भाभी को अपने लंड का दीवाना बनाया

बिहारी सेक्स कहानी भाभी की चुदाई की … मैं मौसी के घर गया तो उनकी बहू मुझे पसंद आ गयी. मैंने उसके आगे पीछे डोलने लगा. वो भी मुझे भाव दे रही थी.

मेरा नाम आशु है.
मैं बिहार के पटना के पास एक गांव से हूँ.

मेरी उम्र अभी 24 साल है लेकिन ये मेरे साथ सच में घटी बिहारी सेक्स कहानी 5-6 साल पहले की है.

ये मेरी पहली सेक्स कहानी भी है.

मैं ये तो नहीं कहूँगा कि मेरा लंड कितना बड़ा है, पर इतना जानता हूँ कि किसी भी लड़की या औरत को संतुष्ट कर सकता हूँ.

पहली बार है तो अगर कुछ लिखने में गलती हो जाए, तो माफ कीजिएगा.

ये बिहारी सेक्स कहानी मेरे और मेरी मौसी की छोटी पतोहू के बीच की है.

उस समय वे 25 साल की थीं और एकदम कड़क माल जैसी एकदम हीरोइन की तरह दिखती थी.
उस वक्त का भाभी का फिगर तो ऐसा था कि कोई भी देखे तो देखता ही रह जाए; वह मन ही मन उनका दूध पीने का सोचने लगे.

हालांकि वे आज भी जबरदस्त माल हैं.

मौसी के दो लड़के हैं.
दोनों मुझसे बड़े हैं और दोनों की शादी हो गई थी पर मैं उस वक्त तक अपनी किसी भी भाभी से मिला नहीं था.

मौसी का एक लड़का अपनी बीवी के साथ कानपुर में रहता है.
वहां उसने अपना घर बनवा लिया है.

ये कहानी गांव वाली भाभी के साथ की है.

हुआ ये कि शहर वाले भैया का लड़का हुआ, तो उन्होंने एक पार्टी रखी और सभी रिश्तेदारों को अपने यहां शहर में बुलाया.

उस समय मेरे एग्जाम खत्म हो चुके थे तो मैं एकदम फ्री था.
घर वालों ने सोचा कि मैं ही उस कार्यक्रम में चला जाऊं.
इसी बहाने थोड़ा कानपुर शहर भी घूम लूँगा.

मैं झट से तैयार हो गया और भैया से फोन करके बता दिया कि मैं आने वाला हूँ.
भैया बहुत खुश हुए.
उन्होंने कैसे आना है, सब कुछ समझा दिया.

जिस दिन पार्टी थी, उससे दो दिन पहले मैं ट्रेन से कानपुर के लिए निकल गया.

रात में 11 बजे के करीब स्टेशन पर उतरा.
तो भैया स्टेशन लेने आए थे.
मैं उनके साथ उनके घर आ गया.

उनके कमरे पर जाने के बाद पहली बार मैं भाभी से मिला और मैंने उन्हें प्रणाम किया.
वहां जाकर पता चला कि छोटी वाली भाभी भी आई हैं और बहुत से रिश्तेदार आए थे.

मैं उन सबसे भी मिला और सभी लोग मुझसे मिलकर बहुत खुश हुए.

अब उधर हुआ ये कि छोटी भाभी को देखते ही पता नहीं मेरे अन्दर क्या हो गया.
मेरा दिल ऐसे धक-धक करने लगा, जैसे मुझे उनसे प्यार हो गया हो.

जिन पाठकों को पहली बार किसी को देख कर ऐसा प्यार हुआ होगा, उन्हें पता होगा कि जब किसी से प्यार होता है तो कैसा महसूस होता है.
वही मेरे साथ भी हो रहा था.

कैसे भी कंट्रोल करके उस रात तो मैं सो गया.
अगले दिन पार्टी की तैयारी हो रही थी और मैं किसी बहाने से छोटी भाभी के आस-पास भटक रहा था.

वैसे आप सभी जानते ही हैं कि शहर में मकान छोटे ही होते है.
इसका फायदा मुझे भी हुआ.

कुछ भी बहाने से छोटी भाभी के इर्द-गिर्द चला जाता था और ये बात भाभी भी ध्यान दे रही थीं.
मुझे ये बात बाद में तब पता चली, जब भाभी ने खुद बताई.

पास जाने के बाद छोटी भाभी कुछ मजाक में बोल देती थीं.

इसी तरह वह दिन बीत गया.
अगले दिन पार्टी थी तो उस दिन और ज्यादा काम था.

सारा दिन कैसे बीत गया, पता नहीं चला.

रात में पार्टी शुरू हुई जिसमें छोटी भाभी ने नेट की साड़ी पहनी थी.
आह क्या ही बताऊं … मेरा मन तो कर रहा था कि अभी ही प्रपोज कर दूँ.

पर डर लगा कि कहीं कुछ गड़बड़ ना हो जाए.
इस वजह से पास मैंने उनके जाकर सिर्फ इतना ही बोला- भाभी, आप बहुत खूबसूरत लग रही हो!

इस पर उन्होंने तिरछी नजर वाली मुस्कान दी और शर्मा गईं.

फिर हम लोग पार्टी में बिजी हो गए.

लगभग 12 बजे रात को पार्टी खत्म हुई.
जो भी घर के बाहर के लोग आए थे, वे उसी समय चले गए थे.

जो कुछ घर के लोग थे, वे सोने जा चुके थे.

मैं वहीं पार्टी वाले स्थान पर बैठकर मोबाइल चला रहा था.

तभी छोटी भाभी आईं और बोलीं- आपको नहीं सोना है क्या?
यह कह कर वे मेरे बगल में कुर्सी लेकर बैठ गईं.

मैंने उन्हें बोल दिया- अभी नींद नहीं आ रही है.
वे बोलीं- क्यों? किसी की याद आ रही है क्या?
अचानक मेरे मुँह से निकल गया- हां!

तो उन्होंने पूछा- किसकी याद आ रही है? कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
तो मैं बोला- अभी तक कोई गर्लफ्रेंड पसंद ही नहीं आई.

वे बोलीं- कैसी गर्लफ्रेंड चाहिए?
तो मैंने बोल दिया- आपके जैसी!

इस पर वे बोलीं- इसी लिए मेरे आस-पास भटक रहे हो क्या? वैसे छोड़ो, ये बताओ कि मेरे में ऐसा क्या है कि मेरी जैसी गर्लफ्रेंड चाहिए?

उस वक्त मेरे मन में आया कि लगता है इनको भी मैं अच्छा लगने लगा हूँ … वर्ना कौन इतना खुल कर बात करता है!

मैंने हिम्मत करके कहा- एक बात बोलूँ? आप गुस्सा तो नहीं कीजिएगा ना?
वे बोलीं- बोलो, मैं क्यों गुस्सा करूंगी … नहीं करूंगी आप बिंदास बोलो!

तो मैंने बोल दिया- आई लव यू!
भाभी सुनकर चुप हो गईं और इधर-उधर देखने लगीं … पर वहां कोई नहीं था.

मैं डर गया कि कहीं भाभी गुस्सा ना हो जाएं.

कुछ देर बाद भाभी उठकर अन्दर चली गईं और मैं कुछ बोल ही नहीं पाया.

मैं सोचने लगा कि अब तो सुबह में इज्जत की धज्जियां उड़ जाएंगी, क्योंकि भाभी सुबह होते ही सबको बोल ही देंगी.

अब तक जो सबकी नजरों में मेरी अच्छी इमेज बनी थी, वह सब खराब हो जाएगी.
यही सोचते हुए लगभग आधा घंटा बीत गया.
अब मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था.

तभी भाभी फिर से आ गईं और आकर मेरे बगल में बैठ गईं.
वे बोलीं- हम्म … अब बोलो क्या बोल रहे थे?

इस बार मैं डरा हुआ था, तो मैंने कहा- भाभी … मैं कहां कुछ कह रहा था … नहीं मैं कुछ नहीं बोल रहा था!

वे गंभीर स्वर में बोलीं- एक बार बोलो तो सही … क्या बोल रहे थे?
मैंने उन्हें मूड में आते देखा तो बोल दिया- आपने जब मेरी बात सुनी ही नहीं, तो चली क्यों गई थीं? अब मुझे कुछ नहीं कहना.

इस बार भाभी हंसने लगीं और धीरे से बोलीं- आई लव यू टू … मैं बस जरा अन्दर का हाल देखने गई थी.
इस पर मैं बोला- भाभी यार, आप एकदम से उठ कर चल दीं … न कुछ कहा और न कुछ गुस्सा हुईं … मेरी तो हालत ही खराब होने लगी थी!

इस पर उन्होंने इठला कर कहा- अच्छा, तुम्हारी हालत खराब हो गई थी क्या … चलो आओ मैं तुम्हारी हालत ठीक कर देती हूँ.
यह कह कर भाभी ने मेरे गाल पर चुम्मा दे दिया.

मुझे अंदाजा ही नहीं था कि भाभी इतनी जल्दी पट जाएंगी.

जब भाभी ने मेरे गाल पर चूमा लिया तो मैंने कहा- ऐसे हालत सही करेंगी क्या … होंठों पर किस दो, तो कुछ समझ में आए.
वे हंस दीं और बोलीं- नहीं, यहां इससे ज्यादा कुछ नहीं हो सकता है, यहां कोई भी देख सकता है. चलो छत पर चलते हैं. वहां अभी कोई नहीं है, मैं देखकर आई हूँ!

मैं मन ही मन में सोचने लगा कि लगता है भाभी को मुझसे ज्यादा चुदने की चुल्ल है. ये तो एकदम से मेरे लौड़े के नीचे लेटने के लिए तैयार हैं!

उनकी कामना को समझते ही मैंने कहा- ठीक है भाभी आप चलिए, मैं आपके बाद आता हूँ!
भाभी मेरी तरफ काम पिपासा भरी नजरों से देखती हुई बोलीं- ठीक है मेरे देवर जी, मैं इंतजार कर रही हूँ, आ जाओ!

यह कहती हुई भाभी गांड मटकाती हुई कमरे से बाहर चली गईं.

पांच मिनट बाद मैं भी निकल गया.
उधर से मैंने इधर उधर देखा और छत की ओर जाने वाले जीने पर चढ़ गया.

छत पर आते ही मैंने ऊपर आने का गेट बंद कर दिया और पलट कर देखा तो भाभी कामुक भाव से मुझे निहार रही थीं.

मैं एकदम से भाभी के करीब गया और उनके ऊपर टूट पड़ा.
वे भी मेरी बांहों में मचलने लगीं और हम दोनों में लिप किस स्टार्ट हो गया.

भाभी को चुम्मियां करते हुए ही मैं उनके बूब्स दबाने लगा और कब उनकी चूचियों को ब्लाउज की कैद से आजाद कर दिया, कुछ पता ही नहीं चला.
हम दोनों के बीच अभी ये सब लगभग दस मिनट ही चला होगा कि भाभी एकदम से गर्म हो गईं और कहने लगीं- अब और देर न करो मेरी जान!

मैंने कहा- भाभी मुझे आपकी नीचे वाली मुनिया को देखना है!
इस पर भाभी बोलीं- सिर्फ देखना है क्या … मैंने तो सब कुछ तुम्हारे लिए ही छोड़ दिया है. जो देखना है देख लो और जो करना है, कर भी लो!

इस पर मैंने देर करना ठीक नहीं समझा और इधर उधर देखने लगा.
उधर एक फटा हुआ बोरा पड़ा था.

मैंने उस बोरे को बिछाया और उस पर भाभी को लिटा दिया.

भाभी भी रंडी की तरफ पैर फैला कर लेट गईं.
मैंने अपना लंड निकाल कर भाभी के मुँह पर रख दिया.

वे होंठ बंद किये हुई थीं और मना करने लगीं कि मुँह में नहीं लूँगी!
मैंने जिद की तो मुँह खोल दिया.

मैंने लंड उनके मुँह में दे दिया.
वे लंड के सुपारे को चूसने लगीं.
उसके बाद भाभी बोलीं- अब बर्दाश्त नहीं हो रहा यार … कुछ करो ना!

यह सुनकर मैंने उन्हें सीधा चुदाई की पोजीशन में लिटाया और उनके ऊपर चढ़ गया.
वे मुझे किस करने लगीं.

मैं कभी भाभी के दूध पीने लगा तो कभी उनके होंठ चूसने लगता.

भाभी मेरे लंड को पकड़ कर उत्तेजक आवाजें निकाल कर माहौल गर्म कर रही थीं.

कुछ देर के बाद मैंने उनकी साड़ी को ऊपर उठा कर देखा कि भाभी लाल रंग की चड्डी पहनी हुई थी.

मैंने चड्डी के ऊपर से जब चुत पर हाथ फेरा, तो चुत का इलाका पूरा भीगा हुआ था.
मैंने उनकी चड्डी को उतार दिया.

सामने मक्खन माल पसीज रहा था, चिकना माल चुत में भरा हुआ था.

क्या बताऊं यार … मैंने जिंदगी में पहली बार किसी बुर को सामने से देखा था.
मस्त बुर थी … उस पर झांटों के छोटे छोटे बाल उगे हुए थे.

मैंने पोजीशन बनाई और भाभी की चुत के ऊपर लंड टिका दिया.
भाभी को लंड अन्दर लेने की चुल्ल मची थी तो वे अपनी गांड उठा रही थीं.

मैंने उनके होंठों पर होंठ जमाए और एक जोरदार धक्का दे दिया.
एक ही झटके में मेरा आधा लंड अन्दर चला गया.

भाभी को दर्द हुआ और उनकी चीख निकलने को हुई.
मेरे होंठों ने उनके होंठों को दबाया हुआ था तो वे कसमसा कर रह गईं.

फिर भाभी हाथ से मेरे मुँह को अपने मुँह से हटाती हुई बोलीं- आह मर गई देवर जी. बहुत बड़ा है आपका … प्लीज आराम आराम से करो … मैं बहुत दिन से चुदी नहीं हूँ!

मैं उन्हें फिर से किस करने लगा और धीरे-धीरे लौड़े को चुत में आगे-पीछे करने लगा.

कुछ देर में भाभी मजे में मस्त होने लगीं, तो मैंने फिर से एक जोरदार झटका दे मारा.
इस बार मेरा पूरा लंड भाभी की चुत के अन्दर चला गया.

भाभी की आंखों से आंसू आ गए.
वे कराह कर बोलीं- आराम से करो यार … तुम्हारे भैया बहुत कम चोदते हैं. वे सिर्फ काम में ही लगे रहते हैं. मुझे बहुत कम ही चोदते हैं. जब से तुम मेरे पास घूम रहे थे, तभी से मैंने तुमसे चुदवाने का मन बना लिया था. आज मेरी आग अच्छे से बुझा दो, मेरी चुत में बहुत आग लगी है. मैं बहुत दिन से लंड खोज रही थी, पर गांव में डर लगता था और किसी पर भरोसा भी नहीं हो रहा था. पर तुमसे पता नहीं क्यों, प्यार हो गया और मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पाई. आज से तुम मेरे राजा हो, तुम जब चाहें मुझे चोद सकते हो. आज के बाद मेरा यह बदन तुम्हारा ही है!

मैं भाभी की बात सुनकर और मस्ती में आ गया और फुल स्पीड में भाभी की चुत को पेले जा रहे थे.
भाभी भी अपनी गांड उठा-उठा कर साथ दे रही थीं.

फुल मस्ती में चुदाई चल रही थी.
हम दोनों को चुदाई करते हुए लगभग आधा घंटा हो चुका था.

भाभी दो बार झड़ गई थीं और वे बोल रही थीं- आह आज पहली बार किसी मर्द ने मुझे रगड़ कर चोदा है!

कुछ देर बाद मैं भी झड़ने वाला हो गया था, तो मैंने भाभी से पूछा- रस कहां निकालूँ?

भाभी बोलीं- अन्दर ही निकाल दो और अपने गर्म पानी से मुझे ठंडी कर दो!

यह सुनकर मैं भाभी की चुत पर पिल पड़ा और दस बारह धक्कों के बाद मेरा काम तमाम हो गया.
मैंने अपने लंड का सारा माल भाभी की बुर के अन्दर ही गिरा दिया.

मैं झड़ कर भाभी के ऊपर लेट गया.
कोई बीस मिनट तक हम दोनों एक दूसरे से बातें करते रहे.

उसके बाद हम दोनों उठे और अपने कपड़े ठीक करके बारी-बारी से नीचे आकर सो गए.

उसके बाद गांव आने के बाद तो जब भी मैं भाभी के घर जाता हूँ, तो वे ऐसी चुदाई की सेटिंग लगाती हैं कि रात में हम दोनों साथ में सो जाते हैं.
मैं उनकी बहुत चुदाई करता हूँ.

बस एक ही कमी रहती है कि हम दोनों जल्दी जल्दी मिल नहीं पाते हैं.
कभी-कभी तो बिना मिले छह महीने भी बीत जाते हैं.

दोस्तो, ये मेरी सेक्स कहानी आपके सामने है.
बिहारी सेक्स कहानी आपको पढ़ कर कैसी लगी, प्लीज अपने कमेंट्स और मेल जरूर करें.
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