जवान भतीजी संग मैकलोडगंज होटल में- 1

लाइव सेक्स सीन इन होटेल मुझे तब देखने को मिला जब मेरी भतीजी रूम के बाहर गैलरी में अपनी चूत मुझसे मरवा रही थी. वहां से साथ वाले कमरे के अंदर का नजर दिख रहा था.

मेरी पिछली कहानी
जवान भतीजी को चोदा पूरी रात
में आपने पढ़ा कि भतीजी की सहेली की कुंवारी चूत और गांड एक ही दिन में मार लेने के बाद वह चुदने लायक नहीं रही थी. तो पूरी रात मैंने अपनी भतीजी की चूत और गांड को पेला.

अब आगे लाइव सेक्स सीन इन होटेल:

अगले दिन हम नौ बजे उठे तो अवनी फटाफट तैयार होकर अपने ऑफिस भागी।
मैं और श्रेया भी तैयार होकर जाने की तैयारी करने लगे।

हम लगभग बारह बजे घर से निकले और शाम के छह बजे मैकलोडगंज पहुंच गए।
वहां हमने होटल पहले से बुक कर रखा था।

होटल में चेक-इन करने के बाद हम दोनों ने थोड़ी देर रेस्ट किया और बाहर घूमने चले गए।

बाहर हमने एक बार में कुछ पेग लिए और लगभग एक घंटा घूमने के बाद वापिस होटल आ गए।

हमारा कमरा माउंटेन व्यू था जिसमें पीछे की तरफ प्राइवेट गैलरी बनी हुई थी।
वहां टेबल और चेयर रखी हुई थीं, जगह बैठकर हम माउंटेन्स का व्यू लेते हुए खाना-पीना एंजॉय कर सकते थे।

कमरे में आते ही श्रेया मुझसे लिपट गई और मेरे होंठ चूमने लगी।
पता नहीं कब हम दोनों मादरजात नंगे हो गए।

श्रेया एक हाथ में मेरा लण्ड कसकर पकड़कर मेरी छाती चूम रही थी।
मैं उसके दोनों चूतड़ों से खेल रहा था।

तभी श्रेया मुझसे अलग होकर बोली, “रुको पापा, आपको कुछ दिखाती हूं!”
मैंने उससे पूछा, “तेरा सब कुछ तो मेरे सामने है, और क्या दिखाएगी?”

श्रेया बोली, “रुको भी ना!”

फिर उसने अलमारी खोलकर उसमें से लाल रंग की हाई हील सैंडिल निकाली और पास में रखी टेबल पर बैठकर पहनने लगी।
फिर श्रेया ने उठकर लाल रंग की लिपस्टिक लगाई और लाल रंग की चूड़ियां पहनकर, एक सोने की चेन लॉकेट के साथ गले में पहन ली और एक चेन कमर में।

मैं पास खड़ा लण्ड को सहलाते हुए श्रेया की तरफ देख रहा था।
वो भी बार-बार मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी।

ये सब पहनने के बाद श्रेया धीरे-धीरे चलते हुए मेरे सामने आ गई और मेरे सामने घूमते हुए बोली, “देखो ना पापा, आपकी बेटी कैसे लग रही है?”

हाई हील पहनकर श्रेया कमाल लग रही थी।
उसके चूतड़ पूरी तरह उभरे हुए थे।
लाल रंग की चूड़ियां और लिपस्टिक लगाकर श्रेया एक नई-नवेली चुदासी दुल्हन की तरह लग रही थी।
श्रेया के बूब्स के बीच सोने का लॉकेट बहुत सुंदर लग रहा था और उसकी पतली कमर में सोने की चेन उसे बहुत कामुक बना रही थी।

मुझे अपनी तरफ घूरते देखकर श्रेया टांगें क्रॉस करके खड़ी हो गई और अपनी टांगों के बीच वाले त्रिकोण की तरफ अंगुली करके बोली, “ओह पापा, आपकी जगह यहां है! आप कुछ बोलो ना!”

मैंने अपने लण्ड को जोर-जोर से हिलाते हुए उसके पास जाकर उसके एक चूतड़ पर थप्पड़ मारकर कहा, “एकदम नई दुल्हन लग रही हो, जो किसी रण्डी की तरह चुदासी होकर लण्ड मांग रही हो!”

श्रेया बिंदास होकर हंसते हुए बोली, “बिल्कुल करेक्ट पापा! आपने मेरे बारे में सही कहा!”

फिर वो मेरा लण्ड पकड़कर खींचते हुए बोली, “चलो पापा, उस बालकनी में चलकर बैठते हैं!”

श्रेया मेरा लण्ड पकड़कर आगे-आगे चल रही थी और मैं उसके पीछे।
श्रेया के गद्देदार चूतड़ ऊपर-नीचे होकर एक-दूसरे से रगड़ खा रहे थे।
मेरा दिल कर रहा था कि इस कुतिया को यहीं पटककर इसकी गांड में लण्ड पेल दूं, पर एक जवान लड़की को नंगी देखने का भी अपना ही मजा होता है।

हम दोनों गैलरी में आ गए।
गैलरी में आते ही ठंडी हवा आकर हमसे टकराई।

रात होने की वजह से बाहर कुछ दिख तो नहीं रहा था, पर खुली और ठंडी हवा का बहुत मजा आ रहा था।
गैलरी में दो कुर्सियां और टेबल लगी हुई थीं।

श्रेया मेरा लण्ड छोड़कर ग्रिल के सहारे खड़ी हो गई।

कमरे और गैलरी के बीच बड़ी सी खिड़की थी जिसमें कांच लगा हुआ था और दरवाजा भी कांच का होने की वजह से कमरे से रोशनी बाहर आ रही थी।
थोड़ी रोशनी में ही श्रेया का दूधिया बदन चमक रहा था।

श्रेया ग्रिल के सहारे खड़ी होकर बोली, “कितनी मस्त हवा है यहां!”
फिर वो अंगड़ाई लेकर बोली, “उफ्फ पापा, दिल कर रहा है यहीं खुले में आपके लण्ड पर चढ़ जाऊं!”

मैं जाकर श्रेया के पीछे खड़ा हो गया और उसके चूतड़ों की दरार में लण्ड फंसाकर अपने दोनों हाथ आगे लेकर श्रेया की चूचियां पकड़कर मसलने लगा और उसकी गर्दन चूमने लगा।
मैं कोई दो-तीन मिनट से उसकी गर्दन पर चूम रहा था पर वो कुछ बोल नहीं रही थी जैसे किसी सोच में डूबी हो।

मैंने श्रेया से अलग होकर पूछा, “क्या हुआ, तुम्हारा ध्यान कहां है?”
उसने अपना चेहरा पीछे लाकर अपने मुंह पर एक अंगुली रखकर चुप रहने का इशारा किया।

फिर वो अंगुली पास वाले कमरे की खिड़की की तरफ करते हुए बोली, “देखो पापा, इधर हनीमून चल रहा है!”

मैंने श्रेया को थोड़ा आगे धकेलते हुए उसकी गर्दन आगे की तरफ की तो बगल वाले कमरे के अंदर का नजारा साफ-साफ दिखने लगा।

कमरे के अंदर लगे बेड पर एक लड़का लेटा हुआ था और उसकी टांगों के ऊपर अप्सरा जैसी हसीन नंगी लड़की बैठी हुई थी।
लड़की की चूड़ियां और मेहंदी साफ इशारा कर रही थीं कि इन लोगों की अभी-अभी शादी हुई होगी।
लड़की अपनी मदमस्त चुचियों को मसलते हुए लड़के के लण्ड पर अपनी चूत रगड़ रही थी।
लड़की की बहुत हल्की आवाज़ बाहर भी आ रही थी।

वो बड़ी बेचैनी से बोली, “हाए… उफ्फ… करो ना… आह संजय… फक मी प्लीज़! उफ्फ… तुम मुझे ऐसे कैसे छोड़ सकते हो? आह… प्लीज़ अपने लण्ड को खड़ा करो ना!”

तभी वो लड़का झुंझलाते हुए बोला, “यार मेरा हो गया, अब मैं क्या करूं? साली तू है ही इतनी गरम, इसमें मेरी क्या गलती है!”

फिर उस लड़के ने लड़की को बेड पर धकेल दिया जिससे लड़की उसकी बगल में लेट गई।

मेरी नज़र लड़के के लण्ड पर पड़ी—उसका लण्ड मुरझाकर दो इंच से भी छोटा हो गया था।

तभी लड़की गुस्से से उठी और बोली, “संजय! जब तुम्हें पता था तुम मुझे ठंडी नहीं कर सकते तो मेरे से शादी क्यों की? अभी घर चलो, मैं सबको बताऊंगी कि उसका दो मिनट में ढीला हो जाता है!”
वो लड़का हंसते हुए बोला, “जा, तू चली जा और जिसको बताना है बता दे। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। सब तुझे ही रण्डी बोलेंगे!”

लड़की बहुत गुस्से से बोली, “संजय! मेरे से तमीज से बात करो! तुम्हें रण्डी का मतलब भी पता है क्या?”
वो लड़का, जिसका नाम संजय था, बोला, “बिल्कुल पता है! रण्डी का मतलब होता है जो किसी से भी चुदवा ले!”

लड़की बोली, “तुम मुझे रण्डी बोलते हो तो क्या मैं किसी से भी चुदवा लूं?”
लड़का तैश में बोला, “जा, मुझे क्या! जिससे मर्ज़ी चुदवा, कम से कम तेरी आग तो बुझेगी!”

लड़की वापिस बेड पर बैठ गई और अपना माथा पकड़कर रोने लगी।
वो लड़का भी उसकी बगल में बैठ गया और उसे मनाने की कोशिश करने लगा।

श्रेया मेरा लण्ड पकड़कर दबाते हुए कमरे के अंदर चली गई और गैलरी की लाइट ऑन करके बाहर आ गई।

फिर आकर मुझसे चिपक गई और धीरे से मेरे कान में बोली, “पापा, जब भगवान ने आपको इतना दमदार लण्ड दिया है तो आपको इससे थोड़ी समाज सेवा भी करनी चाहिए!”
मैं उसकी बात समझा नहीं तो मैंने पूछा, “क्या मतलब?”

श्रेया बिना कुछ बोले नीचे बैठ गई और अपनी टांगें फैलाकर मेरे लण्ड को पकड़कर चूमने लगी।
लण्ड चूमते-चूमते वो बोली, “पापा, अगर आप इससे समाज सेवा करोगे तो इसको भी नई चूत में जाने का मौका मिलेगा!”

श्रेया मेरी तरफ देखकर अंगुली और अंगूठे को मिलाकर एक छेद बनाया और दूसरे हाथ की अंगुली उसमें डालकर चुदाई का इशारा किया।

फिर श्रेया ने अंगुली से बगल वाली खिड़की की तरफ इशारा करके मुस्कुराते हुए कहा, “पापा, मारना चाहोगे उसकी चूत?”
मैंने कहा, “कैसे?”
श्रेया बोली, “बस पांच मिनट!”

फिर वो सरककर ग्रिल के कॉर्नर में आ गई और उसने मेरा लण्ड कुछ इस तरह पकड़ लिया कि अगर बगल वाली खिड़की से कोई देखना चाहे तो उसे मेरा लण्ड आराम से दिखे।
हाई हील पहनकर श्रेया अपनी टांगें फैलाकर बैठी हुई थी।
उसने मेरा मजबूत लण्ड दोनों हाथों से पकड़ रखा था।

तभी वो अचानक बोली, “ओह डैडी! आपका इतना बड़ा है, मैं मुंह में नहीं ले पाऊंगी!”

मैं बिना कुछ बोले उसके होंठों पर लंड टिका कर उसके गाल पर हल्का थप्पड़ मारकर जोर से कहा, “चुप साली रण्डी! चुपचाप लण्ड चूस!”
थप्पड़ की मार तेज़ नहीं थी, फिर भी श्रेया जानबूझकर चीखी, “आई ईईई… मम्मी… दर्द होता है!”

फिर वो लण्ड मुंह में लेकर चूसने लगी।
लण्ड चूसते-चूसते श्रेया मेरी बॉल्स सहला रही थी।

तभी मैंने देखा वो लड़का गैलरी में आकर इधर-उधर देखने लगा।
मैंने उसका ध्यान खींचने के लिए श्रेया का सिर पकड़कर लण्ड उसके मुंह में पेलते हुए कहा, “चूस साली रण्डी! आह… चूस कुतिया की औलाद!”

मेरे इतना बोलते ही वो लड़का सावधानी से आकर बालकनी में जम गया और श्रेया को लण्ड चूसते हुए देख कर लाइव सेक्स सीन इन होटेल का मजा लेने लगा।

मैं उस लड़के को कुछ इस तरह देख रहा था कि उसे पता न चले कि मैं उसे देख रहा हूं।

तभी वो लड़का अंदर चला गया और अपनी पत्नी से कुछ कहने लगा।

उसकी पत्नी उसकी बातें सुनकर एकदम उठी और नंगी ही गैलरी में आकर दीवार की ओट में खड़ी हो गई।

मैं श्रेया के मुंह से बार-बार लण्ड बाहर निकालकर उसके मुंह में डाल रहा था।
मैं चाहता था कि वो मेरा लण्ड आसानी से देख सके।

थोड़ी देर लण्ड चुसवाने के बाद मैंने श्रेया से कहा, “चल, घोड़ी बन!”
श्रेया जानबूझकर धीरे-धीरे घूमते हुए बोली, “डैडी, कितना मस्त लण्ड है आपका! उफ्फ… और यहां कितनी मस्त हवा है! यहां गैलरी में आपका लण्ड लेकर मज़ा आ जाएगा!”

मैंने कहा, “चल घोड़ी बन!”
श्रेया मेरी छाती पर एक अंगुली फिराकर, लण्ड को एक हाथ से पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ते हुए बोली, “डैडी, पहले लाइट तो बंद कर दो, कोई देख न ले! आह… मुझे शर्म आ रही है!”

मैंने उसकी चूची मसलते हुए कहा, “बेटी, क्या हुआ? कोई देख लेगा तो अच्छा ही है ना! तेरी चुदाई देखकर वो भी अपना लण्ड हिला लेगा या चूत मसल लेगी!”

श्रेया मुस्कुराते हुए गैलरी के कॉर्नर में ग्रिल से अपना सिर लगाकर घोड़ी बन गई और अपनी गांड को उचकाकर पूरा खोलकर बोली, “लो डैडी! आपकी कुतिया आपका मस्त लण्ड लेने के लिए तैयार है!”

मैंने जमीन पर अपने घुटने टिकाकर लण्ड को बॉल्स के पास से पकड़ा और श्रेया का एक चूतड़ पकड़कर उसकी गांड को इस तरह सेट किया कि उसकी चूत में मेरा लण्ड अंदर-बाहर होते हुए बगल वाला कपल आराम से देख सके।
फिर मैंने श्रेया की चूत पर थूक लगाया और लण्ड को भी थूक से गीला किया।

फिर मैंने लण्ड का टोपा श्रेया की प्यारी सी चूत के छेद पर रखकर एक झटका मारा और पूरा लण्ड अंदर पेल दिया।
श्रेया जोर से चीखी, “आईईईई… उफ्फ… धीरे करो ना! बहुत बड़ा लण्ड है आपका!”

मैं थोड़ी देर तक श्रेया की चूत में लण्ड पेलता रहा।
श्रेया भी अपनी गांड उछाल-उछाल कर मस्ती से लण्ड अपनी चूत में लेती रही।

वो जानबूझकर चिल्ला रही थी, “आह… ओह… आईईईई… मम्मी… क्या मस्त लण्ड है! आह… मेरी बच्चेदानी हिल गई!”

तभी अचानक श्रेया सीधी हो गई और अपनी गांड आगे खिसकाकर लण्ड बाहर निकाल दिया।
फिर वो खड़ी होकर एकदम चिल्लाई, “ओह डैडी! देखो वो लड़की हमें देख रही है!”

मैं भी खड़ा हो गया और श्रेया के पीछे खड़े होकर उसके चूतड़ों में लण्ड फंसा दिया और उसके बूब्स मसलते हुए उस लड़की की तरफ देखा।
वो लड़की अपनी चूचियों को हाथों से ढककर सहमी हुई खड़ी थी।
उसका नंगा बदन कमरे से आ रही हल्की रोशनी में चमक रहा था।

उसका पति, जो अब तक उसके पीछे खड़ा होकर श्रेया को मेरे लण्ड से चुदता हुआ देख रहा था, वो हालात देखकर कमरे में भाग चुका था।

श्रेया अपना हाथ पीछे लाकर मेरे लण्ड को खींचकर खुद थोड़ा साइड में हो गई और उस लड़की को मेरा लण्ड दिखाते हुए बोली, “तुम भी लोगी क्या? देखो डैडी का कितना मस्त है!”

पर वो लड़की कुछ नहीं बोली।

श्रेया फिर बोली, “आ जाओ ना! अब तो मौका है, ऐसा लण्ड दोबारा नहीं मिलेगा!”
वो लड़की अपने होंठों पर जीभ फिराने लगी।

श्रेया बोली, “अपने कमरे का दरवाज़ा खोलो, हम दोनों तुम्हारे कमरे में आ रहे हैं!”

वो लड़की बिना कुछ बोले अंदर चली गई और उसने गैलरी का दरवाज़ा बंद कर लिया।

मैंने श्रेया से कहा, “यार वो तो चली गई, अब क्या करें?”
श्रेया मेरी तरफ घूमकर मुस्कुराते हुए बोली, “पापा, आप टेंशन मत लो। उसकी चूत में पहले से आग लगी हुई थी, ऊपर से उसने आपका लण्ड देख लिया। वो अब आपसे चुदवाकर ही रहेगी!”

फिर श्रेया बोली, “चलो उनके कमरे में चलते हैं!”
हम दोनों कमरे में आ गए।

श्रेया गैलरी की लाइट बंद करके नंगी ही कमरे का दरवाज़ा खोलकर बाहर चली गई।
मुझे ऐसे किसी के कमरे में जाना अजीब लग रहा था, इसलिए मैं कमरे में ही खड़ा था।

श्रेया मेरी तरफ हाथ करके बोली, “आओ ना पापा!”
मैंने कहा, “यार, ऐसे जाना ठीक होगा क्या?”

श्रेया वापिस मेरे पास आकर गुस्से से बोली, “आपको उसकी चूत मारनी है या नहीं?”
मैं कुछ नहीं बोला तो वो मेरा हाथ पकड़कर बाहर की तरफ बढ़ गई।

शराब के नशे में श्रेया क्या कर रही थी, उसे खुद मालूम नहीं था।
उसने बगल वाले कमरे के बाहर जाकर डोर बेल बजा दी।

एक बार डोरबेल बजाने के बाद कोई नहीं आया तो श्रेया ने दोबारा बेल बजाई।
एक मिनट बाद अंदर से लड़के की आवाज़ आई, “कौन है?”

श्रेया शरारत से बोली, “भईया हम हैं, आपके पड़ोसी! जिनकी आप अभी लाइव ब्लू फिल्म देख रहे थे! प्लीज़ दरवाज़ा खोलो ना!”

लड़के ने अंदर से दरवाज़ा खोल दिया।
श्रेया मेरा लण्ड पकड़कर अपनी छाती उभारकर उसके सामने खड़ी हो गई।
वो लड़का श्रेया को ऊपर से नीचे तक देखकर मेरी तरफ देखने लगा।

श्रेया बोली, “क्या भईया, अंदर आने का नहीं बोलोगे?”

वो लड़का बिना कोई जवाब दिए दरवाज़े से हट गया।
श्रेया मेरा लण्ड (जो थोड़ा ढीला हो चुका था) पकड़कर खींचते हुए अंदर कमरे में घुस गई और धड़ाम से सोफे पर अपने चूतड़ टिकाकर बैठ गई।
मैं उसके पास खड़ा था।

वो मेरी तरफ मुस्कुराते हुए बोली, “पापा, बैठो ना! इतना शरमा क्यों रहे हो?”
मैं उसकी बगल में बैठ गया।

उस लड़के की बीवी, जिसने अपने नंगे बदन को अब तक तौलिए से कवर कर लिया था, वो भी एक साइड में खड़ी थी।

श्रेया बड़ी बेशर्मी से उठकर मेरी गोद में बैठते हुए उन दोनों की तरफ देखकर बोली, “आओ ना भईया-भाभी, आप भी बैठो ना!”

वो लड़का आकर सामने वाले बेड पर बैठ गया.
पर लड़की अभी भी खड़ी थी।

श्रेया ने मेरी गोद से उठकर उस लड़की का हाथ पकड़ा और उसे सोफे पर मेरी बगल में बिठाते हुए बोली, “भाभी, शरमाओ मत! जैसे आपने हमारी चुदाई देखी है, हम दोनों भी खिड़की से आपकी चुदाई देख चुके हैं!”

श्रेया मेरे पास आकर नीचे जमीन पर घुटने टिकाकर बैठ गई और मेरा लण्ड पकड़कर चूमते हुए उस लड़की की तरफ अपना हाथ करके बोली, “बाई द वे, मैं श्रेया हूं और ये मेरे चाचू हैं। हम दोनों भी आपकी तरह यहां खुलकर चुदाई का मज़ा लेने आए हैं!”

वो लड़की जो टेढ़ी नज़र से मेरे लण्ड और श्रेया को देख रही थी, उसने श्रेया की तरफ अपना हाथ बढ़ाकर कहा, “मैं अलका और वो मेरे पति विजय हैं।”

श्रेया उसका हाथ पकड़कर शरारत से मेरे लण्ड पर रखकर बोली, “ओह तो आप लोग भी चुदाई का मज़ा लेने आए हैं! अगर आप लोग चाहो तो हम चारों मिलकर चुदाई का मज़ा ले सकते हैं!”

फिर श्रेया मेरे लण्ड पर ऊपर से नीचे तक जीभ फिराते हुए बोली, “देखो भाभी, पापा का लण्ड कितना टेस्टी है! इस पर उभरी हुई नसों पर जीभ फिराने में मज़ा आ जाता है! और जब ये चूत में जाकर चूत की दीवारों से रगड़ खाता है तो उफ्फ… जन्नत की सैर करवा देता है!”

अलका टेढ़ी पर प्यासी नज़रों से मेरे लण्ड की तरफ देख रही थी।

श्रेया उसकी तरफ देखकर जोर से हंसते हुए खड़ी हो गई और विजय के पास जाकर बड़ी बेशर्मी से उसके शॉर्ट्स के ऊपर से उसका लण्ड टटोलते हुए बोली, “भईया, आप लोगों ने हम दोनों को तो नंगा देख ही लिया, अब आप लोगों को एतराज़ न हो तो आप भी अपना हथियार दिखा दो!”

विजय श्रेया की गोल-गोल चुचियों को आंखें फाड़े देख रहा था।

श्रेया ने एक झटके से उसका शॉर्ट्स नीचे खिसका दिया और उसके सोए लण्ड पर अपना हाथ रखकर उससे लिपट गई और उसके होंठों से अपने होंठ भिड़ा दिए।
विजय उसका साथ नहीं दे रहा था, शायद अलका उसके सामने थी।

मैंने उसकी स्थिति समझते हुए अलका का हाथ पकड़कर अपने लण्ड पर रख दिया।
अलका ने मेरा कोई विरोध नहीं किया और वो लण्ड को ध्यान से देखते हुए हिलाने लगी।

विजय की नज़र अलका की तरफ ही थी।

उसने अलका के हाथ में मेरा लण्ड देखकर श्रेया की कमर में अपना हाथ डाल दिया और उसे चूमने लगा।

मैंने उन दोनों से अपनी नज़र हटाकर अलका के चेहरे को देखा और बड़े प्यार से पूछा, “अलका, कैसा लगा मेरा लण्ड?”
अलका लण्ड को भींचकर बोली, “अंकल, आपका बहुत मोटा और बड़ा है!”

मैंने उसके गाल पर हाथ फेरते हुए उसकी आंखों में देखकर कहा, “बेटी, अंकल का लण्ड लोगी?”
अलका कुछ नहीं बोली, शायद वो लण्ड के आकार से मन में थोड़ी भयभीत थी।

मैंने कहा, “अलका, देखो ना श्रेया तुमसे छोटी है, फिर भी वो आराम से मेरा लण्ड ले लेती है और खूब मज़े करती है। बोलो ना, तुम अपनी चूत में लेना चाहोगी?”

आगे की कहानी की प्रतीक्षा करें.
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