जवान भतीजी को चोदा पूरी रात

फुल नाईट सेक्स कहानी में अपनी भतीजी की सहेली की चूत गांड खोलने के बाद वह लड़की चुदाई लायक नहीं बची थी. अभी पूरी रात बाक़ी थी. तो मैंने अपनी भतीजी को पेला.

मेरी पिछली कहानी
एक ही दिन में जवान लड़की की चूत और गांड मारी
में आपने पढ़ा कि मैं अपनी भतीजी की सहेली की कुंवारी चूत अपने लंड से खोल चुका था. हमें बहुत मजा आया. इसके बाद उसकी गांड में भी मैं अपना बड़ा लंड पेल चुका था.

अब आगे फुल नाईट सेक्स कहानी:

श्रेया अभी भी अवनी के पास बैठी हुई थी।
अवनी श्रेया की कमर में हाथ डालकर लेटी हुई थी।
मुझे कपड़ों में देखकर श्रेया बोली, “चाचू, क्या हुआ? लगता है अवनी ने आपकी बॉल्स का सारा पानी निचोड़ लिया, इसलिए आपने कपड़े पहन लिए!”

मैंने बिना कुछ बोले मुस्कुराते हुए श्रेया को तौलिया दिया और कहा, “ले, इसे साफ कर दे।”

श्रेया अवनी की गांड और चूत को साफ करने लगी।
अवनी का सच में बुरा हाल था।

मैंने श्रेया से कहा, “इसे रेस्ट करने दे, थोड़ी देर में ठीक हो जाएगी।”
श्रेया उस पर चादर देने लगी।

मैं चुपचाप हॉल में आ गया और सोफे पर लेटकर टीवी देखने लगा।
मैं भी थक सा गया था।

थोड़ी देर बाद श्रेया आ गई।
उसने ढीला सा शॉर्ट्स और बिलकुल छोटा सा टॉप पहन रखा था।

वो आकर मेरे पास बैठ गई और मेरे चेहरे के ऊपर झुकते हुए बोली, “पापा, लगता है आप बहुत थक गए हो!”
मैंने कहा, “श्रेया, ऐसी बात नहीं है।”

श्रेया बोली, “फिर क्या बात है? आप यहां आकर क्यों लेट गए?”
मैंने उसकी कमर में हाथ डालकर कहा, “यार, अवनी बहुत टाइट थी। साली के छेद खोलने में बहुत मेहनत करनी पड़ी, लण्ड भी दुखने लगा है।”

श्रेया बोली, “ओह पापा, ये बात है! मेरे प्यारे डैडी का लण्ड दुखने लगा है!”
फिर वो शॉर्ट्स के ऊपर से लण्ड टटोलते हुए बोली, “पापा, मालिश कर दूं आपके हथियार की? अभी तो आपको बहुत मेहनत करनी है!”

वो मेरे होंठ चूमते हुए बोली, “आज सारी रात आपको जगाऊंगी!”
मैंने श्रेया को अपने पास खींचकर कहा, “श्रेया, तुम मुझे पापा-पापा क्यों बोल रही हो?”

श्रेया तपाक से बोली, “हम दोनों इस घर में बाप-बेटी की तरह रहेंगे। अगर हो सके तो आप मुझे बेटी ही बोलो, मुझे बहुत मजा आएगा!”

फिर श्रेया बोली, “पापा, रुको, मैं आपके लिए दूध बनाती हूं। गरम दूध पीकर आपके लण्ड में जान आ जाएगी!”
मैंने कहा, “ठीक है, ले आओ।”

श्रेया उठकर गांड मटकाते हुए किचन में चली गई।
थोड़ी देर बाद उसने दूध का गिलास लाकर टेबल पर रख दिया और मेरा हाथ पकड़कर उठाते हुए बोली, “लो पापा, दूध पी लो। इसमें केसर और बादाम डाला हुआ है!”

मैं उठकर सोफे पर बैठ गया।
श्रेया भी मेरी बगल में मेरे से सटकर बैठ गई और मेरा हाथ पकड़कर बोली, “पापा, मैंने आपको यहां अपने लिए बुलाया था, पर आपने तो उस अवनी की चूत और गांड में अपना सारा पानी बहा दिया!”

मैंने कहा, “बेटी, थोड़ी देर सब्र करो। लण्ड थोड़े रेस्ट के बाद फिर से तैयार हो जाएगा।”
श्रेया खुश होते हुए बोली, “ओह रियली पापा! फिर तो बहुत मजा आएगा!”

मैं गिलास लेकर दूध पीने लगा।

श्रेया फिर बोली, “पापा, आपको मालूम है, अवनी बिलकुल कुंवारी थी। आपने तो उसकी हालत खराब कर दी। अब पता नहीं वो कब उठेगी!”
मैंने कहा, “कोई बात नहीं, थोड़ी देर में सही हो जाएगी। जब उठेगी तो थोड़ी देर गरम पानी में बिठा देना, उसकी चूत और गांड सही हो जाएगी।”

श्रेया बोली, “पापा, एक बात बताओ।”
मैंने कहा, “हां, पूछो।”

श्रेया बोली, “सच बताना, आपको उसके साथ मजा आया?”
मैंने कहा, “बेटी, मुझे कुंवारी लड़कियों की चूत और गांड की सील खोलने में बहुत मजा आता है। तुम्हें पता है, पहली चुदाई कोई लड़की नहीं भूलती। और जो लड़की एक बार मुझसे चुदवा ले, वो बाद में किसी के नीचे सोएगी तो उसे मेरे लण्ड की याद ज़रूर आएगी!”

श्रेया बोली, “हम्म्म, ये बात तो सही है!”

फिर उसने अपना टॉप उतारकर साइड में रख दिया और मेरी तरफ अपनी चूचियां उभारकर बोली, “लो पापा, उस दूध के साथ अपनी बेटी का दूध भी पियो। आपमें जल्दी जोश आ जाएगा!”

मैंने गिलास टेबल पर रखकर उसमें जमी मलाई अंगुलियों से निकालकर श्रेया की एक निप्पल पर लगाई और उसे मुंह में लेकर चूसने लगा।
श्रेया के कच्चे मांस के स्वाद के साथ मलाई बहुत स्वादिष्ट लग रही थी।
मैंने उसकी चूची चूसते हुए उस पर लगी मलाई चाट ली।

श्रेया ने टेबल पर रखा दूध का गिलास उठाकर उसमें अपनी दूसरी चूची डुबोई और मेरे से चुसवाने लगी।
मैं श्रेया की एक चूची मसलते हुए दूसरी को चूस रहा था।

श्रेया मेरे बालों में एक हाथ फिराते हुए बोली, “उफ्फ पापा, बहुत मजा आ रहा है! चूसो, पीओ अपनी बेटी के दूध! उम्मम्म… आह… अपनी से दुगुनी उम्र के मर्द को अपना दूध पिलाकर कितना मजा आता है, उफ्फ!”

श्रेया ने अपनी एक टांग मेरी टांगों पर चढ़ा दी और मचलते हुए मेरे लण्ड को टटोल कर पकड़ लिया।
मैं भी उसके शॉर्ट्स के ऊपर से उसकी चूत मसलने लगा।

थोड़ी देर बाद श्रेया बोली, “चलो पापा, अब मैं आपको अपनी चूत का रस पिलाती हूं!”

श्रेया ये बोलकर फटाक से उठी और एक झटके में अपना शॉर्ट्स और पैंटी उतारकर सोफे पर लेट गई।
उसने खुद को सेट करके अपनी चूत मेरे मुंह के पास करते हुए दोनों टांगे उठा लीं।
श्रेया की प्यारी सी चिकनी चूत और गांड का छेद मेरे सामने था।

मैंने अपनी एक अंगुली थूक से गीली की और श्रेया की चूत के होंठों में फिराने लगा।
श्रेया अपनी मांसल गांड थोड़ी और उठाते हुए बोली, “आह… सी… सी… पापा! अब अवनी तो आपसे चुदवा नहीं सकेगी, आपको अपनी बेटी को पूरी रात चोदना है! आह… अच्छे से मेरी चूत का रस पी लो ताकि आपका लण्ड ढीला होने का नाम न ले!”

मैं श्रेया की बेचैनी समझते हुए उसकी चूत में दो अंगुलियां डालकर उसकी चूत चाटने लगा।
श्रेया एक हाथ से मेरा सिर अपनी चूत पर दबाते हुए, अपनी गांड उछाल-उछाल कर चूत चटवाने लगी।
मैं सोफे के नीचे घुटने टिकाकर उसकी चूत चाट रहा था।

थोड़ी देर बाद श्रेया सिसकियां लेते हुए बोली, “आप पापा… और जोर से! आह… बहुत मस्त चाटते हो आप! उम्मम्म्… मम्मी… कितना मजा आ रहा है! आई ईईई… आह!”

मुझे लगा श्रेया झड़ने वाली है इसलिए मैं एक हाथ से उसका क्लिट रगड़ते हुए, दूसरे हाथ से उसकी चूत में बहुत तेज़ी से अंगुलियां अंदर-बाहर करने लगा।

थोड़ी देर में श्रेया कमर उठाकर झड़ने लगी।
मैंने अंगुलियों की स्पीड और बढ़ा दी।

उसकी चूत से चिकने पानी के साथ मूत की तेज़ धार आकर मेरे मुंह पर लगी।
श्रेया थोड़ी देर आह… उम्मम्म… करते हुए शांत हो गई।

मेरा चेहरा उसके मूत की गरम धार से भीग चुका था और मेरा लण्ड श्रेया की चूत का रस पीकर अपने पूरे आकार में आ चुका था।

दो-तीन मिनट बाद श्रेया जैसे ही संभली तो वो सोफे पर बैठकर मेरा चेहरा देखकर जोर-जोर से हंसते हुए बोली, “ओह पापा! लगता है आपने तो मेरे मूत से चेहरा धो लिया!”

मैंने श्रेया का शॉर्ट्स उठाकर चेहरा पोंछते हुए उसकी बगल में बैठकर कहा, “कोई बात नहीं बेटी, तेरा जूस पीकर मेरा डंडा तैयार हो चुका है। साली कुतिया, देखना तेरी कैसे पिटाई होगी!”
श्रेया ने दोनों बाहें खोलकर अंगड़ाई ली और अपनी छाती उभारकर मुझे बाहों में लेते हुए कहा, “पापा, आपकी ये रण्डी बेटी आपके डंडे से पिटाई के लिए हर समय तैयार है!”

फिर श्रेया ने जैसे ही मेरा चेहरा चूमा, मेरे शॉर्ट्स पर हाथ रखा तो उसके हाथ में मेरा लण्ड आ गया।
वो लण्ड को कसकर पकड़ते हुए बोली, “वाउ पापा! सच में आपका ये अजगर तो पूरा तैयार है! उफ्फ… कितना दम है आप में! सच्ची, मुझे यकीन हो गया कि आप अपनी इस बेटी को पूरी रात चोद सकते हो!”

मैंने उसकी गर्दन पकड़कर गाल पर काटते हुए कहा, “बेटी, ये लण्ड तेरे जैसी दस रंडियों की चूत को एक साथ चोदकर भोसड़ा बना सकता है!”
श्रेया अदा से हाथ हवा में लहराकर बोली, “येस पापा! येस पापा! आई नो! अंदर एक की चूत और गांड तो आपने फाड़ ही रखी है!”

मैंने श्रेया की चूचियां पकड़कर मसलते हुए कहा, “यार श्रेया, अवनी की सील तोड़ने में मजा आ गया। साली मेरे लण्ड को ललकार रही थी, लण्ड अंदर जाते ही कुतिया की चीखें निकल गईं। सच में कुंवारी लड़की चोदने का अपना ही मजा होता है!”

श्रेया मेरी आंखों में देखकर बोली, “पापा, आप कहो तो आपके लिए और कुंवारी लड़की बुला दूं!”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “नहीं बेटी, पहले तुम दोनों की चूत का तो भोसड़ा बना लेने दे, फिर तू किसी और चूत का इंतज़ाम कर देना।”

श्रेया बोली, “पापा, रात को चुदाई करेंगे। मुझे दारू पीकर चुदवाने में बहुत मजा आता है!”
मैंने कहा, “क्या? मैं रात तक लण्ड ऐसे ही खड़ा लेकर घूमता रहूं?”

श्रेया बोली, “पापा, मैं आपके लण्ड को तड़पाना नहीं चाहती, पर मैं चाहती हूं कि आप थोड़ा सा तड़पो, ताकि रात तक आपके अंदर का जानवर जाग जाए। फिर आप पूरी रात मुझे मसल कर रख दो। सच कहूं तो मैं आपकी मजबूत बाहों में खो जाना चाहती हूं!”

फिर वो सवालिया नज़रों से मेरी आंखों में देखते हुए बोली, “क्या पापा, आप अपनी बेटी के लिए इतना नहीं कर सकते?”
मैंने अपना एक हाथ उसके चूतड़ों के नीचे ले जाकर उसकी गांड में एक अंगुली डालकर कहा, “क्यों नहीं बेटी, मैं दिन-रात तेरी चूत और गांड फाड़ सकता हूं!”

गांड में अंगुली जाते ही श्रेया ने चिहुंक कर चूतड़ पीछे की तरफ उभार दिए और अपना सिर मेरी छाती पर रखकर बोली, “पापा, चलो ना, अवनी को देखते हैं। अगर वो उठ गई तो रात को कहीं बाहर चलेंगे, और आपके लिए मेरे पास एक सरप्राइज़ भी है!”

मैंने श्रेया के दोनों चूतड़ पकड़कर उसे अपनी गोद में खींच लिया और कहा, “बता ना, क्या सरप्राइज़ है?”
श्रेया बोली, “पापा, मैंने आपके साथ हनीमून पर जाने का प्लान किया है। मैंने सब प्लान कर रखा है!”

मैंने पूछा, “कहां लेकर जाने का सोच रही हो?”
श्रेया बोली, “मैकलोडगंज जाने की सारी तैयारी कर रखी है। कल निकलेंगे और वहां चार-पांच दिन खूब मस्ती करेंगे!”

मैंने कहा, “ठीक है, पर अवनी भी चलेगी ना?”

श्रेया मुस्कुराते हुए बोली, “नहीं पापा, अवनी का ऑफिस होगा, इसलिए सिर्फ हम दोनों बाप-बेटी मस्ती करेंगे!”

मेरा मन अवनी को लेकर जाने का भी था.
पर मैं श्रेया के सामने कुछ बोल नहीं पाया।

श्रेया मेरी गोद से उठकर मेरा हाथ पकड़कर खींचते हुए बोली, “चलो ना पापा, अवनी के पास चलते हैं!”

मैं खड़ा होकर श्रेया के पीछे-पीछे चल पड़ा।
नंगी श्रेया अपने चूतड़ मटकाती हुई चल रही थी।
जब वो पांव रख रही थी तो उसके भारी चूतड़ एक-दूसरे से रगड़ खाकर मेरे लण्ड को और भड़का रहे थे।

अवनी के पास पहुंचकर श्रेया ने उसे उठाया।
अवनी अंगड़ाई लेते हुए उठकर बैठ गई और श्रेया से बोली, “तुम नंगी क्यों घूम रही हो?”

श्रेया मुस्कुराते हुए मेरी तरफ देखकर बोली, “जब घर में इतना मस्त लण्ड हो तो कोई कपड़े क्यों पहनेगा! चल, इन बातों को छोड़, तू ये बता कि तेरी गांड का क्या हाल है?”
अवनी मुस्कुराते हुए बोली, “अभी तो बदन कुछ ठीक लग रहा है।”

श्रेया बोली, “चल, दिखा ना!”
अवनी ने चादर हटाकर अपनी टांगें उसके सामने फैला दीं।

श्रेया उसकी फूली और लाल हो चुकी चूत को देखकर बोली, “यार, तेरी चूत तो अभी भी लाल है!”
अवनी बोली, “हां यार, ऐसे लग रहा है अंदर कुछ चुभ रहा हो।”

श्रेया उसकी टांगें उठाकर उसकी गांड देखते हुए बोली, “अभी तुम्हारा नीचे का छेद तो ठीक है, पर अभी भी ये फैला-फैला लग रहा है!”
मैंने हंसते हुए कहा, “फैला-फैला क्यों नहीं लगेगा, मैंने इतनी मेहनत जो की है!”

मेरी बात पर वो दोनों खिलखिलाकर हंसने लगीं।

श्रेया बोली, “चल अवनी, आज तेरी पहली चुदाई को सेलिब्रेट करने क्लब चलते हैं!”
अवनी बोली, “नहीं श्रेया, आज मेरा मन नहीं है। बाहर जाने का फिर कभी सेलिब्रेट कर लेना।”

मैंने अवनी से कहा, “चलो ना यार, क्यों ड्रामा कर रही हो?”
अवनी बोली, “नहीं चाचू, सच में आज मेरा कहीं जाने का बिलकुल दिल नहीं है। हम कल जा सकते हैं।”

श्रेया बोली, “कल तो मैं और पापा मैकलोडगंज जाने वाले हैं, तीन दिन बाद आएंगे।”
अवनी बोली, “ठीक है, आप लोग जाकर आओ, तब तक मैं ठीक भी हो जाऊंगी।”

श्रेया बोली, “ठीक है, चल तू उठकर थोड़ी देर बाथटब में गरम पानी में बैठकर अपनी सिकाई कर ले। फिर घर पर ही पार्टी करेंगे!”

श्रेया की बात सुनकर अवनी उठ गई।
श्रेया उसे लेकर बाथरूम चली गई।

शाम के आठ बज चुके थे।
थोड़ी देर बाद दोनों आ गईं।

अवनी ने शॉर्ट्स और टॉप पहन रखा था और श्रेया ने काले रंग की ट्रांसपेरेंट नाइटी।
हम तीनों हॉल में आ गए।

अवनी मेरे पास सोफे पर बैठ गई।
श्रेया हम तीनों के लिए पेग बनाकर ले आई।

थोड़ी देर बाद जब दारू चढ़ गई तो हॉल में चुदाई का नंगा नाच चल पड़ा।
मैंने फुल नाईट सेक्स का मजा लेते हुए श्रेया की दो बार गांड मारी और दो बार चूत।
इसी बीच अवनी मेरे और श्रेया से अपनी चूत चटवाकर झड़ती रही।
रात को एक बजे हम तीनों थककर सो गए।

आगे की कहानी की प्रतीक्षा करें.
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