दोस्त की चुदासी मम्मी की चूत चोदी

पोर्न आंटी चुदाई स्टोरी में मेरे दोस्त की मम्मी मुझे कंटीली मुस्कान से देखती थी. दोस्त के पापा बाहर रहते थे. मुझे लगा कि आंटी की चूत को लंड पूरा नहीं मिलता.

नमस्ते दोस्तो, मेरा नाम राहुल है और मैं 24 साल का हूँ.
मेरा लंड साढ़े सात इंच लंबा और बहुत मोटा है. मेरी हाइट 5 फीट 10 इंच है.

मेरी गर्लफ्रेंड की उम्र 23 साल है.
उसकी कमर पतली, गांड मोटी और चूचे बड़े हैं.
उसे देखकर किसी भी चूत के शिकारी का लंड गारंटी से सल्यूट करने लगेगा.

मैं उसे बहुत चोदता था.
कभी लिटाकर, कभी दीवार से चिपका कर और एक टांग हवा में उठा कर पेल देता था.

वैसे मुझे उसे घोड़ी बनाकर चोदना सबसे अच्छा लगता है क्योंकि उसकी बड़ी मोटी गांड बहुत सुंदर है.

मेरी गर्लफ्रेंड अक्सर 30-40 मिनट चुदने के बाद हमेशा रोने लगती थी और मुझे चूत नहीं मारने देती थी.
इस बात पर मुझे बहुत गुस्सा आता था और मैं सेक्सुअली असंतुष्ट रहता था.

लेकिन यह पोर्न आंटी चुदाई स्टोरी मेरी GF की नहीं है.

अब मेरे मन में ख्याल आता था कि किसी आंटी को सैट करके उसे खूब चोदूंगा, इसमें वह भी खुश और मैं भी.

आंटी भाभी की चूत ढीली रहती है न … तो वे अक्सर खुल कर चोदने देती हैं.

अब मैं ऐसी ही किसी चुदक्कड़ आंटी की तलाश में रहने लगा था.

कुछ दिन बाद मेरे एक दोस्त की मम्मी ने मुझे ऐसी स्माइल दी, जैसे वे प्यासी हों और अपनी चूत में मेरा लंड लेना चाहती हो.

मेरे दोस्त की मम्मी एकदम मस्त माल हैं.
उनकी गांड बहुत बड़ी है और रंग एकदम दूध सा गोरा है.
आंटी के चूचे 36 इंच के हैं और गांड भी लगभग 38 इंच की रही होगी.

मैंने उनकी तरफ जब देखा तो उन्होंने अपने होंठ काट कर मुस्कान दी.
मैं अपने दोस्त को देखने लगा. वह किताब में घुसा हुआ कुछ पढ़ रहा था.

फिर आंटी अन्दर चली गईं और मैं भी अपने घर आ गया.

मैं भी मन ही मन सोचने लगा कि क्या करूँ और कब मौका मिलेगा इस दोस्त की मम्मी को अपनी रंडी बनाने का.

दूसरे दिन मैं फिर उसी दोस्त के यहां गया तो उस वक्त उसकी माँ ने फिर से लाइन दी.
मैं अपना लंड सहला कर घर वापस चला आया.

अगले दिन बाद मुझे उसकी मां का फोन आया.
वे बोलीं कि उन्हें कुछ काम में मेरी मदद चाहिए.

उस वक्त मेरा दोस्त शहर से बाहर गया था.
वह अपने पापा से मिलने गया था.
उसके पापा किसी दूसरे शहर में जॉब करते थे और वे महीने में एक बार ही घर आते थे.

मैं तुरंत समझ गया कि आज आंटी ने मुझे बुलाया है तो जरूर कुछ खेल हो सकता है.

तो मैं फटाफट से आंटी के घर पहुंचा.

वहां पहुंचते ही मैंने देखा कि मेरे दोस्त की मम्मी ने बिना ब्रा के गाउन पहना था और उनके चूचे मस्त हिल रहे थे.

उनके हिलते हुए चूचे देख कर ही मेरे अन्दर का जानवर जाग गया और मैंने ठान लिया कि आज इस कुतिया की चूत फाड़कर ही घर जाऊंगा.

आंटी ने मुझे थोड़ा सा सामान बाहर निकालने को कहा, जो उनके कमरे में ऊपर की तादान पर रखा था.

मैं एक सीढ़ी पर खड़ा था और आंटी को सामान निकाल निकाल कर देता जा रहा था.
ऊपर से मुझे उनकी गहरी क्लीवेज दिखी.

वे गाउन में सारा काम कर रही थीं.

उनके चूचों की घाटी को देखकर मेरा लंड फौलाद की तरह खड़ा हो गया.
लोअर में से मेरे लौड़े की झलक आंटी को समझ आने लगी थी.

मेरा लंड खड़ा देखकर उस कुतिया की आंखों में हवस आ गई.
आंटी ने मुझसे प्यार से पूछा- बेटा क्या हुआ, सब ठीक तो है न!
मैंने कहा- हां आंटी, मैं बस थोड़ा सोया नहीं हूँ … इसलिए थकान से थोड़ा …

अभी मैंने अपनी बात पूरी भी नहीं की थी कि आंटी बोलीं- कोई बात नहीं, ऐसा कभी-कभी हो जाता है. तुम नीचे आ जाओ … बाकी का काम तेरा दोस्त वापस आकर कर देगा.

मैं नीचे उतर रहा था और आंटी की आंखें मेरे लंड से हट ही नहीं रही थीं.

मैं तो चाहता था कि बस पकड़ ले रंडी मेरा लौड़ा … और जोर-जोर से चूस ले!

पर अभी समय नहीं आया था.

तभी आंटी बोलीं- मैं चाय बनाकर लाती हूँ!
मैंने कहा- ठीक है.

मुझे डर भी लग रहा था, पर चूत भी चाहिए थी.
मैं नॉर्मल रहने की कोशिश करने लगा.

आंटी के वापस आने पर हम दोनों चाय पीने लगे.

आंटी ने मुझसे सीधे पूछा- तुम्हारी गर्लफ्रेंड कैसी है?
ये सुनते ही मेरा मूड खराब हो गया.

तभी आंटी ने पूछा- सब ठीक तो है न बेटा?
मैंने कहा- हां आंटी, सब ठीक है. बस मेरी गर्लफ्रेंड से मेरी थोड़ी नाराजगी चल रही है.

उन्होंने पूछा- क्यों?
तो मैंने आंटी से साफ बोल दिया कि वह मुझे संतुष्ट नहीं कर पाती.

ये सुनकर आंटी शॉक्ड हो गईं और मेरे पास आकर बैठ गईं.

आंटी ने मुझसे कहा- तुझे उससे बात करनी चाहिए और अपनी संतुष्टि करवा लेनी चाहिए. वैसे वह क्या कहती है मेरा मतलब तुम्हें संतुष्टि क्यों नहीं मिल पाती है?

मैंने आंटी को पूरी बात बताई कि मैं देर तक करता हूँ और वह कोशिश तो करती है कि मेरा साथ देती रहे … पर वह फारिग होने के बाद मेरे कुछ ही शॉट के बाद मरी सी हो जाती है. जबकि मेरा इंजन तो उस वक्त तक गर्म हो पाता है.

आंटी ये सुनकर हैरान हो गईं और वे मुझे अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से देखने लगीं.

‘ऐसा क्या खास है तेरे इंजन में …’
आंटी ने अपने होंठों में यह बुदबुदाया तो मैं समझ गया कि आंटी चुदने के लिए रेडी हैं.

अब मैंने बेझिझक आंटी की जांघ पर हाथ रखा और कहा- सॉरी आंटी … मुझे आपको ये नहीं बताना चाहिए था. ये मेरी पर्सनल प्रॉब्लम है.

आंटी को एकदम से मजा आने लगा.
वे बोलीं- ये पर्सनल प्रॉब्लम तो सबके साथ होती है, बस कोई बताता नहीं है.

मैंने आंटी से पूछा- क्या आपके साथ भी ऐसा ही होता है?
आंटी धीरे से बोलीं- हां, पर मेरे साथ उलटा होता है. मैं भी बहुत सालों से पूरी संतुष्टि नहीं ले पाई हूँ. तुझे तो मालूम ही है कि तेरे अंकल दूसरे शहर में जॉब के लिए जाते हैं और महीने में एक दिन के लिए आ पाते हैं. उतने में मेरा पूरा कैसे हो सकता है!

ये बोलकर आंटी उदास हो गईं.

तभी मैं आंटी से एकदम चिपक कर बैठ गया.
उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा.

फिर मैंने उनसे पूछा- क्या हम एक-दूसरे की मदद कर सकते हैं?
इस पर आंटी गुस्सा करने लगीं- तुम मेरे बेटे जैसे हो!

मैंने आंटी को कहा- तो क्या हुआ, मैं बेटा थोड़ी हूँ … हम लोग अपनी सहमति से कर सकते हैं!

आंटी बोलीं- तुम छोटे हो, अभी तुम नहीं समझोगे. इस बात को यहीं छोड़ देते हैं … चलो!

ऐसा बोलकर वह कुतिया उठी और जाने लगी.
तभी मैंने उसे पकड़ लिया और दीवार की तरफ धकेल दिया.

आंटी मुझे गुस्से से देखने लगीं.

मैंने आंटी से कहा- बस एक बार के लिए मेरी गर्लफ्रेंड बन जाओ, किसी को कुछ नहीं पता चलेगा!
अब आंटी थोड़ा सोचने लगीं.

इतने में मैंने अपना एक हाथ आंटी के चूचे पर रखा और लंड को कपड़ों के ऊपर से ही रगड़ने लगा.

मैंने आंटी को किस करने की कोशिश की.
पहले तो आंटी ने मेरा साथ नहीं दिया, पर कुछ पल बाद वे थोड़ा शांत हो गईं और उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा.

अब हम दोनों किस करने लगे थे और आंटी मेरे मुँह में अपनी जीभ देने लगी थीं.

सच में आंटी की जीभ चूसने में बड़ा मजा आ रहा था.

वे आह आह करने लगी थीं.
मैं समझ गया कि आंटी की चूत में आग लग गई है.

मैंने तुरंत अपना पजामा नीचे किया और आंटी को मेरा मोटा लंबा लंड पकड़वा दिया.
आंटी ने मेरे साढ़े सात इंच के मोटे लंड को देखा तो वे खुश हो गईं और धीरे-धीरे आगे पीछे करने लगीं.

मैंने कहा- पसंद आया?
वे हंस कर बोलीं- मस्त है … अब इसकी दौड़ देखनी है कि कितना लंबा चलता है!

मैंने कहा- चूत को भोसड़ा बनाने में पीएचडी की है इसने!
वे हंसने लगीं और बोलीं- तभी तेरी जीएफ की फट गई थी क्या?
मैंने कहा- हां, साली से लंड ही नही लेते बनता था!

यह कह कर मैंने आंटी का गाउन उठाना शुरू किया.

जैसे-जैसे गाउन उठा, वैसे ही पता चला कि इस रंडी ने पैंटी भी नहीं पहनी थी!

उसकी चूत पर हाथ लगते ही वे आहें भरने लगीं और मैं उनके दूध मस्त कर चूस कर उनका साथ देने लगा.

फिर हम दोनों ने एक दूसरे को बहुत चूमा, चाटा व चूसा.
आंटी अपने हाथ से पकड़ पकड़ कर दूध चुसवा रही थीं.

अब समय आ गया था कि मेरे प्यासे लंड को एक ऐसी चूत मिली, जिसको लंड की कदर थी.

मैंने बिना समय लगाए आंटी को पकड़ा और उन्हें बेडरूम में ले गया.
मैंने उन्हें बेड पर धकेल दिया.

फिर उनके दोनों पैर पकड़ कर अपनी तरफ को खींचा और अपने पास करके उनकी चूत चाटने लगा.

रंडी आंटी की तो आंख ही नहीं खुली और वे जोर-जोर से मोन करने लगीं.

उनकी चूत बिल्कुल साफ और गोरी थी, पहले से ही चुदने के चक्कर में थीं शायद.

कुछ ही मिनट में मेरी जीभ ने उन्हें पागल कर दिया.

वे मुझसे कहने लगीं- अब चोद भी दे बेटा … और कितना तड़पाएगा मेरा राजा बेटा!

मैंने आंटी की चूत में एक ही झटके में लौड़े को पेल दिया और उनकी जो बसंती बनाई कि वे बेहाल हो गईं.

मैंने शुरुआत में ही दस बारह शॉट दे दनादन मारे … आंटी की चूत ने भोसड़े के जैसे मुँह बा दिया.

वे पानी पानी की आवाज निकालने लगीं.
उन्हें प्यास लग आई थी.

मैंने कुछ देर तक चोदने के बाद उन्हें बिस्तर पर नंगी छोड़ दिया और मैं पानी लेने चला गया.
पानी पीने के बाद आंटी बोलीं- तुमने तो मुझे ऐसे चोदा, जैसे आज के बाद कभी चूत ही नहीं मिलेगी!
ये बोलकर वे हंसने लगीं.

मैंने कहा- बकचोदी बंद करो आंटी … लौड़े को कसरत करने दो!
वे बोलीं- तो आ जाओ.

मैं चढ़ गया और आधा घंटा तक आंटी को रगड़ा.
पोर्न आंटी चुदाई के दौरान दो बार झड़ गई थीं.

फिर उन्होंने शॉवर लेने के लिए कहा.

मैं उन्हें अपने साथ बाथरूम में ले गया और शॉवर के नीचे आंटी को कुतिया बना कर चोदा.

कुछ देर बाद मेरा पानी निकल गया तो मैं शॉवर में खड़े होकर लंबी लंबी सांसें लेने लगा.

उसके बाद आंटी ने मेरे लिए मेरे दोस्त के कपड़े निकाल कर दिए.

मैंने उन्हें वापस अन्दर खींच लिया और कहा- अब पहले लौड़े को चूस कर साफ करो.

फिर शॉवर में ही रंडी आंटी ने मेरा लंड इतना अच्छे से चूसा कि मजा आ गया.
साली आंटी एकदम प्रोफेशनल रंडी थी!

आंटी के होंठों ने मेरे लंड पर पकड़ बना ली थी और वे अपनी जीभ मेरे सुपारे पर घुमा रही थीं.

मैंने कुछ देर में ही आंटी के मुँह में वीर्य झाड़ दिया.
आंटी ने मुझे हंसकर देखा और मेरा वीर्य पी गईं.

मेरे मुँह से निकला- साली रंडी …
यह कह कर मैंने उनके दूध को मसल दिया.

आंटी हंसने लगीं.

फिर वे बोलीं- अब तेरे टॉवर के नेटवर्क आने लगे हैं तो फिर से कॉल मिला ले!

मैं समझ गया कि आंटी को दुबारा चुदने का मन हो गया है.

मैंने उन्हें शॉवर के नीचे ही अपनी घोड़ी बना लिया और नहाते हुए चुदाई की.

इस तरह हम दोनों सेक्स बडीज़ बन गए!
अब मैं जब तब आंटी को चोदने चला जाता हूँ.

आपको मेरी इस सच्ची पोर्न आंटी चुदाई स्टोरी को पढ़ कर कैसा लगा, प्लीज जरूर बताएं.
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