आंटी चुदाई कहानी मेरे पड़ोस की सेक्सी आंटी की है. उन पर मेरा दिल आ गया लेकिन डर लगता था। एक दिन आंटी मेरे घर आयी, मैंने उनकी चूची दबा दी। उन्होंने मुझे थप्पड़ मार दिया। फिर मैंने कैसे उनकी चूत हासिल की? मेरी स्टोरी में पढ़ें।
दोस्तो, कैसे हो सब लोग?
आशा करता हूं कि सभी मुठ मारकर बढ़िया होंगे।
सबसे पहले मैं आपको बता दूं कि मेरा नाम दीपक है। मैं मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश में का रहने वाला हूं। मेरी उम्र 19 साल है और मैं कॉलेज में पढाई कर रहा हूं।
मैं दिखने में गोरा और स्मार्ट हूं। मौहल्ले की सभी आंटियां मुझे बहुत पसंद करती हैं। मेरे घर में मेरे अलावा 2 और सदस्य रहते हैं।
आज मैं आपको अपने पड़ोस की एक आंटी चुदाई कहानी बताने जा रहा हूं।
वो आंटी मेरे घर के बगल में रहती है।
उनके घर किराने की दुकान भी है इसलिए आंटी दुकान भी संभालती हैं।
आंटी दिखने में ठीक-ठाक है। उनके लंबे, काले, घने बाल न जाने क्यूं मुझे उनकी ओर मोहित कर लेते हैं।
मैं बचपन से ही पढाई में तेज था इसीलिए मेरा आस-पड़ोस में अच्छा खासा सम्मान है।
लोग मुझे बहुत अच्छा समझते हैं।
आंटी भी मुझे बहुत अच्छा समझती हैं और मुझे बड़ा लाड-प्यार करती हैं।
कभी कभार उनके घर बनाई गई अच्छी-अच्छी खाने की चीजें वे मेरे लिए लेकर आती हैं।
ऐसे ही अच्छी-गहरी पहचान होने के कारण मेरा आंटी के घर आना जाना लगा रहता है।
उनके दो बच्चे भी हैं।
एक 5 साल का है और दूसरा 7 साल का है।
बच्चों को पढ़ाने के बहाने से मैं उनके घर ज्यादा आना-जाना करता रहता था।
आंटी भी मेरे उनके घर जाने पर बड़े प्यार से बात करती और कभी-कभी मेरे घर भी आ जाया करती थी।
आंटी के पति कार मेकेनिक हैं।
घर से 5 किलोमीटर की दूरी पर उनका गैराज है।
वे वहीं दिनभर काम करते हैं।
एक बार की बात है कि आंटी और उनका पूरा परिवार पिकनिक मनाने शिमला चला गया था।
उनके घर की चाबी आंटी ने मुझे सौंप दी और कह दिया कि जब भी माल की डिलीवरी हो तो घर की दरवाजा खोल कर सामान वहां उतरवा दूं।
फिर मैंने उनको विदा किया।
आंटी और उनका परिवार सात दिन के लिए पिकनिक मनाने के लिए चला गया।
फिर जब डिलीवरी वाला आया तो मैंने उनका सामान दरवाजा खोलकर उतरवा दिया।
डिलीवरी ब्वॉय के जाने के बाद जब मैं घर को बंद करने लगा तो मेरे दिमाग में हवसी ख्याल आया।
मैंने सोचा कि क्यों न मैं आंटी की अलमारी से उनकी ब्रा और पैंटी को चुरा लूं?
मैंने वैसा ही किया।
आंटी की अलमारी से मैंने उनकी ब्रा और पैंटी निकाल ली।
उनकी ब्रा पैंटी को चुरा ले आकर मैं उनको अपने रूम में लेकर आ गया।
उसी दिन मैंने मुठ भी मार डाली।
आंटी की ब्रा और पैंटी को सूंघते हुए मैंने मुठ मारी और मुझे बहुत मजा आया।
उनमें से आंटी की चूत और चूचियों की खुशबू को सूंघते हुए मुझे बहुत उत्तेजना हुई।
अब मैं रोज ऐसे ही उनके अंडरगार्मेंट्स को सूंघते हुए मुठ मारने लगा।
ऐसे ही करते-करते मेरे अंदर आंटी की चुदाई के ख्याल आने लगे।
मैं अब बस किसी तरह आंटी को चोद देना चाहता था।
फिर सात दिन कैसे बीत गए पता ही नहीं चला।
आंटी जब लौटीं तो मेरा उनको देखने का नजरिया ही बदल चुका था।
मेरे मन में यही योजना चलती रहती थी कि आंटी की चूत चोदने का क्या रास्ता निकाला जाए।
इसी के चलते मैं रोज दोपहर में उनके घर जाने लगा।
दोपहर के वक्त सब लोग घरों में घुसे रहते थे और सोते रहते थे।
पूरा मौहल्ला शांत रहता था।
इसलिए मैंने चुदाई का मौका पाने के लिए यही समय चुना।
दूसरा फायदा यह था कि आंटी इस समय अकेली होती थी क्योंकि उनके दोनों बच्चे भी उस समय स्कूल में होते थे।
आंटी को भी घर में अकेले बोरियत होती थी इसलिए वो भी मेरा साथ इंजॉय करने लगी थी।
कई दिन गुजर गए।
जैसे-जैसे समय बीत रहा था, आंटी मेरे से खुलती जा रही थी।
आंटी को अभी तक शायद यह अहसास नहीं हुआ था कि मैं उनको पेलना चाहता हूं।
वैसे अभी तक मेरी भी हिम्मत नहीं हो रही थी कि मैं किसी तरह आंटी की चुदाई कर सकूं।
धीरे-धीरे दिन गुजरते जा रहे थे और आंटी की चुदाई की आग मेरे अंदर भड़कती जा रही थी।
एक दिन की बात है कि मेरा मन चाय बनाने को किया।
जैसे ही मैंने चाय में दूध डाला तो वो फट गया।
मेरे घर में और दूध नहीं था।
मैंने सोचा कि आंटी के पास से दूध लेकर आता हूं।
मैं दूध मांगने आंटी के घर चला गया।
आंटी ने नीले रंग की साड़ी और गहरे गले का ब्लाउज पहना था।
मैं उनको देखता ही रह गया।
उनको देखते ही मैंने कह दिया- आंटी थोड़ा दूध चाहिए!
आंटी ने कहा- इसमें इतना सोचने की क्या बात है … रुको अभी लाती हूं।
बोलकर आंटी किचन में दूध लाने के लिए चली गई।
दो मिनट बाद वो दूध लेकर आई और मुझे देते हुए बोली- लो, मगर खुद ही पी लोगे या मुझे भी पिलाओगे?
मैंने कहा- अरे आंटी … आपका ही तो घर है। आप के लिए कोई मनाही थोड़ी है, कभी भी आइए।
फिर मैं दूध लेकर आ गया। आते समय मैंने दुकान से चॉकलेट और बिस्कुट भी ले लिए।
फिर मैंने जाकर चाय बनाई और एक ट्रे में बिस्कुट सजाकर हॉल में ले आया।
फिर मैंने चॉकलेट का शेक बनाया जिसे मैंने ठंडा होने के लिए फ्रिज में रख दिया।
फिर मैं चाय पीने लगा।
मैं पी ही रहा था कि दरवाजा किसी ने खटखटाया।
मैंने देखा तो सामने आंटी थी।
मैंने उनको अंदर बुलाया और चाय पेश की।
हम दोनों साथ बैठकर चाय पीने लगे।
नीली साड़ी में आंटी कमाल लग रही थी।
मेरे मन में लगातार आंटी की चुदाई के ही ख्याल चल रहे थे।
फिर हम दोनों ऐसे ही बातें करते हुए खिलखिला रहे थे।
मजाक-मजाक में मेरा हाथ आंटी की जांघ पर चला जाता था।
एक बार तो मैंने बहाने से बूब्स पर भी छुआ।
आंटी ने मेरी इस हरकत की कोई नकारात्मक प्रतिक्रिया न दी और न नाराजगी दिखाई।
मेरी हिम्मत थोड़ी सी बढ़ गई।
मैंने सोचा कि यही मौका सही है।
सोचकर मैंने अपने होंठ उनके होंठों पर रख दिए।
मैं होंठों को चूसने की कोशिश करने लगा लेकिन आंटी ने मुझे पीछे हटाकर गाल पर तमाचा जड़ दिया।
गुस्से से बोली- पागल हो गया है क्या?
फिर वो उठ कर जाने लगी।
मैंने सोचा आंटी कहीं किसी को मेरी गंदी हरकत के बारे में बता न दे और मुझे लेने के देने न पड़ जाएं।
मुझे बहुत डर लग रहा था।
लेकिन गनीमत रही कि आंटी वो बात किसी से कही नहीं।
मैं उस दिन के बाद आंटी से थोड़ा डरकर रहने लगा था।
फिर एक रोज आंटी ने मुझे अपने घर बुलाया।
वो बोली- उस दिन मैंने गुस्से में तुम्हें थप्पड़ लगा दिया उसके लिए सॉरी।
मैंने कहा- कोई बात नहीं आंटी, मेरी ही गलती थी। मुझे भी वो हरकत नहीं करनी चाहिए थी।
मैंने इस मौके का फायदा उठाने की सोची।
मैं बोला- आंटी मैं भी क्या करता, मैं आपको इतना पसंद करता हूं कि मुझसे रहा नहीं गया। मगर मैं सेक्स की आग में ये भूल गया कि मैं आपके साथ क्या करने जा रहा हूं। आप तो मेरी मम्मी के समान हैं।
आंटी ने मेरी तरफ दया भरी नजर से देखा।
फिर मेरी जांघ पर हाथ रखकर बोली- ठीक है, मैं समझती हूं। लेकिन ऐसे तो नहीं करता है कोई जबरदस्ती।
जैसे ही आंटी ने मेरी जांघ पर हाथ रखा मेरा लंड पैंट में तन गया।
उनका हाथ मैंने अपने हाथ से सरका कर अपने तने हुए लंड पर रखवा दिया और कहा- देखो आंटी, आपके छूते ही कैसे हो गया।
आंटी ने मेरी आंखों में देखते हुए लंड पर हाथ फेर दिया।
दोनों तरफ आग जल पड़ी।
अगले ही पल आंटी ने मुझे बेड पर धकेल दिया।
वो मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी।
मैं बोला- दरवाजा आंटी?
आंटी ने देखा मेन गेट खुला हुआ था।
फिर वो जल्दी से मेन गेट बंद कर आई।
आते ही मैंने आंटी को बांहों में भर लिया और वो मुझे हाथ पकड़ कर रूम में ले गई।
जाते ही आंटी ने मेरी शर्ट उतार कर मुझे ऊपर से नंगा कर दिया।
आंटी ने मेरी छाती पर हाथ फेरना शुरू कर दिया।
मेरे बदन में करंट आने लगा।
मेरा लंड एकदम से फटने को हो गया।
फिर मैंने उनकी लाल साड़ी को उतारना शुरू किया।
पहले साड़ी को खोला और फिर वो पेटीकोट और ब्लाउज में रह गई।
आंटी के बड़े बड़े दूध ब्लाउज में कैद थे।
मैंने ब्लाउज के बटन पीछे से खोल दिए।
नीचे आंटी ने व्हाइट ब्रा डाली थी।
उनकी चूचियों की गोलाई ब्रा में साफ उभर रही थी।
इतनी मोटी-मोटी और गोल चूचियां देखकर मेरे तो मुंह में पानी आ रहा था।
मैंने उनकी ब्रा को भी खोल दिया और चूचियों को नंगी कर लिया।
आंटी के रसीले दूध मेरे सामने छलक गए।
मैंने दोनों चूचों को हाथों में भरा और दबाते हुए उनके होंठों को पीने लगा।
नीचे से आंटी का हाथ मेरे लंड पर आ गया।
वो मेरे लंड को मसलने लगी।
आंटी दबा-दबाकर मेरे लंड का साइज चेक कर रही थी जैसे कि चूत में जाने से पहले नाप लेकर पता कर रही हो कि चूत में लंड जाएगा तो कितना मजा देगा।
फिर मैंने उनका पेटीकोट खोलकर उनकी पैंटी भी नीचे खींच दी।
आंटी अब पूरी नंगी हो गई।
आंटी की चूत को देखकर मैं पागल सा हो गया।
मैंने आंटी की चूत में उंगली दे दी जिससे वो एकदम से उचक गई।
फिर मैं तेजी से आंटी की चूत में उंगली अंदर-बाहर करने लगा।
वो मचलने लगी।
वो जोर से मेरे होंठों को चूसते हुए मेरे बालों को खींचने लगी।
आंटी बहुत चुदासी सी लग रही थी।
उन्होंने जल्दी से मेरी पैंट का हुक खोला और उसे नीचे सरका कर लंड को हाथ में ले लिया।
मैं तेजी से आंटी की चूत में उंगली कर रहा था और वो मेरे लंड को फेंट रही थी।
जब आंटी से रुका न गया तो बोली- चोद लो अब … और नहीं रुका जा रहा।
आंटी से अब चुदे बिना नहीं रहा जा रहा था।
मैं भी पागल हुआ जा रहा था आंटी की चूत में लौड़ा देने के लिए।
मैंने इतने दिनों से इसी पल का इंतजार किया था कि कब मुझे आंटी की चूत मारने का मौका मिलेगा।
फिर मैंने उनकी टांगों को फैला दिया और चूत पर लंड टिका दिया।
लंड को टिकाकर मैंने आंटी की चूत में धक्का लगा दिया।
आंटी की चूत पहले से गर्म होने के कारण गीली हो चुकी थी।
मेरा लंड आंटी की चूत में एक झटके में सरक गया।
लंड पाकर आंटी को हल्का दर्द तो हुआ लेकिन उनके चेहरे पर एक आनंद का भाव साथ में तैर गया।
मैंने आंटी की चूत में धक्के लगाना शुरू किया।
थोड़ी ही देर में आंटी की चूत में पूरा लंड चिकना होकर आराम से अंदर बाहर होने लगा।
दोनों को चुदाई का पूरा मजा मिलने लगा।
जैसे ही मेरे लंड का धक्का आंटी की चूत में लगता, उनकी चूचियों में एक लहर सी जा लगती।
धक्के के साथ चूचियां भी हवा में डोल जातीं।
आंटी को ऐसे नंगी करके चोदते हुए इतना मजा आ रहा था कि जल्द ही मेरा माल झड़ने को हो गया।
उनके मुंह से लगातार सिसकारियां निकल रही थीं- आह्ह … आह्ह और तेज दीपक … चोदो आह्ह … और चोदो मुझे। पेल दो बुरी तरह से … आह्ह ओह्ह।
उनकी ऐसी आवाजों से मेरा जोश बहुत ज्यादा बढ़ चुका था।
मैंने और स्पीड में शॉट मारने शुरू किए।
चुदाई को चलते हुए लगभग 10-12 मिनट हो गए होंगे।
अब मैं और नहीं रोक सकता था अपना वीर्य।
तेजी से धक्के मारते हुए एकाएक मेरा वीर्य आंटी की चूत में पिचकारी के रूप में गिरने लगा।
मैंने आंटी की चूत को अपने माल से भर दिया।
मैं ढीला होकर आंटी के ऊपर ही लेट गया।
हम दोनों की सांसें बहुत तेजी से चल रही थीं।
फिर कुछ देर में हम नॉर्मल हो गए।
थोड़ी देर का विराम देकर हम दोनों ने फिर से एक दूसरे के लंड-चूत चूसे और चाटे।
दोबारा से गर्म होकर एक बार फिर से हम चुदाई के लिए रेडी हो गए।
दूसरे आंटी चुदाई राउंड में मैंने आंटी को डॉगी स्टाइल में करके उनकी गांड के छेद में भी लंड घुसाया।
आंटी के साथ डॉगी स्टाइल एनल सेक्स में खूब मजा आया।
फिर चुदाई होने के बाद हमने स्नान किया।
आते टाइम मैंने आंटी को बहुत देर तक किस किया।
फिर मैं अपने घर आ गया।
उस दिन के बाद से आंटी के साथ चुदाई का सिलसिला चला ही आ रहा है।
आंटी की चुदाई करने में अलग ही मजा आता है।
लगभग हर तीसरे-चौथे दिन हमारे बीच चुदाई का खेल हो ही जाता है।
आंटी को भी मेरे लंड से चुदे बिना बेचैनी होने लगती है और वो खुद ही मुझे बुला लेती है चुदने का जब मन करता है।
तो दोस्तो, आंटी के साथ ये थी मेरी मस्त चुदाई की कहानी।
आपको यह कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बतायें।
मुझे आप लोगों की प्रतिक्रियाओं का इंतजार रहेगा।
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