झाड़ियों की सफाई करके रखा करो … तभी चूसने का मन होगा.
मैं हंस दिया.

इसके बाद मैं कार से बाहर निकल आया.

उसके बाद उन्होंने अपनी कई सहेलियों को मेरा नंबर देकर उन्हें मुझसे चुदवाया.

अभी तक मैं जिगोलो प्लेबॉय बनकर कई भाभियों को चोद चुका हूँ.
अब मेरा लंड हर वक्त चिकना रहता है क्योंकि न जाने किसकी चुत कब चुदाई के लिए मेरे लंड को पकड़ कर बिस्तर में ले जाए.

आपको मेरी जिगोलो प्लेबॉय कहानी कैसी लगी? ईमेल ज़रूर करें.
अपनी दूसरी सेक्स कहानी लेकर जल्द ही हाज़िर होऊंगा.
निखिल
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