यह हॉट मौसी फक कहानी मेरी और मेरी मौसी के मस्ती से लेकर चुदाई की सच्ची कहानी है. कहानी बहुत मस्ती भरी है. कैसे मैंने अपनी मौसी को अपने मामा के घर में चोदा.
मैं आपका दोस्त समय सिंह हूँ.
मेरी उम्र 23 साल की है.
यह सेक्स कहानी कुछ साल पहले शुरू हुई थी.
उस वक्त मैं 18 साल का हुआ ही था.
तब से वह सब अब तक चल रहा है.
उस वक्त मैं स्कूल में पढ़ता था.
नई नई जवानी चढ़ी थी तो मन में कुछ बदलाव आने लगे थे पर तब भी मुझे सेक्स का इतना ज्ञान नहीं हुआ था और पढ़ाई की व्यस्तताओं के चलते इन सब चीजों का समय था.
चूंकि मैं पढ़ाई में बहुत होशियार छात्र रहा हूँ इसलिए पढ़ाई के अलावा ज्यादा इधर उधर दिमाग लगाता ही नहीं था.
उसी समय एक लड़की ने मेरे जीवन में प्रवेश किया.
मेरी इस हॉट मौसी फक कहानी में वही लड़की मुख्य किरदार है.
उनका नाम दीप्ति है.
वे मुझसे उम्र में बड़ी हैं और रिश्ते में मेरी दूर की मौसी लगती हैं.
उन्होंने हमारे शहर के मेडिकल कॉलेज में MBBS में एडमिशन ले लिया था.
जब मैंने उन्हें पहली बार देखा, तो मेरे नीचे से जमीन ही खिसक गई थी.
बिल्कुल पतली-सी लड़की, पतले से होंठ, हल्के उभार वाला शरीर, चमकदार आंखें और उस पर लगा हुआ चश्मा … बड़ा ही छबीला चेहरा था उनका.
अब आपकी जानकारी के लिए दीप्ति के फिगर के बारे में बात करते हैं.
उस वक्त मुझे फिगर के साइज़ की जरा सी भी जानकारी नहीं थी, वह सब मुझे बाद में पता चला था.
दीप्ति मौसी का फिगर 32-28-34 का था और वे देखने में कमाल की माल लगती थीं.
वे योग आदि कसरतों से अपने फिगर को मेंटेन रखती थीं.
आप सभी को एक बात तो पता होगी ही कि चश्मा लगाने वाली लड़कियां जब चश्मा हटा देती हैं, तो कितनी मल्लूक लगती हैं.
मल्लूक शब्द का अर्थ तो नहीं मालूम है, मगर हम लड़के लोग किसी माल जैसी दिखने वाली लड़की को मल्लूक कहते हैं.
वक्त के साथ मौसी का घर पर आना-जाना हो गया.
जब भी उन्हें कॉलेज से 1 या 2 दिन की छुट्टी मिलती थी, वे हमारे घर आ जाती थीं.
हम दोनों खूब मस्ती करते थे.
मेरे लिए वे उपहार और चॉकलेट्स लाती थीं.
इसी तरह से वक्त कब बीतता चला गया, कुछ पता ही नहीं चला.
मैं कॉलेज में पहुंच गया और वे आगे की पढ़ाई के लिए इंदौर चली गईं.
अब मौसी से मिलना और बातचीत लगभग खत्म ही हो गई.
अब जब वे कभी कभार हमारे घर आती थीं, तो ही उनसे मुलाकात होती थी.
हां इतना जरूर बदलाव आ गया था कि मौसी मेरे घर जब रुकने के लिए आती थीं तो वे मुझसे कुछ ज्यादा ही चिपक कर बात करने लगी थीं.
रात को जब सोने की बारी आती थी तो हम दोनों एक साथ में ही सोते थे.
मौसी मेरे साथ बिल्कुल चिपक कर सोती थीं.
इसे शायद अब कडलिंग बोलते हैं.
उस समय मुझे क्या पता था कि यह कडलिंग आज मुझे उनकी चूत दिला देगी!
फिर हम दोनों की इस अनजान सी सेक्स कहानी में एक नया मोड़ आया.
उन्हीं दिनों मेरे मामा की शादी हुई, उधर मौसी भी आई थीं.
उस शादी के समय हमारी मुलाकात बहुत समय के बाद हुई.
जब मैंने अपनी मौसी को देखा, तो मैं 2 मिनट के लिए सब कुछ भूल गया!
पहले तो मुझे उन्हें देख कर बहुत खुशी हुई फिर ना जाने क्यों मन में एक सेक्सी सा विचार आया.
मैंने जब उन्हें इसी कामुक नजरिए से देखा तो वे पहले से और भी ज्यादा सेक्सी लग रही थीं.
उनका फिगर और भी ज्यादा कामुक हो गया था.
उनके उभरे हुए स्तन और पीछे की तरफ को निकली हुई गांड.
मैं तो उन्हें देखता ही रह गया.
फिर मामा जी की शादी का कार्यक्रम पूरा हो गया.
तब तक काफी रात हो गई थी तो सबके सोने की बारी आ गई.
सब बहुत थक भी गए थे और नवंबर का महीना था तो रात को ठंड भी बढ़ गई थी.
हम सब भाई-बहन और मौसी एक कमरे में सो रहे थे.
सबके बिस्तर एक लाइन से बिछे थे.
दीवार के किनारे से पहले मैं, फिर मौसी और उनके बाद बाकी के सब.
लेटने के कुछ देर बाद मेरी आंख लग गई.
मुझे पता ही नहीं चला कि मैं कब सो गया.
रात के 3 बजे के करीब मुझे अपने ऊपर किसी के हाथ का स्पर्श महसूस हुआ.
मैंने आंख खोली तो देखा कि वह हाथ किसी और का नहीं … मेरी मौसी का था.
उनकी आदत शुरू से ही बाजू वाले के ऊपर हाथ रखकर सोने की थी.
जब मैंने उनका हाथ हटा कर साइड करने की सोची, तो उन्होंने मुझे ऐसे जकड़ लिया कि मेरा हाल खराब हो गया.
मेरा लौड़ा भी एकदम से टनटना कर खड़ा हो गया.
मैं खुद पर काबू नहीं कर पा रहा था.
फिर बड़ी मुश्किल से मैंने उनका हाथ हटाया और बाथरूम में जाकर उनके नाम की दो बार मुट्ठ मार ली.
बार-बार उनके शरीर की खुशबू ने मुझे मदहोश कर दिया था.
शादी के बाद सब लोग चले गए लेकिन मैं और मौसी वहीं थे.
शादी वाला घर खाली हो गया था.
मैं मौसी के लिए रुका था, उन्हें एक हॉस्पिटल में जॉब मिल गई थी.
मैं उनके साथ 1-2 दिन हॉस्पिटल में गया.
वे बहुत खुश थीं और मैं भी.
फिर हम दोनों भरपेट खाना खाकर आए और सोने की तैयारी करने लगे.
अब घर में सिर्फ नानी और मौसी थीं.
मामा और मामी अपने कमरे में सो रहे थे और नानी को जल्दी सोने की आदत थी.
मैं और मौसी रात को दूसरे कमरे में अलग सोने चले गए.
उस रात को दोबारा वही हुआ.
उनका हाथ मेरे ऊपर आ गया.
आज मैंने हिम्मत करके उन्हें अपनी बांहों में ले लिया और जानबूझ कर मैंने अपना हाथ उनके मम्मों पर रख दिया.
अगले एक मिनट तक मैंने अपने हाथ को बिल्कुल भी नहीं हिलाया, जिससे उन्हें लगे कि मैंने नींद में ही हाथ रख दिया है.
कुछ देर बाद जब उधर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, तो मैंने उनकी टी-शर्ट के ऊपर से हल्के-हल्के उनके बूब्स दबाने शुरू कर दिए.
मौसी के दूध दबाते हुए मैं डर भी रहा था कि कहीं वे उठ न जाएं और कोई लफड़ा न हो जाए.
लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की.
इससे मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने पुनः हल्के हाथ से उनके एक दूध को हॉर्न के जैसे दबाया.
इस बार भी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई.
मैं अब मस्ती से मौसी के दूध मसलने और सहलाने लगा.
तभी अचानक से उन्होंने करवट बदली और मेरे मुँह की ओर अपनी पीठ कर ली.
मैं पहले तो एकदम से घबरा गया कि ये क्या हुआ?
कुछ देर तो मैं सकपकाया हुआ यूं ही पड़ा रहा, पर जब उनकी तरफ से कुछ भी नहीं हुआ तो वापस से हिम्मत आने लगी.
मैं उनके सेक्सी बदन की महक से पहले ही अपने होश खो चुका था तो मेरी वासना पुनः सर उठाने लगी.
इस बार मैंने उनकी मोटी-भारी गांड पर अपना हाथ रखा और आराम से सहलाने लगा.
उन्होंने पहले की तरह कुछ भी रिएक्ट नहीं किया तो मैंने समझ लिया कि मौसी को मजा आ रहा है.
यह सोचते ही मैंने अपने एक हाथ से उनकी ब्रा की पट्टी को टटोला.
मेरे हाथ उनकी ब्रा का हुक आ गया, तो मैंने उनकी टी-शर्ट के अन्दर हाथ डाल दिया और ब्रा के हुक को खोलने लगा.
इतने में ही मौसी एकदम से हिलीं और अपने हाथ पीछे करती हुई बोलीं- अरे मेरे लख्ते जिगर … ऐसे तो खोल ली तूने … रुक बेटा … आज तू तो गया!
मैं घबरा गया कि आज तो लौड़े लग गए.
पर जो हुआ, वह मैं सपने में भी नहीं सोच सकता था.
उन्होंने हाथ पीछे करके खुद अपनी ब्रा के हुक खोल दिया और मेरा हाथ पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिया.
मुझे तो यकीन ही नहीं हुआ.
अब मैंने उनकी टी-शर्ट के अन्दर हाथ डालकर ब्रा हटाई और जब मौसी के नंगे मम्मों पर हाथ रखा, तो लगा जैसे जन्नत मिल गई.
उनके सॉफ्ट-सॉफ्ट बूब्स को जैसे ही मैंने दबाया, वैसे ही उनके मुँह से मादक आवाज निकली- आराम से करो ना … मुझे दर्द होता है!
उनकी आवाज की मीठी कसक मुझे उत्तेजित कर गई थी.
अब मैं कहां रुकने वाला था.
मैं तो मौसी के मम्मों पर पागलों की तरह टूट पड़ा.
मैंने दबा-दबाकर उनके बूब्स लाल कर दिए.
मैं पीछे से अपने हाथ आगे करके उनके दोनों स्तनों को जोर-जोर से दबा रहा था.
मौसी के कंठ से हल्की-हल्की सिसकारियां निकल रही थीं.
वे बार-बार बोल रही थीं- आराम से करो … आह!
मैं मजे ले-लेकर उनके दूध दबा रहा था, तो कभी-कभी निप्पलों को अपनी दो उंगलियों से खींच रहा था.
फिर मैंने उन्हें घुमाया और उनका चेहरा अपनी तरफ कर लिया था.
मौसी की आंखें बंद थीं.
मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा.
शुरू शुरू में तो वे मुझे नहीं चूम रही थीं, पर एक बार जो उन्होंने मुझे चूमना चालू किया तो समझो मेरी तो निकल पड़ी थी.
मैं अपने एक हाथ से उनके स्तनों को दबा रहा था और दूसरे हाथ से उनकी गांड को सहला रहा था.
उनका चुंबन मेरे जीवन का सबसे अच्छा चुंबन था.
मौसी ने अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर डाल दी थी और मेरी लार को चूसती हुई वे अपनी जीभ से मेरी जीभ को चूस रही थीं.
कुछ देर बाद अचानक से उन्होंने मुझे दूर धकेला और मुँह फेरकर लेट गईं.
मेरा लंड फटने को हो रहा था.
मैं चुप था.
मैंने सोचा कि शायद आज के लिए इतना ही काफी है.
मैं नहीं चाहता था कि जल्दबाजी में चूत से महरूम होना पड़े और लौड़े पर लात लग जाए.
जल्दीबाजी में सब कुछ हाथ से निकल जाने का डर हो गया था.
मैंने बाथरूम में जाकर मुट्ठ मारी और बहुत सारा माल निकाला.
फिर वापस आकर मैं लेट गया.
करीब आधा घंटा बाद मौसी ने मेरे लौड़े को टटोला, तो मेरी झक्की खुल गई.
लंड में सनसनी होने लगी. मगर मैं चुपचाप पड़ा रहा.
मौसी ने वापस मेरी तरफ घूम कर मुझे हिलाया और कहा- साले मेरी चुत में आग लगा कर तूने तो अपनी मुट्ठ मार ली … मगर मेरा क्या होगा?
इतनी बिंदास भाषा सुनकर मैंने उनके दूध को पकड़ कर मसला और कहा- आ जाओ मेरे ऊपर!
वे चुप रहीं और अपनी लोअर को नीचे खिसका कर मेरे ऊपर चढ़ गईं.
मैंने भी अपने लौड़े के ऊपर से लोअर और चड्डी को एक साथ नीचे सरका दिया.
मौसी की चुत पर गीली चड्डी अभी भी चढ़ी थी.
मैंने उनके कान में कहा- चड्डी हटाओ न!
वे बोली- साइड में करके कर ले!
मैंने उनकी चुत को हाथ से टटोला और चड्डी को चुत से एक साइड करके अपने लौड़े को चुत से रगड़ दिया.
मौसी की आह निकल गई और उन्होंने अपनी कमर को इधर उधर करके चुत के मुँह को लंड से लगा दिया.
मैंने कहा- क्या आप पहले लंड ले चुकी हो?
वे कुछ नहीं बोलीं, तो मैं समझ गया कि कोई मादरचोद पहले ही मौसी की चुत फाड़ चुका है.
मैंने गांड उचकाई तो लंड के सुपारे से चुत की फांक की चुम्मी ले ली.
मौसी की हल्की सी आह निकली और उन्होंने अपनी टांगें फैला कर चुत में लौड़े को गड़प कर लिया.
बस मैं धीरे धीरे हॉट मौसी फक का मजा लेने लगा.
मौसी ने मुझसे पूछा- तूने पहले किसकी ली है?
मैंने कहा- मेरी जीएफ की चूत.
वे बोलीं- कितनी बार कर चुका है?
मैंने कहा- चार बार.
वे अब मस्ती से लौड़े को चुत रगड़ने लगी थीं.
मैंने उनका एक दूध निकाल कर मुँह में भर लिया और चुदाई के साथ चुसाई का भी मजा लेने लगा.
मौसी कुछ ही देर में हम्म हम्म करती हुई बोलीं- मैं जा रही हूँ. तुम बाहर निकाल लो!
मैंने उन्हें दबोच लिया और कहा- ऐसे कैसे निकाल लूँ!
वे चुप रहीं.
मैंने भी कमर उठा उठा कर मौसी की चुत को रगड़ा और खुद ही अपने लंड को चुत से बाहर निकाल कर रस झाड़ कर बिस्तर की चादर पर ही टपका दिया.
हम दोनों कुछ देर ऐसे ही लिपटे पड़े रहे और बाद में अलग होकर सो गए.
आगे क्या हुआ, वह अगली कहानी में लिखूँगा.
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