होली की हुड़दंग में घर घर हुई चुदाई

पोर्न होली चुदाई कहानी में मैं होली खेलने निकला तो पड़ोस में जिस घर में भी गया तो वहां लंड चूत की होली का खेल देखा. उन लोगों ने मुझे भी अपने साथ शामिल कर लिया.

इस बार की होली बड़ी मजेदार थी दोस्तो!
पूरी घटनाएँ इस पोर्न होली चुदाई कहानी में पढ़ें.

मेरा नाम अनुज है और हमारे मोहल्ले में होली कुछ ज्यादा ही होती है और खुल कर होती है।

होली खेलने के लिए मैं पड़ोस की काजल भाभी के घर पहुँच गया तो वह बड़े रोमांटिक मूड में बोली- इस बार की होली रंग के साथ साथ लण्ड की भी होगी। रंग भी डाला जायेगा और लण्ड भी डाला जाएगा, लण्ड पेला जायेगा, लण्ड घुसेड़ा जायेगा। चाहे चूत हो या गांड हर जगह लण्ड पेला जायेगा।

यह सुनकर मेरा लण्ड साला खड़ा हो गया।

फिर हम दोनों ने एक दूसरे को खूब रंग लगाया।

अचानक भाभी रंग लगाते लगाते मेरे पजामा का नाड़ा खोल डाला।
पजामा नीचे गिरा तो मैं नंगा हो गया।

भाभी ने लण्ड पकड़ लिया तो लण्ड और ज्यादा टन्ना गया।
उसने घुटनों के बल बैठ कर लण्ड मुंह में भरा और चूसने लगी।

मैंने कहा- भाभी लण्ड बाहर निकालो … नहीं तो मैं झड़ जाऊंगा।
लेकिन वह नहीं मानी और लण्ड मेरा तब तक चूसती रही जब तक मैं झड़ नहीं गया।

मेरा पूरा वीर्य भाभी के मुंह में भर गया और वह सारा का सारा गटक गयी।

मैं जब चलने लगा तो बोली- अनुज, अब आना तो मुझे चोद कर जाना।
भाभी की इस बात ने मुझे बुरी तरह झकझोर दिया।

फिर मैं अपने दोस्त मनू के घर होली खेलने पहुँच गया।

इत्तिफाक से उसका दरवाजा उढ़का हुआ था, अंदर से बंद नहीं था, खुला था।
तो मैं बेधड़क उसके बेडरूम में चला गया।

अंदर जो हो रहा था उसे देख कर मैं दंग रह गया।
मैंने कभी सोचा भी न था कि ऐसा होता होगा।

मैंने देखा की मनू अपनी माँ चोद रहा है।
उसकी माँ एकदम नंगी नंगी चित लेटी हुई है और मनू नंगा उस पर चढ़ा हुआ है और मस्ती से चोद रहा है उसका भोसड़ा।

इतना ही नहीं, मनू की बहन रूपा अपनी माँ के मुंह पर नंगी नंगी बैठी हुई अपनी चूत चटवा रही है।

मजे की बात यह थी कि तीनों के बदन पर रंग बुरी तरह लगा हुआ था।

माँ बेटी की चूचियाँ, चूतड़, गांड, हाथ, पैर, मुंह सब पर बुरी तरह रंग से सने हुए थे।

मनू के चिकने लण्ड पर भी रंग लगा हुआ था।
मैं समझ गया कि इन तीनों ने पहले खूब रंग खेला होगा और अब तीनों मिलकर चुदाई कर रहे हैं।

यह सब देख कर मेरी आँखें खुली की खुली रह गईं।

मनू की मम्मी का नाम है मिसेज रश्मि!
वे मनू की सौतेली माँ है. और रूपा भी उसकी सौतेली बहन है.

मुझे देख कर रश्मि आंटी बोली- अरे बेटा अनुज, तुम भी पजामा खोल कर मेरे पास आ जाओ और चोदना शुरू कर दो। आज के दिन चुदाई करने में मजा आता है।

ऐसा कह कर उसने मुझे अपने पास बुलाया और मेरे पजामा का नाड़ा खोल डाला।
पजामा नीचे गिरा तो मेरा लण्ड टनटना कर खड़ा हो गया.

आंटी ने मेरा लण्ड अपनी बेटी रूपा को पकड़ा दिया और कहा- ले बुरचोदी रूपा, इसका लण्ड अपनी चूत में पेलवा ले. तुझे साल भर लण्ड खूब मिलते रहेंगे।

रूपा लण्ड पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगी.
और तभी मैंने गच्च से लण्ड अंदर घुसा दिया।

रूपा बड़ी बेशर्मी से मुझसे अपनी सगी माँ और सौतेले भाई के सामने चुदवाने लगी।

उधर मनू अपनी माँ चोदने में जुटा ही हुआ था।

अचानक कमरे में मेरा दोस्त किशोर आ गया।
उसके हाथ में रंग था. वह होली खेलने आया था।

वह चुदाई देख कर सन्न रह गया, उसका लण्ड खड़ा हो गया।

रूपा ने उसकी नेकर नीचे खींच दी तो वह भी नंगा हो गया।

उसका लण्ड साला बड़ा मोटा था।
उधर रश्मि आंटी बोली- बेटा किशोर, अपनी माँ चोद कर आ रहे हो क्या?

वह बोला- हां आंटी, मैं अपनी माँ चोद कर आ रहा हूँ। पर आपको कैसे मालूम?

आंटी ने बताया- तेरी माँ और मैं, हम दोनों एक साथ कॉलेज में खूब चुदवाया करतीं थीं। हम दोनों बेस्ट फ्रेंड्स हैं और बेस्ट चुड़क्कड़ भी। अपने अपने बेटों से चुदवाना हम लोगों ने ही शुरू किया था। अब इसके बाद हम दोनों एक दूसरे के बेटों से भी चुदवाया करेंगी। इसीलिए उसने तुमको मुझे चोदने के लिए भेजा है।

रश्मि आंटी की इस बात ने मुझे और किशोर को उत्तेजित कर दिया।
फिर क्या … किशोर रश्मि आंटी को चोदने लगा।

मनू रूपा को चोदने लगा और मैं रश्मि आंटी की गांड में लौड़ा पेल कर मज़ा लेने लगा।
इस तरह 3 लण्ड और 2 चूत का खेल बड़ी देर तक चलता रहा।

उसके बाद हम तीनों बाहर निकले तो वहां एक और दोस्त हरीश मिल गया।
हम चारों ‘बुरा न मानो होली है, बुरा न मानो होली है’ कहते हुए एक और घर में घुस गए।

वहां देखा कि 3 औरतें एक साथ होली खेल रहीं हैं।
वो तीनों हमारे परिचित की ही थीं।

हमें देख कर बोली- अरे तुम लोग होली खेलने आये हो न?
हमने कहा- हां आंटी, होली खेलने ही आए हैं।

हमने देखा कि वहां तो होली पहले से ही हो रही है।
उनके कपड़े आधे फटे हुए हैं. उन तीनों की चूँचियाँ बिलकुल नंगी हो गईं हैं.

उनकी नंगी चूचियाँ देख कर हम सबके लण्ड खड़े हो गए थे।

वास्तव में वो तीनों सास बहू और ननद थीं।
या यूँ कहें कि माँ बेटी और बहू थीं।

माँ मिसेज नमिता थी, बेटी रुचि और बहू नेहा थी।

मुझे पता चला कि घर में कोई मर्द नहीं है।
मैंने कहा- आंटी, मैं सब जगह रंग लगाऊंगा।
वह बोली- हां बेटा सबकी सब जगह रंग लगा ले आज के दिन सब छूट है।

फिर कहा- आज हम तीनों मिलकर तुम सबके लण्ड से होली खेलेंगी। सबके लण्ड पर रंग भी लगाऊंगी और सबके लण्ड सबकी चूत गांड में भी पेलवाऊंगी।

मैं फिर मजे से सबकी चूचियां चूत गांड सब रंगने लगा।
मेरे साथ वो तीनों भी रंग लगाने में जुट गए।

बस पल भर में ही आंटी ने मेरे पाजामे के हाथ डाल कर लण्ड पकड़ लिया।
उधर उसकी बेटी ने मनू का लण्ड बाहर निकाल लिया और बहू ने किशोर का लौड़ा हिला हिला कर सबको दिखाने लगी।

तब तक आंटी ने हरीश को भी नंगा कर दिया।
मैं समझ गया कि ये तीनों लण्ड के लिए बेताब हैं.

उसके बाद तो हम सबको जोश आ गया।
मैंने आंटी को पटक दिया और उसका भोसड़ा खोल कर लौड़ा पेल दिया।

हरीश आगे आकर लण्ड आंटी के मुंह में घुसेड़ दिया।

मनू उसकी बेटी पर नंगा चढ़ बैठा और लण्ड पेल कर चोदने लगा।

उसके सामने नेहा भी नंगी नंगी किशोर का लण्ड चूसने में जुट गई।

मस्ती में आंटी बोली- मुझे भी चोदो मेरी बेटी भी चोदो और मेरी बहू भी चोदो। मेरा फाड़ डालो भोसड़ा! मेरी बेटी की फाड़ डालो बुर और मेरी बहू की चूत का बना दो भोसड़ा।

फिर क्या हम चारों घपाघप तीनों की चूत, बुर, भोसड़ा, गांड, मुंह, चूची सब जगह लण्ड पेल पेल कर चोदने लगे।

मैं आंटी का भोसड़ा चोदने में जुटा था और हरीश उसके मुंह में लौड़ा पेले हुए था.

मनू उसकी बेटी की बुर लेने में जुट गया था और किशोर ने उसकी बहू की गांड में पेल दिया था लण्ड।

तीनों सास बहू ननद बड़ी मस्ती से चुदाई करवाने लगी।

चुदाई की भच्च भच्च, धच्च धच्च, फच्च फच्च की आवाज़ें हर तरफ से आने लगीं।

मजे की बात यह थी की रंगे हुए लण्ड रंगी हुई चूत बुर भोसड़ा चोद रहे थे।

इतने में आंटी बोली- बेटी रूचि, आज मौका है सबके लण्ड का मज़ा लेने का। खूब मजे से चुदवा लो सबसे।
वह बोली- अरे मम्मी, मेरी चूत फटी जा रही है. बड़ा मोटा लण्ड है इस मादरचोद मनू का।

तब तक बहू बोली- मोटा तो किशोर का भी लण्ड है ननद रानी। देखो न मैं कितने मजे से चुदवा रही हूँ। अभी मैं इसे तेरी गांड में ठोकूंगी।

इस तरह की बातों से सबकी उत्तेजना बढ़ने लगी और तब सबने चुदाई की रफ़्तार बढ़ा थी।

इन तीनों के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी, आहें भरने लगी बहनचोद तीनों।

इतने में हरीश ने लण्ड आंटी के भोसड़ा में पेल दिया।
मैंने लण्ड उसकी बेटी की चूत में घुसेड़ दिया।

मुझे माँ के सामने बेटी की बुर चोदने में दूना मज़ा आने लगा।

मनू ने लौड़ा बहू की चूत में डाला तो किशोर ने लण्ड बहू के मुंह में घुसेड़ दिया।

लण्ड बदले, चूत बदली तो मज़ा सबको दूना आने लगा।

किशोर बोला- आंटी, अब तो मैं होली के बाद भी तुम सबको चोदा करूंगा।
आंटी ने कहा- हां हां … जरूर चोदना. अब तो रास्ता खुल गया है न … जब मन हो तब चोद लेना. लेकिन लौड़ा अपना मजबूत रखना नहीं तो मैं तेरी माँ चोद दूंगी।

यह सुनकर सब लोग हंसने लगे.

इन तीनों को अदल बदल कर चोदने के बाद हम लोग अपने अपने घर लौट गए।

मैं जब अपने घर पहुंचा तो देखा कि हमारे घर तो होली बड़े घनघोर तरीके से हो रही है।
मेरे पड़ोसी मोहन अंकल अपनी बेटी रेनू के साथ मेरे मम्मी से होली खेल रहे हैं।
दोनों मिलकर मेरी मम्मी को रंग रहे हैं।

मम्मी की चूचियाँ एकदम नंगी हैं।
वे केवल पेटीकोट में हैं और रेनू भी अधनंगी है।
उसकी भी चूचियाँ खुली हुईं हैं।

मम्मी ने उन्हें रंग दिया और अंकल का कुरता फाड़ दिया।
अंकल केवल पजामा में रह गए।

मैं एक कोने में खड़े होकर तमाशा देखने लगा।

मम्मी ने फिर अंकल का पजामा खोल डाला तो वह नंगा हो गया।
मम्मी ने उसका लण्ड पकड़ लिया और उस पर रंग लगाने लगी।

इतने में रेनू बोली- आंटी, ऐसे में अगर तेरा बेटा अनुज आ गया तो?
मम्मी ने कहा- तो मैं उसका भी लण्ड रंग डालूंगी। मैं तो उसका लण्ड लेने के लिए तड़प रही हूँ।

मम्मी की इस बात ने मेरे बदन में आग लगा दी।

तब तक रेनू ने मम्मी का पेटीकोट खोल डाला तो वह भी नंगी हो गयी।
मम्मी ने फिर रेनू को पूरी नंगी कर दिया।

अचानक रेनू ने मुझे देख लिया और बोली- अरे अनुज भइया, आओ न सामने!
तब मैं रेनू के पास आया तो उसने रंग लगा दिया.
मैंने भी उसे रंग लगाया.

फिर वह बोली- भइया, मैं तेरे लण्ड पर रंग लगाऊंगी।
मैंने कहा- मुझे मम्मी के आगे नंगा मत करो रेनू!
वह बोली- अरे भइया, देखो मैं तो अपने पापा के आगे नंगी हूँ. तुम भी मम्मी के आगे नंगे हो जाओ। इसमें क्या शर्माना?

फिर उसने मुझे नंगा कर दिया और मेरे लण्ड प्यार से रंग लगाया।

मैंने देखा कि अंकल मेरी मम्मी चोदने लगे हैं.
मम्मी ने मुझे देखा और ख़ुशी ज़ाहिर की।

उसने इशारा किया तो मैंने रेनू को पटक दिया और उस पर चढ़ कर उसे चोदने लगा।
मुझे रेनू को चोदने में बड़ा मज़ा आने लगा।

फिर मैं मम्मी के आगे बेशरम हो गया और वो भी मेरे आगे बिंदास बेशरम हो गईं।

मुझे मम्मी की चुदाई देखने में भी मज़ा आने लगा।
मम्मी को पापा के बाद शायद पहली बार कोई लण्ड मिला था।

मैं अंकल की बेटी चोद रहा था और अंकल मेरी माँ चोद रहे थे।
हम चारों वासना में डूबे हुए चुदाई का आनंद उठा रहे थे.

अनायास मेरी नज़र मम्मी की चूत और चूचियों पर पड़ने लगी और उसकी नज़र मेरे लण्ड पर!
वह बड़े गौर से मुझे रेनू को चोदते हुए देखने लगी और मेरे लण्ड को बार बार चूत में अंदर बाहर आते जाते देखने लगी।

रेनू और मम्मी दोनों अगल बगल लेटी थीं और चुदाई बड़े जोर शोर से चल रही थी।

थोड़ी देर में रेनू ने एक बड़ा खेल कर दिया।
वह उठी और मम्मी की चूत से अंकल का लण्ड निकाल कर चूसने लगी।
यानी बेटी अपने बाप का लण्ड बड़ी मस्ती से चूसने लगी।

यह देख कर मेरे बदन में जबरदस्त आग लग गई।

इतने में मम्मी उठी और बड़े मजे से मेरा लण्ड पकड़ कर मुंह में डाला और बिलकुल वैसे ही चूसने लगीं जैसे रेनू अपने पापा का लण्ड चूस रही थी।
मुझे भी मज़ा आने लगा।

मम्मी जिस तरह से मेरा लण्ड चूस रहीं थीं, उससे मुझे बहुत ज्यादा आनंद आ रहा था।

तब तक अंकल ने लण्ड रेनू की चूत में घुसेड़ दिया तो मैंने भी लण्ड मम्मी की चूत में पेल दिया।
उसके मुंह से उफ़ निकला।

तब मैंने मम्मी को अपने बदन से चिपका लिया और घपाघप चोदना शुरू कर दिया।

इधर मेरा लण्ड बहुत ज्यादा गरम हो गया था उधर मम्मी की चूत भी भठ्ठी की तरह धधक रही थी।
ऐसे में चुदाई का मज़ा बढ़ता ही जा रहा था।

मुझे याद आ गया कि मनू अपनी माँ कैसे चोद रहा था और किशोर भी अपनी माँ को कैसे पेलता है.
तो आज मैं भी अपनी माँ को उसी तरह चोदूंगा।

फिर मैंने चुदाई की स्पीड बढ़ा दी।

मम्मी को घोड़ी बनाकर लण्ड पीछे से पेलने लगा।

मुझे सच में पोर्न होली चुदाई में बड़ा अच्छा लग रहा था।

मम्मी बोली- बेटा अनुज गांड में भी घुसा दे लण्ड!
मैं समझ गया कि मम्मी गांड मरवाना चाहती हैं।

तो मैंने लण्ड चूत से निकल कर गांड में ठोक दिया।
उसके मुंह से उफ़ निकला, फिर वह मज़ा लेने लगीं।

उसके बाद बोली- आज होली का दिन है। आज मेरी इच्छा पूरी हो रही है।
मैंने कहा- मम्मी, चिंता न करो मैं आगे भी तेरी इच्छा पूरी करता रहूंगा।

इतने में रेनू ने कहा- भइया जैसे मेरे पापा को अपनी बेटी चोदने में मज़ा आ रहा है वैसे ही तुमको अपनी माँ चोदने में मज़ा आ रहा होगा?
मैंने कहा- हां यार रेनू, तू सही कह रही है। मुझे खूब मज़ा आ रहा है। पर मैं अब अपनी माँ के साथ साथ तुम्हें भी चोदा करूंगा।

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लेखिका की पिछली कहानी थी: घरेलू नौकर को दे दी अपनी चूत और गांड