सेक्सी भाभी फक स्टोरी में हमारे घर एक भाभी किराए पर रहने लगी. तब मैं जवान हुआ था और लंड के लिए चूत की तलाश में था. भाभी को देखकर मैं मुठ मारने लगा.
दोस्तो, मेरा नाम चंदू है. उम्र अभी 20 साल की है.
मेरी फैमिली में दो बहनें, मां-पापा हैं. हमारा परिवार एक सुखी परिवार है.
मैं जब युवा हो गया था, तभी से मेरे अन्दर जवानी का उबाल आने लगा.
टांगों के मध्य एक अजीब सी खुजली होने लगी थी, जो हाथ से खुजाने से नहीं मिटती थी.
उस खुजली को मिटाने के लिए मुझे एक लड़की के छेद की जरूरत थी.
मैं इधर उधर मुँह मारता फिरता था कि कहीं से कोई जुगाड़ मिल जाए.
एक दिन रात को मेरी नींद खुली तो मैं पानी पीने किचन में आ गया.
उधर पापा के कमरे की खिड़की से कुछ आवाज आ रही थी तो मैं देखने चला गया.
कमरे के अन्दर पापा मम्मी अपनी चुदाई में मस्ती से लगे हुए थे.
वे दोनों पूरे नंगे थे और उनका धकापेल चुदाई का खेल चल रहा था.
मम्मी की आह आह की आवाज मुझे उत्तेजित करने लगी थी तो मैं चुपके से उन दोनों की चुदाई को देखने लगा.
पापा का मस्त मोटा लंड मम्मी की चुत में घुसा हुआ था और वे मम्मी को तबीयत से चोद रहे थे.
मां की कामुक आवाज़ें सुनकर मैं एकदम से गर्मा गया था और अपने लौड़े को हाथ में लेकर मुठियाने लगा था.
जल्दी ही मैंने उन दोनों की चुदाई को देख कर अपने लौड़े से माल फेंक दिया था.
उसके बाद मैंने पापा मम्मी की चुदाई को कई मर्तबा देखा.
मम्मी की चुदाई के बाद मैं किसी भी भाभी या आंटी के बूब्स, गांड के उभार देख कर मुठ मारने लगा था और अब मुझे लगभग रोज ही मुठ मारने की आदत पड़ गई थी.
हालांकि कभी सामने से मैंने किसी को न ही अब तक छुआ था और न ही छूने का मौका मिला था.
बस इच्छा थी कि कोई मिल जाए तो लौड़े को मजा दिला दूँ.
यूं ही समय निकलता जा रहा था.
फिर एक दिन पापा ने हमारे घर में एक बंद पड़ा कमरा किराए पर दे दिया.
उस कमरे में किराएदार के आते ही मानो मेरे जवान लंड की किस्मत जैसे खुल गई थी.
इसी भाभी ने मेरी यह सेक्सी भाभी फक स्टोरी बनाई.
क्योंकि जो फैमिली किराए पर रहने आई थी, उस फैमिली में सिर्फ एक भाभी और उनकी एक बेटी थी.
भाभी का पति शराबी था, इसलिए उनका तलाक हो गया.
भाभी का नाम अंजू था.
उनकी उम्र 40 साल की जरूर थी लेकिन उनके फिगर की कसावट किसी कॉलेज गर्ल जैसी थी.
उनके 34 इंच के जबरदस्त तने हुए बूब्स, पतली कमर और 36 इंच की हाहाकारी गांड को देख कर मेरे लौड़े में मस्त उठान आने लगा था.
उन्हें देख कर बस यही लगता था मानो भाभी काम की देवी हों.
पहली नजर में ही उन्हें देख कर मेरा लंड तंबू बन गया था.
भाभी ने मेरी नजरों को शायद पढ़ लिया था लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की थी.
धीरे-धीरे उनका हमारे घर में आना-जाना शुरू हो गया और वे मेरी मां की सहेली जैसी हो गईं.
एक दिन मां ने मुझे भाभी के पास भेजा.
मां- बेटा, जाकर अंजू भाभी को बोलो कि मां बुला रही हैं.
मैं भाभी के पास आ गया.
उनकी बेटी रानी सो रही थी.
मुझे भाभी कहीं दिखी ही नहीं.
मैं कमरे के अन्दर बने किचन की तरफ उन्हें ढूंढने आ गया मगर भाभी नहीं दिखीं.
तभी बाथरूम से भाभी की दर्द भरी आवाज आई, तो मैं एकदम से चौंक गया कि यह क्या हुआ?
अंजू भाभी रोती हुई- आह बचाओ … मैं मर गई!
मुझे कुछ समझ नहीं आया. मैं दौड़कर बाथरूम की ओर भागा, तो दरवाजा खुला था.
मैं अन्दर घुसा तो मेरे होश उड़ गए.
मेरे सपनों की रानी … मेरी भाभी नंगी पड़ी हुई थीं. वे फर्श पर किसी कारण से फिसल कर गिरी हुई थीं.
पानी की बूंदें भाभी के बदन से बह रही थीं, खासकर उनकी चूचियों की दरार से पानी की मोटी धार बह रही थी क्योंकि नल से पानी की धार उनके क्लीवेज से होकर नीचे चुत की तरफ बहती जा रही थी.
उन्हें इस तरह से नंगी देख कर मुझे समझ में ही नहीं आया कि मुझे क्या करना चाहिए.
भाभी ने मुझे देखा तो कराह कर कहा- अब देखते ही रहोगे क्या … मुझे उठाओ न!
मैंने अचकचा कर खुद को होश में लाते हुए भाभी की तरफ हाथ बढ़ाया और उनको सहारा देकर उठाया.
वे नंगी थीं तो मैं उन्हें पकड़ने से झिझक रहा था और वे भी मेरे सामने शर्म से लाल हो गई थीं.
खड़ी होते ही भाभी ने झपट कर खूंटी पर टंगा हुआ टॉवल ले लिया.
वे तौलिया से अपने बदन को ढकने लगीं.
तभी मुझे न जाने क्या हुआ कि मैंने भाभी के होंठों पर अपने होंठ लगा कर उनको किस कर दिया.
वे एकदम से पीछे को हुईं तो मैंने उनकी गांड को पकड़ कर मसल दिया.
भाभी मुझे देखने लगीं.
वे भी न जाने कब से प्यासी थीं तो मर्द का स्पर्श पाकर बहकने लगी थीं.
मैं उन्हें अपनी बांहों में भर कर आलिंगन करने ही वाला था कि अचानक से भाभी ने एक जोरदार झापड़ मेरे गाल पर दे मारा.
ऐसा लगा जैसे वे खुद को मेरे साथ सेक्स में गिरने से संभालने के लिए ऐसा कर रही थीं.
मैं ये कहते हुए बाहर आ गया- सॉरी भाभी. मैं तो बस मां का मैसेज लेकर आया था … ये सब एक्सीडेंटली हो गया.
वे कुछ नहीं बोलीं और लंगड़ाती हुई बाहर आ गईं.
मैं भी उन्हें मम्मी का संदेश दे कर अपने कमरे में आ गया.
कमरे में आकर मैंने अपनी तेज चलती सांसों को नियंत्रित किया.
उसके बाद अपने हाथ को चूमा और लौड़े की मुठ मारकर खुद को शांत किया.
उसके बाद 15 दिन तक हम दोनों एक-दूसरे के सामने नहीं आए.
फिर एक दिन मेरी मां की सहेली के घर में शादी थी.
उसमें पूरे परिवार को आने का न्योता आया था.
मेरी तबीयत हल्की सी खराब थी तो मां ने अंजू भाभी से मेरी तबियत के बारे में बताया.
मां- हम सब 2 दिन के लिए शादी में जा रहे हैं. चंदू को फीवर है, तो प्लीज़ उसका ध्यान रखना.
अंजू भाभी- ठीक है दीदी.
शाम को अचानक से मेरा बुखार बढ़ गया.
मैं चुपचाप पड़ा था. मुझमें भाभी को बुलाने की भी हिम्मत नहीं थी.
कुछ देर बाद अंजू भाभी आईं.
अंजू भाभी- चंदू, खाना खा लो और दवा ले लो.
मैंने कहा- मेरा मन नहीं है भाभी.
तभी भाभी ने मुझसे कहा- सॉरी!
मैं- सॉरी किसलिए?
अंजू भाभी तनिक नरम आवाज में बोलीं- उस दिन की बात के लिए …
मैं- कोई बात नहीं भाभी, गलती आपकी नहीं थी. हालात की थी.
फिर अंजू भाभी ने दोस्ती के लिए हाथ बढ़ाया.
उनके हाथों के स्पर्श से मेरा लंड फिर से लौड़ा तन गया.
मैं बुखार में था लेकिन लंड को मेरी सेहत की झांट परवाह नहीं थी.
वह मेरे लोअर में फूलने लगा था.
भाभी की नज़र मेरे लोअर पर बने टेंट पर ठहर गई.
वे शर्म से लाल होकर कमरे से जाने लगीं.
मैंने सोचा कि आज चाहे तबियत खराब ही सही लेकिन आज नहीं तो कभी नहीं!
मैंने उनका हाथ पकड़ कर उन्हें अपनी तरफ खींचा, तो वे मेरे ऊपर गिर गईं.
मैंने उन्हें कसके अपनी बांहों में भर लिया और उनकी गर्दन पर जोरदार किस कर दिया.
वे मुझे देखने लगीं तो मैंने उनके होंठों से अपने होंठ मिला दिए.
भाभी ने भी किस में संग देना शुरू कर दिया.
हम दोनों में 5 मिनट तक किस चलता रहा.
इस बार थोड़ा तीव्र चुंबन हो रहा था और लौड़े की हालत सख्त होती जा रही थी.
मेरा एक हाथ अपने लंड पर आ गया.
मैंने कहा- भाभी …
अंजू भाभी भी गर्म होकर मुझसे प्यार करने लगी थीं.
वे बोलीं- भाभी नहीं … अंजू कहो!
मैं- अंजू तुम मुझे पसंद आईं?
अंजू- बहुत आई लव यू चंदू …
मैं- सॉरी अंजू जान.
अंजू भाभी उत्तेजित होकर- लव यू चंदू, बना लो मुझे अपनी … पूरी कर दो मेरी प्यास!
उतने में मैंने लोअर उतार दिया.
मेरा 8 इंच लंबा और 2 इंच मोटा लंड देखकर भाभी सिहर गईं.
अंजू भाभी- मैं तो बच्चा समझ रही थी … ये तो आदमखोर लौड़ा है!
यह बोलते ही वे लौड़े को मुँह में डालकर ऐसे चूसने लगीं, जैसे लॉलीपॉप हो.
मेरे हाथ भी न जाने कब भाभी के पूरे बदन को नंगा कर चुके थे, न ही अंजू भाभी को और न ही मुझको पता चला.
मैंने भाभी के दोनों दूध और गांड को खूब दबाया और चूसा.
उसके बाद जब भाभी लौड़े को चूसने में लगी थीं तो मैं उन्हें गाली देने लगा था ‘आह चूस ले साली … खा जा पूरा माल… चूस ले मेरी अंजू रानी!’
अंजू भाभी- दे साले … पूरा लंड लॉलीपॉप समझ कर खा जाऊंगी भोसड़ी के ठरकी आह!
वे मेरे टट्टों को सहलाती हुई टोपे को अपने होंठों में फंसा कर चुसकने लगी थीं.
तो मेरी उत्तेजना चरम पर पहुंच गई और मैं भलभला कर झड़ गया.
लौड़े से पिचकारी निकल कर सीधी अंजू भाभी के मुँह में चली गई और वे मेरा पूरा माल प्यार से गटकती हुई पी गईं.
अंजू भाभी ने मेरे झड़े हुए लौड़े को चूसते हुए कहा- आह … तेरा रस मस्त है हीरो … अब आ जा … और चोद दे अपनी अंजू रानी की चुत … आज फाड़ ही दे मेरी चूत को और बना ले मुझे अपनी रंडी … चोद दे मुझे.
मैंने भाभी की टांगों में अपने आप को सैट किया और उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया.
मैं चुत को सूँघता हुआ बोला- आह क्या खुशबू है अंजू रानी तेरी चूत की!
वे हंस कर बोलीं- अभी चाटेगा तो टेस्ट भी मजेदार लगेगा … चूस ले न भोसड़ी के आह.
मैं ज़ोर ज़ोर से जीभ को भाभी की चुत में अन्दर तक घुसा घुसाकर रस चाटने लगा.
अंजू भाभी मादक भाव से सिसकारियां लेटी हुई कराह रही थीं ‘अय्यय्या … उफ्फ्फ मार डाला साले चूस … चोद दे ना प्यासी रंडी की चूत को!’
कुछ देर मैंने चुत चूसी और भाभी की चुदास देखते हुए जल्दी से अपना लौड़ा भाभी की चूत में लगाया और जोर लगाते हुए कसके अन्दर पेल दिया.
मैंने एकदम से झटका मारा था तो भाभी इतनी ज़ोर से चीख पड़ीं मानो पहली बार किसी वर्जिन चुत में लंड घुसा हो.
मैंने भाभी के होंठ अपने होंठों में ले लिए और उनकी आवाज को बंद करके उन्हें खूब ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा.
कुछ ही देर में भाभी मस्त हो गईं और मेरे साथ चुदाई का भरपूर मजा लेने लगीं.
मैंने भी कभी उनको घोड़ी बनाकर चोदा तो कभी उनकी गांड पकड़ कर गाली देते हुए चोदा.
‘आह ले साली अंजू रांड … बहन की लवड़ी साली … कितनी रसीली चुत है तेरी आह!’
भाभी की गांड पर मैंने ज़ोर-ज़ोर से चमाट मारीं और धकापेल पेला.
भाभी- आह मार ना तो … फक मी हार्ड मे पुसी … आह साले ज़ोर-ज़ोर से चोद न!
आधा घंटा जबरदस्त सेक्सी भाभी फक के बाद मैंने अपने लौड़े का पूरा माल भाभी की चूत में छोड़ दिया था.
मेरा सारा बुखार खत्म हो गया था.
फिर तो मुझे भूख भी खुल कर लगी और उस रात को मैंने भाभी को एक बार और चोदा.
मम्मी को दो दिन तक नहीं आना था तो भाभी मेरी रंडी बनकर खूब चुदाई करवाती रहीं.
फिर मेरी मम्मी-पापा आदि सब लोग घर आ गए.
अब जब भी मौका मिलता है तो मैं अंजू भाभी की ले लेता हूँ.
कभी जब चुदाई करने का अवसर नहीं मिलता तो मैं अंजू भाभी के मम्मों को कपड़ों के ऊपर से ही मसल देता और वे आह करके मुस्कुरा देतीं.
मैं कभी उनकी गांड को अपने हाथ से थपथपा देता तो वे भी मेरे लौड़े को पकड़ कर मसल देतीं.
एक दिन मैं अंजू भाभी को चोद रहा था.
उस रात अपने कमरे में वापस आते वक्त मेरी बहन अनु ने मुझे भाभी के कमरे से निकलता हुआ देख लिया था.
उसे सब पता चल गया था.
मैं डर गया.
अनु- भाई, इतनी रात क्या कर रहे हो भाभी के यहां से?
मैं- भाभी की तबीयत खराब थी … दवा देने गया था.
अनु ने मुस्कुराते हुए कहा- दवा देने गए थे या इंजेक्शन लगाने?
मैं हड़बड़ा गया.
वह बोली- हां मैं सुन रही थी. भाभी के रूम से तो चीखने की आवाज़ आ रही थी … जैसे इंजेक्शन लग रहा हो.
मैं दांत पीसते हुए उसे देखने लगा.
मैं- ज़्यादा मत बोल, भाग यहां से.
इतने में अनु ने रूम लॉक किया और मोबाइल में भाभी की चुदाई का क्लिप दिखाने लगी.
अनु- भाई, बोल तो ये इलाज़ सबको दिखा दूँ!
मैं उससे माफी मांगने लगा.
तभी उसने बम फोड़ा.
अनु- भाई, माफी नहीं … मलाई खानी होगी!
मैं समझ गया कि यह भी चुदने के लिए मचल रही है.
‘तू बहन है मेरी!’
अनु- ज़्यादा नखरे मत कर बहन का … बगल वाली के बूब्स और गांड प्रेस करता है, नहीं मिलती है तो मुठ भी मारता है … तो आ जा बहनचोद भी बन जा न!
मैं समझ गया कि यह मानने वाली नहीं है. उस रात मैंने अपनी बहन को किस तरह से चोद कर ठंडी किया, वह सब सेक्स कहानी जरा लंबी है तो फिर कभी लिखूँगा.
कुछ इंतजार करें … और इस सेक्सी भाभी फक स्टोरी पर कमेंट्स जरूर करें.
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