मैंने अपनी सेक्सी मम्मी की चुदाई देखी- 1

मॅाम बॉयफ्रेंड सेक्स कहानी में एक दिन मैं मॅाम के साथ बाजार में थी कि एक आदमी मॅाम को घूरने लगा. मॅाम भी उसे देख रही थी. बाद में मुझे पता चला कि वो मॅाम का बॉयफ्रेंड था.

हैलो फ्रेंड्स, मेरा नाम सविता जाधव है और मैं महाराष्ट्र में रहती हूँ.
मैं इस पटल पर नई हूँ, अगर मॅाम बॉयफ्रेंड सेक्स कहानी में कोई गलती हो जाए तो माफ कर दीजिएगा.

मेरी मम्मी हाउसवाइफ हैं. मम्मी का नाम रंजना है, उम्र तो उनकी ज्यादा है पर दिखने में वे सिर्फ 32-33 साल की लगती हैं.

मम्मी का फिगर 36-32-38 का है … उफ्फ़, क्या माल हैं वे …
सामने से देखो तो बिल्कुल माधुरी दीक्षित लगती हैं.

उन्हें देख कर अच्छे-अच्छों का लंड खड़ा हो जाता है.
मेरे पापा खेतों में मजदूरों से काम करवाते हैं. ऊपर वाले की कृपा से हम लोग ठीक-ठाक वाले धनी वर्ग में आते हैं.

मैं अभी फर्स्ट ईयर में पढ़ रही हूँ और जवानी की दहलीज पर हूँ.
मेरा एक छोटा भाई है, पर वह बाहर बोर्डिंग में पढ़ने गया है.

घर पर मैं और मम्मी-पापा ही रहते हैं.
ये सब मैंने अपनी आंखों से देखा है, इसलिए लिख रही हूँ. ये कोई झूठी कहानी नहीं … बिल्कुल सच्ची है.

यह तीन महीने पहले की बात है.

हमारे पास खेती कुछ ज्यादा ही है, पापा उसी में दिन-रात व्यस्त रहते हैं.
वे घर पर ज़्यादा ध्यान नहीं देते, कभी कभी तो खेतों के बीच बने फार्म हाउस में ही रुक जाते हैं.
शायद वे उधर अपनी दारू वाला कार्यक्रम खुल कर चलाते होंगे.

घर का सारा काम मम्मी ही संभालती हैं.
जब भी मम्मी को बाहर जाना होता है, चाहे मार्केट हो, पार्लर हो, किसी का फंक्शन हो … वे हमेशा मुझे ही साथ ले जाती हैं क्योंकि मम्मी को स्कूटी चलानी नहीं आती, तो एक्टिवा लेकर जहां जाना होता है, मैं ही उन्हें अपने साथ बिठा कर ले जाती हूँ.

एक दिन ऐसा हुआ कि मम्मी को मार्केट जाना था.
मैंने उन्हें पीछे बिठाया और चली गई.

मम्मी तो हमेशा की तरह साड़ी और बहुत छोटा-सा, गहरा वी-शेप ब्लाउज़ पहन कर रेडी हो गईं.

वे हमेशा ऐसा ही ब्लाउज पहनती हैं.
इसमें से उनके भारी-भारी बूब्स मस्ती से झलकते हुए थिरकते हैं और देखने वाले मर्दों के लौड़े खड़े हो जाते हैं.

उनकी मादक जवानी को देखने के चक्कर में साला मुझे तो कोई देखता ही नहीं है, सब मम्मी के मादक हुस्न को आंखों से चोदते रहते हैं.

उस दिन भी यही हुआ.
मार्केट में एक हट्टा-कट्टा, मज़बूत बदन वाला आदमी बार-बार मम्मी को घूरे जा रहा था.

मैंने ध्यान दिया कि मेरी मम्मी ने भी उसे नोटिस कर लिया था और वे भी चुपके-चुपके उसकी तरफ़ देख रही थीं … पर मैं अनजान बनी रही.

हम जहां-जहां गए, वह आदमी पीछे-पीछे आता रहा.
मम्मी भी कभी-कभी पीछे मुड़कर देख लेती थीं.

हमने सब्ज़ी वगैरह ली और वापस चल दिए.
वह हमारे पीछे-पीछे आया, हमारे मोहल्ले तक आया और घर के बाहर से वापस लौट गया.

घर पहुंच कर मैं मुँह-हाथ धोने लगी.

जब मैं बाथरूम से बाहर आई तो मुझे मम्मी कहीं नहीं दिखीं.
मुझे लगा कि वे शायद छत पर गई होंगी.

छत पर गई तो देखा … मम्मी रोड की तरफ़ बार-बार झांक रही थीं.

तभी मम्मी ने मुझे देख लिया और वे घबरा कर बोलीं- ऊपर क्यों आई हो?
मैं मम्मी के पास गई और नीचे देखा … वह आदमी मुझे फिर से दिखा.

मुझे देखते ही वह तुरंत मुड़कर चला गया.
मैं सब समझ गई … मम्मी ऊपर क्या कर रही थीं.

मैंने मम्मी से पूछा- आप उस आदमी को क्यों देख रही थीं?
मम्मी ने झूठ बोला- नहीं तो … मैं ऐसे ही ऊपर टहलने आई थी.

मैंने कुछ नहीं कहा.
फिर वे बोलीं- चलो नीचे चलते हैं.

हम दोनों नीचे आ गए.

अब तक शाम हो गई थी.
कुछ देर बाद पापा भी घर आ गए.

मम्मी और मैंने मिलकर खाना बनाया, सबने खाया और सो गए.

मेरी नींद तब टूटी जब रात को बाइक का हॉर्न बजा.
मैं उठी और खिड़की से बाहर झांका … तो वही बाइक वाला था जो दिन में आया था.
मैंने देखा कि वह ऊपर यानि छत की तरफ़ कुछ इशारे कर रहा था.

मुझे लगा कुछ गड़बड़ है.
डर तो लग रहा था कि मम्मी न देख लें, पर मैं दबे पांव छत पर चली गई.

वहां पहुंची तो मेरा दिमाग हिल गया … मम्मी उस अनजान आदमी को फ्लाइंग किस दे रही थीं.
मैं समझ नहीं पा रही थी कि ये क्या हो रहा है.

मैं समझ रही थी कि मम्मी अब तक उस मर्द को जानती तक नहीं हैं तो वे उसे फ्लाइंग किस क्यों दे रही हैं?

फिर मम्मी ने कुछ कागज़ जैसा नीचे फेंका और पीछे को मुड़ीं.

मैं फटाफट नीचे भाग आई.

मेरा दिमाग तेज़ी से दौड़ने लगा … अब क्या करूँ? मेरा कोई बॉयफ्रेंड भी नहीं है कि किसी से सलाह लूँ. सहेली से बात करना ठीक नहीं लग रहा था.
फिर दिमाग में आइडिया आया … सुबह मम्मी का मोबाइल चेक कर लूँगी.

नींद तो वैसे भी उड़ चुकी थी, पर मैंने सोने की कोशिश की और कब सो गई, पता ही नहीं चला.

सुबह पापा मेरे उठने से पहले ही खेत चले गए थे. मम्मी ने मुझे उठाया और बोलीं- आज पार्लर चलना है.
मैंने पूछा- किसी फंक्शन में जाना है क्या?
मम्मी बोलीं- हां … बाद में बताऊंगी, अभी बस चल!

‘ठीक है.’ कहकर मैं नहाने चली गई.
नहा-धोकर हमने नाश्ता किया और हम पार्लर निकल गए.

वहां मम्मी ने जो-जो करवाया, सुनकर मेरे होश उड़ गए … बॉडी पॉलिश, पेडिक्योर, फुल बॉडी वैक्स, मेनिक्योर, ब्लीचिंग, आइब्रो, बॉडी ब्लीच … सब कुछ.

मैंने सोचा, बहती गंगा में हाथ धो लूँ … तो मैं मम्मी से बोला- जो आप करवा रही हो, मैं भी वही सब करवाऊंगी!
मम्मी ने साफ़ मना कर दिया- नहीं तू सिर्फ़ आइब्रो और पेडिक्योर करवा!

मेरा मुँह लटक गया.
मम्मी बोलीं- तू अभी छोटी है बेटा … बाद में सब करवा दूँगी!

मैंने मन ही मन सोचा … कितनी कमीनी औरत है, खुद के लिए तो सब कुछ, मेरे लिए कुछ नहीं!
मेरा मूड ऑफ हो गया.

मम्मी पूरा ट्रीटमेंट करवाने अन्दर चली गईं.
उस दिन पूरा दिन लग गया.

जब बाहर निकलीं तो मैं देखती रह गई … इतनी सुंदर लग रही थीं कि पूछो मत.

मैंने मज़ाक में कहा- मम्मी … किसके दिल को चोरी करने वाली हो?
मम्मी गुस्सा होकर बोलीं- चुप कर! ऐसा कुछ नहीं है!

मैं बोलती ही रही- पर पापा देखेंगे तो बेहोश हो जाएंगे … ये पक्का है.
मम्मी मुस्कुराने लगीं, उनका गुस्सा थोड़ा कम हुआ.
सच में, मम्मी अप्सरा जैसी लग रही थीं.

फिर मम्मी बोलीं- कुछ कपड़े लेने हैं, चल!
हम लोग अपने कस्बे के एकलौते शॉपिंग मॉल गए और मम्मी ने उधर से फैंसी-फैंसी ब्रा-पैंटी ख़रीदीं … वह भी बहुत सेक्सी वाली.

अब मम्मी नई साड़ी भी ले रही थीं.
मैंने मौक़ा देखकर कहा- मम्मी मोबाइल देना, ज़रा काम है!

मम्मी ने फोन दे दिया.
मैंने सोचा तब तक वे साड़ी चुन लेंगी.

फोन हाथ में आते ही मैंने कॉल लिस्ट खोली … और मेरे होश उड़ गए.
उस नंबर से कितनी बार बात हुई थी, फिर व्हाट्सएप खोला … वहां तो ढेर सारे फोटो, वीडियो कॉल, सेक्सी चैट … सब कुछ था.
दुकान में होने की वजह से मैं सब नहीं देख पाई … पर जो देखा, उससे दिल धक-धक करने लगा.

इतने में मम्मी ने बहुत ही सेक्सी ट्रांसपेरेंट साड़ी चुन ली.
बिल देखकर बोलीं- चल, पहले खाना खा लें, फिर घर चलते हैं. पापा के लिए घर पर ही कुछ बना लेंगे.
हमने खाना खाया और घर आ गए.

पापा जब घर आए तो मम्मी को देखकर दंग रह गए- अरे वाह … कहां जाना है?
मम्मी बोलीं- फंक्शन है.
पापा ने पूछा- कौन सा फंक्शन?
मम्मी मुस्कुरा कर टाल गईं- खाना खा लो, बाद में बताऊंगी.

मम्मी-पापा किचन में थे.
मैंने मौक़ा देखकर फिर मम्मी का फोन चेक किया … और तो मुझे झटका ही लग गया.

वहां मम्मी के बूब्स, चूत, गांड के फोटो थे … और उस आदमी ने अपना लंबा मोटा लंड भेज रखा था.

चैट पढ़ी तो पता चला कि दोनों अच्छे दोस्त बन चुके हैं.
उसका नाम राजेश है.
दोनों ने घर पर मिलने का प्लान बनाया था.

मम्मी मुझे किसी बहाने बाहर भेजने वाली थीं.
दो दिन में मम्मी इतनी बदल जाएंगी, मुझे यकीन नहीं हो रहा था.

मम्मी को पता नहीं था कि मुझे सब मालूम हो चुका है.

उनका मिलना घर पर ही तय था, पर अभी तारीख़ फाइनल नहीं हुई थी. इसलिए मैं भी चुप रही.
मैंने प्लान बनाया … कुछ दिन पापा के साथ खेत पर जाऊंगी, मम्मी को लगेगा मुझे कुछ नहीं पता.

ऐसे ही मैंने 3-4 दिन किया.
इसी के साथ हर रात खाना खाने से पहले मम्मी का फोन चेक करती थी.

फिर आख़िरकार संडे को उनका मिलना फाइनल हो गया.
उस दिन पापा को बाहर 2-3 दिन के काम से जाना था.

मैंने मम्मी से कहा- मैं भी खेत पर जाऊंगी, शाम तक आ जाऊंगी!
मम्मी के लिए यही सबसे अच्छा मौका था.

चैट पढ़कर मैंने खाना खाया और सोने का नाटक किया.
संडे सुबह पापा चले गए. मैं भी जल्दी उठी, नहाई और तैयार हुई.

मैं मम्मी से बोली- आज स्कूटी नहीं ले जाऊंगी.
मम्मी ने पूछा- क्यों?

मैंने बहाना बनाया- टायर में हवा कम है, बाद में कहीं रुक गई तो तकलीफ़ होगी. पापा भी नहीं हैं.
मम्मी बोलीं- ठीक है.

जैसे ही मम्मी किचन की तरफ़ गईं, मैंने नाटक किया कि बाहर जा रही हूँ … और चुपके से घर के अन्दर आकर छुप गई.

सीढ़ियों के नीचे पुराना सामान रखा था, उसी के पीछे मैं छुप गई.
वहां से सब साफ़ दिख रहा था.

मम्मी को लगा कि मैं चली गई.
उन्होंने किचन से झांक कर मुझे तलाशा, जब मैं उन्हें कहीं नहीं दिखाई दी … तो दरवाज़ा बंद किया … और सबसे पहले फोन लगाया.

फोन लगते ही वे बोलने लगीं.

मम्मी फोन पर बोलीं- राजेश … सविता और पति बाहर जा चुके हैं, तुम 12 बजे तक आ जाओ!
राजेश- ठीक है जान … आ रहा हूँ!

फोन कटते ही मम्मी ने साड़ी, ब्लाउज़, पेटीकोट सब उतार कर यूं ही फेंक दिया और सिर्फ़ ब्रा-पैंटी में घर में घूमने लगीं.

उन्होंने सोफा ठीक किया, किचन में कुछ सामान इधर-उधर करने की आवाज़ आई.
मुझे लगा साफ-सफाई कर रही होंगी.

अचानक बेल बजी.
अभी सिर्फ़ 10 बजे थे.

मम्मी घबरा गईं, फटाफट पेटीकोट उठाया और सोफे के नीचे ठूँस दिया.
साड़ी लपेटी, पल्लू डाला … पर ब्लाउज़ पहनना भूल ही गईं.
उन्होंने ब्रा में ही दरवाज़ा खोल दिया.

बाहर सुबह वाले मज़दूर संभालने वाले अंकल आए थे, जो रोज पापा के साथ खेती में काम करवाने जाते हैं.

अंकल ने नीचे पड़ा ब्लाउज़ देखा, मम्मी की हालत भाँप ली और बोले- मालकिन, साहब कहां गए हैं?

मम्मी ने हड़बड़ाते हुए कहा- दो-तीन दिन के लिए बाहर गए हैं … सविता खेतों की तरफ गई है.
अंकल ने मुस्कुरा कर कहा- ठीक है मालकिन!

वे चले गए.
उनके जाते ही मम्मी ने राहत की सांस ली.

अब इसके आगे क्या हुआ, वह मैं आपको मॅाम बॉयफ्रेंड सेक्स कहानी के अगले भाग में लिखूँगी.
आप अपने विचार मेल के जरिए मुझे जरूर भेजें.
धन्यवाद.

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