भाई के दोस्त ने मेरी चूत मारी

मस्त चुदाई स्टोरी हिंदी में पढ़ें कि कैसे मुझे मेरे भाई का दोस्त पसंद आ गया. मैंने उससे दोस्ती बढ़ाई. एक दिन उसने मुझे पाने घर बुलाकर प्रोपोज किया.

दोस्तो, मेरा नाम अंजलि है। मेरी उम्र 19 साल है। मेरा रंग गोरा है और मेरा फिगर 32-30-34 का है। मेरी हाइट 5.1 फीट है।

अब तो मैं कॉलेज में दाखिला ले चुकी हूं लेकिन ये मस्त चुदाई स्टोरी तब की है जब मेरे 12वीं के बोर्ड एक्ज़ाम चल रहे थे.

दोस्तो, मैं आपको बता दूं कि मैं 11वीं में फेल हो गयी थी और मैंने दोबारा से वो क्लास की थी. मेरी उम्र का अतिरिक्त एक साल एक ही क्लास को दो बार करने में निकल गया था.

मैं पूरी जवान हो चुकी थी और बालिग थी. मगर कहते हैं कि जवानी जब आती है तो कुछ न कुछ तूफान लेकर आती है. उन दिनों बोर्ड के एग्जाम थे और मेरी एक्सट्रा क्लास चल रही थी.

मेरा एक भाई है जिसका नाम अजय है. वो मुझसे छह साल बड़ा है. वो 25 साल का है.
अजय का एक दोस्त है धनंजय. ये दोनों एम. टेक. फाइनल इयर के छात्र हैं.

एक दिन भाई ने अपने जन्मदिन की पार्टी रखी। वहां मेरी मुलाकात धनंजय से हुई। धनंजय की उम्र भी लगभग 25 साल थी।
मैं उसको देखते ही उसमें खो गयी थी।

उसके बाद धनंजय कभी कभी भाई से मिलने हमारे घर पर आता था।
हम एक दूसरे को देखते थे।

धीरे धीरे स्माइल के साथ बात भी होने लग गयी। मैंने उसको इंस्टाग्राम पर ढूंढ कर बात शुरू की।

हमारी इंस्टाग्राम पर घंटों बात होती थी। हम दोनों के बीच प्यार होने लगा था।

एक दिन की बात है कि हल्की बारिश हो रही थी. मुझे स्कूल जाने में देरी हो गयी.

उसी वक्त भाई और धनंजय दोनों बाइक से कॉलेज जा रहे थे.
मैंने उनको कहा कि मुझे भी छोड़ दो.
वो मान गये.

भाई बाइक चला रहा था और धनंजय बीच में और मैं सबसे पीछे बैठी थी.

मैंने अपना हाथ धनंजय के कंधों पर रखा हुआ था। मेरी चूची धनंजय की पीठ से सटी थीं और मुझे मजा आ रहा था.
मेरी चूत में उसको छूकर गीलापन हो गया.

उस दिन बारिश की वजह से सर ने जल्दी छुट्टी कर दी।
मैंने धनंजय को कॉल किया।

धनंजय कॉलेज में था। मैंने उसको रेस्टोरेंट में कॉफी पीने के लिए बोला क्योंकि मौसम काफी ठंडा था।
वो भी तैयार हो गया। वो भाई की बाइक लेकर आ गया।

फिर वो मुझे स्कूल से बाइक पर बिठा कर रेस्टोरेंट ले गया।
हम दोनों ने कॉफी पी और बात की।
मैं उसकी शराफत को देख कर उस पर फिदा हो गयी थी।

उसने बताया कि उसका बर्थडे आने वाला है।
धनंजय के बर्थडे के दिन उसके घर कोई नहीं था।

मैं स्कूल गयी थी. वहां मुझे धनंजय मिला।
धनंजय ने मुझसे स्कूल बंक करने की बात कही।
कारण पूछने पर धनंजय ने बताया कि आज उसका बर्थडे है।
मैं भूल गयी थी।

मैंने धनंजय को बर्थडे विश किया और स्कूल बंक करने के लिए मान गयी।
मैंने पूछा- मगर हम जाएंगे कहां?

उसने कहा- मेरे घर चलो, कोई नहीं है घर!
मैंने पहले मना किया फिर मैं मान गयी।

मुझे शाम 4 बजे अपने घर वापस भी जाना था।

फिर वो मेरे लिए गिफ्ट लेने चला गया।
मैंने कहा- बर्थडे तुम्हारा है मेरा नहीं!
वो बोला- कोई बात नहीं, तुम्हारा हो या मेरा हो, एक ही बात है.

उस वक्त मैंने स्कूल ड्रेस की ही शर्ट और स्कर्ट पहनी हुई थी.

धनंजय मुझे अपने घर ले गया। उसने मुझे अपने बेडरूम में बिठाया।
तब तक उसका फ्रेंड उसे केक दे गया.

उसने फ्रिज में रख दिया और मुझको सरप्राइज़ देने के लिए बाहर बुलाया।

उसने मेरी आंखों पर पट्टी बांध दी और टेबल पर केक सजा दिया।
धनंजय ने मुझको आँखें खोलने को बोला।

मैंने आँखें खोलीं तो धनंजय ने मुझको प्रपोज करते हुए मुझे रिंग पहना दी.

मैं तो सोच ही नहीं पायी कि वो ऐसा भी कर देगा.
मैंने रिंग स्वीकार कर ली.

उसने मुझे गले से लगा लिया. फिर हमने साथ में केक काटा.
मैंने अपने हाथों से धनंजय को केक खिलाया।

फिर उसने मुझे केक खिलाया और कुछ केक मेरे होंठों पर लग गया.
उसने मेरी आंखों में देखा और मेरे होंठ से केक को उंगली से उतारने लगा.

मगर धीरे धीरे वो मेरे चेहरे के करीब अपने होंठों को ले आया और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिये.

इससे पहले मैं कुछ समझ पाती … उसने किसिंग शुरू कर दी.

मैं भी खुद को रोक नहीं पाई और उसका साथ देने लगी.

हमने दो-तीन मिनट तक किस किया और जब हटे तो दोनों मुस्करा रहे थे.

मेरी चूत में पानी सा फील हुआ मुझे!
अच्छा अहसास था वो!

फिर धनंजय ने मेरे सामने गिफ्ट रख दिया.
मैं बोली- मैं तो तुम्हारे लिये कुछ लाई ही नहीं.
वो बोला- तुम ही मेरा गिफ्ट हो. तुम आ गयी समझो गिफ्ट मिल गया.

मैंने पैकेज खोला तो उसमें एक ड्रेस थी.
मैं बोली- इसकी क्या जरूरत थी.
वो बोला- मैं तुम्हें इसी ड्रेस में देखना चाहता हूं.

धनंजय नहाने चला गया।
तब तक मैंने वो ड्रेस पहन ली।

मैं उस ड्रेस में बिल्कुल परी लग रही थी।
वो ड्रेस लहंगा टाइप गाउन था।

धनंजय नहा कर बाहर आया तो मुझे देखकर होश खो बैठा।

मैं चुटकी बजाते हुए उसको होश में लायी।
वो बोला- अंजलि तुम तो बिल्कुल परी लग रही हो। एकदम दुल्हन सी लग रही हो। सोच रहा हूं अभी तुमसे शादी कर लूं!

इस बात पर मैं हँस पड़ी और बोली- पहले कपड़े तो पहन लो, वर्ना टॉवल निकल जायेगा।
वो हँस पड़ा और कपड़े पहन कर तैयार हो गया।

मैं बोली- अब आगे क्या करना है?
वो बोला- बीवी पास में है तो क्यों न सुहागदिन बना लें आज?
मैं बोली- सुहागदिन नहीं होता, सुहागरात होती है पागल!

वो बोला- मेरी गुड़िया … अभी दिन है तो सुहागदिन ही हुआ न?
मैं बोली- ऐसे नहीं होता।

फिर मैं धनंजय के कंधे पर सिर रखकर बैठ गयी और बोली- मुझसे हमेशा ऐसे ही प्यार करते रहोगे न?
धनंजय ने मेरा सिर सहलाते हुए कहा- हमेशा ऐसे ही प्यार करूँगा।

मैंने धनंजय को गले लगाते हुए हग किया।
उसने मेरे माथे पर किस किया।

मैं आंखें बंद करके खूब कसकर धनंजय से चिपक गयी।
धनंजय ने मेरा मुंह ऊपर किया और अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख दिया।

वो मेरे होंठों को चूसने लगा। मैं भी धनंजय का साथ दे रही थी।
हम दोनों एक दूसरे में खो गए थे।

5 मिनट तक किस करने के दौरान धनंजय ने तीन बार मेरे होंठों को काटा.

वो किस करते करते मेरे बूब्स दबाने लगा।
मैं सिसकारियां भरने लगी थी।
मैंने धनंजय का बिल्कुल विरोध नहीं किया। वो जो कर रहा था मैं बस उसमें उसका साथ दे रही थी।

धनंजय बोला- अंजलि, लहंगा उतार दूं क्या?
मैंने कहा- मैं तुम्हारी हूं और ड्रेस भी तुम्हारी लायी हुई है. जो उतारना है उतार लो.

उसने धीरे से मेरा गाउन उतार दिया।
मैं अब सिर्फ ब्रा पैंटी में थी।

धनंजय मेरे गले पर किस करते हुए मेरे बूब्स दबाने लगा।
मैंने सिसकारियां भरते हुए कहा- आह्ह … आराम से चूसो धनंजय … तुम्हारे ही तो हैं … पूरे पी लो … आह्ह … तुम भी उतार दो कपड़े, मुझे अकेली को ऐसे शर्म आ रही है।

धनंजय ने कहा- तुम ही उतार लो।
मैंने धनंजय की शर्ट और जीन्स खोल दी।
वो बस अंडर गारमेंट्स में था।
उसका लंड खड़ा था।

मुझे धनंजय का लंड जीजू से बड़ा लगा इसलिए थोड़ा डर गई क्योंकि जीजू से बहुत दर्द हुआ था मुझे.

धनंजय ने गोद में लेकर मुझे बेड पर लिटाया और मेरी ब्रा को खोलकर मेरे बूब्स पीने लगा.

फिर उसको केक याद आ गया. वो बचा हुआ केक लाया और मेरे बूब्स पर मसल कर मेरी चूत में भी केक भर दिया.
फ्रिज का ठंडा केक मुझे चूत में ठंडक दे रहा था.

उसने मेरे बूब्स का केक चाटा और फिर चूत का केक भी चाटा.

अब उसने अंडरवियर उतारा और मेरी चूत में लंड को लगाया.
चूत के अंदर लगा केक उसके लंड पर लग गया.
उसने मुझे लंड चूसने को कहा.

मैंने मस्ती में आकर उसका केक लगा लंड चूसा. मैंने जीजू का लंड भी वैसे ही चूसा था. फिर वो मेरी चूत में जीभ देकर चाटने लगा. मैं पगला गयी और बोली- कुछ करो यार … अंदर चीटियां काट रही हैं. बहुत खुजली हो रही है.

उसने मेरी टाँगें चौड़ी कीं और अपना लंड मेरी चूत पर लगाकर चूत को लंड से सहलाने लगा।

मैं अब और ज्यादा तड़पने लगी.
मैंने कहा- अब और मत तड़पाओ … आह्ह … लंड को डाल दो न प्लीज???

धनंजय ने मेरी चूत टाइट सोचकर लंड को धीरे से चूत में धकेला.
उसको लगा कि मैं कुंवारी चूत हूं लेकिन मैं तो चुद चुकी थी.
मैंने दर्द भरी आह्ह निकालते हुए कहा- आराम से … लग रहा है.

वो बोला- लगेगा क्यों नहीं, सील पैक जो हो. पहली बार जब सील टूटेगी तो दर्द होगा लेकिन फिर हमेशा मजा आयेगा.
बातों ही बातों में उसने एक जोर का झटका मार दिया. मुझे सच में दर्द हुआ लेकिन मैंने दिखावा ऐसे किया कि जैसे मेरी कुंवारी चूत फट गयी हो.

मैं जोर से चिल्लाने लगी- आह्ह … आईईई … आराम से … मर गयी … आह्ह।

वो मुझे किस करने लगा औऱ धीरे धीरे मेरी चूत में अपना लंड आगे पीछे करने लगा।
फिर मुझे भी मजा आने लगा।
हम दोनों सेक्स में डूब गए।

अब मैं चुदने का पूरा मजा लेना चाहती थी. इसलिए मैंने अपने पैरों को धनंजय की कमर पर लपेट लिया। धीरे धीरे धनंजय ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। धनंजय कुछ देर बाद जोर जोर से चोदने लगा। मैं कंट्रोल नहीं कर पाई और झड़ गयी।

मैंने अपने पैरों की पकड़ से धनंजय को आजाद कर दिया।
मैं बेड पर लेट गयी।
धनंजय मुझे पेले ही जा रहा था। उसने जोर जोर के झटके मारने शुरू कर दिए।

मैं समझ गयी कि धनंजय झड़ने वाला है।

उसने कहा- कहा निकालूँ?
मैंने बोला- अंदर ही निकाल दो, मुझे पूरी तरह आपकी होना है।
धनंजय झटके देते देते चूत में झड़ गया और मेरे ऊपर लेट गया।

थोड़ी देर बाद धनंजय ने अपना लंड बाहर निकाला तो मेरी चूत में जमा हुआ हम दोनों का पानी मेरी जाँघों से बहते हुए जमीन पर गिरने लगा।
फिर हम दोनों बाथरूम गए और एक दूसरे को साफ़ किया और फिर बेडरूम में चले गए।

करीब दोपहर के 12 बज गए थे। स्कूल खत्म होने में अभी 3 घंटे बाकी थे।
इसलिए मैं स्कूल भी नहीं जा सकती थी और घर भी नहीं।

फिर मैं धनंजय की बांहों में उसके साथ ही सो गई।

धनंजय ने 2 बजे मुझे जगाया और कहने लगा- एक घंटे बाद तुम घर चली जाओगी। अगर तुम्हारा मन हो तो एक बार और चोद लूं क्या मेरी बीवी को? ऐसा मौका दोबारा शायद न जाने फिर कब मिले?

मैंने कहा- बीवी से कोई पूछता है क्या? आपका मन है तो चोद लो.
उसके बाद हमने लंड चूत की चुसाई नहीं की। बस एक दूसरे के होंठों को चूसा।

धनंजय ने मेरे बूब्स चूसे और मेरी चूत पर लंड रगड़ कर डाल दिया।
5-6 मिनट के धक्कों के बाद में मैं झड़ गयी।

मेरे झड़ने के बाद धनंजय ने दस बारह धक्के दिये और एकदम से लंड मेरी चूत की जड़ तक डाल दिया.

उसका वीर्य मेरी बच्चेदानी को भिगोने लगा.
गर्म गर्म पिचकारियों से मेरी चूत अंदर से पूरी भीग गयी.

फिर हम दोनों साथ में नहाये.

उसके बाद मैंने ड्रेस पहनी और चलने लगी तो मुझसे ठीक से चला नहीं जा रहा था.
वो बोला कि टेबलेट ला दूं तो मैंने मना कर दिया.

मैं बोली- होने दो दर्द को, ये मुझे तु्म्हारे प्यार की याद दिलायेगा.
वो बोला- मगर आईपिल तो खा लो? प्रेग्नेंसी का डर नहीं रहेगा.
मैं आईपिल के लिये मान गयी.

फिर वो मुझे घर तक छोड़कर चला गया.

शाम को मैं और भाई धनंजय के घर उसके बर्थडे पार्टी पर गए।
तब मैंने धनंजय को गिफ्ट दिया और साथ में लव लेटर भी।

उसके बाद धनंजय ने मुझे 3-4 बार होटल में ले जाकर भी चोदा।

एक रात धनंजय घर आया था. वो भाई के रूम में भाई के साथ सोने वाला था. उसने मुझे 2 गिलास दूध बनाने को बोला।

वो नींद की दवाई लाया था और मैंने वो भाई के दूध में डाल दी.

फिर वो मेरे रूम में आ गया और हम दोनों पूरे नंगे होकर चुदाई करने लगे.

मेरे रूम में खिड़की में शीशे लगे हैं जिसमें रात के समय अंदर का बाहर से सब दिखता है.

मैंने ध्यान ही नहीं दिया कि बाहर से कोई हमें देख भी सकता है.
हम दोनों लाइट जलाकर चुदाई कर रहे थे.

मुझे चोदने के बाद धनंजय नंगा ही सो गया.

रात करीब 3 बजे मुझे लगा कि कोई बाहर था।
मैंने तुरंत कपड़े पहने और बाहर गयी।

बाहर कोई नहीं था लेकिन उसी टाइम भाई के रूम का गेट बंद हुआ।
मैं समझ गयी कि भाई ने मुझे और धनंजय को नंगा देख लिया।

मुझे डर था कि कहीं भाई मम्मी पापा को न बता दे इसलिए मैं सीधे भाई के रूम में चली गयी।

भाई ने मुझे डांटते हुए बेड पर पटक दिया और कहने लगे- बहुत खुजली है तेरी चूत में जो अभी से चुदवाने लग गयी? शर्म नहीं आती? घर में ही चुदवा रही है। बहुत खुजली है ना तेरी चूत में … आज मैं शांत करता हूं तेरे को।

भाई ने मेरी नाइटी उतार दी. फिर गुस्से में मेरी ब्रा पैंटी फाड़ दी और मेरे ऊपर आ गए।

मेरे बूब्स को दबाते हुए मेरी चूत में अपना लंड डाल दिया और जोर जोर से मेरी चूत को चोदने लगे।

मुझे चोदते हुए वो साथ मे डांट भी रहे थे- दोबारा चुदती हुई मत दिख जाना, नहीं तो तेरी चूत को फाड़ कर रख दूंगा मैं, फिर किसी और से चुदवाने लायक नहीं रहेगी.

भाई जोर जोर से गुस्से में मेरी चूत को चोद रहे थे।

थोड़ी देर में उसका पानी निकल गया।
भाई मेरे ऊपर गिर गए।
उनका गुस्सा भी शांत हो गया था।

वो उठे तो उनको अपनी गलती का अहसास हुआ।
वो मुझसे माफी मांगने लगे।
मैंने भाई को बोल दिया- आप माफी मत मांगो, आपका भी हक़ है मुझ पर!

उसके बाद भाई ने मुझे कपड़े पहन कर अपने रूम में जाने को कहा।
उस रात के बाद मैं और भाई रात को एक ही रूम में सोने लग गए।

अब भाई को मेरी और धनंजय की चुदाई से भी प्रॉब्लम नहीं थी।

जब मैं और भाई बिल्कुल ओपन बात करने लगे तब भाई ने बताया कि ये सब उनका प्लान था मेरी चूत मारने का।

भाई ने बताया:
अंजलि, जब तूने धनंजय को कॉलेज में कॉल किया तब मैं उसके साथ ही था।
मैंने जानते हुए भी धनंजय को बाइक की चाबी दी। मैंने ही धनंजय से तुझे चोदने को बोला।
उस रात मैंने धनंजय को जानबूझ कर घर बुलाया।
मैंने ही धनंजय को कहा कि तुम्हें बोले दूध में नींद की दवा मिलाये जिससे मैं सोने का नाटक करूं।
रात को मैंने ही धनंजय को तुझे चोदने को भेजा था और मैंने गुस्से में नहीं बल्कि जानबूझ कर उस रात तुझे चोदा था.
ये सब हमारा प्लान ही था.

यह कहानी लड़की की सेक्सी आवाज में सुन कर मजा लें.

फिर हंस कर मैं बोल पड़ी- ये सब आप पहले बोल देते तो मैं पहले ही चुदवा लेती.
वो बोले- प्लान करके चोदने में जो मजा मिला वो ऐसे सीधे बोलने में नहीं आने वाला था. इसलिए हमने तुझे गर्म करके चोदा.

दोस्तो, फिर मैंने भाई को बोला कि धनंजय के साथ मिलकर थ्रीसम करेंगे लेकिन भाई ने मना कर दिया.

उसके बाद मैंने धनंजय और उसके फ्रेंडस के साथ मेरे बर्थडे पर घर में ही गैंगबैंग किया.

तो दोस्तो, ये थी मेरी जबरदस्त चूत चुदाई की कहानी. मेरी मस्त चुदाई स्टोरी अच्छी लगी या नहीं? मुझे ईमेल करें और मुझे बतायें कि स्टोरी आपको कितनी पसंद आई.
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