मौसा की भानजी के साथ सेक्स का आनन्द

हॉट बेब देसी कहानी मेरे मौसाजी की बहन की बेटी की चुदाई की है. संयोगवश वो और मैं एक ही दिन मेरे मौसाजी के घर पहुंचे. हमारी दोस्ती कैसे हुई और फिर सेक्स कैसे हुआ?

दोस्तो, मेरा नाम रिकी है, मैं 23 साल का हूं और मैं मध्यप्रदेश का निवासी हूं.

जब मैं किशोरवय था, तभी से सेक्स कहानियां पढ़ रहा हूं और मैंने काफ़ी लड़कियों व औरतों के साथ ऑनलाइन सेक्स चैट भी की है.
मुझे ये सब सेक्स काफी पसंद है इसलिए लगभग रेगुलर सेक्स कहानी और सेक्स चैट करता रहता हूं.

इससे पहले आप सभी ने मेरी कहानी
चलती बस में भाभी के साथ सेक्स का मजा
को जरूर पढ़ा होगा, जिसमें मैंने बताया था कि कैसे गांव की एक गोरी माल भाभी को मैंने बस में गर्म करके उसका पानी निकाला और उसने भी अपने मुलायम हाथों से मेरे लंड को सहला कर मेरा पानी अपने चिकने शरीर पर निकाला था.

पर अफसोस कि हम दोनों की वासना चुदाई तक नहीं पहुंच पाई और हम दोनों एक दूसरे से बिछड़ गए थे.

अब आगे हॉट बेब देसी कहानी:

बस मेरे स्टॉप तक पहुंच गई और मैं भी उतर गया.
पर अभी भी मेरे दिल और दिमाग में शिखा भाभी की चुदाई चल रही थी.

मेरा लंड अभी भी ये सब सोच कर लोहे की रॉड जैसा तना हुआ था पर मेरा ध्यान तो अभी भी बस शिखा भाभी की मोटी गांड पर ही लगा हुआ था.
मैंने देखा भी नहीं कि मेरे पैंट में तम्बू बना हुआ है.

शायद कुछ लोगों को नजर मेरे तम्बू पर पड़ गई थी इसीलिए वो सब मुझ पर हंस रहे थे.
मैंने नजरअंदाज़ कर दिया और साइड में खड़े होकर अपने मौसा जी के आने का इंतजार करने लगा क्यूंकि वो मुझे लेने आने वाले थे.

वहीं पास में ही एक लड़की खड़ी हुई थी और वो बार बार मुझे देखे ही जा रही थी तो मुझे लगा शायद लाइन दे रही थी.
फिर मैंने उसे देखा तो उसने मुँह फेर लिया.
मुझे समझ नहीं आया कि ऐसा उसने क्यों किया.

खैर … मुझे क्या, मैं तो अभी शिखा भाभी के ही सपने देख रहा था और इयरफोन लगाए हुए गाने सुन रहा था.

तभी वो लड़की फिर से छुप छुप कर मुझको देखने लगी.
वो मेरे लंड पर नजरें मार रही थी.

वैसे मैं काफी फिट था तो मुझे लगा शायद इसीलिए उसकी नजर मुझसे नहीं हट रही हो.

अब मैंने ही उससे पूछ लिया- क्या हुआ?
वो- कुछ भी तो नहीं!

मैं- तो ये सब क्या है?
वो- क्या, सब?

मैं- आप बार बार ऐसे क्यों देख रही हो?
वो- क्योंकि आपने अपना हुलिया नहीं देखा शायद!

मैं- क्यों क्या हुआ, ऐसा क्या है?
वो- पब्लिक प्लेस में ऐसे घूम रहे हो, शर्म नहीं आती आपको?

मैं- यहां गांव में पब्लिक प्लेस में अलग तरीके से घूमते हैं क्या, क्यूंकि मुझे तो सब सही लग रहा है.
वो- जरा अपने नीचे देखो.

मैं नीचे देखने के बाद बोला- कुछ भी तो नहीं है.
वो- ये तम्बू लिए घूम रहे हो और बोल रहे हो सब ठीक है?

मुझे थोड़ा अजीब लगा और मैं अपना लंड छुपा कर एडजस्ट करने लगा मगर वो फिर भी तिरछी नजरों से देखे जा रही थी.
पता नहीं क्यों पर मुझे शर्मिंदगी सी महसूस होने लगी.

मैंने उससे माफी मांगी- सॉरी वो मेरा इस पर ध्यान नहीं गया, आप गलत मत समझिए.
वो- अब इसमें समझने के लिए बचा ही क्या है, सब कुछ तो दिखा दिया आपने.

मैं- अरे वो मुझे पता ही नहीं चला कब हुआ ये सब, वो तो अच्छा हुआ आपने बता दिया, नहीं तो मेरी बेइज्जती हो जाती.
वो- जाने दीजिए, जो भी हुआ.

इतने में मेरे मौसा मुझे लेने आ गए और मैं उनकी तरफ बढ़ने लगा.

तभी अचानक से मुझे पीछे एक आवाज सुनाई दी- मामा जी, आपने तो बहुत देर कर दी, मैं यहां खड़ी खड़ी एकदम थक गई हूं.
ये आवाज मुझे जानी पहचानी लगी.
मैंने पलट कर देखा तो ये वही लड़की थी जो मेरे तम्बू पर नजर लगाए हुए थी.

मैं चौंक गया और वहीं खड़े होकर देखने लगा कि ये सब चल क्या रहा है.

इतने में मौसा जी ने आवाज दी- अरे रिकी घर नहीं चलना है क्या … या यहीं पर रहोगे?
मैं- आया मौसा जी.

वो मुझे ऐसे घूर रही थी जैसे उसको बहुत जोर का झटका लगा हो.

खैर … मुझे बस उसकी आंखें दिख रही थीं तो मुझे पता नहीं चला कि ये जान कर उसकी क्या प्रतिक्रिया थी.

फिर हम दोनों बाइक पर बैठे. मौसा चला रहे थे, उनके पीछे मैं था और मेरे पीछे वो लड़की.
हम तीनों घर की ओर निकल पड़े.

गांव की सड़क तो आप सब जानते ही हैं इतने गड्डे होते हैं कि आदमी बाइक पर ठीक से बैठ ही न पाए.

ट्रिपल होने की वजह से मैंने बैग साइड में अपने पैर पर रखा हुआ था, जिस वजह से उस लड़की और मेरे बीच में ज्यादा गैप नहीं था.
अब जैसे ही गाड़ी गड्डे में जाती, उसकी चूचियां मेरी पीठ पर रगड़ जातीं.

इसमें मुझे तो बहुत मजा आ रहा था. ऐसे ही बार बार गड्डों की वजह से मेरे और उस लड़की के बीच में ज्यादा फासला नहीं बचा था.
अब उसकी चूचियां मेरी पीठ से एकदम चिपकी हुई थीं और इस स्पर्श से मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया.

इतने में उसने आवाज दी- मामा जी गाड़ी रोको ना, मुझे पीछे बैठने में प्रॉब्लम हो रही है.
मौसा जी- क्या हुआ डिंपी?

डिंपी- मामा यहां इतने गड्डे हैं न … इसलिए पीछे बैठने में प्रॉब्लम हो रही है.
मौसा जी- ठीक है फिर तुम बीच में बैठ जाओ, रिकी पीछे बैठ जाएगा.

मुझे समझ आ गया कि इसे ये सब पसंद नहीं आया.

अब मैं थोड़ा दूरी बना कर बैठ गया, पर सड़क को ये सब मंजूर नहीं था.
गड्डों की वजह से हमारे बीच का फासला कम होता जा रहा था और मेरा लंड जो डिंपी की चूचियों की वजह से खड़ा हुआ था, अब बस डिंपी की गांड तक पहुंचने वाला था.

तभी अचानक से सामने गाय आ गई और मौसा जी ने अचानक ब्रेक मारा जिससे मैं एक झटके में आगे खिसक आया और मेरा लंड डिंपी की गांड से चिपक गया.

तेज झटके की वजह से मैंने उसकी कमर को कसके पकड़ लिया.
वो कसमसा कर रह गई.

अब मेरा लंड फूल मूड में आ चुका था और डिंपी की गांड के मजे ले रहा था.
ऐसे ही करते हुए हम घर पहुंच गए.

डिंपी उतरते ही सीधा अन्दर चली गई, उसने मेरी तरफ देखा भी नहीं.

मुझे लगा कि कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए कि ये किसी को बता ना दे कि मैंने उसके साथ ये सब किया.
मैं उस पर नजरें बनाए हुए था.

फिर शाम को जब वो अकेली दिखी तो मैं उसके पास गया और जाते ही सॉरी बोल दिया.
पर वो मुँह फेर कर जाने लगी.

मैंने उसका हाथ पकड़ कर रोका और कान पकड़ कर सॉरी बोल कर उठक बैठक करने लगा.
तो वो हंस पड़ी.

मैं समझ गया कि वो मान गई है.
मैं- अब तो माफ कर दो.

डिंपी- अभी नहीं, 20 और लगाओ.
मैं- कोई देख लेगा तो क्या सोचेगा?

डिंपी- अच्छा जी … और जो सब बाइक पर हुआ वो देख कर क्या सोचेगा कोई?
मैं- अरे सॉरी ना, जानबूझ कर थोड़ी किया … गलती से हुआ.

डिंपी- हां, तो अब जानबूझ के ही 30 और लगाओ.
मैं- अरे पहले 20 अब 30, ये तो चीटिंग है.

डिंपी- जितना बोला, उतना करो नहीं तो बुलाऊं मामा जी को.
मैं- नहीं मत बुलाना, मैं करता हूं.

डिंपी- गुड बॉय, वैसे भी तुम तो इतने फिट हो, रोज जिम में इससे ज्यादा ही करते होगे.
मैं- हां, पर ऐसे किसी लड़की के सामने करने की आदत नहीं है.

डिंपी- फिर इसकी आदत डाल लो, क्योंकि अभी तुम्हें और भी बहुत कुछ करना पड़ेगा.
मैं- क्या मतलब?
डिंपी शैतानी मुस्कुराहट के साथ बोली- देखते जाओ.

इसके बाद हम नॉर्मल बातें करने लगे. कहां से हो, क्या करते हो इंट्रोडक्शन टाइप की बात.
फिर बातें जीएफ बीएफ पर आ गईं.

मैं- तुम्हारे तो काफी सारे बीएफ होंगे.
डिंपी- हां 10 को छोड़ चुकी हूं और अभी 3 और हैं.

मैं- मतलब कुछ भी, इतने बीएफ कैसे हो सकते हैं?
डिंपी- जैसे तुम लड़के लोग 4-5 लड़कियां एक साथ घूमते हो, वैसे ही.

मैं- अरे मजाक मत करो.
डिंपी- हां तो ऐसे सवाल भी मत करो.

मैं- अच्छा ठीक है बीएफ होगा ही न!
डिंपी- नहीं हमारे नसीब में कहां है ये सब, खुद से ही काम चलाना पड़ता है.

मैं समझ गया था कि ये चूत में उंगली करने की बात कर रही है.
फिर भी मैंने अंजान बनते हुए पूछा- खुद से ही, मतलब?
डिंपी- मतलब अकेले ही रहती हूं ना, आपके जैसे थोड़ी कि दिन भर अपनी जीएफ के ख्यालों में खोए रहो.

मैं- कुछ भी, आपको किसने कहा ऐसा?
डिंपी- वो तो मैंने दिन में सब देख ही लिया था न.

मैं- अरे आप भी ना, छोड़ो उस बात को.
डिंपी- छोड़ने वाली बात ही नहीं मतलब, कोई इतना कैसे खो सकता ही कि उसे अपना तम्बू ही महसूस ना हो.

मैं- उस पर मेरा ध्यान ही नहीं गया था यार!
डिंपी- मतलब इतनी हॉट लड़की पटाई हुई है तुमने!

मैं- अरे नहीं, मैं तो सिंगल हूं और वैसे भी हॉट लड़कियां तो सिंगल ही रहती हैं. अपने आपको ही देख लो.
डिंपी- अच्छा जी, तुम कह रहे हो कि मैं हॉट हूं!

मैं- हां जी, इसमें कोई शक की बात ही नहीं है, आपके जितनी हॉट लड़की तो मेरे क्लास में भी नहीं है.
डिंपी- फिर भी देखो मेरी किस्मत में कोई नहीं है, क्या फायदा ऐसी हॉटनेस का?

मैं- फिर तो सिंगल रह कर ही मजे करो.
डिंपी- अच्छा ऐसा भी होता है क्या?
मैं- हां जी, आज कल सब होता है, मेरी फ्रेंड तो एकदम फुल मजे करती है, वो भी अकेले.

डिंपी- सारे मज़े अकेले नहीं होते, कुछ के लिए बीएफ जीएफ होना जरूरी होता है.
मैं- उसके बीएफ जीएफ नहीं, बस बॉय और गर्ल की जरूरत होती है.

डिंपी- लगता है तुम्हें इस सबका बहुत एक्सपीरियंस है.
मैं- जी, बहुत ज्यादा, मेरी उसी फ्रेंड के साथ एक्सपीरियंस शेयर भी करता हूं.

डिंपी- ओह, फिर तो बहुत लकी हो तुम, मेरी किस्मत में तो वो भी नहीं है.
मैं- वैसे ऐसा फ्रेंड आपको आपके आस पास भी मिल सकता है.
डिंपी- अच्छा वो कैसे?

मैं उसके पास खिसक कर उसकी जांघ पर हाथ रख कर.

मैं- जी मैं हूं ना.
डिंपी- अरे तुम तो अलग ही दुनिया में रहते हो और तुम्हारी तो पहले ही गर्लफ्रेंड है, फिर क्या फायदा?

मैं- फायदा देना मेरा काम है, आप तो बस फायदा लो.
डिंपी- अब भी आप आप करते रहोगे क्या?

मैं धीरे धीरे उसकी जांघ को सहलाने लगा, उसने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
फिर मैं उससे चिपक कर बैठ गया और दोनों जांघों के बीच में हाथ डाल कर सहलाने लगा.
उसने एक लंबी सांस भरी.

डिंपी- रिकी, कोई देख लेगा.
मैं- शश्श … इतने अंधेरे में कोई कुछ नहीं देख पाएगा, तुम बस एंजॉय करो.

मैंने उसकी एक जांघ उठाकर अपनी जांघ पर रख ली और अपना हाथ और अन्दर ले जाकर उसकी चूत के ऊपर रख कर सहलाने लगा.

उसने फिर लंबी सांस भरी और आंखें बंद कर लीं.
फिर मैंने धीरे से हाथ उसकी जींस के अन्दर डाल दिया और उसकी चूत को रगड़ने लगा.
वो मादक सिसकारियां भरने लगी.

तब मैं उसके मुँह में अपनी जीभ डाल कर किस करने लगा.

अब मैंने उसको वहीं लेटा दिया और जींस नीच करके उस देसी बेब की नंगी चूत में उंगली करने लगा.
क्या मस्त गीली और चिकनी चूत थी उसकी, जैसे बस मेरे लिए तैयार की गई हो.

उसकी आंखें अभी भी बंद थीं.
ये देख कर मैंने अपनी उंगली जोर से अन्दर तक डाल दी, जिससे उसकी आह निकल गई और आंखें खुली की खुली रह गईं.

चूत में उंगली के साथ ही मैं उसकी चूचियों को भी दबाने लगा.
अब वो भी मेरे मुँह में जीभ डाल कर किस करने लगी.
मैं भी जोर जोर से उसकी चूचियां दबाने लगा.

मेरा लंड अब एकदम लोहे की रॉड जैसा गर्म और हार्ड हो चुका था.
मैंने उसका हाथ अपने शॉर्ट्स के अन्दर डाल दिया और उसने भी एक झटके में लंड को जकड़ लिया.

वो हॉट बेब मेरे लंड को धीरे धीरे हिलाने लगी.
मुझे मजा आने लगा.

कुछ ही देर में हम दोनों एकदम गर्म हो चुके थे.

ऐसे ही कुछ देर तक हम दोनों लगे रहे.
वो लंड हिलाती रही और मैं उसकी चूत और चूचियों के साथ खेलता रहा.

डिंपी- रिकी अब और रहा नहीं जाता, मेरी चूत में अपना लोहा डालो न!

मैंने भी अपना शॉर्ट्स निकाला और उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख कर पोज बनाने लगा, उसकी चूत पर लंड रख कर रगड़ने लगा.
वो वासना से सिसकारियां भर रही थी.

मैंने धीरे से अपना लंड उसकी चूत में सरका दिया, गीली चूत में लंड का सुपारा आसानी से घुस गया.
वो मचल गई.

मैंने उसको कसके पकड़ा और जोर का धक्का मारते हुए उसकी चूत के अन्दर लंड पेलता चला गया.
उसकी चीखें निकलने लगीं.

मैंने उसके मुँह में अपनी उंगलियां डाल दीं और चूसने को कहा.
वो मुँह में उंगली लेकर अपना दर्द बांटने लगी.

मैं धीरे धीरे उसकी चूत में धक्के मारने लगा.
पर उसकी चूत एकदम टाइट थी जिससे मेरा लंड पूरा अन्दर नहीं जा पा रहा था.

आखिर मैंने उसकी चूचियां कसके पकड़ीं और उसके मुँह में अपनी जीभ डाल कर जोर का धक्का दे मारा.

वो छटपटाने लगी, पर मैंने परवाह किए बिना फिर से धक्का लगाया.
अब लंड थोड़ा और अन्दर पहुंच गया.

उसने भी मुझे कस पकड़ लिया और उसके नाखून मेरे शरीर में घुस कर मुझे और उत्तेजित करने लगे.

तभी मैंने उसकी टांगों को और झुकाकर सैट किया और चूचियों को जकड़ कर पूरी ताकत से लंड को अन्दर पेल दिया.

वो बिन पानी की मछली जैसे छटपटाने लगी और उसकी आंखों से आंसू बहने लगे, उसके नाखून और मेरी पीठ में और अन्दर घुस गए.

मैं 10 सेकेंड रुका और उसके बाद मैंने उसे जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया.
उसकी सारी सिसकारियां मेरे मुँह में जाकर खत्म हो रही थीं.

मेरा लंड उसकी चूत को चीरते हुए अन्दर तक जा रहा था और मेरे लंड पर चूत का कसाव बढ़ता जा रहा था.

अब उसके हाथों ने हरकत शुरू की और वो मेरी पीठ पर नाखूनों से निशान छोड़ने लगी.
मैं भी बिना परवाह किए उसे लगातार चोदता जा रहा था.

इस बीच उसकी चूत दो बार पानी छोड़ चुकी थी, जिससे चूत में चिकनाहट बढ़ गई थी और लंड पूरी मस्ती में अन्दर जा रहा था.
कुछ देर ऐसे ही चलता रहा.

अब मेरा लंड झड़ने वाला था.
मैंने अपना लंड निकाल कर उसके मुँह पर रख कर उसकी एक चूची को जोर से मसला.
इससे उसके होंठ खुल गए और मैंने लंड मुँह में अन्दर डाल दिया.

मैं कुछ देर उसके मुँह को चोदता रहा, फिर मैंने अपना सारा पानी अन्दर ही छोड़ दिया.
वो वीर्य पीने में नखरे करने लगी मगर मैंने लंड को मुँह में ही रख कर उसकी नाक दबा दी जिससे उसे मेरा माल पीना पड़ा.

रस खत्म होते ही मैंने अपना लंड निकाल लिया.

डिंपी- तुम कितने कमीने हो, मेरी चूत फाड़ कर रख दी, बहुत दर्द हो रहा है.
मैं- मतलब मजा नहीं आया तुमको, ठीक है. फिर अपनी दोस्ती यहीं खत्म.

डिंपी- अरे नहीं, मेरा वो मतलब नहीं था.
मैं- तो क्या मतलब था?

डिंपी- तुमने तो ऐसे चोदा जैसे ये बस आखिरी बार ही हो … और मैं कल चली जाऊंगी.
मैं- क्या भरोसा, बाद में मौका मिलता या नहीं, तो मैंने सोचा पहला मजा भरपूर वाला होना चाहिए.

डिंपी- दस दिन रुकने वाले हो, बहुत मौके मिलेंगे तुम्हें … पर तुमने तो मुझे दोबारा चोदने लायक ही नहीं छोड़ा.
मैं- ये दर्द बस कुछ देर का है, कल तेरी चूत फिर से लंड की ऐसे प्यासी हो जाएगी, जैसे उसे कुछ हुआ ही न हो.

डिंपी- कल का कल देखेंगे, अभी चलो यहाँ से … वरना कोई ढूंढते हुए आ जाएगा तो प्रॉब्लम हो जाएगी और ये हमारी आखिरी चुदाई रह जाएगी.
मैं- हां तुम जल्दी से कपड़े पहनो.

फिर हमने कपड़े पहने.

इस चुदाई के बाद वो ठीक से चल नहीं पा रही थी तो सबने पूछा- क्या हुआ.
तो उसने बोला कि उसके पैर की नस खिंच गई है, इसलिए चल नहीं पा रही है.

पर आप सबको तो पता ही है, उसके ठीक से न चल पाने की क्या वजह थी.

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