देसी आंटी फक कहानी में मैं नानी के घर गया तो मौसी को चोदना चाहता था. पर वे अपने घर चली गयी. तो मैंने गाँव में अपने दोस्त की मम्मी को चोदा. वे मुझसे कैसे सेट हुई?
हैलो मेरी प्यारी भाभी और चुदक्कड़ बहनो,
आप सबको मेरे खड़े लंड का प्रणाम … ये मेरी पहली सेक्स कहानी है.
मेरा नाम अमन शर्मा है.
मेरी उम्र 19 साल है और मेरा रंग गोरा है.
मेरे लंड का साइज 7.2 इंच है.
यह देसी आंटी फक कहानी कुछ दिनों पहले की है जब मैं अपने नानी के घर गया था.
वहां मेरी मौसी भी आई हुई थीं, जिनकी उम्र 27 साल है. उनकी शादी अभी कुछ महीनों पहले हुई थी.
मेरी मौसी एक मॉडल जैसी हैं. वे दिखने में किसी अप्सरा से कम नहीं हैं.
मैं उन्हें पहले से ही पसंद करता हूँ. उन्हें देखकर मैं पागल सा हो जाता हूँ और मेरे छोटे अमन को खड़े होने में ज़रा भी वक़्त नहीं लगता.
पर हुआ यूं कि मौसी दो दिन बाद ही अपने ससुराल चली गईं.
मैं उन्हें चोदने की फिराक में था.
पर ऐसा हो न सका.
अब मेरे दिल में तो चल ही रहा था कि अपने आपको शांत करने के लिए किसी को तो चोदना ही है!
उस दिन तो मुठ मारकर किसी तरह से लौड़े को ठंडा कर लिया और सो गया.
अगले दिन मैं गांव में ही अपने एक दोस्त के घर गया.
मैंने देखा वह घर पर नहीं था, मार्केट गया था.
मैं उसकी मम्मी से मिला, जो 48 साल की हैं.
लेकिन उन्होंने अपने आपको इस तरह बनाए रखा है कि वे 32 के आसपास की लगती हैं. उनका नाम रोशनी है.
मैंने आंटी से कहा- आप कैसी हैं?
उन्होंने कहा- बेटा … मैं ठीक हूँ … आओ बैठो तुम्हारा दोस्त जरा बाजार तक गया है अभी आता ही होगा.
उस वक्त मेरी नज़रें उनके मम्मों पर थीं.
शायद यह उन्होंने जान लिया था कि मैं उनके बूब्स को देख रहा हूँ.
उन्होंने अपने कपड़ों को ठीक किया तो मैं समझ गया कि उन्हें पता चल गया है कि मेरी नज़र उनके बूब्स पर है.
मुझे भी थोड़ा अजीब लगा और मैं वहां से चला गया.
फिर पूरी रात उनके बारे में सोचकर 3 बार मुठ मारी.
अगले दिन मैं दोबारा गया और अपने दोस्त से मिला.
वह मुझसे उम्र में छोटा है, उसकी उम्र 18 साल की होगी.
वह स्कूल जा रहा था.
उसने मुझसे कहा- अमन, जब मैं स्कूल से आ जाऊं, तब आना!
मैंने कहा- ठीक है!
वह स्कूल चला गया.
फिर मैं उसके घर गया और आंटी को गुड मॉर्निंग बोला.
मैं सोच रहा था कि आंटी को कैसे चोदूँ.
लेकिन तभी एक अलग सी चीज़ हुई.
आंटी खुद चल कर मेरे पास आईं, पहले उन्होंने दरवाज़ा बंद किया और बोलीं- बेटे एक बात बताओ, कल तुम क्या देख रहे थे?
मैंने कहा- कुछ नहीं!
तो उन्होंने कहा- जब तुम्हें राहुल ने बोल दिया था कि तुम दिन में आना, तो तुम फिर क्यों आए?
मैंने कहा- आप किसी से बोलेंगी तो नहीं?
उन्होंने कहा- नहीं!
मैंने कहा- मैं आपसे प्यार करता हूँ!
वे हंसने लगीं और बोलीं- मुझसे या मेरे बूब्स से?
मैं समझ गया कि वे ख़ुद मुझसे चुदना चाहती हैं.
मैंने कहा- क्या मैं आपके साथ सेक्स कर सकता हूँ?
उन्होंने बिल्कुल सेक्सी आवाज़ में कहा- तभी तो दरवाज़ा बंद किया है!
मैंने कहा- आप मुझसे ही क्यों चुदना चाहती हैं?
उन्होंने कहा- इसलिए क्योंकि कल जब तुम्हारा लंड खड़ा हुआ था, तो वह काफ़ी बड़ा लग रहा था!
उनकी लंड वाली भाषा सुनकर मैं भी खुल गया, मैंने कहा- आज तो मैं तुम्हें चोद चोद कर रंडी बना दूँगा!
उन्होंने भी वासना भरी आवाज में कहा- तो बना दो मुझे रंडी मेरी जान!
सबसे पहले मैंने उनकी साड़ी के ऊपर से उनके बूब्स दबाने शुरू किए.
उन्होंने मेरे होंठों में अपने होंठ रखे और चूसने लगीं. साथ ही मेरे लंड को पैंट के ऊपर से ही दबाने लगीं.
फिर मैं भी फुल जोश में उनके बूब्स दबाने लगा. मैं अपने एक हाथ से उनकी साड़ी के ऊपर से ही चूत को सहला रहा था.
कुछ दस मिनट बाद उन्होंने मेरी पैंट उतारी. मैंने उनकी साड़ी उतारी.
फिर हम दोनों ने ख़ुद ही सारे कपड़े उतार दिए.
जब उन्होंने मेरा लंड देखा, तो बोलने लगीं- सालों बाद इतना अच्छा लंड देख रही हूँ!
हम दोनों 69 की पोजीशन में आ गए.
आंटी मेरा लंड चूस रही थीं और साथ में ‘आह आह’ की आवाज़ भी कर रही थीं.
मैं उनकी चूत चाट रहा था.
हम दोनों करीब दस मिनट बाद एक-दूसरे के मुँह में झड़ गए.
फिर हम बात कर रहे थे.
मैंने पूछा- आपने अब तक कितने लंड लिए हैं?
वे हंस कर बोलीं- बस दो … पहला अपने पति का और दूसरा अपने ससुर का. वह बुड्डा अब मर गया, उसके बाद से दूसरा लौड़ा नसीब ही नहीं हुआ. आज तीसरा तुम्हारा है!
जब मेरा लंड भी खड़ा होने लगा, तो उन्होंने उसे मुँह में ले लिया.
मैं ‘आ आ’ करने लगा और बोला- और अन्दर तक ले साली मेरे लंड को!
फिर जब मेरा लंड पूरी तरह खड़ा हो गया तो उन्होंने कहा- मुझे अब चोदेगा भी या बस ऐसा ही करता रहेगा?
मैंने बोला- ठीक है, करता हूँ!
फिर जैसे ही मैंने उनकी चूत में लंड सैट किया और धक्का दिया, मेरा लंड गया ही नहीं.
मैंने उनसे पूछा, तो उन्होंने कहा- बहुत साल हो गए बिना चुदाई के … इसी लिए ऐसा हो रहा है!
तभी वे उठीं और सरसों के तेल की बोतल लाईं.
उन्होंने पहले मेरे लंड पर तेल लगाया, फिर अपनी चूत पर!
बोतल रखकर वे बोलीं- थोड़ा धीरे-धीरे अन्दर करना!
मैंने कहा- ठीक है!
लेकिन जैसे ही मैंने पहला झटका मारा, वे चीख पड़ीं- मादरचोद, मारेगा क्या मुझे … रुक थोड़ी देर!
मेरा लंड अभी सिर्फ़ तीन इंच अन्दर गया था.
जब उन्हें लगा कि अब ठीक है, तो वे सहज हो गई.
उन्होंने कहा- अब कर!
इस बार मैंने पूरा लंड अन्दर कर दिया.
वे रो पड़ीं और बोलीं- थोड़ा धीरे कर न!
मैं रुक गया और फिर धीरे धीरे चुदाई करने लगा.
आंटी सिसकारी लेने लगीं- आह आ आह … मार डाला ऊह ऊह … भोसड़ी वाले ने मार डाला!
फिर वे खूब मजे से चुदने लगीं. अब तो वे गांड उठा-उठाकर लंड ले रही थीं.
कुछ ही समय में वे दो बार झड़ गई थीं. मैं धकापेल करने में लगा रहा.
फिर जब मेरा लंड फारिग होने को हुआ, तो मैंने उनसे कहा- मैं झड़ने वाला हूँ!
तो उन्होंने कहा- मेरी चूत में ही झड़ जा!
मैंने ‘ठीक है’ बोला और आंटी की चुत में ही झड़ गया.
हम कुछ देर ऐसे ही चिपके रहे.
फिर जब मैं उनके ऊपर से हटा तो वे मुझसे हंस कर बोलीं- तूने तो मुझे सचमुच रंडी बना दिया. अब से बस तू ही मुझे चोदेगा … और कोई नहीं!
इसके बाद उन्होंने कहा- अब रात को बाजू वाले खाली प्लॉट में मिलना, मैं वहीं आऊंगी!
मैंने कहा- ठीक है मेरी रंडी, मैं आ जाऊंगा!
आंटी को चोद कर मैं घर के लिए जाने लगा.
जाते वक्त मैंने देखा कि आंटी ने जिस जगह रात को मिलने के लिए कहा था वह एक ऐसा प्लॉट था जो चारों तरफ चाहरदीवार से सुरक्षित था.
अन्दर जाने के लिए एक दरवाजे की जगह बनी थी लेकिन दरवाजा नहीं था.
मुझे लगा कि आंटी अपने बेटे के कारण रात में इधर मिलना चाह रही हैं.
मैं भी उनकी गांड मारने की सोचता हुआ अपने घर चला गया.
फिर जब रात हुई, तो मैं आंटी की बताई हुई जगह पर पहुंचा.
मैंने देखा कि वे पहले से ही वहां थीं.
वे अपने मुँह को एक कपड़े से ढक कर खड़ी थीं.
मैंने उनके करीब पहुँच कर कहा- मेरी जान शुरू करें?
उन्होंने कहा- ठीक है … पर चुदाई जल्दी करना, मुझे जल्दी जाना है!
उनकी आवाज़ थोड़ी अलग सी लगी, पर मैंने ध्यान नहीं दिया.
अब मैंने सीधे उनकी सलवार को खोला और उनकी गांड चाटनी शुरू कर दी.
वे बोलीं- ये क्या कर रहा है?
मैंने कुछ नहीं कहा और अपना लंड उनकी गांड में सैट कर दिया.
उन्होंने चिहुंकते हुए कहा- अरे … चूत चोदो न!
मैंने कहा- नहीं, मुझे गांड मारनी है!
यह बोलकर मैंने अपना लंड उनकी गांड के अन्दर पेल दिया.
वे कुछ चिल्ला पातीं, इससे पहले ही मैंने उनका मुँह दबा दिया.
फिर जब लगा कि वे ठीक हैं, तो मैं गांड मारने लगा.
साथ में मैं उनकी चुत को अपनी दो उंगलियों से मसलने लगा और उंगली अन्दर करने लगा.
वे मस्ती से गांड मरवाती रहीं.
देसी आंटी फक में तीस मिनट तक गांड मारने के बाद मैं उनकी गांड में ही झड़ गया.
अब तक उनकी चूत ने भी दो बार पानी छोड़ दिया था.
फिर मैं अपने घर और वो अपने घर चली गईं.
जब मैं सुबह आंटी से मिला और बोला- रात को मज़ा आया?
तो वे बोलीं- मैं तो आई ही नहीं थी!
मैंने कहा- तो फिर वो कौन थी?
यह सुनकर आंटी हैरान रह गईं कि मैंने किसके साथ सेक्स किया.
यह हम दोनों के लिए चिंता का विषय था.
हालांकि बाद में मुझे जानकारी लग गई थी कि उस खाली प्लॉट में मेरे लौड़े से किसने गांड मरवाई थी.
आंटी ने जब रात को आने के लिए खुद कहा था और वे आई नहीं थीं.
उनकी जगह ऐसा कौन हो सकता है जिसे मालूम हो कि रात को मैं उन्हें चोदने आने वाला हूँ!
खैर … इस मुद्दे पर आपके साथ अगली सेक्स कहानी में चर्चा करूंगा.
तो दोस्तो, मैंने आंटी को सैट कर लिया था और अब अपने दोस्त के स्कूल जाते ही मैं आंटी के साथ सेक्स करने उनके घर आ जाता हूँ.
आज के लिए इतना ही.
अगली सेक्स कहानी में मैं आपको बताऊंगा कि वह कौन थी. आपको मेरी देसी आंटी फक कहानी पसंद आई होगी.
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लेखक की पिछली कहानी थी: प्यासी पड़ोसन भाभी की चूत पेली