बेक सेक्स कहानी में मेरी सहेलियां अपनी चुदाई की कहानियों से मुझे गर्म करती थी पर मुझे डर था कि चूत की सील टूटने से पति को शक हो जाएगा. तो मैंने गांड सेक्स की सोची.
हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम नेहा है और मैं 23 साल की हूँ. मैं उत्तर प्रदेश के एक शहर में रहती हूँ.
मेरी इस सेक्स कहानी में आप सब का स्वागत है.
ये बेक सेक्स कहानी पूरी तरह सच्ची घटना पर आधारित है, बस नाम और जगहें काल्पनिक हैं.
मेरा फिगर 36-32-38 का है. मेरा बदन गोरा और मलाई जैसा है. अक्सर लड़कों की वासना से भरी नज़रें मेरे मोटे-मोटे चूचे और भारी गांड पर अटकी रहती हैं.
मुझे भी मज़ा आता है, इसलिए मैं जानबूझ कर उन्हें रिझाती रहती हूँ.
ये बात कुछ महीने पहले की है जब मैं जॉब के लिए दिल्ली आई थी.
वहां मैं दो और लड़कियों के साथ किराए के फ्लैट में रहती थी.
मेरी दोनों रूममेट्स के बॉयफ्रेंड थे पर मैं सिंगल थी.
वे दोनों मेरे सामने अपनी चुदाई की कहानियां पूरी तन्मयता से सुनाया करती थीं.
उनकी सेक्सी बातें सुन-सुनकर मेरी चूत में भी खुजली होने लगती थी और मन में चुत चुदवाने के अरमान जाग जाते थे.
एक दिन जब मैंने एक सहेली से पूछा कि चुत शादी के पहले खुल गई तो क्या शादी के बाद पति को मालूम नहीं चलेगा?
वह बोली- हां यह बात तो है, लेकिन चुत की आग बुझवाने के लिए चुत चुदवाना जरूरी है बन्नो!
हम दोनों इस बात को लेकर गर्म गर्म बातें करने लगीं.
तभी एक ने कहा- तू गांड मरवा ले किसी से … बेक सेक्स करने से तेरे पति को गांड की सील का पता नहीं चलेगा!
मैं खुश हो गई कि इसने यह सही तरीका बताया.
तभी वह बोली- गांड मरवाना इतना आसान नहीं होता है. इसके लिए गांड को ढीला करने की तुझे कोशिश करना पड़ेगी!
मैंने उससे बेक सेक्स का मजा लेने के लिए गांड ढीली करने की तरकीब पूछी तो उसने गूगल पर सर्च करके मुझे लिंक भेज दी और बोली- सर्च करने पर तुझे इसी तरह की और भी लिंक मिल जाएंगी.
कुछ देर बाद वे दोनों अपने अपने काम पर चली गईं.
मैंने उस लिंक को खोल कर पढ़ा.
तो मालूम हुआ कि गांड को ढीला करने के लिए निरंतर प्रयास करना पड़ेगा.
मैं कोशिश करने लगी.
सबसे पहले मैंने गोल वाला मोटा सा पेन खरीदा और उसमें तेल लगा कर गांड में करना चालू किया.
चिकने पेन को गांड में करने से मजा आने लगा.
धीरे धीरे मैं उस पेन को गांड में रख कर काफी देर देर तक चलने लगी तो गांड में काफी गुदगुदी होती.
अब अगला स्टेप गांड में बट प्लग लगा कर मजा लेने का था तो मैंने ऑनलाइन बट प्लग मँगवाया और अपनी गांड में बट प्लग लगा कर रखने लगी.
इस तरह से मेरी गांड खुल गई थी.
इस दौरान मेरी सहेलियां मुझसे इसी मुद्दे पर बात करतीं.
एक सहेली हंसी ठिठोली करती कि गांड मरवाने के लिए मर्द भी तो खोज ले बन्नो!
दूसरी सहेली भी मेरे साथ खूब मजे लेती.
जब वे दोनों मेरे अन्दर आग लगा कर चली जातीं तो मैं अकेले में पोर्न देखकर अपनी चूत मसल-मसल कर और गांड खोद कर झड़ जाती थी.
ऐसा कई दिन चला, पर अब मुझे गांड में कम मजा आता था और मेरी चूत की प्यास दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही थी.
एक दिन मैं घर में अकेली थी और पॉर्न देख रही थी.
तभी दरवाज़े पर खटखटाहट हुई.
मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने 6 फीट का लंबा, कोई 25-26 साल का हैंडसम लड़का खड़ा था.
मैं उस वक्त सिर्फ नाइटी में थी और मैंने ब्रा भी नहीं पहनी थी.
जिस वजह से मेरे मोटे चूचे एकदम उभरे हुए थे और निप्पल एकदम से फूले हुए थे.
वह मर्द बस मेरे मम्मों को घूरे जा रहा था.
मैंने पूछा तो उसने बताया- मेरा नाम शरद है. मैं बगल वाले फ्लैट में अकेला रहता हूँ. आपकी रूममेट का सामान देने आया था.
उसने सामान दिया और चला गया.
ये हमारी पहली मुलाकात थी.
फिर हम बार-बार मिलने लगे.
कभी रास्ते में, कभी किसी काम से.
एक दिन वह मुझे ग्राउंड में मिला तो उसने मेरा नंबर मांगा और अपना देकर बोला- हम पड़ोसी हैं ना, कभी न कभी काम आ ही जाएगा!
रात को उसने मैसेज किया, हाल-चाल पूछा.
ऐसे ही हमारी दोस्ती हो गई और रोज़ देर रात तक चैट होने लगी.
एक दिन उसने कहा- क्यों न हम मेरे घर मिलें और साथ में डिनर करें?
मैंने तुरंत हां कर दी और अगले दिन का प्लान पक्का हो गया.
मैंने सोच लिया था इसके लंड को अपनी गांड में लेकर देख लूँगी.
अगली शाम मैं तैयार होकर लाल कलर की टाइट ड्रेस पहनी, लंबे बाल खोलकर उसके घर पहुंच गई.
उसने दरवाज़ा खोला तो वह मुझे देखता ही रह गया.
उसके मुँह से जब यह निकला कि ‘वाह नेहा … कितनी हॉट लग रही हो’ सच में मुझे अन्दर तक बड़ी खुशी हुई.
उसने मुझे अन्दर बुलाया.
हम दोनों ने खूब बातें कीं, पर उसकी नज़रें मुझसे हट ही नहीं रही थीं.
फिर हमने साथ डिनर किया.
डिनर के बाद मैं उठ कर जाने लगी तो उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और पास बिठा लिया.
फिर बोला- अभी कहां जा रही हो? क्यों न आज वाइन के दो ड्रिंक्स साथ में हो जाएं?
मैंने हंसकर हां कर दी.
हम दोनों बैठकर वाइन ड्रिंक करने लगे.
अब दोनों पर नशा चढ़ने लगा था.
तभी उसने पूछा- तेरा कोई बॉयफ्रेंड है क्या?
मैंने मना किया.
तो वह मेरे और करीब आया और धीरे से बोला- तो क्या तू आज रात के लिए मेरी गर्लफ्रेंड बन जाएगी?
ये सुनकर मैं चौंक गई.
वह मेरे बिलकुल पास आ गया और फुसफुसाया- जिस दिन से तुझे देखा है नेहा, उसी दिन से तुझे अपना बनाना चाहता हूँ … तू बहुत सेक्सी है यार … बहुत ज्यादा हॉट है!
इतना कहते ही शरद ने मुझे ज़ोर से अपनी तरफ खींच लिया.
मैं बोली- तुम पागल हो गए हो क्या?
उसने हंसते हुए कहा- हां नेहा … तेरे लिए पूरी तरह पागल हो गया हूँ बस आज एक बार मेरी बांहों में आ जा!
मैं भी नशे में चूर थी और समझ गई थी कि आज मेरी गांड की प्यास बुझने वाली है.
फिर भी मैंने थोड़ा नाटक किया.
उसने मुझे अपनी गोद में खींच लिया और पागलों की तरह किस करने लगा.
मैंने पहले तो धक्का दिया, पर अगली बार मैंने उसे रोकने की कोशिश ही नहीं की.
हम दोनों के होंठ एक-दूसरे में खो गए.
किस करते-करते हमने एक-दूसरे के सारे कपड़े उतार दिए.
मेरी चुत पसीज गई थी और उसमें से पानी निकलने लगा था.
अब मैं सिर्फ लाल ब्रा-पैंटी में थी और वह सिर्फ अंडरवियर में.
मैंने उसे बेड पर धकेला, उसके ऊपर चढ़ गई और अपनी गीली चूत उसके लौड़े पर रगड़ने लगी.
‘आह्ह्ह … कितना मज़ा आ रहा है!’
हम दोनों आहें भर रहे थे.
फिर मैंने उसका अंडरवियर उतारा और उसका मोटा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.
कुछ ही देर में उसका लंड लोहे जैसा कड़क हो गया.
उसने मुझे अपने ऊपर से उठाया, बेड पर पटक दिया और मेरे ऊपर चढ़ गया.
वह मुझे ऐसे चाट रहा था जैसे कोई भूखा शेर आइसक्रीम चाट रहा हो.
वह मेरे मोटे चूचे चूसने लगा, पैंटी के ऊपर से ही चूत रगड़ने लगा.
पूरे पांच मिनट तक ऐसा चलता रहा.
अब मेरी चूत पूरी तरह से टपक रही थी और लंड के लिए तड़प रही थी.
मैं भूल गई थी कि चुत में लंड नहीं लेना है बल्कि गांड मरवानी है.
दूसरी तरफ शरद को समझ में आ गया था कि मैं चुत चुदवाने के लिए मचल रही हूँ.
उसने झटके से मेरी ब्रा-पैंटी फाड़ दी और गंदी-गंदी बातें बोलने लगा- साली रंडी तेरी चूत को कितनी प्यास लगी है … आज इसका पूरा भोसड़ा बना दूँगा!
उसके मुँह से ये गालियां सुनकर मुझे और जोश चढ़ गया.
मैंने अपनी टांगें खोल दीं और उसे गांड की तरफ इशारा कर दिया.
उसे समझ में आया कि मैं चुत के लिए इशारा कर रही हूँ.
उसने अपनी तीन उंगलियां एक साथ मेरी चूत में ठूँस दीं और ज़ोर-ज़ोर से अन्दर-बाहर करने लगा.
मैं चिल्ला उठी- आह्ह्ह … ओह्ह्ह … आआ आह्ह्ह … मम्म्मीईई मर गई! उधर नहीं … पीछे के लिए कहा था.
वह मेरी सुन ही नहीं रहा था.
कुछ देर में मैं मस्त होने लगी.
मैंने उससे कराहते हुए कहा- अब तू चुत ही चोद दे मेरी मादरचोद … मुझसे सहा नहीं जा रहा बुझा दे … आह मेरी चूत की आग … फाड़ दे आज मेरी चूत को!
ये सुनते ही उसकी आंखें लाल हो गईं.
उसने अपना मोटा लंड मेरी चूत पर सैट किया और एक ज़ोरदार धक्का मारा.
उसका पूरा लंड अन्दर घुसता चला गया.
लौड़े की चोट से मैं ज़ोर से चीखी- आआ आह्ह्ह्ह … मर गईईई!
पर वह कहां रुकने वाला था, साला ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा.
‘आह रंडी क्या मस्त चूत है तेरी ले … ले बहन की लवड़ी … आह आज तो तुझे पूरी रात चोदूँगा बहनचोद!’
वह मुझे बीस मिनट तक लगातार चोदता रहा.
फिर हम दोनों एक साथ झड़े.
उसने अपना सारा गर्म माल मेरी चूत में ही छोड़ दिया.
उसका और मेरा पानी मिलकर मेरी चूत से बाहर बहने लगा.
मैं उठने लगी तो उसने मुझे फिर से खींच लिया और अपना गीला-पिचका लंड मेरे मुँह में ठूँस दिया- अभी कहां जा रही है साली अभी तो तेरी गांड भी फाड़नी बाकी है!
मैं गांड मरवाने की बात सुनकर खुश हो गई.
उसने अपना 8 इंच का मोटा लंड मेरे गले तक घुसा दिया और दस मिनट तक मेरा मुँह चोदा.
फिर लंड कड़क हुआ तो उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा.
जैसे ही मैं घोड़ी बनी, उसने मेरी गांड पर दो ज़ोरदार थप्पड़ मारे.
मेरी गांड एकदम लाल हो गई.
उसने लंड पर थूक लगाया और ज़बरदस्ती मेरी गांड में घुसा दिया.
मुझे बहुत दर्द हुआ, मैं चीखी, पर उसे कोई रहम नहीं आया.
कुछ देर बाद जब गांड ने लंड से दोस्ती कर ली तो मुझे बहुत मजा आने लगा.
वह भी मेरे दूध मसलते हुए मुझे चोद रहा था.
वह बोला- तुम्हारी गांड तो बड़ी रसीली है … गांड मारने में तो बहुत ज्यादा मजा आ रहा है!
मैंने कहा- हां आज से पहले कभी किसी की गांड मारी भी है तुमने?
वह बोला- नहीं जान … गांड पहली बार मार रहा हूँ! क्या तुमने अब तक गांड ही मरवाई है … पर तुम तो कह रही थीं कि तुम्हारा कोई ब्वॉयफ्रेंड ही नहीं है?
मैंने हंस कर कहा- हां मेरा कोई ब्वॉयफ्रेंड नहीं है. बस मैं चुत बचाने के चक्कर में अपनी गांड को खुद ही ढीली करती रही कि मर्द का सुख पीछे से ही ले लूँगी!
वह मेरे दूध दबाता हुआ बोला- मेरी जान, गांड मरवाने से सुख मिलता है, लेकिन असली सेक्स का सुख सिर्फ चुत चुदवाने से मिलता है. यह नेचुरल होता है, जबकि गांड मरवाना अप्राकृतिक मैथुन कहलाता है.
मैं समझ गई थी कि गांड चुदाई को अप्राकृतिक मैथुन क्यों कहा जाता है … लेकिन सच कहूँ तो मुझे चुत चुदाई से ज्यादा मजा गांड मरवाने में आया था.
हम दोनों मस्ती से चुदाई का मजा लेते रहे.
दस मिनट बाद वह मेरी गांड में ही झड़ गया.
फिर वह मुझे बाथरूम ले गया, शॉवर चालू किया और पानी के नीचे मेरी एक टांग उठाकर फिर से गांड चोदने लगा.
उसके बाद हम दोनों नंगे ही बाहर आ गए और बिस्तर पर लेट कर एक-दूसरे से लिपट कर सो गए.
अब तो कभी उसके घर, कभी मेरे घर – हम दोनों आगे पीछे दोनों तरफ से यानी फ्रंट और बैक सेक्स का मजा लेते हुए बेपनाह चुदाई करते थे.
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