गांव के मेले में मिली भाभी की चुदाई

राजस्थान भाभी फक स्टोरी में गाँव के मेले में मेरी दोस्ती एक लड़की से हुई. बाद में पता चला कि वह शादीशुदा और उसकी एक औलाद भी है. उसने मुझे अपने घर बुलाकर कैसे चूत दी?

दोस्तो, कैसे हैं आप लोग? अच्छे ही होंगे और हिला रहे होंगे या किसी छेद में चला रहे होंगे … है ना?

नमस्ते मेरा नाम देवा ठाकुर है.
मैं पांच फुट दस इंच का हूँ. मेरा रंग गेहुंआ है और लंड की साइज़ सामान्य है.
यह पांच इंच लंबा और साढ़े तीन इंच मोटा है.

आप सबके मनोरंजन के लिए आपको मैं एक रंगीन सफर पर ले चलता हूँ.
ये राजस्थान भाभी फक स्टोरी बिल्कुल सच्ची घटना पर आधारित है.

यह बात उस टाइम की है जब मैं नया-नया जवान हुआ था.
हम लोग अपने दोस्तों के साथ गांव में मेला देखने गए थे.

आपको तो पता ही होगा कि गांवों में अक्सर मेला आदि लगता रहता है, यही सब हमारी संस्कृति है.

मेरे गांव में भी मेला लगा था.
मैं उधर घूमने गया था.

मुझे वहां एक लड़की दिखी जो बड़ी ही मस्त दिख रही थी.
वह पीले रंग के सलवार सूट में थी और एक छोटी लड़की के साथ एक दुकान के पास खड़ी थी.

उसके पीछे कुछ लड़के अपने फोन नंबर हाथ में लेकर उसे देने की सोच रहे थे.
मैं भी उसी सोच का लड़का था.

फिर मैंने उन सब लड़कों के आगे से जाकर अपना नंबर लिखी पर्ची उसके हाथ में दे दी.
वह मुझे देख कर मुस्कुरा दी.

वे सब लड़के मुझे देखते ही रह गए.
फिर मैंने उन लड़कों की तरफ घूर कर देखा तो वे सब एक एक करके चले गए.

कुछ देर तक उस लड़के के साथ रुकने के बाद मैं भी वहां से अपने घर चला गया और उसके फोन आने का इंतजार करने लगा.

रात को 11 बजे फोन मेरा बजा.
मैं बात की तो यह वही लड़की निकली.
उसकी आवाज़ बहुत ही सुरीली थी.
हम लोग बहुत रात तक बातें करते रहे.

ऐसे ही कुछ दिन बातें करने के बाद पता चला कि उसकी शादी हो चुकी है और उसकी एक दो साल की लड़की भी है.

मैं सर पटक कर रह गया कि साली चुदी चुदाई भाभी निकली.
वह भाभी जरूर थी लेकिन दिखने में बड़ी ही कांटा माल थी.

यह सोच कर मैं उससे बात करने लगा कि चलो छेद खुला है तो क्या हुआ, लंड का पानी तो निकल ही जाएगा.
मैं उससे बात करने लगा तो पता चला कि उसका पति उसे इसलिए छोड़कर चला गया था क्योंकि उसे संतान के रूप में सिर्फ लड़का चाहिए था.

यह अजीब चुतियापे वाली बात थी लेकिन मैं इसमें क्या कर सकता था.
हम दोनों में बातें चलने लगीं और वह भी मुझसे खुल कर बात करने लगी.

हम लोग लगभग चार महीने तक बात करते रहे.
वह राजस्थानी भाभी मेरे साथ बहुत सेक्सी बातें किया करती थी और मैं भी उसकी रसीली बातों में मजा लेता था.

हमारे बीच सेक्स की बातें खुल कर होने लगी थीं.
वह मुझसे चुदने के लिए तैयार थी क्योंकि उसकी चुत को पति के जाने के बाद लंड नहीं मिला था.

एक दिन वह रात में मिलने को बोली.
पर उसके घर पर बाकी के लोग भी रहते थे तो हमें कोई अच्छा टाइम नहीं मिल रहा था.

एक दिन उसके घर वाले किसी रिश्तेदार की शादी में गए थे.
उसने मुझे बताया कि आज घर खाली है, आ जाओ.
तो हम लोगों ने रात का टाइम फिक्स कर लिया.

मैं बहुत खुश था क्योंकि मैं पहली बार किसी की चुदाई करने वाला था.

मैंने अपने दोस्त को कॉल किया कि वह अपनी गाड़ी से मुझे उसके गांव के बाहर छोड़ दे.
उसका गांव मेरे गांव से काफी दूर था … लगभग 12 किलोमीटर दूर था.

उसका घर गांव के थोड़ा बाहर को ही था तो मेरा दोस्त मुझे उसके घर के नजदीक छोड़कर गांव के बाहर रास्ते में एक खाली टपरे में बैठकर मेरा इंतजार करने लगा.

मैं रात के अंधेरे में उसके घर के पीछे घुस गया.
वह मेरा इंतजार कर रही थी.

जैसे ही मैंने उसे देखा, देखता ही रह गया.
वह एक पीले कलर की साड़ी में खड़ी थी.
क्या कमाल की लग रही थी … वह पूरी सजकर खड़ी थी.

उसने मुझे देखा तो वह शर्माती हुई मेरे गले से लग गई.
मैंने भी उसे जोर से अपनी तरफ खींच लिया.

उसकी चूचियां मेरे सीने से दब रही थीं और मेरा हाथ उसके गांड को दबा रहा था.
मेरे होंठ उसके गालों को चूमते हुए उसके होंठों से लड़ने लगे थे.

हम दोनों पांच मिनट तक किस करते रहे.

फिर वह बोली- चलो … अन्दर चलते हैं, इधर कोई देख लेगा तो बड़ी गड़बड़ होगी.

वह मेरा हाथ पकड़ कर अन्दर अपने घर के सबसे पीछे बने एक स्टोर रूम में ले गई.
उस कमरे में वे लोग अपने घर का सारा राशन आदि रखते थे.

वहां पर मैं उसे पकड़ कर किस करने लगा और किस करते-करते ही मैं उसकी चूचियों को भी दबाने लगा था, गांड को भी मसल रहा था.
वह भी बेताबी से मुझे चूम रही थी और जल्दी से चोदने के लिए कह रही थी.

मैं उसके कपड़े निकालने लगा.

पहले मैंने उसकी साड़ी उतार कर अलग कर दी.
वह ब्लाउज और पेटीकोट में खड़ी थी.
सच में बड़ी कमाल की लग रही थी.

उसकी चूचियां काफी रसभरी थीं.
शायद उसकी बेटी अभी उसका दूध पीती थी तो उसके मम्मों में दूध भरा हुआ था.
मेरे दबाने से दूध से उसकी ब्रा और ब्लाउज गीला हो गया था.

मैंने उससे कहा- क्या तुम्हारी बच्ची दूध पीती है!
वह बोली- नहीं, अब वह ज्यादा नहीं पीती है लेकिन मेरे दूध बहुत ज्यादा भरे रहते हैं. मुझे खुद दबा कर इन्हें खाली करना पड़ता है.

मैं उसे वासना से देखने लगा.
उसकी कमर बिल्कुल पतली थी और गांड बहुत बड़ी थी.

सच में बड़ा ही गदराया हुआ जिस्म था.
उसके दूध व चूतड़ बिल्कुल गोल और टाइट थे.

उसे देखकर तो मेरा दिमाग ही खराब हो गया.
मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसकी एक चूची को अपने मुँह में भर लिया.

उसके मम्मे में से मस्त मीठा दूध आ रहा था तो मैं खूब दबा-दबाकर चूस रहा था.
उसका दूध निकल रहा था तो उसे बड़ा ही रिलेक्स फ़ील हो रहा था और वह मेरे बाल सहलाती हुई मुझे प्यार कर रही थी.

कुछ देर में ही मैंने उसके दोनों मम्मे दूध से खाली कर दिए थे.

अब मैंने उसे नीचे लिटाया और नाभि को चूमते हुए उसकी बुर के पास आ गया.
मुझे उसकी चुत से एक अजीब सी मादक महक आई, जिससे मेरी वासना और ज्यादा भड़क उठी.

मैं चुत को सूंघने लगा, सच में बहुत ही मदहोश करने वाली खुशबू थी.

मुझसे रहा नहीं गया. मैंने उसकी टांगों को फैलाया और चूत को चाटना शुरू कर दिया.
मुझे उसकी नमकीन चुत चाटने में बहुत मज़ा आ रहा था.

मैं चुत के काफी अन्दर तक जीभ को डालकर रस चाट रहा था.
वह बिन पानी की मछली की तरह तड़प रही थी.

उसके मुँह से मादक आवाजें निकल रही थीं- हह … ऊऊऊ … ईईई … ई मां.
उसकी कामुक आवाजों से पूरा कमरा गूँज रहा था.

फिर कुछ टाइम बाद उसका रस निकल गया, जिसे मैंने पूरा चाट लिया.
उसका बहुत सारा पानी निकला था.
वह संतुष्ट हो गई.

मैं खड़ा हुआ और मैंने अपनी चड्डी निकाल फेंकी.
वह मेरे लंड को देखकर बहुत खुश हुई.
उसने मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया और आगे-पीछे करने लगी.

मुझे तो ऐसा लग रहा था, जैसे मैं जन्नत में हूँ.

फिर वह मेरे लंड को अपने मुँह में भरकर चूसने लगी.
वह अपने मुँह में लंड को पूरा अन्दर तक ले रही थी.
उस देसी भाभी ने लंड चूसने का मजा लिया.

मुझे उसे लौड़े को चुसवाने में बहुत मज़ा आ रहा था.
मैंने अपने हाथ से उसके बाल पकड़े और अपना लंड आगे-पीछे करने लगा.

कुछ मिनट तक लंड चूसने के बाद मैं उसके मुँह में ही झड़ गया.
वह बड़े ही प्यार से मेरा सारा रस गटक गई और लौड़े को चाटकर साफ कर दिया.

उसने मेरे लौड़े को जब तक चूसना नहीं छोड़ा, जब तक वह फिर से खड़ा नहीं हो गया.

जैसे ही उसने मेरे लंड को चाट चूस कर खड़ा किया, वह मेरी तरफ वासना से देखने लगी.

मैंने पोज बनाया और अपना लंड उसकी बुर के पास लेकर रगड़ना शुरू कर दिया.
वह पूरी मदहोश हो गई थी और बार-बार यही बोल रही थी कि अब अन्दर डाल दो.

मैंने भी सोचा कि अब देर नहीं करनी चाहिए.
तो मैंने एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर डाल दिया.

वह एकदम से चीख पड़ी और मुझसे बोली- आह दर्द हो रहा है … तुम कुछ देर ऐसे ही रुको.

मैंने उससे कहा- तुम्हारी तो शादी हो गई है ना?

वह बोली- हां, पर मैंने एक साल से लंड नहीं लिया है.

मैं धीरे-धीरे आगे-पीछे करने लगा.
उसे भी अब मज़ा आने लगा था.
वह भी अपना गांड उठा-उठाकर साथ दे रही थी.

उसके मुँह से, ‘हाआ आआ … अहह … ओहह. निकल रहा था और वह कही जा रही थी कि आह फाड़ दो मेरी बुर को … आज इसकी आग बुझा दो … बहुत परेशान करती है!
वह अपने हाथों के नाखून मेरी पीठ में गाड़ रही थी.

मैं किसी अरबी घोड़े की तरह उसे रौंद रहा था और जोर-जोर से उसकी चुत में अपना लंड पेलता जा रहा था.

लगभग बीस मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ झड़ गए.
झड़ने के बाद हम एक-दूसरे को पकड़ कर लेटे रहे और किस करते रहे.

फिर मैं उठा और अपने मुरझाए लंड को उसके मुँह में डाल दिया.
वह वापस लंड चूसने लगी.

मैं उसके गले तक लंड डाल रहा था, जिससे उसकी सांसें रुक जा रही थीं.
उसकी आंखों से भी पानी बह रहा था.

मैंने उससे कहा- अब मुझे तुम्हारी गांड मारनी है!
वह मना करने लगी.

मैंने जैसे-तैसे उसे मनाया.

मेरा लंड पूरा तन गया था.
मैंने उससे घोड़ी बनने को कहा.
वह बन गई.

मैंने उसके पीछे जाकर उसकी गांड में ढेर सारा थूक लगाया और अपने लंड पर भी.
फिर अपने लंड को सैट किया और उसकी कमर को पकड़ कर जोर से एक ही बार में अन्दर डाल दिया.

वह गांड में लंड लेते ही जोर से चिल्लाई- आह फट गई मेरी … इसको बाहर निकालो!

लेकिन मैंने कोई रहम नहीं किया … मैं जोर-जोर से पेलता जा रहा था.
वह चिल्ला रही थी- हाआअ … ओहह … ओये मां … मर गई मेरी गांड फाड़ डाली.

वह अंट-शंट बड़बड़ा रही थी और मैं जोरों से पेलता जा रहा था.
कुछ टाइम बाद उसे भी मज़ा आने लगा.

वह भी साथ देने लगी.
अब वह बोलने लगी- आह फाड़ दो मेरी गांड को और जोर से पेलो … और जोर से पेलो!

कुछ पंद्रह मिनट बाद मैंने उसकी गांड में ही रस झाड़ दिया और हांफते हुए उसके ऊपर गिर पड़ा.

उस रात मैंने तीन बार उसकी बुर पेली और दो बार गांड मारी.
रात को तीन बजे मैं वापस आया, तो मेरा दोस्त मेरा इंतजार कर रहा था.

हम दोनों वापस अपने गांव आ गए.
तब से जब भी ऐसा मौका मिलता है, तो हम दोनों मिल कर चुदाई कर लेते थे.

फिर वह भाभी घर से बाहर भी मिलने लगी थी.
कभी खेतों में तो कभी सुनसान तालाब आदि के किनारे या जंगल में झाड़ियों में हम दोनों जहां भी मिलते थे, बस चुदाई ही करते थे.

आपको मेरी ये राजस्थान भाभी फक स्टोरी कैसी लगी, मुझे ज़रूर बताएं.
धन्यवाद.
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