जवान भतीजी संग मैकलोडगंज होटल में- 3

पिंक ऐस्स होल फक स्टोरी में एक दुल्हन की गांड मारना चाहता था पर उससे पहले मैंने अपनी भतीजी की गांड उसके सामने मारी ताकि दुल्हन घबराए ना.

मेरी कहानी के पिछले भाग
दुल्हन की चूत मारी उसके पति के सामने
में आपने पढ़ा कि मैकलोडगंज होटल में मेरी भतीजी मेरे साथ हनीमून का मजा लेने आई हुई थी. बगल वाले कमरे में एक नवविवाहित जोड़े को देख उसने मेरे लिए उस दुल्हन की चूत का प्रबंध किया, मैंने उस दुल्हन की चूत फाड़ चुदाई की.

अब आगे पिंक ऐस्स होल फक स्टोरी:

फिर श्रेया के पीछे आकर उसके दोनों चूतड़ पकड़कर फैला दिए।

मैंने श्रेया के गांड के गुलाबी छेद पर थूका और अलका की चूत की चिकनाई से भीगा हुआ लंड उसके छेद पर टिका दिया।

फिर मैंने विजय से कहा, “विजय, तुम्हारी पत्नी की चूत तो पानी छोड़ चुकी है! अब देखो मैं इस रण्डी की गांड फाड़ता हूं!”

अलका अपनी बुरी तरह चुद चुकी चूत को लेकर टांगें फैलाकर लेटी हुई थी।
विजय मेरी बात सुनकर बोला, “अंकल, बहुत ज़बरदस्त चोदा है आपने इस रण्डी को! साली कुतिया की चूत में खूब आग लगी थी! अब ये दोबारा लंड नहीं मांगेगी!”

मैंने अलका की आंखों में देखकर उसे आंख मारी और मुस्कुरा दिया।
मेरी मुस्कुराहट के जवाब में अलका भी अपना एक होंठ दांतों के बीच दबाकर मुस्कुरा दी और अपनी टांगें सिकोड़कर अपनी दोनों चूचियां सहलाने लगी।

अलका की कातिल मुस्कान में रण्डीपना साफ झलक रहा था।
अपने पति के सामने दूसरे मर्द का लंड लेकर किसी भी औरत के अंदर की रण्डी जाग ही जाती है।

मैंने ये सब सोचते हुए श्रेया की गांड में लंड का सुपाड़ा डाल दिया और उसके दोनों चूतड़ पकड़कर एक धक्का मारा।
जिससे तीन इंच के लगभग लंड उसकी गांड के पिंक होल में चला गया।
मेरा धक्का लगते ही श्रेया ज़ोर से चिल्लाई, “ओह… धीरे करो ना पापा! उफ्फ… दुखता है!”

फिर मैंने एक और शॉट मारकर लोहे जैसे लंड को उसके नरम चूतड़ों के बीच के गुलाबी छेद में आधे से ज्यादा डाल दिया।
श्रेया शॉट लगते ही अपनी कमर हिलाकर ज़ोर से चीखते हुए बोली, “उफ्फ डैडी… प्लीज़ थोड़ा धीरे!”

फिर वो अलका की तरफ देखकर जबरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश करते हुए बोली, “मेरी और भाभी की चूत और गांड आपकी ही तो है! जितना मर्ज़ी मार लो, पर थोड़ा प्यार से!”

अलका श्रेया की बात सुनकर मुस्कुराते हुए उठ गई और उसने श्रेया के चूतड़ों के बीच अपना मुंह लाकर मेरे लंड पर बहुत सारा थूक फेंका।
और जितना लंड बाहर था उस पर अपनी पतली अंगुलियों से थूक मसलने लगी।

मैंने अपने एक हाथ से अलका की चूची पकड़कर खींचते हुए मुंह में भर ली और उसे चूसते हुए लंड को श्रेया की गांड से बाहर खींचकर एक और धक्का मारा।
जिससे लंड पूरा श्रेया की गांड में चला गया।

श्रेया चीखी, “आई डैडी… स्लो प्लीज़! आह… प्लीज़ थोड़ा स्लो करो ना!”

मैंने मुंह सेअलका की चूची निकालकर दोनों हाथ श्रेया के चूतड़ों पर मारे और हंसते हुए विजय से कहा, “विजय, साली रण्डी के मुंह में अपना लंड डालो! कुतिया बहुत चिल्ला रही है!”

विजय ने आज्ञाकारी बच्चे की तरह श्रेया के मुंह के सामने खड़े होकर लंड उसके मुंह में दे दिया।

मैंने श्रेया की गांड में लंड अंदर-बाहर करते हुए कहा, “चूस रण्डी! विजय का लंड खड़ा कर! आज हम दोनों मिलकर एक साथ तेरी चूत और गांड मारेंगे!”

विजय मेरी तरफ देखने लगा तो मैंने कहा, “विजय, पहले हम दोनों श्रेया को एक साथ चोदेंगे, फिर मैं तुम्हारी पत्नी की गांड खोलूंगा, तुम उसकी चूत मारना!”

विजय बोला, “ठीक है अंकल, पर मुझे श्रेया की गांड मारनी है!”

अलका हंसते हुए मेरी बॉल्स सहलाते हुए विजय की तरफ देखकर बोली, “ओह जानू! आपने मेरे पिछले छेद की तरफ तो कभी ध्यान भी नहीं दिया! अंकल को श्रेया की गांड मारते हुए देखकर आप भी उसकी गांड मारना चाहते हो!”

मैंने फुल स्पीड से श्रेया की गांड में लंड अंदर-बाहर करते हुए अलका से कहा, “बेबी, गांड मारने के लिए लंड में बहुत ज़्यादा दम होना चाहिए! फिर ही लंड गांड भेद सकता है! देखो, मैंने श्रेया की गांड पूरी खोल दी है, अब इसमें मामूली लंड भी घुस सकता है!”

अलका हंसते हुए विजय का मज़ाक बनाते हुए बोली, “सच है अंकल! मेरा पति तो मेरी चूत में लंड नहीं घुसा पाता, कई बार तो बाहर ही ढेर हो जाता है! गांड मारना इसके बस का कहां!”

मैंने श्रेया की गांड से लंड बाहर खींच लिया और लंड को पास में रखे अलका के टॉप से पोंछकर बेड पर लेट गया।
फिर श्रेया के चूतड़ को पकड़कर अपनी तरफ खींचा।
श्रेया मेरी कमर के इर्द-गिर्द अपने घुटने रखकर अपनी चूत के होंठों को एक हाथ की दो अंगुलियों से खोलकर दूसरे हाथ से लंड पकड़कर उसे अपनी चूत से भिड़ाकर उस पर बैठ गई।
जिससे धीरे-धीरे मेरा लंड उसकी चूत में जाने लगा।

मैंने टाइम खराब न करते हुए श्रेया की कमर में एक हाथ डालकर नीचे से एक झटका मारा।
जिससे मेरा पूरा लंड उसकी चूत की गहराई तक चला गया।

श्रेया अपने चूतड़ हिलाकर खुद को सेट किया और मेरे कंधे पकड़कर मेरे चेहरे पर अपना चेहरा झुकाकर मुस्कुराते हुए बोली, “काश डैडी… आपका लंड कभी ढीला न हो और मैं दिन-रात इस तरह आपका लंड अपनी चूत में लेकर बैठी रहूं!”

मैंने श्रेया की झूलती हुई चूचियों पर थप्पड़ मारते हुए कहा, “चल कुतिया! आज तुझे एक साथ दो लंड का मज़ा दिलवाता हूं!”

श्रेया मेरे चेहरे को चूमते हुए अपनी चूचियों को मेरी छाती से रगड़कर बोली, “ओह डैडी… सिर्फ दो ही क्यों! आप चाहो तो मैं एक साथ दस लंड भी ले लूं!”

फिर श्रेया मेरे कंधे पकड़कर मेरे लंड पर ज़ोर-ज़ोर से कूदने लगी।
अलका पास में बैठी हुई उसकी चूत में लंड अंदर-बाहर होते हुए देख रही थी।

मैंने अलका के नंगे घुटने पर हाथ रखकर अपने पास बुलाया।
वो मेरे चेहरे के पास अपना चेहरा लाकर बोली, “हां अंकल!”

मैंने उसकी गर्दन दबोचकर उसके नर्म पतले होंठ अपने होंठों में भर लिए और उन्हें चूसते हुए श्रेया के हर झटके के साथ नीचे से झटके मारने लगा।
दो-तीन मिनट अलका के होंठ चूसने के बाद मैंने उसे छोड़ दिया और पास में घुटनों के बल खड़े विजय की तरफ देखा।
वो भी अपना लंड हिलाते हुए भूखी नज़रों से श्रेया को देख रहा था।

मैंने श्रेया की कमर में हाथ डालकर उसे अपने ऊपर गिरा लिया और विजय से कहा, “चलो विजय! इस कुतिया की गांड में अपना लंड पेल दो!”

श्रेया उसकी तरफ मुंह घुमाकर हंसते हुए बोली, “भइया, मार लो मेरी गांड! मौका है! फिर बदले में डैडी के लंड से भाभी की गांड भी फटने वाली है!”

विजय फुर्ती से श्रेया के पीछे आकर उसकी फैली हुई गांड में लंड डालकर बोला, “श्रेया, कितनी मस्त गांड है तुम्हारी! मुझे तुम्हारी गांड मारनी थी! बदले में अंकल चाहे अलका को दिन-रात चोदें!”

श्रेया झल्लाते हुए बोली, “अब डालो भी! रुक क्यों गए?”
विजय बोला, “श्रेया, मेरा पूरा लंड तुम्हारी गांड में है!”

उसकी बात सुनकर श्रेया मेरे कान के पास अपने होंठ लाकर धीरे से बोली, “ओह डैडी… इसके लंड का तो पता भी नहीं चल रहा! अंदर है भी या नहीं!”

मैं श्रेया की चूची मुंह में लेकर नीचे से कमर हिलाकर उसकी चूत चोदने लगा।
पीछे से विजय उसकी गांड में धक्के मार रहा था।

थोड़ी देर बाद विजय श्रेया की गांड में ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारते हुए आह… आह… करने लगा।
तो मैंने अपने लंड को बॉल्स के पास से पकड़कर श्रेया को ऊपर की ओर धकेल दिया।
जिससे मेरे लंड के साथ विजय का लंड भी उसकी गांड से बाहर निकल जाए।

श्रेया मेरी बगल में गिर गई।
मैंने उठकर श्रेया की चूत के पानी से भीगे अपने लंड को पास में बैठी अलका के मुंह में दे दिया।
अलका मेरे लंड को पकड़कर चूसने लगी।

उधर श्रेया ने भी विजय का लंड पकड़कर अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
एक मिनट में ही श्रेया ने विजय के लंड का पानी निकालकर पी लिया और उसके लंड को पूरा निचोड़कर खाली कर दिया।

फिर वो अलका की तरफ देखकर हंसते हुए बोली, “लो भाभी! आपका पति तो खलास!”
अलका भी अपने मुंह से लंड निकालकर बोली, “हां दीदी, इनका बहुत जल्दी हो जाता है!”

मैंने विजय की तरफ हाथ करके कहा, “विजय, अब मैं तुम्हें पहले श्रेया की गांड फाड़कर दिखाऊंगा, फिर तुम्हारी बीबी की गांड अपने इस लंड से फाड़ूंगा! तुम्हें कोई ऐतराज़ तो नहीं ना?”

विजय मेरे हाथ पर ताली देकर मेरे लंड की तरफ देखकर बोला, “अरे नहीं अंकल! आप अलका को जैसे चाहो चोदो! मुझे कोई ऐतराज़ नहीं! उल्टा मुझे तो इस कुतिया को आपके बड़े लंड से चुदवाते देखकर मज़ा आएगा!”

मैंने हंसते हुए कहा, “ठीक है विजय! बस थोड़ी देर में मैं अपनी कुतिया की ठंडी कर दूं, फिर तुम्हारी कुतिया को रण्डी बनाऊंगा!”
मेरी बात पर विजय बोला, “श्योर… श्योर अंकल!”

तो सब हंसने लगे।

फिर मैंने बेड से नीचे उतरकर श्रेया के दोनों पैर पकड़कर उसे बेड के किनारे पर खींच लिया।
जिससे वो बेड पर गिरकर किनारे की तरफ सरक गई।

मैंने उसकी दोनों टांगें ऊपर उठा दीं और उसके फैले हुए चूतड़ों पर थपकी देकर उसकी गांड पर थूक फेंका।
और थोड़ा थूक अपने लंड पर मसला।
श्रेया ने अपने हाथों से अपनी टांगें कसकर पकड़ लीं और अपनी गांड को बाहर की तरफ पूरा उभार दिया।

वह सिसकी लेकर बोली, “आह… कम डैडी… माय लिटिल एस होल वेटिंग फॉर योर बिग डिक! प्लीज़ कम… डिस्ट्रॉय माय लिटिल होल! आह डैडी… फक मी नाइसली!”

मैंने मुस्कुराते हुए विजय की तरफ देखकर उसे आंख मारी और श्रेया की तरफ देखा।
तो विजय श्रेया की एक चूची सहलाते हुए बोला, “अंकल, इसमें तो बहुत गर्मी है! फाड़ डालो साली की गांड!”

अलका जो पास में बैठकर अपनी एक निप्पल को मसलते हुए श्रेया की गांड के छेद पर नज़रें टिकाकर लंड अंदर जाने का इंतज़ार कर रही थी, मैंने उसकी तरफ देखकर कहा, “थोड़ी देर में विजय इस रण्डी की तरह तुम्हारी ये दुल्हन भी अपनी गांड फैलाकर इसी जगह लेटी होगी!”

मेरी बात सुनकर अलका मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा दी और वापिस श्रेया की गांड की तरफ देखने लगी।

मैंने श्रेया के प्यारे से चेहरे की तरफ एक बार देखकर अपने लंड को बॉल्स के पास से पकड़ा और लंड का सुपाड़ा श्रेया की गांड से भिड़ा दिया।
और अपने फौलादी लंड की तरफ देखा जो श्रेया के गद्देदार चूतड़ों के बीच उसके सुरमई गुदा द्वार से भिड़ा हुआ था।

कहां एक कच्ची कली के भारी और एकदम दूध जैसे चूतड़… और चूतड़ों के बीच छुपा हुआ मामूली सा खुला हुआ उसकी गांड का छेद…
और कहां मेरा भयंकर दिखने वाला लंड, जिसका टोपा तीन इंच व्यास से भी ज्यादा था और सौ वॉट के बल्ब की तरह दिखता था… और लंड पर बहुत गंदे तरीके से उभरी हुई मोटी-मोटी नसें, जो किसी भी लड़की के छेद को अंदर से छीलने के लिए काफी थीं।

एक लड़की श्रेया अपनी गांड फैलाए मेरा लंड अंदर जाने का इंतज़ार कर रही थी.
और एक नवविवाहिता लड़की पास में बैठी अपनी निप्पलों से खेलते हुए मेरे लंड और श्रेया की गांड को ध्यान से देख रही थी शायद ये सोचते हुए कि इतना मोटा और बड़ा लंड इतने छोटे छेद में कैसे जाएगा… अपनी बारी आने का इंतज़ार कर रही थी।

उसका पति जो लगभग नामर्द जैसा ही था, वो श्रेया के बाद अपनी पत्नी को मेरे से गांड मरवाते हुए देखने के लिए मन ही मन खुश हो रहा होगा।

मैंने ये सोचते हुए श्रेया की गांड के छेद पर लंड का पूरा दबाव दिया तो लंड का टोपा बड़ी अदा से फट की आवाज़ करता हुआ अंदर चला गया।
श्रेया चीखी, “आह डैडी!”

तो मैंने एक धक्का और मार दिया।
जिससे सिर्फ दो इंच लंड अंदर चला गया।
और श्रेया ने चीखते हुए अपनी गांड को और खोलते हुए मेरी तरफ उभार दिया।

शायद वो भी मेरे लंड से जंग लड़ने के पूरे मूड में थी और जल्दी से जल्दी मेरे पूरे लंड को अपनी गांड की गहराई तक लेकर पास में बैठी अलका का हौसला बढ़ाना चाह रही थी।

मैंने लंड को थोड़ा बाहर निकालकर अलका से कहा, “अलका, आओ इस पर अपना थूक मलो!”

अलका अपनी चूची मसलनी छोड़कर श्रेया की गांड के पास अपना मुंह करके झुक गई।
मैंने उसकी गर्दन पकड़कर लंड श्रेया की गांड से बाहर निकाला और उसके मुंह में पूरा डाल दिया।

मेरा लंड अलका के गले में जाकर फंस गया।
वो गूं… गूं… करने लगी, जिससे उसके मुंह से लार निकलकर श्रेया की गांड में टपकने लगी।

जब अलका की लार से श्रेया की गांड का छेद पूरा भर गया तो मैंने उसके मुंह से लंड निकालकर एक झटके में पूरा श्रेया की गांड में पेल दिया और बेड के ऊपर अपना एक घुटना चढ़ाकर श्रेया के ऊपर झुक गया और पूरी स्पीड से उसकी गांड मारने लगा।

थोड़ी देर में कमरा आह… सी… सी… आह डैडी… उफ्फ… आह… क्या मस्त लंड है आपका… आईईईई… आह… एकदम पत्थर जैसा… उफ्फ डैडी मारो मेरी गांड… आह उफ्फ… की आवाज़ों से गूंजने लगा।

जैसे ही मेरा लंड पूरा श्रेया की गांड में जाता, उसके मुंह से चीख जैसी आवाज़ निकलती।
और जैसे ही लंड बाहर आता, श्रेया की गांड के अंदर की लाल चमड़ी मेरे लंड से लिपटकर बाहर आ जाती।

विजय और अलका श्रेया की अगल-बगल में बैठे घमासान चुदाई का मज़ा ले रहे थे।
तभी मैंने श्रेया के मुंह और बूब्स पर थप्पड़ों की बरसात कर दी।

श्रेया के गोरे बदन पर जहां मेरा थप्पड़ पड़ता, वो जगह लाल हो जाती।
जिसे देखकर विजय खुश होता हुआ बोला, “अंकल, ऐसे ही अलका को ठोको!”

मैंने लंड अंदर-बाहर करते हुए अलका की तरफ देखकर कहा, “अलका बेटी, मरवाओगी ना अपनी गांड?”

अलका ने कोई जवाब नहीं दिया तो विजय तपाक से बोला, “अंकल, इससे क्या पूछ रहे हो! ये तो क्या, इसकी मां भी मना नहीं करेगी!”

तभी श्रेया बोली, “आह उफ्फ डैडी… बहुत मज़ा आ रहा है! उफ्फ… चूत से भी ज्यादा गांड मरवाने में मज़ा आता है! उफ्फ… कम फक मी फास्ट! आह!”

मैंने श्रेया की चूत में दो अंगुलियां डालकर उसके क्लिट को ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगा।
श्रेया की गांड में मेरा लंड अंदर-बाहर हो रहा था।

वो इस डबल मज़े को बर्दाश्त नहीं कर पाई और उसकी चूत से थोड़ी देर में पानी के साथ उसके मूत की तेज़ धार निकल गई।
वो चीखी, “आईईईई… आह… बस… आह… बस!”

मैं अब भी उसकी चूत में बहुत तेज़ अंगुली कर रहा था।
मेरा पूरा हाथ उसकी चूत के कामरस और उसके मूत से भीग गया था।

मैंने श्रेया की गांड से लंड निकालकर उसके बाल पकड़े और उसे नीचे फर्श पर खींचकर घोड़ी बना दिया और उसके चूतड़ों पर थप्पड़ मारकर कहा, “चल कुतिया! कमरे का चक्कर लगाकर विजय को दिखा, तेरी गांड कितनी मस्त है! फिर उसकी दुल्हन भी ऐसे ही कुतिया बनेगी!”

श्रेया मुंह ऊपर उठाकर विजय की तरफ देखकर किसी रण्डी की तरह मुस्कुराई।
उसे मुस्कुराते देखकर विजय फटाफट बेड से उठकर नीचे खड़ा हो गया और अपना सिकुड़ा हुआ लंड हिलाते हुए उसे देखने लगा।

श्रेया बड़ी अदा से अपनी हथेलियों और घुटनों के बल फर्श पर चलने लगी।
उसके हर कदम के साथ उसके चूतड़ आपस में रगड़ खाकर खुल और बंद हो रहे थे।

जब श्रेया के चूतड़ खुलते तो उसकी चूत के होंठों का आपस में रगड़ खाने का नज़ारा और उसकी गांड के फैले हुए छेद का नज़ारा दिख रहा था।
अलका भी बेड से खड़ी होकर श्रेया को देखने लगी।

जैसे ही श्रेया कमरे का एक चक्कर लगाकर मेरे सामने आई, मैंने उसके बाल खींचकर उसे उठाया और उसके मुंह पर थूककर कहा, “कुतिया, मेरे लंड को ठंडा कौन करेगा?”
श्रेया तपाक से बोली, “डैडी, मैं करूंगी! मैं हूं ना आपकी रण्डी!”

मैंने उसे इतना सुनते ही दीवार के पास धकेला और उसकी टांगें फैलाकर लंड उसके चूतड़ों में फंसाकर उसकी गांड में धकेल दिया।
श्रेया ने दीवार पर दोनों हाथ रखकर अपनी गांड पीछे की तरफ उचकाकर मारने के लिए मेरे हवाले कर दी।
मैंने अपने दोनों हाथ आगे लेकर श्रेया के दोनों बूब्स पकड़ लिए और पीछे से ज़ोरदार धक्के मारने लगा।
कमरे में ठप-ठप… आह… सी… उफ्फ डैडी… आह… की आवाज़ें गूंजने लगीं।

आठ-दस मिनट की चुदाई के बाद मेरा लंड श्रेया की गांड में फूल गया।
और लंड ने झटके मारते हुए अपना गाढ़ा माल उसके पिंक ऐस्स होल में भर दिया।
मैं आह… सी… सी… करते हुए श्रेया की दोनों चूचियों को कसकर पकड़ा हुआ था।
मेरी सांसें बहुत तेज़ हो चुकी थीं।
थोड़ी देर बाद जब मेरी सांसें कंट्रोल हुईं तो मैंने श्रेया की गांड से लंड बाहर खींचकर उसे छोड़ दिया।
मेरी पकड़ से छूटते ही श्रेया वहीं ज़मीन पर निढाल होकर बैठ गई।
उसके बाल बुरी तरह बिखरे हुए थे, उसकी आंखों में पानी था और उसके पूरे बदन पर मेरे थप्पड़ों के निशान थे।

आगे की कहानी की प्रतीक्षा करें.
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