जवान भतीजी ने सहेली के सामने चूत मरवाई- 1

लस्ट अनकण्ट्रोलेबल कहानी में एक जवान लड़की अपने चाचा के लंड की मुरीद हो चुकी थी. लेकिन दोनों अलग अलग शहरों में रहते थे. लड़की ने चाचा को जिद करके अपने घर बुलाया.

मेरी पिछली कहानी
रूम अटेंडेंट के सामने भतीजी की गांड मारी
में आपने पढ़ा कि होटल में मैं अपनी भतीजी के साथ था और उसे चोद रहा था. गीली चादर होने पर मैंने होटल वालों से चादर बदलवाने को कहा. एक लड़का आयातों मैंने उसे अंदर बुला लिया और उसके सामने ही अपनी भतीजी की गांड मारी.

अब आगे लस्ट अनकण्ट्रोलेबल कहानी:

हमें मिले तीन महीने से ऊपर हो गए।
बीच-बीच में हमारी फोन पर बात होती रहती थी, पर कभी मिलना नहीं हो सका।

इसी बीच मेरे बच्चों के स्कूल की छुट्टियां थीं।
मेरी पत्नी उन्हें लेकर दो दिन बाद अपने मायके जाने वाली थी।

अगले दिन मैं ऑफिस में था।
श्रेया का फोन आया, तो वो बोली, “चाचू! बहुत दिल है! कुछ करो ना!”

मैंने उसे बताया- तुम्हारी चाची मायके जाने वाली है, मेरे घर आ जा!

तो श्रेया खुश होते हुए बोली, “चाचू! आपके घर नहीं! चलो कहीं घूमने चलते हैं! मैं ऑफिस से दस दिन की छुट्टी ले लेती हूं!”
मैंने कहा, “ठीक है! पर तुम्हें दस दिन मेरी पत्नी बनकर रहना होगा! और याद रखना, मैं तुम्हें दिन-रात रगड़ूंगा!”

श्रेया बोली, “उफ्फ मेरे जानू! रगड़ डालो ना जितना मर्जी! मैं भी तो यही चाहती हूं!”

फिर श्रेया बोली, “चाचू! दस दिन ही क्यों? जिंदगी भर के लिए मुझे अपनी पत्नी बना लो ना!”

मैंने कहा, “ठीक है! तुम अपनी चाची को जाने दो, फिर प्लान बनाते हैं!”

दो दिन बाद मेरी पत्नी चली गई।

ऑफिस से आने के बाद मैं घर पर अकेला था।
मैंने श्रेया को कॉल किया।

श्रेया ने फोन उठाया तो वो अपने दोस्तों के साथ बाहर थी।
उसने बताया कि उसने ऑफिस से एक हफ्ते की छुट्टी ले ली है पर वो मेरे घर नहीं आ पाएगी।

उसकी बात सुनकर मैंने कहा, “क्यों यार! खड़े लण्ड पर चोट कर रही हो! तुम्हारी चाची भी पंद्रह दिन के लिए जा चुकी है, मेरा लण्ड तो तुम्हारी चूत में गोते मारने के सपने देख रहा था!”

तभी मुझे श्रेया के पास किसी लड़की के हंसने की आवाज़ आई।

श्रेया बोली, “चाचू! कुछ तो शर्म करो आप! फोन पे सब कुछ बोले जा रहे हो! मेरा फोन स्पीकर पर था, मेरी सारी फ्रेंड्स ने आपकी बात सुन ली है!”
फिर श्रेया बोली, “ठीक है चाचू, अब बोलो। मैंने फोन स्पीकर से हटा दिया और साइड में जाकर बात कर रही हूँ।”

मैंने कहा, “बता क्या प्लान है?”
श्रेया बोली, “चाचू, आप कल यहाँ चंडीगढ़ आ जाओ। फिर हम दोनों यहाँ से हनीमून के लिए धर्मशाला चलेंगे। पूरा एक हफ्ता मैंने आपके डंडे को निचोड़ कर ना रख दिया तो मेरा नाम भी श्रेया नहीं!”

मैंने कहा, “साली रण्डी की औलाद! मैं एकदम से कैसे आऊँ?”
श्रेया बोली, “चाचू, मुझे कुछ नहीं पता! अगर आप मुझे प्यार करते हो तो आप कल यहाँ पहुँच रहे हो!”

मैंने उसकी अनकण्ट्रोलेबल लस्ट को समझते हुए कहा, “ठीक है, मैं फ्लाइट चेक करता हूँ।”
श्रेया बोली, “ओके चाचू! मैं घर जाकर आपको कॉल करती हूँ।”

मैं अगले दिन की फ्लाइट बुक करके श्रेया के फोन का वेट करने लगा।
रात को दस बजे श्रेया की तरफ से वीडियो कॉल आया।

जैसे ही मैंने फोन रिसीव किया, वो चहकते हुए बोली, “मेरे प्यारे चाचू! मेरी जान! क्या कर रहे हो?”
मैंने कहा, “बस फ्लाइट बुक करके तुम्हारे कॉल का वेट कर रहा था।”

श्रेया फोन पे किस करते हुए बोली, “वाउ चाचू! इसका मतलब आप कल आ रहे हो!”
मैंने कहा, “बिल्कुल आ रहा हूँ!”

श्रेया सोफे से उठकर खड़ी होते हुए बोली, “सच्ची चाचू! मैं बहुत खुश हूँ! आपके लिए मेरे पास सरप्राइज है! बस आप जल्दी से आ जाओ!”
फिर वो बोली, “बस मैं भी अभी आई हूँ।”

फिर मैं श्रेया से थोड़ी देर बात करके जाने की तैयारी करने लगा।

अगले दिन सुबह मेरी दस बजे फ्लाइट थी।
मैं एक बजे चंडीगढ़ एयरपोर्ट पर पहुँच गया।

श्रेया मुझे लेने एयरपोर्ट पर आई हुई थी।
मैं जैसे ही अपना सामान लेकर एयरपोर्ट के गेट पर पहुँचा, श्रेया मेरे सामने थी।
वो इस टाइम एक लाल टॉप में थी जिसमें उसके मोटे कबूतर झकड़े हुए थे।

शायद श्रेया ने अंदर ब्रा नहीं पहनी हुई थी इसलिए उसके दोनों निप्पल्स टॉप में से झाँक रहे थे।

श्रेया का पूरा पेट नंगा था।
उसकी पतली कमर पर एक स्कर्ट बंधी हुई थी जो बहुत ही छोटी थी।
अगर श्रेया थोड़ा सा झुक जाए तो उसके चूतड़ पूरे दिख जाएँ।
और स्कर्ट इतनी पतली थी कि अंदर से श्रेया की टाँगें झाँक रही थीं।

श्रेया ने लाल लिपस्टिक लगा रखी थी और ऊपर माथे पर काला चश्मा।
पाँच फुट नौ इंच लंबी लड़की, जिसकी दूध जैसी गोरी और गुदगुदी टाँगें थीं, वो पैरों में शायद और लंबी दिखने की चाहत में हाई हील की चप्पलें पहने हुई थी।

मुझे देखकर श्रेया चहकते हुए दौड़कर मेरे पास आई और मुझसे लिपट गई।
मैंने भी श्रेया की कमर में अपनी बाहें लपेट दीं, जिससे वो अपनी टाँगें मोड़कर हवा में लहरा सी गई।

फिर वो मेरे होंठों को चूमकर मेरी आँखों में देखते हुए बोली, “फाइनली मेरी जान आ ही गई! आह! आई लव यू चाचू! सच्ची, मैं इन दिनों में आपको मिस करके बहुत रोई हूँ!”

मैंने आदत से मजबूर होकर मौके का फायदा उठाते हुए, श्रेया की स्कर्ट में पीछे से एक हाथ डालकर उसके चिकने चूतड़ों की गोलाई का जायजा लेते हुए कहा, “मेरी जान! मिस तो मैंने भी तुम्हें बहुत किया!”

मेरी इस हरकत से श्रेया मुस्कुराकर मुझसे अलग हो गई, पर मैंने देखा वो थोड़ा असहज महसूस करके इधर-उधर देख रही थी। शायद ऐसे पब्लिक में उसे अपने चूतड़ों पर हाथ फिरवाना अच्छा नहीं लगा।

तभी मैंने देखा श्रेया की बगल में एक लड़की खड़ी थी, जो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी।

श्रेया उसकी तरफ देखकर बोली, “चाचू! ये मेरी बेस्ट फ्रेंड अवनी है, मेरे साथ ही रहती है!”
अवनी ने अपना हाथ मेरी तरफ बढ़ाते हुए मुझे हेलो बोला और श्रेया की तरफ देखते हुए शरमाकर बोली, “चाचू बोलूँ या जीजू? कुछ समझ नहीं आ रहा!”

श्रेया तपाक से बोली, “मेरे कुछ भी हो, मैं जिससे प्यार करती हूँ वो तुम्हारे तो जीजू ही हुए ना!”
अवनी मुस्कुराकर मेरी तरफ देखकर बोली, “जी जीजू!”

मैंने उसे अपनी तरफ खींचते हुए कहा, “अरे! जीजू के गले लगकर मिलते हैं! ऐसे क्या बेगानों की तरह दूर से ही हेलो?”

अवनी झूलते हुए मेरी बाहों में आ गई और मुझसे लिपटते हुए बोली, “जीजू! श्रेया सच ही बोलती थी, बड़े मजबूत हो आप!”

मैंने अवनी की कमर में दोनों हाथ डालकर, धीरे से हाथ उसके चूतड़ों पर सरका दिए और उनका जायजा लेकर कहा, “अवनी! मैं जितना मजबूत हूँ, तुम्हारी छत्तीस साइज़ की उतनी ही सॉफ्ट लग रही है!”

अवनी मुझसे अलग होकर एक मुक्का मेरी छाती पर मारते हुए बोली, “वाह! क्या बात है जीजू! आपने तो एक बार में ही पूरा साइज़ नाप लिया!”

मैंने अवनी से एक कदम दूर होकर उसे ऊपर से नीचे तक देखते हुए कहा, “चौंतीस इंच के पहाड़, छब्बीस की लहराती कमर, और कमर के नीचे छत्तीस इंच के थिरकते!”
मेरे इतना बोलते ही श्रेया मेरे होंठों पर अंगुली रखकर बोली, “बस भी करो ना चाचू! अब चलो भी, चलते हैं!”

अवनी श्रेया की बात सुनकर जींस में कसी हुई गांड मटकाते हुए कार की तरफ बढ़ गई और कार की ड्राइवर सीट संभाल ली।

मैं और श्रेया पीछे वाली सीट पर बैठ गए।
रास्ते में मज़ाक करते हुए हम घर तक पहुँच गए।
श्रेया ने चंडीगढ़ में बहुत ही शानदार फ्लैट ले रखा था।

अवनी श्रेया की तरह की कद-काठी की थी — उसी की तरह लंबा कद, बड़े चूचे, पतली कमर और भारी चूतड़, और दूध जैसे गोरे बदन की मालकिन थी।

श्रेया के साथ अवनी को देखकर मेरे लण्ड में हलचल होने लगी थी।
हम तीनों आकर हॉल में बैठ गए और बातें करने लगे।

बातें करते-करते श्रेया मुझसे लिपट गई।
श्रेया ने अपनी एक टाँग मेरी टाँग पर चढ़ा दी और अपने बूब्स उभारकर मेरी छाती से भिड़ा दिया।

वह मुझे चूमते हुए बोली, “आह चाचू! मैंने आपको कितना मिस किया, आप नहीं जानते! सच्ची आई लव यू चाचू! आप मेरे रोम-रोम में बस चुके हो! अवनी से पूछो, मैं आपको कितना मिस करती हूँ!”

मैंने एक हाथ श्रेया की स्कर्ट में डालकर उसके चूतड़ों को भींच लिया और उसे ऊपर उठाते हुए उसके लाल सुर्ख होंठों का रस चूसने लगा।
श्रेया भी मेरा साथ देते हुए मेरी जीभ चूस रही थी।
वो मेरी जीभ चूसते हुए अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल रही थी।

उसके चूतड़ों के नीचे से मेरे हाथ की अंगुलियाँ उसके थाँग के ऊपर से उसकी गांड के छेद को कुरेद रही थीं।

श्रेया ने अपना टॉप उतारकर अपनी एक चूची पकड़कर मेरे मुँह में दे दी।
मैंने श्रेया की नरम चूची पर लगी कड़क निप्पल को मुँह में भर लिया और उसे चूसते हुए श्रेया की गांड के नीचे वाले हाथ से उसे उठाकर अपनी टाँगों पर बिठा लिया। दोनों हाथों को उसके पीछे ले जाकर उसके चूतड़ फैला दिए।

फिर मैंने श्रेया की गांड में फँसे थोंग को साइड में किया और एक हाथ की अंगुली को श्रेया के मुँह में डालकर थूक से गीला करके उसकी गांड के छेद में डाल दिया।

श्रेया ने अपनी गांड पीछे को उभारकर, “आह चाचू! उफ्फ़!” करते हुए अपनी चूची को मेरे मुँह से खींचकर दूसरी अंदर डाल दी।

थोड़ी देर तक मैं श्रेया की चूची को चूसता रहा और वो मेरे बालों में हाथ फिराते हुए लस्टी स्वर में बोली, “उफ्फ़ जान! बहुत मज़ा आ रहा है! आह चाचू मेरे मालिक! इतने दिन कहाँ थे आप? मुझे अपनी रखैल बनाकर अपने साथ ही रख लो ना! उफ्फ़ कितना अच्छा चूसते हो! आह! मैं चाहती हूँ आप दिन-रात मेरा दूध पीते रहो! उफ्फ़ चाचू! मेरे बूब्स पीकर आपका लण्ड और मोटा और तगड़ा हो जाएगा! फिर आप उससे मेरी चूत चोदना! आह! कितना मज़ा आ रहा है! आह चाचू! आप बोलो तो मैं चाची से बात कर लेती हूँ! आह! मुझे चाची की सौतन बना दो! आह उफ्फ़!”

मैंने श्रेया की गांड में अंगुली अंदर-बाहर करते हुए दूसरे हाथ से उसके कोमल चूतड़ों पर थप्पड़ मारे।
तो श्रेया सिसकते हुए बोली, “आह उफ्फ़! मुझे आप जैसे रफ मर्द ही पसंद हैं! आह डैडी! मारो मुझे! उफ्फ़!”

मेरी पैंट में लण्ड पूरा आकार ले चुका था, जिससे वो पैंट में बुरी तरह दबा हुआ था।
इसलिए लण्ड में दर्द होने लगा था।

मैंने श्रेया को गोद में उठाकर बेड पर पटक दिया।
जैसे ही मैंने श्रेया को बेड पर पटका तो मेरी नज़र अवनी पर गई, जिसे मैं बिल्कुल भूल चुका था।
वो पास में कैमरा लेकर खड़ी वीडियो बना रही थी।

मुझे अपनी तरफ देखते हुए अवनी अंगूठा ऊपर उठाकर बोली, “गुड जॉब जीजू! आप आज इस रण्डी को मसल डालो! साली ने मुझे इतने दिन से सोने नहीं दिया!”

मैंने अवनी की तरफ मुस्कुराकर देखते हुए अपनी टी-शर्ट उतार दी और जींस का हुक खोलने लगा।
तो अवनी कैमरा साइड में करके अपनी जीभ होंठों पर फिराते हुए बोली, “जीजू! मैं कुछ हेल्प कर दूँ?”

मैंने उसे इशारे से अपने पास बुलाया।
तो वो कैमरे को टेबल पर सेट करके मेरे पास आ गई।
मैंने उसका कंधा पकड़कर उसे नीचे बिठा दिया। तो वो अपने घुटने फर्श पर टिकाकर मेरी जींस का बटन खोलने लगी।

अवनी ने फुर्ती से जींस का बटन खोला और जैसे ही अंडरवियर को नीचे खिसकाया तो लण्ड झटका मारकर उसके मुँह पर लगा।

अवनी ने “अम्म्म!” करते हुए लण्ड को जितनी तेज़ी से अपने कोमल हाथ में पकड़ा, वो उसी तेज़ी से लण्ड को वापिस छोड़कर खड़ी होते हुए बुदबुदाई, “ओह माई गॉड! इट्स सो मच बिग!”

फिर वो श्रेया की तरफ देखकर बोली, “श्रेया! ये इम्पॉसिबल है कि तुम इस अजगर को ले चुकी हो!”

मैंने अवनी का हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ खींचा और उसकी गर्दन पर चूमना चाहा।
तो वो मुझे धक्का देकर दूर हो गई और बोली, “सॉरी जीजू! आप श्रेया के हो!”

मैंने कहा, “अभी तो तुम मेरा लण्ड चूसने वाली थी!”
अवनी बोली, “वो तो मैं श्रेया की चूत के लिए आपके लण्ड को तैयार कर रही थी!”

फिर वो लंबी साँस लेकर लण्ड की तरफ देखकर बोली, “पर आपका तो है ही इतना बड़ा!”

तभी श्रेया ने आकर मेरे लण्ड को पकड़ लिया और अपनी स्कर्ट उतारकर लण्ड को पकड़कर लण्ड अपनी चूत से भिड़ा लिया।
वह मुझे चूमते हुए बोली, “आह चाचू! मैं हूँ ना! मैं लूँगी ना आपका लण्ड! उफ्फ़ चाचू! इसको क्या पता कि बड़े और मोटे लण्ड को लेकर कितना मज़ा आता है!”

फिर वो अपनी छोटी अंगुली अवनी को दिखाते हुए बोली, “इसने तो ऐसे लण्ड लिए हैं! अभी तक तो इसकी चूत का उद्घाटन भी अच्छे से नहीं हुआ! बेचारी कितने लण्ड ट्राई कर चुकी है!”

फिर श्रेया हँसते हुए मेरी छाती पर अपनी कोमल अंगुलियाँ फिराकर मेरे निप्पल्स पर अपने होंठ रगड़ने लगी।

मैं श्रेया के चूतड़ों को पकड़कर मसल रहा था।
मेरा लण्ड श्रेया की चूत की फाँकों में अटका हुआ था और मेरी नज़रें अवनी की तरफ थीं।
वो भी मेरी तरफ देख रही थी।

मैंने उसे अंगुली के इशारे से अपने पास बुलाया।
तो उसने जवाब में ना में अंगुली हिलाकर मुस्कुराते हुए कैमरा थाम लिया और वीडियो रिकॉर्ड करने लगी।

मैंने श्रेया के चूतड़ों की घाटी के बीच में फँसे हुए थोंग को अपनी अंगुली फँसाकर एक झटका मारा।
तो थोंग की डोरी टूट गई, जिससे थोंग मेरे हाथ में आ गया।

मैंने थोंग को सूँघकर श्रेया से कहा, “क्या मादक खुशबू है तेरी चूत की!”
श्रेया बोली, “आह डैडी! ये खुशबू सिर्फ आपके लिए है!”

मैंने थोंग अवनी की तरफ उछाल दिया, पर अवनी वीडियो बनाने में मस्त थी।
मैंने श्रेया की गर्दन पर किस करते हुए उसे बाहों में कसकर भींच लिया।

मेरे मजबूत बदन की कसावट से वो कहराकर बोली, “आई ईईई! ऊऊ ऊऊ चाचू!”

मैंने श्रेया को बाहों से ढीला छोड़कर उसकी एक चूची को दाँतों में दबा लिया और एक हाथ से उसकी गांड पकड़कर दूसरे हाथ की बीच वाली दो अंगुलियाँ उसकी बहती चूत में घुसेड़ दीं।
अंगूठे से उसकी चूत का दाना रगड़ते हुए तेज़ी से अंगुलियाँ उसकी चूत के अंदर-बाहर करने लगा।

श्रेया दोनों हाथों से मेरे बाल खींचकर बोली, “आह उह्ह! मम्मी! आह! धीरे चाचू! ऐसे तो मैं झड़ जाऊँगी! आह उफ्फ़! मुझे आपका लण्ड चाहिए! उफ्फ़! मुझे अंगुलियों से नहीं झड़ना! उफ्फ़ बस मेरे राजे! आह!”

मैंने तेज़ी से अंगुलियाँ अंदर-बाहर करते हुए उसकी चूची को ज़ोर से काटा।
तो श्रेया दर्द से बिलबिला उठी और मुझे धकेलने की कोशिश करने लगी।
पर मैं तब तक उसके गांड के छेद में भी दो अंगुलियाँ डालकर उसे अपने हाथों में कस चुका था।

मैंने तेज़ी से श्रेया की दूसरी चूची को मुँह में लेकर उसके कंधे तक खींच लिया।
अवनी की तरफ देखा तो वो एकदम पास से श्रेया की गांड और चूत में अंदर-बाहर हो रही मेरी अंगुलियों की हरकत को कैमरे में कैद कर रही थी।

मैंने उसे आँख मारी तो उसने भी कैमरा साइड में करके मुझे आँख मार दी और अपने होंठों पर जीभ फिराकर मुस्कुराने लगी।

मैंने उसे गर्दन हिलाकर पास आने का इशारा करते हुए कहा, “लॉलीपॉप चूसेगी?”
तो वो मुस्कुरा दी।

मैं फिर से श्रेया की चूची चूसते हुए उसकी चूत में अंगुलियाँ अंदर-बाहर करने लगा।
श्रेया अपनी एड़ियाँ उठाकर काँपते हुए बोली, “आह उफ्फ़ धीरे! आह डैडी! फक माई कंट! उफ्फ़! आई वांट योर बिग डिक इन माई फकिंग पुसी!”

तभी मैंने महसूस किया कि मेरे लण्ड पर कोई नरम अंगुलियाँ फिरा रहा है।
मैंने श्रेया की चूची मुँह से निकालकर झुककर देखा तो अवनी एक हाथ से लण्ड को पकड़कर घुटनों के बल ज़मीन पर बैठी थी और दूसरे हाथ की पतली अंगुली मेरे लण्ड की उभरी नसों पर फिराते हुए लण्ड को ध्यान से देख रही थी।

जैसे ही मेरी और अवनी की नज़रें मिलीं, उसने मुस्कुराकर एक आँख दबा दी और लण्ड के सुपाड़े पर जीभ फिराने लगी।

श्रेया के साथ एक और लड़की पाकर मेरा जोश डबल हो गया।
मैं बहुत तेज़ी से श्रेया की चूत में अंगुलियाँ अंदर-बाहर करने लगा।

अवनी एक हाथ से मेरे लण्ड को कसकर पकड़े हुए थी और दूसरे हाथ से मेरी भारी बॉल्स से खेलते हुए लण्ड पर अपनी लाल जीभ फिरा रही थी।

तभी श्रेया ज़ोर से चीखी, “उफ्फ़ आई मम्मी! मैं गई! आह चाचू! आह उफ्फ़! ईई ईईई!”

उसके बदन को झटका लगा और उसकी चूत से कामरस के साथ-साथ उसके मूत की तेज़ धार निकल गई।
श्रेया के बदन को चार-पाँच झटके लगे और वो हाँफते हुए तेज़ी से बोल रही थी, “उफ्फ़ डैडी! आई स्क्वर्ट! उफ्फ़ डैडी!”
फिर श्रेया का बदन एकदम से अकड़ गया।

मैंने उसकी चूत और गांड से अंगुलियाँ निकालकर उसे ढीला छोड़ दिया।
तो वो कहराते हुए वहीं ज़मीन पर गिर गई।

मैंने श्रेया को छोड़कर अवनी की तरफ देखा।
तो वो लण्ड पर जीभ फिरा रही थी।

मैंने जैसे ही अवनी के सिर में हाथ रखा, तो वो मेरी तरफ देखने लगी और लण्ड को हथेली में भींचते हुए बोली, “सच्ची जीजू! आपका बहुत बड़ा और मोटा है! मुझे यकीन नहीं हो रहा कि श्रेया इसको झेल पाएगी!”

मैंने कहा, “अवनी! अगर तू चाहे तो तेरी चूत भी इससे खोल दूँ!”

अवनी लण्ड को पकड़कर उसकी स्पोर्ट से खड़ी होते हुए बोली, “अरे ना जीजू! मुझे अपनी फड़वानी नहीं है! वो तो आप श्रेया को मज़ा दे रहे थे, इसी लिए मैंने सोचा मैं आपको थोड़ा मज़ा दे दूँ! बाकी मेरा अंदर डलवाने का कोई मन नहीं है! और आप भी मेरे बारे में सोचना बंद करके श्रेया को चोदने के बारे में सोचो!”

यह लस्ट अनकण्ट्रोलेबल कहानी आपको पूरा मजा दे रही होगी.
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